फूलों में जैसे लाली शबनम की प्याली तितली की उड़ान जवां इश्क़ ए कव्वाली घुंगरू की छमछम बजे कानों में हरदम तेरी पायल भी बोले हमसे कुछ कमकम हंसी बेपना नूरानी छलके इसकदर जवानी आओ […]

क्या रे! क्यों शोर मचाता है जीवन क़ी आपाधापी में क्यों आपा खो जाता है बनियान तेरी फ़टी हुई जैबों में एक कोढी तक नहीं ब्लैक मनी ब्लैक मनी चिल्लाता है क्या रे! क्यों शोर […]

तुम्हें ज़िन्दगी के उजाले मुबारक अंधेरे हमें आज रास आ गए हैं तुम्हें पा के हम ख़ुद से दूर हो गए थे तुम्हें छोड़कर अपने पास आ गए हैं तुम्हें ज़िन्दगी के… तुम्हारी वफ़ा से […]

हिसाब की पंचायत वहाँ लगती हैं जहाँ दोनो तरफ सौदागर होते हैं लूटतें हैं दिल की दौलत जब चितचोर अक्सर ये लूटरोंसे लोग बेखबर होते हैं बेहिसाब नुक़सान होता है दिलदार का जब दिल्लगी मे […]

लाहौर के उस पहले जिले के दो परगना में पहुंचे रेशम गली के दूजे कूचे के चौथे मकां में पहुंचे और कहते हैं जिसको दूजा मुल्क उस पाकिस्तां में पहुंचे लिखता हूँ ख़त में हिन्दोस्तां से पहलू-ए हुसना […]

मेरी कलम नहीं उलझी है माशूका के बालों में, मेरे लफ्ज नहीं अटके हैं राजनीति की जालों में, मैने अपने अंदर सौ-सौ जलते सूरज पाले हैं, और सभी अंगारे अपने लफ्जों में भर डाले हैं, […]

करीब आओ तुम नूरानी सी रातें हैं! बाद मुद्दत़ के मस्तानी सी रातें हैं! छुप गये हो किसलिए उम्र की तस्वीरों में? शबनमी ख्याल की दीवानी सी रातें हैं! मुक्तककार #महादेव’

ठहरा दे इस वक़्त को ये वक़्त गुज़र जाएगा कुछ बात अब भी है हलक तक वो एहसास बयां ..करने तो दे | गफलत हुए अरसा हुआ पर मलाल उसका.. ज़िंदा है गर ना करे […]

दुखी हो जाता है मन मेरा भी जब जब दुखी तुझे मैं पाता हूँ क्या बोलूँ मैं दर्द मेरा टूट सा पूरा जाता हूँ   कभी सुनकर खबर शहीदों की आत्मा मेरी भी रोती है […]

इस लहलाती हरियाली से , सजा है ग़ाँव मेरा….. सोंधी सी खुशबू , बिखेरे हुऐ है ग़ाँव मेरा… !! जहाँ सूरज भी रोज , नदियों में नहाता है……… आज भी यहाँ मुर्गा ही , बांग […]

पहली बारिश मे टहलना…. देखना कभी शाम ढलना… तितलियों के पर पकड़ना…. ख्वाब का आँखो मे पलना.. बात छोटी है मगर मायने रखती है…. रूठे बच्चे को मनाना…. दर्द मे भी मुस्कुराना… काँच रस्ते से […]

नाम साधना के अभ्यास के दौरान उभरा हुआ यह गीत प्रस्तुत करने बहुत ख़ुशी महसूस कर रहा हूँ  ..! “नाम”  में  प्रभू  के  हम,   मस्त  हो  के  जी  रहे ……! (गीत)   हम  है  भक्त  […]

समय बदलने लगा तो खेल बदलने लगे, दोस्त साथ घूमना और बाहर निकलना भूलने लगे, खिलौने भी बदलने लगे खिलाड़ी भी बदलने लगे, जो संग साथ लगाते थे मेले खुले आंसमा के निचे, आज अकेले […]

हम हिन्दुस्तानी हैं हिन्दुस्तान हमें जां से ज्यादा प्यारा है हम भारत माता के लाल हैं जो करेगा भारत मां का अपमान उसे आज हमने ललकारा है काश्मीर और अवध हमें जा से ज्यादा प्यारा […]

किसने  मानव  को  सिखाया, करना  अभेद  में   भेद। एक  निराकार  परमात्मा, अनन्त, अविनाशी, अभेद, हम  मानव  झगड़  रहे , कर  उसके  भेद। एक  हीं  जमीं  एक  आसमां, एक  हीं  सूरज- चाँद, फिर  क्यूँ  मानव […]

चिर आनन्द की अभिलाषा में, चंचल मन व्याकुल रहता है, अंधियारे-उजियारे में, कुन्ज गली के बाड़े में, देवालय में,जीव-निर्जिव सारे में, ढूँढ़़-ढूँढ़ थक हारी मैं, इस जग की सारी कृति, कराहती  पुकारती आनन्द की, चाह […]

महक रही है फिजा कुछ इस तरह, खुली पलकों में तसव्वुर अब पलने लगे है। पिंघल रही है चांदनी कुछ इस तरह , ख्याल तेरे गज़लों में अब ढलने लगे है। उभर रही है आंधियां […]

शीशे का एक महल तुम्हारा, शीशे का एक महल हमारा. फिर पत्थर क्यों हाथों में आओ मिल बैठें , ना घात करें । प्रीत भरें बीतें लम्हों को, नवदीप जलाकर याद करें – पूनम अग्रवाल

जन-जन की भाषा है हिंदी, भारत की आशा है हिंदी । जिसने पूरे देश को जोड़े रखा है, वो मजबूत धागा है हिंदी । हिन्दुस्तान की गौरवगाथा है हिंदी, एकता की अनुपम परम्परा है हिंदी […]

सारी दुनिया  का  यही,  क्यूँ  है  ये  हाल  सही..….! (गीत) सारी दुनिया  का  यही,  क्यूँ  है  ये  हाल  सही, बाँहों  में  और  कोई,   ख्यालों  में  और  कोई… ख्यालों  में  और  कोई,   बाँहों  में  और  कोई..…. यारों,   […]

स्वार्थ के हर रंग मेें रंग गया है दिल…..देखो और मुस्कुराकर कह रहें हैं— ये दुनियाँ कितनी रंगीन है……!! “मतलब” के रस्से से अब बँध गया है तन…….देखो प्यार के वो कच्चे धागे मिल नहीं […]

शाम गुजार देते हैं लोग गुजरती नहीं, बरसात से कभी किसी राही की प्यास बुझती नहीं, कहे ना कहे कोई बुलाये ना बुलाये खुद ही चली आती हैं यादें, जिस तरह सोते हैं हम तो […]

आज ओढ़ ली थकान की चादर कुछ इस तरह, के हफ़्तों बाद मिली हो किसी को फुरसत जिस तरह, जागता ही रहा हो सफर में ज़िन्दगी के कोई जिस तरह, आज सोया हूँ ऐसे के […]

जाने किस कश्मकश में, जिंदगी गुजरती जा रही है, न जाने मैं अपना न पाई या, जिंदगी मुझे आजमाती रही, बहुत हीं कच्ची डोर में, ये पतंग फँसी हुई है, न जाने किस गुमाँ में, […]

2.01(63) मैं ! तुझे छू कर; ‘गु…ला…ब’ कर दूँगा ! ज़िस्म के जाम में, ख़ालिस शराब भर दूँगा !! तू; मेरे आगोश में, इक बार सही; आ तो ज़रा ! ख़ुशबू—सा बिखर जाएगी, सारा हिसाब […]

मैं जीना चाहती हूँ.. बावजूद इसके.. कि व्यर्थ हो गयी मेरी चीखें.. खुद को बचाने की हर कोशिश.. हर प्रार्थना हर उम्मीद.. जीत गया दानवी पौरुष.. और हार गया मेरा शरीर.. मेरे शरीर का हर […]

मेघों में फंसे सूरज, तुम हो कहाँ? सोये से अलसाए से, रश्मी को समेटे हुए, तुम हो कहाँ ? मेरे उजालों से पूछों – मेरी तपिश से पूंछो- सूरज हूँ पर सूरज सा दीखता नहीं […]

तेरी आदत सी मुझे जब होने लगी, तेरी परछाईं मुझमें ही खोने लगी, तू जो रूठे तो शाम होने लगी, मेरे ख़्वाबों में तू आके सोने लगी, धूप सी मेरे चेहरे पे खिलने लगी, तू […]

ख़ुशी जिसे कहते हैं, वो चीज ढूंढता हूँ गैरों की इस दुनिया में अपनों को ढूंढता हूँ अकेला तो न था पहले कभी इतना साथ चले थे जो उन क़दमों को ढूंढता हूँ ख़ुशी जिसे […]

कब तक जियोगे, समझौते भरी ज़िंदगी तेरी आंखें बताती है, नहीं इसमें तेरी रजामंदी अरे खुद से पूछ तो सही, तुझे क्या चाहिए ? उम्मीद जमाने से ना कर, खुद बदल जाईये आँखों में कोई […]

मैने माना, ओ रे कान्हा, दुनिया पल का आना- जाना, पर है ठाना, दूँगी ताना, अब फिर जो तूने न माना, तूने राधा के संग बाँधा, हो आधा पर प्रेम को साधा, बोल, ये जो […]

कुछ गलतफहमियाँ है, तेरे मेरे दरमियाँ, चल मिटा लें फासले, कुछ गुफ़्तगू कर लें, रूठी रहोगी, आखिर कब तलक, मै इधर तड़पता हूँ, और तु उधर, मेरी मौजूदगी को यूँ, नजरअंदाज ना कर, चिर जाती […]

तुम्हें न देखा न स्पर्श किया, नाही सुना है अब तक पर तुम कितने खास बन गए हो, तुम्हारे आने की जब से हुई है दस्तक ! तुम्हारे आने का इन्तजार है अब तुम्हे पाने […]

देखता हूँ अक्सर खिड़की से, कुछ कोयल दाना चुगती हैं फुदक फुदक कर चुगते चुगते फिर वो सब उड़जाती हैं काश मैं भी उड़पाता, रंग आसमान के देखपाता आज़ादी क्या होती है काश मैं भी […]