ता उम्र मैं इक अनजान सी राह में रहा, जागते हुए भी मैं सफ़र ए ख़्वाब में रहा, वो जिसे पाने को भटका मैं दर बदर ज़माने में, अंत समय में जाना वो मेरी जिस्मों […]
ता उम्र मैं इक अनजान सी राह में रहा, जागते हुए भी मैं सफ़र ए ख़्वाब में रहा, वो जिसे पाने को भटका मैं दर बदर ज़माने में, अंत समय में जाना वो मेरी जिस्मों […]
एक जैसे हो गए हैं चेहरे सारे, मेरी आँखों से कहीं खो गया है चेहरा तेरा, मुद्दते बीत गयी हैं सपना तुम्हारा देखे, जागता रहता है हर रोज बिस्तर पर तकिया मेरा, फ़हरिस्त होगी मरने […]
तेरे कदमों की आहट से खुश होती थी माँ तेरी, आज लगे रहते हैं लोग तेरे कदम उखाड़ने के लिए, कोई खुश नहीं होता आज तरक्की से तेरी, लोग मौका ढूंढते हैं आज हर कदम […]
थक कर के बैठ जाऊँ वो “राही” मैं नहीं, आँखों में ठहर जाऊँ वो आँसु मै नहीं, चिराग हूँ माना बुझना है मुझे मगर, रौशन ज़माना जो ना कर पाऊँ वो मैं नहीं, दिखता हूँ […]
दर्द के दामन में चाहत के कमल खिलते हैं! अश्क की लकीर पर यादों के कदम चलते हैं! रेंगते ख्यालों में नज़र आती हैं मंजिलें, जिन्दगी में जब भी ख्वाबों के दिये जलते हैं! मुक्तककार […]
मेरा नसीब मुझसे क्यों रूठ गया है? राहे-मंजिल से रिश्ता टूट गया है! यादें सुलग रहीं हैं पलकों में लेकिन, तेरा दामन हाथों से छूट गया है! मुक्तककार – #महादेव’
सब शब्दों का खेल है भैया वरना लड़ाई मे तो दोनो ही हारते है
‘हर अश्क सोख लेता है वो आंख से मेरे, रोने भी नहीं देता मुझे, दर्द का सहरा…।’ ………………………………………..सतीश कसेरा
वतन में आज नया आफताब निकला है, हर एक घर से गुल ए इंकलाब निकला है। सवाल बरसों सताते रहे थे जो हमको, सुकूनबख्श कोई अब जवाब निकला है। गये थे सूख समन्दर उदास आंखो […]
दो रोटी गर्म गर्म फूली हुई सी आज भी जो मिल जाये तो मै दौङी चली आऊँ, दो कौर तेरे हाथों से खाने को जो अब मिल जाये, तो मै सब कुछ छोङ आ जाऊँ। […]
मेरा नसीब मुझसे क्यों रूठ गया है? राहे-मंजिल से रिश्ता टूट गया है! यादें चल रहीं हैं पलकों में हर घड़ी, तेरा दामन हाथों से छूट गया है! मुक्तककार – #महादेव’
गुमान ही नहीं होता ऐसे महसूस इश्क़ जो हमें कभी मिला नहीं है मैंने तो दिया था उधार में दिल खुद का समझ वापस दिया नहीं है
एक शहीद सैनिक दिल्ली से क्या कहना चाहता होगा इसी विषय पर मेरी एक कल्पना देखें- सुलग उठी है फ़िर से झेलम हर कतरा अंगारा है, हिमगिरी के दामन में फ़िर से मेरे खून की […]
मेरी कलम नहीं उलझी है माशूका के बालों में, मेरे लफ्ज नहीं अटके हैं राजनीति के जालों में, मैने अपने अंदर सौ-सौ जलते सूरज पाले हैं, और सभी अंगारे अपने लफ्जों में भर डाले हैं, […]
तेरी कलम को कभी अपनी रुबाई नहीं दूंगा, मैं तुझको चश्म-ए-नम की कमाई नहीं दूंगा l तेरी आंखों में वहम के कई पर्दे टंगे हुए हैं, मैं तुझे सामने रहकर भी दिखाई नहीं दूंगा l […]
ज़रा सा गौर से सुन अब ये आईंदा नहीं होना, कि मुझको तेरा होके और शर्मिन्दा नहीं होना| जहां मतलबपरस्ती आशनाई नोच खाती है, मुझे ऐसी तेरी बस्ती का बाशिन्दा नहीं होना| बहोत ही बेरहम […]
लिपट कर एक बेल एक पेड़ को,आधार पा गई थी बहुत खुश थी सुंदर फूल उगाती थी और गिराती थी जैसे पुष्प वर्षा हो वो समझती थी की अब आसान सफर है जिंदगी का पेड़ […]
ऐ मेरे स्कूल मुझे, जरा फिर से तो बुलाना… कमीज के बटन ऊपर नीचे लगाना, वो अपने बाल खुद न काढ़ पाना, पी टी शूज को चाक से चमकाना, वो काले जूतों को पैंट से […]
मयखाने में साक़ी जैसी दीपक में बाती जैसी नयनो में फैले काजल सी बगिया में अमराई जैसी बरगद की शीतल छाया-सी बसन्त शोभित सुरभी जैसी गीता कुरान की वाणी-सी गंगा यमुना लहराती जैसी बगीचे की […]
दिल के एक कोने मे मन्दिर बना लो। मात-पिता की मूरत उस मे बिठा लो। दिया ना जलाओ पर गले से लगा लो। आरती के बदले , कुछ उनकी सुनो , कुछ अपनी सुनाओ। पहला […]
नाज हमें है उन वीरों पर, जो मान बड़ा कर आये हैं। दुश्मन को घुसकर के मारा, शान बड़ा कर आये हैं।I मोदी जी अब मान गये हम, छप्पन इंची सीना है। कुचल, मसल दो […]
कई मंथराओं का मिलन– परिहास पर है कैकयी फिर भृमित कोप में उपवास पर है तड़फ रहे जनता के दशरथ हाथ मल रहै देख रहै सव कि -राम अव वनवास पर है सीता भी अव […]
तुम आओ सिंह की सवार बन कर ! माँ तुम आओ रंगो की फुहार बनकर ! माँ तुम आओ पुष्पों की बहार बनकर ! माँ तुम आओ सुहागन का श्रृंगार बनकर ! माँ तुम आओ […]
हर लहर उठती है एक नयी उम्मीद लेकर खाती ठोकर चट्टानों की,अपना सबकुछ देकर फिरभी खिंचती चली आए, मिलने किनारे से इन दोनों का प्यार चला है इक ज़माने से एक अरसे से किनारा भी […]
हम भारतवासी हैं हम सभी धर्मों का आदर करते हैं जो भारत मां की तरफ आंखों उठायेगा उसका सीना चीर दिया जाएगा जो इन दिलों में नफरतों के बीज बोयेगा वह जिंदगी भर रोयेगा भारत […]
पाक के गद्दारों के लहू से कर दो धरती लाल उसी खून से करना है माँ भारती का श्रंगार तत्पश्चात चिड़ियाघर में भूखे शेरो और चीतों के आगे फेंक दो मेरी सरकार तो दीपक जलाऊॅ […]
कितना भी मैं करना चाहूँ मैं अपने प्यार का इजहार आई लव यू कहकर पर कमबख्त जुबान फिसल जाती है और मुँह से निकल जाता है जयहिंद प्रस्तुति – रीता जयहिंद
किसी की ऑख़ों में ऑसू थे मेरे लिए वह शख्स मुझे दुनिया में सबसे प्यारा लगा प्रस्तुति – रीता जयहिंद
जब घर से निकली तो बिलकुल अकेली थी मैं जब मुसीबतों ने घेरा मुझे तो मदद करने वालों की कोई कमी नहीं थी जहान् में
जब पाक साफ कर लोटकर आयेगे हमारे वीर जवान मैं साल में मनाऊॅगी दीवाली बारह बार कनातों पर दीपक रोज जलाऊॅगी और पाकिस्तान की धरती पर तिरंगा लहराकर आऊंगी प्रस्तुति – रीता जयहिंद जयहिंद
अब ना कोई शहीद होगा अब ना कोई सुहाग उजड़ेगा अब न कोई बालक अनाथ होगा अब तो केवल पाक साफ होगा प्रस्तुति – रीता जयहिंद जय भारत
यह देश है शेर जवानों का अब तो नाश होगा हैवानों का अब तो सिर्फ हिसाब होगा सत्रह जानों का यहाँ खौल रहा है खून हर हिन्दुस्तानी का प्रस्तुति – रीता जयहिंद
अब तो कोई माफी भी न काम करेगी अब तो सिर्फ तुम्हारी मय्यत ही सजेगी काश्मीर की धरती फिर से जन्नत ही बनेगी अब तो न कोई माॅ का आंचल सूना होने पायेगा अब की […]
जब पाक खाक होगा भारत में एक त्योहार और मनाया जायेगा जैसे दशहरा मनाया जाता है रावण का पुतला दहन करके वैसे ही आतंकवाद का पुतला जलाया जायेगा प्रस्तुति – रीता जयहिंद
छप्पन इंची सीना ना जाने कैसे बहत्तर इंची का हो गया वाह मोदी जी वाह ये तो कमाल हो गया सारा देश मोदी जी आपका कायल हो गया मेरा बुझा मन भी रोशन हो गया […]
सोये हुए सैनिकों को मारकर तूने किया है बुरा काम वाकई में ना कोई तुझसा नमक हराम अब तो मिट जाएगा दुनिया से तेरा नामोनिशान सोच बेटा अब क्या होगा तेरा अंजाम प्रस्तुति – रीता […]
ना पूछना कभी इन आँसुओं की कीमत, तुम गुज़रा हुआ वक़्त लौटा नहीं पाओगे….
‘इक दिल के टूट जाने से क्या—क्या नहीं टूटा, पायल तो रही पांवों में, घुंघरु नहीं रहे………..’ ………………………………………………….सतीश कसेरा
तुम जब जब गिराओगे लाशें मैं तब तब ज़िंदा हो जाऊंगा, शक्ल बदलेगी मगर तुम्हें हर शय मे, मैं ही नज़र आऊंगा l मैं सपूत हूं उस मां का जिसकी मिट्टी ही मेरा […]
कैसे लिखें इस कागज पर जब जिंदगी खाली खाली सी है स्याही है ही नहीं शब्दों को उतारने के लिए
आए थे राजनीति में लेकर वो अपने कायदे,कानून और शिष्टाचार पर […]
अगर इश्क हो तो ही होती गज़ल है। ख़यालों के बिस्तर पे सोती गज़ल है।। दिशा है दिखाती ये भटके हुओं को, दिलों की ख़लिस को भी धोती गज़ल है।। जो साहित्य […]
हंसाकर कहीं तुम रुला तो न दोगे, कोई जख़्म फिर से नया तो न दोगे। हसीं वादियों के सपने दिखाकर, कहीं यार तुम भी दग़ा तो न दोगे। हिफ़ाजत का कर के बहाना कहीं […]
पाक के गद्दारों के लहू से कर दो धरती लाल उसी खून से करना है माँ भारती का श्रंगार तत्पश्चात चिड़ियाघर में भूखे शेरो और चीतों के आगे फेंक दो मेरी सरकार तो दीपक जलाऊॅ […]
ओ विप्लव के थके साथियों विजय मिली विश्राम न समझो उदित प्रभात हुआ फिर भी छाई चारों ओर उदासी ऊपर मेघ भरे बैठे हैं किंतु धरा प्यासी की प्यासी जब तक सुख के स्वप्न अधूरे […]
जाँ पे खेला बचाया है तुमने वतन ज़ुल्म सहते रहे गोली खाते रहे बीच लाशों के तुम मुस्कुराते रहे कतरे-कतरे से तुमने ये सींचा चमन आज करता हूँ मैं देशभक्तों नमन साँप बनकर जो आए […]
देखती हूँ चांद को – लगता है बहुत भला , सोचती हूँ कईं बार – अगर आह्वान करूं चांद का क्या आएगा चांद धरती पर? अगर आ भी गया तो बदले में कन्या रत्न ना […]
आसमां के तारों में वो एक सितारा क्यों लगता है अपना सा। पलकें बंद कर देखूं तो सब क्यों लगता है सपना सा। बाहें किरणों की पसरा कर वह देख मुझे मुस्काता है। बस वही […]
आ कि तुझ बिन बज्म-ए-यारों में भी घबराता हूँ मैं, अपनों की महफिल में खड़ा गैर हो जाता हूँ मैं, बिन तेरे सारा जहाँ नाशाद सा लगता मुझे, सू-ए-मंजिल से दफ्अतन […]
तुमको देखकर मेरे ख्याल मचलते हैं! तुमको सोचकर मेरे ख्वाब बहलते हैं! किसतरह हालात पर लगाऊँ मैं बंदिशें? मुझको दर्द के कदम दिन रात कुचलते हैं! मुक्तककार – #महादेव’
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