बंधु ! शक्ति–स्वरूपा माँ दुर्गा की आराधना के अकल्पनीय दिवस और अंतत: वैभव एवं विजय के पर्व ‘दशहरा’ पर मन–मानस में व्याप्त ‘लोभ–मोह–आघात’ के प्रतीक “रावण” का दहन । आप सभी का हार्दिक अभिनंदन एवं […]

सपने में भी जब कभी तुम्हारा ख्याल आता है- तो दर्द से तड़फ कर जाग जाता हूँ मै . जब अंधेरों के सिवा कुछ मिलता नहीं वहां- तो खुद ही खुद से घबरा जाता हूँ […]

सब कुछ मिलकर लगे जैसे कुछ ना मिला हो कैसी कमी नज़र आती है हाथों की लकीरों में जिनसे मिलते थे हम अक्सर सब-ओ-रोज़ आज सिर्फ यादें ही मिला करती है तस्वीरों में

क्या हुस्न अदा,कैसा शिक़वा गिला किस्मत में ना था प्यार इसलिए ही ना मिला खुदा जानता है मेरा दिल झरने के पानी की तरह साफ़ है पर यह भी सच है की कमल कभी भी […]

दशहरा का तात्पर्य, सदा सत्य की जीत। गढ़ टूटेगा झूठ का, करें सत्य से प्रीत॥ सच्चाई की राह पर, लाख बिछे हों शूल। बिना रुके चलते रहें, शूल बनेंगे फूल॥ क्रोध, कपट, कटुता, कलह, चुगली […]

विजय सत्य की हुई हमेशा, हारी सदा बुराई है, आया पर्व दशहरा कहता करना सदा भलाई है. रावण था दंभी अभिमानी, उसने छल -बल दिखलाया, बीस भुजा दस सीस कटाये, अपना कुनबा मरवाया. अपनी ही […]

फिर हमें संदेश देने आ गया पावन दशहरा संकटों का तम घनेरा हो न आकुल मन ये तेरा संकटों के तम छटेंगें होगा फिर सुंदर सवेरा   धैर्य का तू ले सहारा द्वेष हो कितना […]

किसलिए हर आदमी खुद को जला रहा है? सिलसिला-ए-दर्द़ से खुद को सता रहा है! ढल रही है जिन्दगी शीशे की शक्ल में, रास्तों में तन्हा पत्थर सा जा रहा है! मुक्तककार- #महादेव’

हर सुबह ख्वाबों से रिश्ता टूट जाता है! प्यार का पलकों में गुलिस्ताँ छूट जाता है! खोजता हूँ मंजिलें तमन्नाओं की लेकिन, मुझसे चाहतों का फरिश्ता रूठ जाता है! मुक्तककार- #महादेव’

तेरा ख्याल तन्हा छोड़कर आया हूँ! दीवार-ए-दर्द को तोड़कर आया हूँ! भूला हूँ मंजिलों को वक्त-ए-सितम से, यादों की लहर को मोड़कर आया हूँ! मुक्तककार- #महादेव’

जिन्दगी  भर  भटका  किये  राह-ए-उम्मीद  में, कभी   पहुँच   ही  ना  पाये  दयार-ए-हबीब में, शाम  ढ़ल  गयी  और  हम  यूँ  ही  बैठे रह गये, वो आये और जा बस गये निगह-ए-अंदलीब में, क्या   […]

क्या दोष तुम्हें दूँ तुम ही कहो.. क्या दोष तुम्हें दूँ तुम ही कहो.. इस रिश्ते की बुनियाद हिलाने की शुरुआत तो मैंने की थी.. छुपकर तुमसे और किसी से पहले बात तो मैंने की […]

कोई नहीं है मंजिल न कोई ठिकाना है! हरवक्त तेरे दर्द़ से खुद को सताना है! मुमकिन नहीं है रोकना नुमाइश जख्मों की, हर शाम तेरी याद में खुद को जलाना है! मुक्तककार- #महादेव’

वो पूर्ण शक्ति जब बिखर गया, कण-कण में  सिमट गया , तब हुआ इस जग का निर्माण, वो परमपिता सृजनकर्ता जो, नित्य सूर्य बन अपनी किरणो से, नव स्फूर्ति का जीवो में करता संचार, वो […]

ता उम्र मैं इक अनजान सी राह में रहा, जागते हुए भी मैं सफ़र ए ख़्वाब में रहा, वो जिसे पाने को भटका मैं दर बदर ज़माने में, अंत समय में जाना वो मेरी जिस्मों […]

एक जैसे हो गए हैं चेहरे सारे, मेरी आँखों से कहीं खो गया है चेहरा तेरा, मुद्दते बीत गयी हैं सपना तुम्हारा देखे, जागता रहता है हर रोज बिस्तर पर तकिया मेरा, फ़हरिस्त होगी मरने […]

तेरे कदमों की आहट से खुश होती थी माँ तेरी, आज लगे रहते हैं लोग तेरे कदम उखाड़ने के लिए, कोई खुश नहीं होता आज तरक्की से तेरी, लोग मौका ढूंढते हैं आज हर कदम […]

थक कर के बैठ जाऊँ वो “राही” मैं नहीं, आँखों में ठहर जाऊँ वो आँसु मै नहीं, चिराग हूँ माना बुझना है मुझे मगर, रौशन ज़माना जो ना कर पाऊँ वो मैं नहीं, दिखता हूँ […]

दर्द के दामन में चाहत के कमल खिलते हैं! अश्क की लकीर पर यादों के कदम चलते हैं! रेंगते ख्यालों में नज़र आती हैं मंजिलें, जिन्दगी में जब भी ख्वाबों के दिये जलते हैं! मुक्तककार […]

मेरा नसीब मुझसे क्यों रूठ गया है? राहे-मंजिल से रिश्ता टूट गया है! यादें सुलग रहीं हैं पलकों में लेकिन, तेरा दामन हाथों से छूट गया है! मुक्तककार – #महादेव’

वतन में आज नया आफताब निकला है, हर एक घर से गुल ए इंकलाब निकला है। सवाल बरसों सताते रहे थे जो हमको, सुकूनबख्श कोई अब जवाब निकला है। गये थे सूख समन्दर उदास आंखो […]

दो रोटी गर्म गर्म फूली हुई सी आज भी जो मिल जाये तो मै दौङी चली आऊँ, दो कौर तेरे हाथों से खाने को जो अब मिल जाये, तो मै सब कुछ छोङ आ जाऊँ। […]

मेरा नसीब मुझसे क्यों रूठ गया है? राहे-मंजिल से रिश्ता टूट गया है! यादें चल रहीं हैं पलकों में हर घड़ी, तेरा दामन हाथों से छूट गया है! मुक्तककार – #महादेव’

एक शहीद सैनिक दिल्ली से क्या कहना चाहता होगा इसी विषय पर मेरी एक कल्पना देखें- सुलग उठी है फ़िर से झेलम हर कतरा अंगारा है, हिमगिरी के दामन में फ़िर से मेरे खून की […]

मेरी कलम नहीं उलझी है माशूका के बालों में, मेरे लफ्ज नहीं अटके हैं राजनीति के जालों में, मैने अपने अंदर सौ-सौ जलते सूरज पाले हैं, और सभी अंगारे अपने लफ्जों में भर डाले हैं, […]

तेरी कलम को कभी अपनी रुबाई नहीं दूंगा, मैं तुझको चश्म-ए-नम की कमाई नहीं दूंगा l तेरी आंखों में वहम के कई पर्दे टंगे हुए हैं, मैं तुझे सामने रहकर भी दिखाई नहीं दूंगा l […]

ज़रा सा गौर से सुन अब ये आईंदा नहीं होना, कि मुझको तेरा होके और शर्मिन्दा नहीं होना| जहां मतलबपरस्ती आशनाई नोच खाती है, मुझे ऐसी तेरी बस्ती का बाशिन्दा नहीं होना| बहोत ही बेरहम […]

लिपट कर एक बेल एक पेड़ को,आधार पा गई थी बहुत खुश थी सुंदर फूल उगाती थी और गिराती थी जैसे पुष्प वर्षा हो वो समझती थी की अब आसान सफर है जिंदगी का पेड़ […]

ऐ मेरे स्कूल मुझे, जरा फिर से तो बुलाना… कमीज के बटन ऊपर नीचे लगाना, वो अपने बाल खुद न काढ़ पाना, पी टी शूज को चाक से चमकाना, वो काले जूतों को पैंट से […]

मयखाने में साक़ी जैसी दीपक में बाती जैसी नयनो में फैले काजल सी बगिया में अमराई जैसी बरगद की शीतल छाया-सी बसन्त शोभित सुरभी जैसी गीता कुरान की वाणी-सी गंगा यमुना लहराती जैसी बगीचे की […]

दिल के एक कोने मे मन्दिर बना लो। मात-पिता की मूरत उस मे बिठा लो। दिया ना जलाओ पर गले से लगा लो। आरती के बदले , कुछ उनकी सुनो , कुछ अपनी सुनाओ। पहला […]