तुम्हारी बेवक्त आने की आदत एक दिन मुझे खो देगी इंतजार करते करते चला गया तो तुम रो दोगी अभी सावन है आ जाओ सितंबर के बाद ये बरसात न होगी मैं शहर चला जाऊंगा […]

बस इतनी सी ख्वाइश है जैसे आज मिले हो, हर बार यूं ही मुस्कुरा कर मिलोगे क्या दौलत शोहरत ज्यादा मिले ना मिले एक ही घर में मां पिताजी के साथ रहोगे क्या ये गुलाब […]

बीते सुनहरे पल तब क्यों याद आते हैं जब बैठो अकेले यादों की दरिया के किनारे यादों की एक लहर सी आती है सुर्ख दिल की सुर्ख रेत को गीला कर देती है दिल आज […]

हे प्रभु, कभी जन्म लो इस धरा पर , बन कर एक इंसान। फ़िर महसूस करो उस दर्द को, जब बिछुड़ जाए निज संतान। अब इसके आगे क्या कहूँ, खुलती नहीं जुबान। खिसक गई पैरों […]

इस दीर्घ कविता के पिछले भाग अर्थात् पन्द्रहवें भाग में दिखाया गया जब अर्जुन के शिष्य सात्यकि और भूरिश्रवा के बीच युद्ध चल रहा था और युद्ध में भूरिश्रवा सात्यकि पर भारी पड़ रहा था […]

वृक्ष हैं कुदरत का वरदान, इन्हें क्यों काट रहा इन्सान। वृक्ष होंगे तो होगी हरियाली, वसुंधरा पर होगी खुशहाली। नियत समय पर वर्षा आएगी, सूखी धरती भी अन्न उपजाएगी। वृक्ष देते औषधि, फल और फूल, […]

जीवन है अनमोल, इसे व्यर्थ में ना गंवाइए, चलना सदा सत्य पथ पर, बाधाओं से ना घबराइए। ***************** कर अथक निरंतर प्रयास, सफलता को पाइए, मन में जो पाले ख्वाब बड़े, उन्हे सार्थक कर दिखाइए। […]

गुरुदेव तुम्हारा अभिनन्दन भारती के अमित चन्दन तुमसे है सुगन्धित शांतिवन युवा पढ़कर पाते पुनर्जीवन रचनाएं जागरण की जान बनी भारत जन का स्वाभिमान बनी नोबल का इसे सम्मान मिला अन्य देशों का भी इमान […]

जमाना खराब है, भरम पाल बैठा हूँ। आगे सुधार होगा, आशा में बैठा हूँ। गलत ही गलत है, नहीं कुछ सही है, सब कुछ गलत है भरम पाल बैठा हूँ। खुद ही सही हूँ, बाकी […]

क्या सोंचकर चुना था ये क्या कर रहें हैं भेंड़ बनके वोट मांगने वाले भेड़िये निकल रहे हैं अरबों किया इकट्ठा पर पप्पू ही पल रहें हैं कुत्तों के घर में कैसे लोमड़ी पल रहें […]

पलकों में अटके हैं वो उसकी याद की तरह आज फिर तन्हा हैं हम तारों से घिरे चाँद की तरह रो अगर जाएं तो यादें बह जाएं अंजुली में भर लो इन्हें बस एक प्यास […]

कोपल दया की अब तो, उग जा, नमी नमी है, बरसात का यौवन, किस बात की कमी है। अब तो हवा भी सूखी-सूखी नहीं है बिल्कुल। आकाश भी है गीला गीली हुई जमीं है। अब […]

सावन उन्हें भिगो दे सूखे पड़े हैं जो दिल राही हैं प्रेम के जो मिल जाये उनको मंजिल। मुस्कान उनके लब पर उस वक्त जाये खिल जिस वक्त रास्ते में हमको वो जायें मिल। रिश्ते […]

आसमाॅं भी रो दिया, सुन कर मेरी दास्ताँ । हमने कहा चाॅंद तारों से, कोई दूर न हो अपने प्यारों से। ये दर्द बहुत ही गहरा है, लगता है वक्त ही ठहरा है। जो गया,वह […]

वृक्ष हैं कुदरत का वरदान, इन्हें क्यों काट रहा इन्सान। वृक्ष होंगे तो होगी हरियाली, वसुंधरा पर होगी खुशहाली। नियत समय पर वर्षा आएगी, सूखी धरती भी अन्न उपजाएगी। वृक्ष देते औषधि,फल और फूल, धारण […]

बात छोटी सी है, मगर मुश्किल बड़ी है, बहू बेटी दोनों बराबर, किस अंतर से छोटी बड़ी है। दोनों इज्जत ही तो है अपने घराने की, जिद सी क्यों है अहम दिखाने की। ये बात […]

भेजकर आश्रम में माता-पिता को, वह बहू-बेटा बहुत खुश हो रहे थे। चुपचाप चल दिए वे बुजुर्ग दंपत्ति, घर को छोड़ते वक्त बहुत रो रहे थे। सोच कर मुसीबत गई घर से, वो बहू-बेटा राहत […]

रावण अभी जिंदा है अमृत सुखा के नाभी का रावण कहाँ मर पाया है वापस अयोध्या लौटे तो फिर से जिंदा पाया है पहले लंका में रहता था अब प्रजा के मन में पाया है […]

मुस्कुराहट फूल का ही रूप है मुस्कुराओ और खुशबू को बिखेरो खुद रहो खुश और सबको प्रेम दो नफरतों को छोड़कर बस प्रेम दो। खूब भीगो नेह की बरसात में, धुन में गाओ खूब झूमो […]

सावन में, पड़ी जब बरखा की फुहार, मौसम भी बदल गया और ठंडी चली बयार । चिरैया फुदक रही वृक्षों पर, मेघों ने गाया राग मल्हार। रिमझिम बूंदें बरस रही हैं, भीगा ऑंगन सारा । […]

बूंदें टपक रही हैं नभ से सावन आया है जब से कोपल फूटी है चाहत की सावन आया है जब से। जिनकी राहें देख रहे थे मेरे नयन उन्हीं ने आकर पूरा घेर लिया मन […]

बूढ़ी थकी सी पलकों में पल रही वो उम्मीद का जग जाना उनके लिए पर्व का महापर्व बन जाना वो दिवाली में मेरा घर आना पुराने पर्दों का एकाएक नया हो जाना धूल खा रही […]

देवकीनन्दन खत्री जी की पुण्यतिथि:- जन्म:- (18 जून 1861) मृत्यु:- (1 अगस्त 1913) ************* हिन्दी के प्रथम तिलस्मी लेखक वा कहानीकार देवकीनन्दन खत्री जिनकी है आज पुण्यतिथि नमन है उनको इस प्रज्ञा’ का जिसने लिखी […]

इस दीर्घ कविता के पिछले भाग अर्थात् चौदहवें भाग में दिखाया गया कि प्रतिशोध की भावना से ग्रस्त होकर अर्जुन द्वारा जयद्रथ का वध इस तरह से किया गया कि उसका सर धड़ से अलग […]

मिलते हैं कुछ फ़रिश्ते ज़िन्दगी में, बना देते हैं रिश्ते ज़िन्दगी में, साथ निभाऍं हॅंसते-हॅंसते, ज़िन्दगी में। टूट जाए जब दिल, जिगर हो कर निराश, हम जाऍं बिखर, तब करते हैं वो बहुत फ़िकर। कीमती […]

बारिश की यह बूंदे बस गिरे जा रही हैं दिल के आग को सीए जा रही हैं रो हम रहे हैं यहां पढ़ सभी अनजान हैं बारिश मै आंसू खो जा रहे हैं सब बोलते […]

सर्द इस मौसम मे बस जिए जा रहे हैं दामन मे बस सफा है इसी का घुमान किया तो तुम घमंड समझ लिए तू पाक हैं तू परवर्दिकार है बस यह इल्तिज़ा है की मेरे […]

चलो तुम मुस्कुराए तो सही भले ही मान कर हमको लतीफा खिलखिलाए तो सही। जा रहे थे इस गली से देखने को आपने आंख के चंचल पलक कुछ हिलाए तो सही।

आज ऐसे वीर बहादुर की जयंती है, जो जलियांवाला बाग नरसंहार का दोषी था, उसको घर में घुस कर मारा और अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण की। ऐसे महान क्रांतिकारी का नाम है उधम सिंह, जो अनाथालय […]

आज तुम्हारे जन्मदिन पर, देते हैं तुम्हे बधाई। बस अब ये मत कहना कि कौन सी सब्जी मंगाई? सच पूछो तो किसी रेस्टोरेन्ट का खाना हमको नही भाता है, तुम्हारे बनाए खाने मे ही असली […]

मोहम्मद रफी पुण्यतिथि स्पेशल:- (31 जुलाई 1980) मोहब्बत को जो गजलों में हमेशा बांध देता था मुनासिब था नहीं वो दिल को ऐसा साज देता था सबकी रूह तक जाती थी उसकी आवाज़ थी ऐसी […]

प्रेमचंद्र का जन्मदिवस:- (31 जुलाई 1880) ****************** हिन्दी कहानी के पितामह उपन्यासों के सम्राट नाम है जिनका धनपत राय वह थे विश्व विख्यात जिसने दिया सजल नैनों का सागर अपने लेखों से भर दी गागर […]

बारिश के बूंदों से याद आती हैं वोह सौंधी सी खुश्बू जो मन को भाती थी वोह गली वोह नुक्कड़ जिनमे ख्वाब देखा था जेब छोटी ही सही पढ़ दिल बड़े हुआ करते थे कीचड़ […]

अनसुनी करके सबकी बात लक्ष्य हमेशा रखना याद।। इल्म ऐसा तुझमें आए तेरी मंजुलता सबको भाए हर सङक पर, हर गली में हरेक जन की हो ये फ़रियाद अनसुनी करके सबकी बात लक्ष्य हमेशा रखना […]

कयी जिम्मेदारी है “ऐ आत्मजा” तुम पर हासिल करना है तुझे छिपा जो क्षितिज पर। लगन जगाना है कुछ ऐसा मशाल बन जाए वो वैसा मिशाल मिल न पाए तुझ जैसा अनुसरण करें तूं बढ़े […]

कुछ लोग रोटियाँ सेकने आ गए जब जलने लगा मेरा मकाॅं। किसी के नुकसान की , यही है कड़वी दास्ताॅं। बुझाने आग , एक हाथ भी नहीं आया । देने को मेरा साथ, कोई साथ […]

🌹🌹🌹🌹🌹🌹 वीणावादिनी मां पद्मनिलया, ज्ञान का दीप जला देना, तिमिर मिटे अज्ञानता का, मां पथ आलोकित कर देना। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹 श्वेतवस्त्रा मां सुरवंदिता, आन कंठ सुर भर देना, शीश नवाऊं तेरे चरणों में, वरद हस्त सिर […]

“कारगिल विजय दिवस” ***************** नमन तुम्हें है वीर सपूतों जीता तुमने सबका प्रेम है तेरे ही गौरव की गाथा गाता पूरा देश है कारगिल के विजय दिवस को हम कैसे भूल सकते हैं जिन वीरों […]

इल्ज़ामो की तलवार चली है हम पर बेबुनियाद मुकदमे चले हैं हम पर कोशिश बहुत की पर ना बचा पाये खुद को यार ने ही जब कटार चलाई है हम पर।।

माशूम ज़िंदगी के तुम्ही तो सहारे थे भोले चंचल मन को कितने प्यारे थे नयनो के दर्पण में अक्स उभरता था मुझे और खिलोने की नहीं जरुरत थी कभी न तुमसे रहा था तकरार मुझे […]

हे! महेश्वर शंभू दीनानाथ, कृपादृष्टि बरसाओ देना साथ, हम शरण तिहारी आए हैं, करूं विनती जोडूं दोनों हाथ। शशिशेखर विश्वेश्वर दिगंबर, तुम परमपिता हो परमेश्वर, सिर जटा में गंगा की धारा, कहलाते जटाजूट गंगाधर। भस्म […]

प्यार की जमीं साजिश के तहत तैयार की गयी ऊर्जा से भरे भारती संतान को बीमार कर गयी एक उम्र गुजरी अपनों से सीख कर उनकी आदतों को खुद में कैद कर पास रहने का […]

साया चाहूं मात-पिता का, जीवन में हर पग पग पर, देना खुशियां हे! परमेश्वर, मात पिता का दामन भर। करूं वंदना कर कमलों से, रज को सजाऊं माथे पर, मिलता आशीर्वाद स्नेह, सज जाता फिर […]

मां पापा तो मेरे इस जीवन की पतवार नहीं चुका पाएंगे हम मां पापा के उपकार मां से पाया जीवन और मिले संस्कार पापा ने दी शिक्षा, दिखलाया है संसार मां पापा से ही जीवन […]

गजल- मुजरिम ए मोहब्बत | बहर -आजाद ,रदीफ़ -करेंगे ,काफिया – आर तू खुश रहे तुझसे प्यार न करेंगे | आएगा नही तू तेरा इंतजार न करेंगे | चाहे जितना ढा ले तू जुल्मों सितम […]

हे गुरुवर गुणशील आगारा। चरण कमल बन्दौं मैं तुम्हारा।। तेरी कृपा ने चलना सिखाया। जीवन के अंधकार मिटाया।। अग जग में किया उजियारा। चरण कमल बन्दौं मैं तुम्हारा।। १।। शिव विरंचि नारायण तुझ में। शब्द […]

​इस दीर्घ कविता के पिछले भाग अर्थात् तेरहवें भाग में अभिमन्यु के गलत तरीके से किये गए वध में जयद्रथ द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका और तदुपरांत केशव और अर्जुन द्वारा अभिमन्यु की मृत्यु का […]

“सावन में सावन पर प्रथम कविता” *********************** सावन आया है।। ——————– प्रीत की रीत निभाना तू कि सावन आया है मिले थे जिस दिन हम तुम वो मौसम आया है। बाहों में भर के तुझे […]

“गुरू पूर्णिमा स्पेशल” —————— माँ होती है प्रथम गुरू जो प्रेम का पाठ पढ़ाती है अंतहीन विनम्रता के साथ जीवन जीना सिखलाती है धरती, अम्बर, प्रकृति सिखाये हर दिन नवल प्रभात सिखाये ज्ञान पुंज के […]