गलियारों में अंधियारे हैं निश्चित ही सब दुखियारे हैं नहीं हैं खाने को कुछ दाने दूर दूर से सब प्यारे हैं कर्तव्यों की बलिवेदी पर बैठा है कोई शस्त्र पकड़कर पर दुनिया की रीत यही […]
गलियारों में अंधियारे हैं निश्चित ही सब दुखियारे हैं नहीं हैं खाने को कुछ दाने दूर दूर से सब प्यारे हैं कर्तव्यों की बलिवेदी पर बैठा है कोई शस्त्र पकड़कर पर दुनिया की रीत यही […]
आकांक्षाओं के तिमिर में स्मृतियों का बसेरा है जीवन है अंधकार युक्त और खुशियों का सवेरा है बीत जाती हैं कई शामें बिस्तर की सिलवटों में लिहाफ ओढ़ कर यह वक्त गुजर जाता है उंगलियों […]
पिछले कुछ दिनों से फिर आ रही है उनकी याद उसकी याद में दर्द है और थोड़ी सी प्यास भूल तो गए थे हम दो-चार लोगों से मिलकर उसे, पर अब वो लोग ही ना […]
गंध भरे महूबे मन छू गए सकारे यादों की दोपहरी चढ़ आयी द्वारे गूँज उठी सुधियों नूतन नमराइयाँ कूँक रहे कण्ठ आज दर्द की रुबाइयाँ डूब गए गागर में सागर रतनारे गंध भरे महूबे मन […]
कृपाचार्य और कृतवर्मा के जीवित रहते हुए भी ,जब उन दोनों की उपेक्षा करके दुर्योधन ने अश्वत्थामा को सेनापतित्व का भार सौंपा , तब कृतवर्मा को लगा था कि कुरु कुंवर दुर्योधन उन दोनों का […]
दोहा – आनन्द मगन गदगद बदन कृष्ण भाव के रंग जामे रंगीले सब स्वजन बाजत ढोल मृदंग।। भजन – गोकुल में जन्मे साँवरिया ।।03।। सांवरिया रे सांवरिया ओ सांवरिया जेलन मे जन्मे सांवरिया ।। गोकुल […]
अपनी जिन्दगी के बिषम हालात के वक्त का वर्णन करते हुए आर्यन ने लिखा ये गीत – फसी है जिन्दगी कैसी मुकद्दर के किनारों मे छुपी है रंग ए रौनक वक्त के बन्द द्वारों मे।। […]
जो सावन में भी न मिल पाया वो ये माह कहां से देगा इस महीने का तो नाम ही “सितम-बर” है ये रहम कहां से देगा मेरा हकीम तो खुद बीमार है वो मरहम कहां […]
गीत – मेरे होने लगे | आपके होकर खुद खोने लगे | धीरे -धीरे आप मेरे होने लगे | हर घड़ी ख्याल आपका है आता | नजरों में कोई अब नहीं है भाता | आप […]
गीत – तुझसा नहीं कोई | तू ही है सबसे प्यारा | तुझसा नहीं कोई यारा | रूप से तेरे चाँद है रोसन | महकता है तुझसे गुलशन | तुही है मेरा दिलदारा | तुझसा […]
जब इस आसमां में नया तारा जन्म लेता होगा तो क्या होता होगा? क्या उसे कोई सैर कराता होगा? या अकेले ही उन्मुक्त मड़राता होगा कोई दिल तोड़ता होगा उसका या वो खुद ही टूट […]
ठहराव ठीक नहीं फिर वो जीवन का हो या पानी का मुझे दादाजी ने सिखाया था बूढ़े सागर ने जवां नदियों को समझाया है ठहराव ठीक नहीं फिर वो नया सीखने की ललक का हो […]
-सत्य घटना पर आधारित काव्य- एक नन्ही मेहमान आई है मेरे घर मैना आई है जब अकेले थी तो पेड़ की डाल में रह लेती थी अब मां बनने वाली है तो जिम्मेदारी भी आई […]
मैं चाहती हूं मेरे लफ्जों में गहराइयां हों छूता चले मेरा हर अल्फाज आसमान को मेरे भावों में वो ऊंचाइयां हो तितली से रंग भरे हों पन्ने और जवानी की अंगड़ाइयां हों भवन में पसारा […]
कैसे कहें कि क्या खोया है हमने और क्या पाया है हमने दर्द के सिवा कुछ मिला नहीं जो तू ना मिला तो गिला भी नहीं ————————- आकाश की ऊंचाइयों से तू ना घबराना गर […]
आज आ गया समझ में जिंदगी कितनी छोटी होती है एक पल में होती है हमारी तो दूजे पल में हमसे कोसों दूर होती है। यूँ रोज टूटते हैं सितारे आसमान से लेकिन किसी एक […]
शिरोमणि संसार का, भारत देश महान। उच्च शिखर आसीन हो, प्यारा हिंदुस्तान।।(१) *********************** विविधता में एकता, है इसकी पहचान। बोली भाषाएं अलग, धर्म और परिधान।।(२) *********************** प्रहरी बना हिमालय,नदियां करें निनाद। संस्कृति फूले फले सदा, […]
उदासी का समन्दर है इन नयनों में, उठती हैं लहरें बेचैनी की। फिर ऑंखों से रिसता है पानी, यही है इस जीवन की कहानी। कोई जब लेकर आए इक नाव, निकालने को इस समन्दर से, […]
गिरगिट रंग बदलता है, यह बचपन से जाना। साॅंप डॅंक मारता है , यह भी हमने माना। शेर शिकार करके खाए, हाथी नकली दाॅंत दिखाए । इनकी प्रकृति ऐसी ही है, ये प्रकृति ने ऐसे […]
तुम्हारे छिन जाने से मानो सब छिन गया दिल गया, चैन भी छिन गया स्मृति ही शेष रह गई अब तो हाँथों से सर्वस्व छिन गया बैठे हैं हम सागर के किनारे आयेगी एक लहर […]
महारानी ———– समस्त आकांक्षाओं का वृहद आकाश.. और पतंग सी वह। उड़ती ..खिचती.. डोर से बँधी ऊँचा उड़ने का माद्दा रखती..वह। इंद्रधनुषी रंगो से सजे.. ख्वाब.. हृदय में सजाएँ, पेंडुलम सी झूलती वह। भीगे आँचल.. […]
मजदूर ——- मुट्ठी में बंद उष्णता, सपने, एहसास लिए, खुली आँखों से देखता है कोई ….. क्षितिज के उस पार। बंद आँखों से रचता है इंद्रधनुषी ख्वाबों का संसार। झाड़ता है सपनों पर उग आए […]
भर लो आगोश में, आओ कि सहारा दे दो, इश्क है कि नहीं थोड़ा सा इशारा दे दो। 1.हम भरम में रहे कि इश्क है तुमको हमसे करो न याद सितमगर तो भुलावा दे दो। […]
तुम्हारी हँसी तुम्हारा रुदन, तुम्हारी स्मृतियाँ संँजो रखी हैं कीमती दस्तावेजों की तरह कागजों पर मैनें। तुम्हारी आंँख से टपके आँसू ..मोती बन स्वर्णाक्षर से लिख गए हैं वहाँ। कागज के उस जादुई कालीन पर […]
कोकिला ———– कानों में मिश्री सी घोले, काली ‘कोकिला’ मीठा बोले। रूप रंग लुभाते हैं…. पर गुणों के अभाव में तिरस्कार ही पाते हैं। गुण अमूल्य समझाती है, मीठी तान सुनाती है। पतझड़ हो या […]
कृपाचार्य दुर्योधन को बताते है कि हमारे पास दो विकल्प थे, या तो महाकाल से डरकर भाग जाते या उनसे लड़कर मृत्युवर के अधिकारी होते। कृपाचार्य अश्वत्थामा के मामा थे और उसके दु:साहसी प्रवृत्ति को बचपन […]
वह थी बिजली की कौंध सी वह थी निश्चल प्रेम सी वह थी सावन की फुहार लड़कियाँ जैसे पहला प्यार लड़कियाँ जैसे पहला प्यार। गीत गाता हो जैसे सावन मन हो जाता पुलकित पावन आये […]
क्यों ! मैं बुद्ध जैसी बनूँ….. मैं बुद्ध नही हूँ.. जो चल दिये अपना सारा संसार छोड़कर; मैं एक अदना सी नारी कैसे कह दूं बेटा मेरा नहीं बेटी मेरी नहीं पति मेरा नहीं मां-बाप […]
एक थी प्यारी निशा कल्पना की तरह नव आकर्षण लिए सबकी ख़ुशी के लिए उम्मीद भी न थी साथ होगी कभी देर से मिली सही आई बनकर खुशी हंसी मनमोहक सी सबकी ही प्रिय बनी […]
यह समय बड़ा बलवान है समय पर लिखना कितना आसान है पर समझ पाना मुश्किल जितना उलझो इसे समझने में उतना ही जटिल किसी के लिए हाथों से फिसलती रेत तो किसी के लिए बेवफा […]
दुनियां कितनी बदल जाए अगर इंसानों की तरह प्रकृति में भी प्रतिस्पर्धा हो जाए घोसले की जगह चिड़ियों की भी अट्टालिकाएं बन जाए फूलों में सुंदरता को लेकर प्रतियोगिताएं हो जाए वृक्ष भी अपने फलों […]
अर्थ होते हैं त्वरित परिमाण होते हैं गीत होते हैं स्वयं के साज होते हैं है धरा मुर्छित हुई जब जब म्यान में तलवार है दूर कितना है सवेरा चहुँ ओर अन्धकार है है विदुर […]
तुम्हारे खूबसूरत चेहरे पे जो गुस्सा रहता है जैसे हर गुलाब की हिफाजत में कांटा रहता है जंगल में किसी कस्तूरी हिरन सी लगती होगी जब अपने पायल की खनक से तुम खुद डर जाती […]
अपनी सुरक्षा खुद करो औरों के भरोसे मत रहो मदद नमक की तरह ही लो जिम्मेदारी में आलस न करो सुरक्षा कर्मी लगाकर अगर निश्चिंत हो होते हो इंदिरा की तरह कीमती जिंदगी खोते हो… […]
हाथ फैला कर श्वेत कुमुदिनी सी, वो कर रही थी मेरा इंतज़ार। ना जाने कब से करता था मैं उससे प्यार । वो मेरा रुहानी प्यार.. जिसका कभी न किया मैनें इज़हार वो समझी तो […]
============================ इस दीर्घ कविता के पिछले भाग अर्थात् सोलहवें भाग में दिखाया गया जब कृपाचार्य , कृतवर्मा और अश्वत्थामा ने देखा कि पांडव पक्ष के योद्धाओं की रक्षा कोई और नहीं , अपितु कालों के […]
उदास बाजार में भी खुशी आ जाती है बेरंग बाजार रंगीन हो उठता है जब बाजार में बिकने राखी आ जाती है खुद न आए तो भी उसकी राखी हर साल आती है भाइयों के […]
विचारों की विचार गाथा पर हम तो शंकित रह गए पुष्प जो हर्षित खिले थे औंधे मुंह मुरझा गए थी प्रणय की आस किन्तु आस मेरी मृत हुई दूर बैठी अप्सरा यह देख कर हर्षित […]
बूंद की किंचित उदासी बूंद ही सुन ले अगर क्यों मिले सागर में जाकर गुत्थी ये सुलझे अगर तो स्वयं ही हो समाधानों की अविरल बारिशें क्यों हृदय में हो मिटाने की अमिट फरमाईशें।।
कविता- धागा राखी का | धागा राखी का भाई बहन का है प्रेम बंधन | तोड़ने से टूटे ना लगाए बहना टीका चन्दन | बहना की दिया रक्षा का वादा निभाना भईया | तुम ही […]
अजीब इत्तिफाक था याद है…… छत पे हमारा चोरी छिपे मिलना तुम्हारे पिताजी के आते ही बिजली का चले जाना अजीब इत्तिफाक था एक छतरी में कॉलेज से घर आना तुम्हारा गले मिलने का मन […]
वृक्षों पर आ गया सूरज, धरा पर छा गया सूरज। बिखराकर अपनी स्वर्ण रश्मियाँ, गीत कोई गा गया सूरज। हल लेकर निकल पड़े किसान, देखो आ गया सूरज। अंधकार मिटाने धरा से, सदियों से आता […]
तालिबान ने यह कैसी हालत कर दी अफगानिस्तान की बैठे बैठे मृत्यु आ गई कीमत कम हो गई अब तो जान की। फिल्मों जैसा हाल हो गया अफगानी नागरिकों का, प्लेन से मानव ऐसे गिरते […]
ये उत्तराखण्ड है हिमालय की गोद में उत्तर का एक अखंड प्रदेश पहाड़ों के बीच खड़ा एक दुखों का पहाड़ लिए कुछ आपदा का शिकार कुछ राजनीति का जन्म एक बार नामकरण दो बार अजीब […]
कोरोना से आजादी की जंग में, जो नित वैक्सीन लगा रहे हैं स्वतंत्रता सेनानी से कम नहीं हैं, वो चिकित्सक देश को बचा रहे हैं। गाँव-गाँव, नगर-नगर में जाकर, इस रोग के विरुद्ध कैम्प लगा […]
इस दीर्घ कविता के पिछले भाग अर्थात् सोलहवें भाग में दिखाया गया जब कृपाचार्य , कृतवर्मा और अश्वत्थामा पांडव पक्ष के बाकी बचे हुए जीवित योद्धाओं का संहार करने का प्रण लेकर पांडवों के शिविर के […]
सोच बिंदास है आपकी दान है यह महा दान है, दान अंगों का करने की सोच का दिल से सम्मान है। मुक्ति की चाह में खाक होकर उड़ते रहे हम धुँवा बन सीमित रहे निज […]
शत् शत् नमन है मेरा उन वीरों को, जिन्होंने देश को आजादी दिलवाई। आज स्वतंत्रता दिवस की है सबको बधाई। भारत माँ की रक्षा खातिर, अपने सीने पर गोली खाई। जय हिन्द का गूॅंज उठा […]
*यह कविता एक ऐसे व्यक्ति पर आधारित है जो की अपनी मृत्यु के पश्चात अपनी व्यथा सुना रहा है* मैं अब दुबारा जीना नहीं चाहता जब जिंदा था तब कौन सा जीने दिया तुमने अब […]
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