शायर 🌺——🌺 शब्दों के तीरों से भरे तरकश सा व्यवहार करते हैं… शायर भी क्या खूब यार करते हैं। एक एक तीर से घायल हजार करते हैं, अपने टूटे दिल के टुकड़े समेटकर, जख्मों की […]
शायर 🌺——🌺 शब्दों के तीरों से भरे तरकश सा व्यवहार करते हैं… शायर भी क्या खूब यार करते हैं। एक एक तीर से घायल हजार करते हैं, अपने टूटे दिल के टुकड़े समेटकर, जख्मों की […]
चंदन ! तुम सर्प लपेटे रहते हो। तुम शीतल हो तुम निर्मल हो, खुशबू तेरे भीतर है। वैर नहीं है तुम्हें किसी से हृदय बड़ा पवितर है।। मलयाचल पर बने तपस्वी दूर अकेले रहते हो। […]
नब्ज देख के बतला दो मुझे कौन-सा रोग है। दिल में तुझे बसाकर भी आखिर क्यों वियोग है।।
बूँद-बूँद से मैं दरिया बन जाऊँ। तिश्नगी का मैं ज़रिया बन जाऊँ। डूबाने की मंशा बिलकुल नहीं है, ज़िन्दगी का मैं नज़रिया बन जाऊँ। देवेश साखरे ‘देव’
नींद अक्सर आती नही है रातो मे, मन उलझा रहता है अजीब बातों में। बहुत उधेड़बुन है यार हमारी जिन्दगी मे, आपसे अपना हाल कहते है हकीकत मे।।
ज्यादा मजबूत हृदय का दावा करने वाले अक्सर बंद कमरे में रोया करते हैं। निमिषा सिंघल
नित भाव मन मे उमड़ रहे है किन्तु लेखनी साथ न देती। चहुँओर खुशबू को है बिखरना परन्तु सरल समीर साथ न देती।।
नित भाव मन मे उमड़ रहे है किन्तु लेखनी साथ न देती। खुशबू है चहुँओर बिखरने को तैयार पर ये बेवफा पवन साथ न देती।।
काश इश्क करने से पहले भी एक राज़ीनामा ज़रूरी हो जाये जो कोई तोड़े तो हो ऐसा जुर्माना जो सबकी जेबों पर भारी हो जाये फिर देखो बेवज़ह दिल न फिसला करेंगे इश्क की गलियों […]
कुछ तो खेल है हाथ की लकीरों का हाथ ना आया लगाया हाथ जिसमें न पाने की तमन्ना थी मिला हरदम वही मुझको जुस्तजू जिसकी थी हमने उसी से हाथ धो बैठे जिंदगी बन गई […]
रोज सोचते यही है उनसे तोड़ देंगे सारे नाते याद में उनकी नहीं कटेगी रो-रोकर मेरी रातें फ़ैसला जब करते हैं हम दिल रोक लेता है मेरी याद से बहे समंदर घुटती हूं अंदर ही […]
पता नहीं इबादत के किस मोड़ पर हूं तेरी जरूरत भी नहीं तेरी कमी भी है होठों पर हंसी और आंखों में नमी भी है तेरे जाने का मलाल भी नहीं तेरे आने का इंतजार […]
हमें दुश्मन समझ कर बङा पछताओगे आप ! करके भरोसा खुद्दारों पर… अरें ! करके भरोसा खुद्दारों पर.. खङे-खङे ही गिर जाओगे आप !! हमें दुश्मन समझ कर बङा पछताओगे आप ! ! :- सोमनाथ
बारिश से कहो यूं न आया करे मुझे तेरा उनके बगैर आना अच्छा नहीं लगता तूने आने से पहले दस्तक तो दी थी सर्द मौसम में भिगोने की जुर्रत तो की थी जितना चाहे रिझा […]
ये ठण्ड है कि बरसात कुछ समझ नही आता, कि मौसम ले रहा है रोज इतनी अंगडाईयां। खुश है कि रूठा हुआ है किसी से, इसकी अदाओ को कोई क्यो समझ न पाता?
इंसान और मै मन्दिर , मस्जिद नहीं देखता हूं उस में बेठा भगवान देखता हूं हिन्दू, मुस्लिम नहीं देखताहू इंसान में इंसान देखता हूं हैरान हूं मै यह देखकर लोग पूछते है मेरा धर्म कोनसा […]
बर्फ़ गिर रहा है सर्द चमन में निशा के तम में कोई सड़क पर रो रहा है बर्फ़ गिर रहा है निल गगन में, बिना ओट के कोई सड़क पर सो रहा है बर्फ़ गिर […]
बन बंजारा बन -बन भटकत है मन मेरे तु कहा अटकत है तुझे ढूढन को में मन्दिर-मन्दिर फिरत तू मेरे मन मन्दिर में बसत है हर एक गोपी को पूंछा करता दिल को अपने, अंगारों […]
मैंने उन्हें एक ख़त भिजवाया है एक लिफाफे में उसे रखवाया है देखने में कोरा न लगे,इसलिए उस लिफाफे को खूब सजाया है जो पहुचेगा वो उनके हाथों में रख देंगें वो उसे किताबें में […]
कविताएं गढ़ना जानते हो, भावनाएं पढ़ना कैसे भूल गए? कुछ शब्द उधार ही मांगे थे, तुम उन्हे चूकाना भूल गए। लिखनी बराबर चलती रही, पर दोस्त बनाना भूल गए। हमने तो हंसी बस मांगी थी, […]
पहले पढ़ता था फर्क तूफान आते जाते थे जबसे गहराइयों से नाता जोड़ा है तेरे ध्यान में मग्न हो भीड़ में भी संसार से नाता तोड़ा है। निमिषा सिंघल
कभी किसी के सामने वफ़ा का नाम मत लेना ! कभी.. किसी के सामने वफ़ा का नाम मत लेना ! मेरे यार… बदनाम हो जाओगे ! ये मोहब्बत की बिमारी ये… मोहब्बत की बिमारी है […]
उनका प्यार से इनकार करना भी अब तो ऑनलाइन है। अब ये कौन सी डिजिटल इंडिया की नयी गाईडलाईन है।।
नहीं बन सके महान धरा पर, इंसानियत का बने सहारा, जग रूठे पर रब ना रूठे, ऐसा हो सेवा भाव हमारा। दीन हिन् बिखरता वैभव, कुंठित हुई भावनाये ऐसे, शव समान रिश्ते ऐठे है, मन […]
खुदा से शिकायत हो तोह कभी गरीबों की बस्ती जाओ जनाब कितने खुशनसीब हो पता चल जाएगा
जनवरी सपना दिखाती है दिसंबर गलतियां अपने गलतियों से सीख और आगे बर अपने सपनो पर नव वर्ष की हार्दिक अभिनंदन
KITAABON KO KHULA CHHOD KR WO USKE MESSAGE KA RPLY KRTA HAI !! DEKHO TO ISE WO KISI SE WAFA KISI SE BEWFAAI KRTA HAI !! KHUD KHALI PAIT HAI YE OR USNE KHANA KHAYA […]
इस भीड़ अपार में, सैकड़ों – हजार में, ढूंढ पाना है मुश्किल हमसफर, छिपा होता है दुश्मन यार में। नहीं होता जहां में कोई अपना, साथ छोड़ देते सभी मझधार में। करते हैैं साथ निभाने […]
एक कलमकार ————- जीता है हर किरदार एक कलमकार! जिंदगी की हर कसौटी पर खुद को खुद ही कसता है। उसकी कलम उत्तम लिखे इसीलिए लगातार घिसता है। उसकी लिखी हर कहानी हर गीत श्रोताओं […]
कमाल हो तुम! कैसे जीते हो तुम? इस जहरीले नशीले अंदाज़ के साथ। कभी आग कभी पानी रोज़ ही लिखते हो एक नई कहानी । पल में तोला पल में माशा मोहब्बत का अक्सर बना […]
वो हंस रही थी मुझ पर मेरा कत्ल हो रहा था। इश्क का जारी फतवा सरेआम हो रहा था। आगोश में जब अपने भर लेना उसको चाहा। वो हर जगह थी दाखिल नज़दीक हो रही […]
कुरेदने ना देना इस दिल को मेरे। राख तले दबे अरमान, सुलग उठेंगे शोलो की तरह। झांकने ना देना इन आंखों में मेरी। इनमें तुम्हारा अक्स छपा है पहचान लिए जाओगे राधा की आंख में […]
तुम भी ना एक राग बन चुके हो जो बजता रहता है …. रेडियो सा मेरे हृदय के सितार से। आनंदित करता रहता है मेरी सात तालों से बंद हृदय कोठरी को। कभी तुम सुगंधित […]
चिरैया होगी! तुम अपने मां बाबा की। लाडली होगी! तुम अपने भाई और बहन की । समाज के भूखे भेड़ियों के लिए तुम बस एक शिकार हो। इज़्ज़त पर तेरी फिर बन है आई, फिर […]
अच्छे लगते हो मुझको तुम। जब झांकते हो इन आंखों में, गिर पड़ते गहरे सागर में, हम शोखी से भर जाते हैं । अच्छे लगते हो मुझको तुम। जब हंसी ठिठोली करते हो, मुझे देख […]
कृत्रिम सजावट जीने में, आत्मिक सुख तो नहीं ला पाती है। आनंद नाद की प्राप्ति तो प्रभु के चरणों में ही आती है। जब पा जाते खुद में खुद को तब एक कड़ी खुल जाती […]
पानी और दूध की दोस्ती है अनमोल। “विनयचंद “ये साथ हो बिके एक हीं मोल।।
पानी और दूध का एक नहीं रंग रूप। आकर दोनों साथ में बन जाये समरूप।।
पूस की रात ————- कड़कड़ाती सर्दी,सिसकती सी रात ठिठुरन, सिहरन आरंपार। पूस की रात जो हुई बरसात कांप उठी सारी कायनात। ना जाने कब होगी ये प्रातः। ठंड और कोहरे ने गला दिए हाड़ मांस। […]
मैं उससे प्यार करता हूँ, पर इजहार से डरता हूँ। कभी-कभी मैं सोचता हूँ, मुझसे भी प्यार वो करती होगी शायद। दौड़कर खिड़की पर आना, मुझे देख प्यार से मुस्कुराना। कभी-कभी मैं सोचता हूँ, मेरे […]
दर्द को छुपा कर जीना मेरी आदत सी हो गई है भीगी आँखों के साथ मुस्कुराना मेरी आदत सी हो गई है मर चुके है जजबात मेरे दिल के फिर भी टूटी ऊमिदों के साथ […]
Meri jindagi me aake mujhe apna bna ke Usne tode the sare jo kie the vaade
काट दो कुल्हाड़ी से फिर भी खुशबू हीं दूँगा। मैं तो मलयाचल का चंदन हूँ कुछ भी दाम नहीं लूँगा।।
अच्छा हुआ जो तुम… न आये मेरे जनाजे में , आज तो दफना ही दिया जाता हमें… जनाब ! अगर वक्त पर हिचकियाँ न आती !! :- सोमू आचार्य
तुम एक बुत! मैं संभावनाओं से भरा ताबूत। नहीं इरादा तोड़ने का तुमको नहीं इरादा हंसी छीनने का तुम्हारी। बात बस इतनी सी है समझानी मित्र के साथ परम मित्रता है हमें निभानी। तुम समझते […]
दर्द। टूटकर सपने नहीं कम हो सके पास रहकर भी न उनमें खो सके, अश्क से दामन मेरा है तरबतर फूटकर हम आजतक न रो सके। दूर भी हैं वो हमारे पास भी मौत भी […]
एक स्त्री! उड़ेल देती है सारा स्नेह खाना बनाने में। सभी की पसंद नापसंद का ध्यान रखते रखते, खुद को क्या पसंद है भूल ही जाती है। एक स्त्री! सबको स्नेह से खिलाने भर से […]
क्या हुआ? मुड़ क्यू गए? जब आए थे मुझसे मिलने! तो मिले बिना चल क्यों दिए? कुछ खोज रही थी तुम्हारी निगाहे मेरे चेहरे में! बंद आंखों से भी जान लिया मैंने। शायद बिना देखे […]
सरोगेट मदर( उधार का मातृत्व) जन्म तो दूंगी तुम्हें सहेजकर लेकिन मजबूर हूं देख नहीं पाऊंगी तुम्हें बेचकर। विप्पनतावश हारी हूं परिस्थितियों के आगे बेचारी हूं। मैं अपनी कोख का सौदा करने के लिए मजबूर […]
एक कलमकार ————- जीता है हर किरदार एक कलमकार! जिंदगी की हर कसौटी पर खुद को खुद ही कसता है। उसकी कलम उत्तम लिखे इसीलिए लगातार घिसता है। उसकी लिखी हर कहानी हर गीत श्रोताओं […]
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