जो सपने अधूरे रह गए वही शब्दों में बदल गए लिखना अब और नही है मुझे पर अभी ज़िंदगी के कई और इंतिहाम रह गए ।। अब तू ही बता दे क्या है तेरे इरादे […]
जो सपने अधूरे रह गए वही शब्दों में बदल गए लिखना अब और नही है मुझे पर अभी ज़िंदगी के कई और इंतिहाम रह गए ।। अब तू ही बता दे क्या है तेरे इरादे […]
प्रदूषण की मार, सह रहा संसार रोको इस प्रदूषण को मनुज, वरना फिर पछताओगे दूषित होती रही धरा यूं ही तो कैसे रह पाओगे वायु प्रदूषण यूं ही होता रहा तो, शुद्ध पवन की सांस […]
ज़रा सी देर क्या हुयी तुम यूँ ख़फा हुए । ज़रा सी बात पर बस यूँ ही चल दिए। जरा सी देर क्या हुयी नज़र यूँ फिरा लिए जैसे हम नहीं कोई जहाँ अलग बसा […]
तेरा मेरे लिए होना, उतना जरूरी, जितना जरूरी , ज़हान को हवा पानी है, तू अंजाम है, मेरे इश्क का , तू सुकून है , मेरी बैचेनी का, कम शब्द में कहुं तो दिल की […]
देवी देवता करते हैं गंगा का गुणगान इसके घाटों पर बसे हैं ,सारे पावन धाम गंगा गरिमा देश की ,शिव जी का वरदान गोमुख से रत्नाकर तक ,है गंगा का विस्तार भागीरथी भी इन्हे ,कहता […]
कविता- सभी सो रहे —————————- सभी सो रहे हैं, घरों में पड़े हैं| हम ही हैं दीवाने, अभी जग रहे हैं| बड़ा दुख है हमको जो जग रहे हैं। दिखे ना किनारा, चले जा रहे […]
दोस्तों का दिल से सम्मान है, उनकी दोस्ती पर हमें,अभिमान है दोस्ती होती है ,सुधा समान, सुधा की एक बूंद ही महान है निज स्वार्थ से ऊपर उठी जो दोस्ती, उस दोस्ती में दोस्तों की […]
बहुत मिला इस ज़िन्दगी से, सब कुछ कहां,किसे हासिल मगर रह ही जाता है, किसी का “काश”, और, कहीं किसी का “अगर”.. *****✍️गीता
रास्ते के पत्थर समझ के, ठोकर मार कर चले गए वो। हम किनारे पे खड़े रहे, किसी के हो कर गुजर गए वो।।
खुद को जला के हम, अपनी प्यास कहाँ बुझा पाए। समंदर भी मुझे देख कर , अपनी धारा बदलती जाए ।।
दीदार करके उसका मैं पाक हो गई मेरी मोहब्बत से जिन्दगी आबाद हो गई करता रहा वो मेरे इजहार का इन्तजार पर मैं किसी और की बाँहों का हार हो गई..!!
जाने क्या सोंचती रहती हूँ बस उसके ही खयालों में खोई रहती हूँ जिन्दगी अब फुर्सत कहाँ देती है अपनी उलझनों में ही उलझी रहती हूँ…
गीतों में सबसे प्यारा गीत हो तुम मेरे हमदम मेरे मनमीत हो तुम नहीं चाह मुझे आसमां की बुलंदियों की मेरी तो जीत हो तुम…
दिल टूट जाने के बाद भी प्यार है तुमसे ऐसा क्यों है नहीं जानती हूँ मैं बस इतना ही मालूम है मुझे कि आज भी बेपनाह तुझे चाहती हूँ मैं…
यदि किसी भूखे को हम दो कौर रोटी दे सकें तो तब कहीं सचमुच में हम इंसान कहने योग्य हैं। दर्द के आँसू किसी के पोंछ पायें, रोक पायें तब कहीं सचमुच में हम इंसान […]
खुद ही खाऊं खुद ही पाऊँ दूजे का हक भी खुद खाऊं दुनिया का जो भी अच्छा हो वह मुझे मिले, मैं सुख पाऊँ। सब पर मेरा राज चले सब मेरी बातों को मानें जिसको […]
आज कथनी का कर्म से कोई मेल नहीं है कहने को बातें ऊँची करने को कुछ नहीं है गीता रामायण की धरती पर हिंसा का संगीत चढ़ा है कैसे बचेगी मानवता दानवता का दल बहुत […]
जल रहा है आज रावण राम जी के वाण से, उड़ रही हैं खूब लपटें देखता जग शान से। गा रहे हैं जोश से सब राम राघव की बड़ाई अबकी ऐसा वाण मारो दूर भागे […]
इस सुरमयी संसार में सबको मिले सुख भोगने को दुख किसी को भी मिले मत राम जी वर आज दो। आपने त्रेता में जैसे, उस दशानन को संहारा, आज भी आकर निशाचर वृति को संहार […]
दशहरा पर्व यह पावन मुबारक हो सभी को, मिटे सारी बुराई खिले बस खूब अच्छाई। रावण सरीखी वृतियाँ सब दूर हो जायें, जीभ में शारदा माँ और वाणी में मिठाई। भलों का मार्ग कांटों से […]
दशहरा का पर्व है आया अच्छाई ने बुराई को हराया विजय गीत सब मिल गाओ कुछ ऐसा पर्व मनाओ || सोंचो तरक्की के जुनून में हम खुद से हो गए पराए हमको लगे जकड़ने ,ख्वाहिशों […]
कभी-कभी सोंचती हूँ कि दूसरों को जो राय देती हूँ क्या उसे मैं स्वयं अपनाती हूँ ! क्या मैं अपने अन्दर की गन्दगी मिटा पाती हूँ ? जवाब आता है नहीं मैं तो सिर्फ भाषण […]
कविता- रावण हूं ———————- रावण हूं, राम नही , राक्षस हूं, भगवान नही, अब की बार दशहरे में, पहले खुद राम बनो फिर आग लगाना मुझे| रघुकुल की पता होगी वे सत्य वचन पर, अटल […]
61-नहीं मरेगा-रावण अहम भाव में बसता हूं मैं कभी न मरता रावण हूं मैं स्वर्ण मृग मारीच बनाकर सीता को भी छलता हूं मैं..। किसे नहीं है खतरा सोचो केवल अपनी सोच रहे हो रावण […]
बाल श्रम पर कविता **************** यही तो बात हुई, कलम,-दवात नहीं, न उजाला है कहीं, जूठे बर्तन हैं पड़े, नन्हें हाथों में मेरे, यहीं से सच कहूं तो जिंदगी की मेरी, सच्ची शुरुआत हुई। इनमें […]
निरंतर चलते रहता है दौड़ते रहता है समय, वो देखो भाग रहा है समय दौड़ रहा है समय। हम कितना ही चाहें नहीं रोक सकते उसकी गति को, वक्त की पटरी पर हमें दौड़ना पड़ता […]
बे-कार हूं बे-रोजगार नहीं आदतों का शिकार नहीं शौक से नहीं परहेज मुझे तेरी तरह शौक का गुलाम नहीं इक सुई का किया आविष्कार नहीं उसे हर नई खोज की दरकार है मेरी जरूरतों का […]
*****हास्य – रचना***** कछुए और खरगोश की, पांच मील की लग गई रेस तीन मील पर खरगोश ने देखा, कछुआ तो अभी दूर बहुत है थोड़ा सा आराम करूं ना…ना वो सोया नहीं ये पुरानी […]
आज तूफानों से कह दो आप भी पीछे रहो मत, धूल तो उड़ ही रही है, आप यूँ शरमाओ मत। हम हवा के हल्के झोकों से नहीं घबराते हैं, यदि स्वयं तूफान आये तब भी […]
रावण जलाया तो क्या जलाया, दिल के रावण जलाओ तो जाने । तुम्हारी ढकोसला षडयंत्र को हम, अपनी सुरक्षा कवच क्यों माने।।
चलो इश्क़ की दरिया में कूद कर देखते है। सुनता हूँ नीली गहराई का कोई अंत नहीं है।।
एक रास्ता मय़खाने की ओर दूसरा रास्ता शबाब की ओर। उतावला दिल किधर जाए इधर जाए या उधर जाए।।
प्रेम क्या है क्या बताएं पूछते हो तो सुनो, प्रेम जीवन प्रेम माया प्रेम सब कुछ है सुनो। प्रेम करुणा, प्रेम ममता प्रेम चाहत है सुनो, प्रेम दिल को जोड़ता है प्रेम बंधन है सुनो। […]
रोज है सुनने में यह आता गर हेल्मेट होता बच जाता, फिर भी बाइक पर चलने पर हेल्मेट को टांगे रहते हैं। दुर्घटना हो जाने पर फिर सारे लोग यही कहते हैं गर हेल्मेट होता […]
अजीब आदत है अपने आप से, मिल लेता हूँ कभी कभी सच है ! अब वो दौर नही रहा जहाँ फुरसत हुआ करती थी अब तो खुद ही में उलझ गए है फिर भी फुरसत […]
अधर्म का हो खत्म राज धर्म को विजय मिले, धनुष उठाएं रामचंद्र विश्व को निर्भय मिले। दैत्य दम्भ खत्म हो अहं की बात दूर हो, घमण्ड भूमि पर गिरे, बचे जो बेकसूर हो। अशिष्टता समाप्त […]
ना जाने आप में ऐसा क्या है जो सबका मन हर लेते हो… थोड़ी देर बैठो जिसके करीब उसके दिल में घर कर लेते हो..
श्रीराम को आदर्श मानते हो ना, तो चलो उनके आदर्शों पर, गुरु का सम्मान, माता की इच्छा और पिता के वचन की रक्षा को राजगद्दी का त्याग, चौदह बरस तक वनवास ग्रहण करना। राक्षसों का […]
ओ युवा!! भारत के मेरे, राम बन जा आज तू, खुद हरा भीतर का रावण, धर्म धनु ले हाथ तू। बढ़ रहे हैं नित दशानन हम जला पुतला रहे हैं, जल गया रावण समझ कर […]
मेरे राम! फिर से आओ मेरे राम! फिर से आओ ना, बढ़ चुकी दानवों की फौज फिर से, आओ धरती में चले आओ ना। पहले दिखता था रावण मारना आसान था, अब तो लगता है […]
मेहनत का कल मेहनताना, फल पाने को मन ताना बाना | मेहनत की सीढ़ी लगन, मंजिल मेहनताना, मन आतुर पाने को मेहनताना | देह करौंदे, मेहनत का कड़वा खाना, मेहनत का स्वाद कुटकी जैसा | […]
अपने मन को कभी न डगमगाना भले ही त्याग दे, तुझको ये स्वारथ का जमाना, अपने मन को कभी न डगमगाना। भले ही लाख परेशानियां आएं तुझ पर। मगर तू लौह सा बन हौसला रखे […]
कविता- इबादत ———————— परमेश्वर तेरा, धन्यवाद करता हूं, तेरी इबादत करता हूँ तुझे प्रणाम करता हूं| जब जब पुकारा, तूने साथ निभाया, मेरी मुराद पूरी करके, मुझे खुशहाल बनाया, दिया मुझे सब कुछ दिया, घर-परिवार […]
रोशनी आये भले ही कहीं से भी मगर वो आये, अंधेरे को हराने आये। उसकी किरणें हों इतनी तीखी सी आवरण भेद कर भीतर जहां हो मन वहां पहुंचें, मिटा दें सब अंधेरा। और जितनी […]
तोहफा वो अनमोल था आज शुकून भी मिल जाता,काश कोई झूठा ही सही पर कोई हमदर्द ही निकल जाता | इसी चिंता से मेरा मन विकल था,पर उसकी आँखो में इतिहास ना कोई सरल था […]
जिन्दगी ने दिया है तोहफा हो प्राणों की हरेक सांस हो तुम, सजा चमन तुम्हीं से आज मेरा, कल भी जी लेंगे ऐसी आस हो तुम। जबसे आई, बाहर लाई हो लुटाती नेह, चली आई […]
ज़िन्दगी, है एक चमत्कार हर सांस इसकी है, प्रभु का उपहार प्रभु की दी हुई नेमत है ये, यूं कुछ भी कह के ना कर बेकार.. *****✍️गीता
देखो जरा सा बाहर मिट्टी है सब तरफ जी, मिट्टी में हैं जन्मते मिट्टी में खेलते हैं, मिट्टी में जड़ हमारी मिट्टी है सब तरफ जी। रोड़ी- सीमेंट की जिस चमकी छठा में हो तुम, […]
मानव का गहना है वाणी, वाणी का भोगी है प्राणी । मधुर वचन है मीठी खीर, कटु वचन है चुभता तीर । सद वचन है सदा अनमोल, मन कांटे से इसको तौल । हिय का […]
तू रहे सलामत तुझे जन्म दिन बहुत- बहुत मुबारक ! हर छोटी-बङी अनन्य उम्मीदों से भरी सतरंगी स्वप्नों से सजी पूरी हो चाहत तुझे जन्म दिन बहुत-बहुत मुबारक! तेरी ख्वाहिश, परवान चढ़े तुझे मुकम्मल, जहाँन […]
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