अपनों से दूर हो हर इंसान खुद को भी भूल जाता है अपने करते हैं नित शिकायत पराधीन कहां सुख पहुंचाता है पारावत की तरह हर सन्देशें पर की अंजाने को पहुंचाता है अपने रहें […]
अपनों से दूर हो हर इंसान खुद को भी भूल जाता है अपने करते हैं नित शिकायत पराधीन कहां सुख पहुंचाता है पारावत की तरह हर सन्देशें पर की अंजाने को पहुंचाता है अपने रहें […]
सिक्किम के सौन्दर्य का, मैं कैसे करूं बखान वहां से लेकर हम यादें, आए अद्भुत, आलीशान स्वर्णिम सूर्य उदित होते हैं, पर्वतों के पार बनते बादलों की छटा है, सुन्दर अपरम्पार झरने झर-झर बहें यहां […]
वो एक कप कॉफी का वादा तुम्हें याद होगा रोज़ मिला करते थे तुम मुझसे उसी वादे की खातिर कहना चाहते थे मगर कह नहीं पाते थे कि चलोगी मेरी बाइक की बैक सीट पर […]
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° मेरे आने पर दिल में गिटार बजा करती थी चलती थी सड़कों पर तो कतार लगती थी अपने भी दिन हुआ करते थे साहब! जब मैं जवान हुआ करती थी… अब इन बूढी़ झुर्रियों […]
वो एकतरफा प्यार ,जिसके लिये हुआ दिल बेक़रार मैं ढूंढता रहा उसे ,होकर बेक़रार उसका मुस्कुराना देखकर आँखों का झुकना देखकर उसके आगे लगने लगे महखाने सारे बेअसर वो जाते जिधर जिधर मैं पहुंचता उधर […]
तुम्हीं बताओ कैसे एक नयी शुरुआत करें, तुझे जानकर भी फिर से तुझपर कैसे इन्तिखाब करें । जिनकी फितरत रही हैंअकसर ताश के पत्तों की तरह, जिनकी बातें जल में उठते बुलबुले की तरह , […]
तुम वो अहसास हो जिसे छू जाये वो संदल सा महक जाये तुम वो इश्क़ हो जिसे हो जाये वो दीवाना हो जाये!!
इक दृढ़ संकल्प के साथ करते हैं इक नयी शुरुआत । संकल्प लेना और उसपर अमल करने को तत्पर रहना फिर देखो होती है कैसे खुशियों की बरसात । सफल होना ही है इस दृढ़ […]
हमेशा रात-सी खामोशी लिए एक अजीब सी वेचैनी से घिरी- घिरी रहती हूँ । निशा हो या दिवस खुद में ही सिमटी, सूर्य की किरणों से कहाँ मिला करती हूँ ।
उम्र और जिंदगी में फर्क:- —————————— उम्र वो है दोस्तों जो बीते अपनों के बिना, ******************************* जिंदगी वो है जो अपनों के साये में गुजरती है|
उन्हें हमारी मौजूदगी से परहेज होने लगा हमें यह जैसे ही समझ आया हम मुस्कुरा के चल दिए….
जाहिर ना होने देंगे हम अपने दर्द को, तुम समझ ना सको तो कैसे हमदर्द हो !
तुम वो एहसास हो जिसे सोंचकर मन-मस्तिष्क में आतंक सा जाता है । तुझे सोंच कर इन नयनों में आँसूओ का सैलाब उमङ आता है ।
मैंने गुस्से से उसे देखा उसने भी गुस्से से देखा मैंने आँखें दिखाईं वो भी आँखें दिखाने लगा मैं तंग आकर हँसने लगी तो वह भी खिलखिला उठा मैं मुस्कुराई वह मुस्कुराया मैं इतरायी वह […]
जब मुसीबत आई तो मैंने ये नहीं सोंचा कि ‘अब कौन काम आएगा’ बल्कि यह सोंचा कि देखती हूँ अब कौन साथ छोंड़ जाएगा..
वो जब आया घर तो बिल्कुल खामोश था कुछ नहीं बोल रहा था कोई आवाज नहीं मैंने पैकिंग खोली सेल डाले, चैनल सेट किया आवाज बढ़ाई रेडियो चलने लगा और पहली बात जो सुनाई दी… […]
मैं लड़ना जानती हूँ मगर चुप रहती हूँ ! ************** क्योंकि अगर मैं जीत गई तो जानती हूँ सब कुछ हार जाऊंगी
भीम पार्टी आई देखो भीम पार्टी आई दलित को गोद में लेकर खुद को नेता समझे भाई वह कहती है ब्राह्मण, ठाकुर और तलवार इनको मारो जूते चार और सभी प्यारे बंधु दलित पर हो […]
गैया तुम तो मैया हो है दूध अमृत तुम्हारा जीने एक सहारा जिससे पोषित होता है मन और शरीर हमारा। हर तरह काम आती हो जीना हो या मरना हो हर जगह जरूरत पड़ती शुभ-अशुभ […]
जब जलता जाए धागा, इक रौशनी के वास्ते ये देख कर.. मोम ने भी ली नसीहत, और पिंघलना सीख गया .. *****✍️गीता
कहीं भ्रूण हत्या बेटी की, कहीं पर हुआ बलात्कार है कहीं एसिड अटैक सुना और कहीं दहेज़ की, सही मार है गर यूं ही चलता रहा तो, भारत में भगवान भी बेटी ना देंगे पैदा […]
कविता- पिता पुत्री का संवाद ————————————- तेरे खातिर दर-दर भटके, हर धर्मों का चौखट चुमू, आजा बेटी मां के सूनी आंचल में, मैं सीता मरियम नाम से बोलूं| तुमको पाने के खातिर मैं, कहां-कहां नहीं […]
मुझ में भी कमियां होंगी तुझ में भी कमियां होंगी, तुझ में, मुझ में दोनों में लाखों ही कमियां होंगी। आ कमियां खूबी में बदलें मिलकर कर कदम बढ़ा लें हम दोनों अपनी खूबी से […]
ओस की चंद बूंदे, इधर भी दे-दे, ए खुदा वीरान मेरे दिल की, ज़मीन पड़ी है ।। *****✍️गीता
राहों में भटक गए गर, मंज़िल नहीं भूलेंगे शौक को कब से फ़िक हुई , पावों के छालों की.. *****✍️गीता
कांटों सी क्यों चुभन रखूं जब मिट्टी में मिल जाना है, कभी किसी ने कभी किसी ने निश्चित ही है जाना है। फूलों सी खुशबू फैला दूं जिधर चलूँ उधर महका दूँ, प्यार का बीजारोपण […]
तुम अपने मुहब्बत का हिसाब मत देना। अबकी वेलेंटाइन पे यारा गुलाब मत देना।। फूल तो देना मगर काँटों का घाव मत देना। खुली आँखों में अधूरा कोई ख्वाब मत देना।।
थोड़ी सी कोशिश करें, थोड़ी रखें उम्मीद रास्ते भी मिल जाएंगे, ना हो ना उम्मीद कुछ भरोसा भी रख, क्या पता मुकद्दर खुद तुझे तलाश ले ।।
मेरी भी कश्ती, इक दिन लगे किनारे मुकद्दर ना साथ दे तो, साथ कर्म होंगे हमारे ।। *****✍️गीता
नया सवेरा नई उमंगें छोड़ो मन की सभी उलझनें, बीते बातें एक तरफ कर जीतो, पा लो नई मंजिलें। रात निराशा की थी जो भी बीत गई सो बात गई, अब वो सारा दर्द भुला […]
विजदेव नारायण साही जी का आज जन्मदिन है, उनको श्रद्धांजलि अर्पित कर लूं यह कवि का मन है। तीसरा सप्तक में उदित हुए, अंदाज कबीरी मिलता है मछलीघर, साखी में उनका बौद्धिक परिचय मिलता है। […]
वतन पे मर- मिटने वालों का हस्र क्यूँ ये हुआ है रौशनी तो पा लिए हम पर करने वाले धुआँ हैं हर जवान हिन्द का यह सवाल कर रहा है ?
क्यूँ हम कृतघ्न ऐसे, मूढ़ बने पङे हैं एक वीरान्गना के कृत्यों को भूल बैठे हैं कोई तो होता, थोङा सा भी तस्कीन देता उनके साथ खङा हो उन्हे तसलीम देता । तस्कीन- ढाढस तसलीम- […]
अंग्रेजी हुकूमत को चकमा दी सेनानियों को बचाने खातिर पति शहीदों में शामिल बम बनाने खातिर घर-वार कर निछावर जेल में पङी थी बाहर आकर, अपना कहे किसे वो अकेले ही जद्दोजहद में पङी थी
अपने जीवन के अमूल्य पल, दुर्गा वोहरा सूवा की सुश्रुषा में, इन्तिसाब कर मुमानियत को तोङ, मुल्क के हिफाज़त मे रही जो तत्पर, मिली क्यूँ उन्हें गुमनाम मौत?
पिता बाँके बिहारी इलाहाबाद में नाजीर थे महारानी विक्टोरिया की आस्था में लीन थे ससुर “राय साहब” उपाधि से दे मण्डित आसपास के सभी ब्रिटिशों में आसक्त थे ऐसी ही आव-ओ-हवा में, दुर्गा के हौसले […]
अनगिनत वर्ज़नाओ की बंदिशो में, नारी जकङी हुई थी क्रांति की अलख जगाने,धधकती विद्रोह में कुद पङीथी मुखबिर, कभी भार्या बन, वतन का कर्ज चुका रही थी नाउम्मीदी के तिमिर में, हर साँस जल रही […]
कुछ लोगों का दूसरों के, नक्शे कदम पर चलना। यह साफ-साफ ज़ाहिर करता है… उनका कोई वजूद है ही नहीं.. यह तो हर दूसरा, तो कोई गैर कहता है…..
लब पर तेरा नाम यूं बार-बार आता है, जैसे कोई परिंदा अपना आशियाना बनाता है…..
कोरे मेरे, सपने मेरे, कोरे ही रह जाएंगे….२ उम्मीदें देंगी,दस्तक उन तक, उम्मीदें ही रह जाएंगी…. कोरे मेरे, सपने मेरे, कोरे ही रह जाएंगे…२ शामें देगी,उल्फत उनको, शामें ही रह जाएंगी… कोरे मेरे,सपने मेरे, कोरे […]
उम्मीद की लौ जल-जल के बुझ रही थी नाउम्मीदी के तिमिर में, हर साँस जल रही थी परालम्बन भरे जीवन से मुक्ति हमें दिलाने वीर- वीरान्गनाओ की टोली कफ़न बाँध चल रही थी ।। दिन […]
हास्य कविता ——————– गारंटी है जरा भी हँसी नहीं आयेगी ! ****************** जर्जर हैं दीवारें इसकी मत तुम जोर लगाओ रहना है तो रहो नहीं तो तुम यहाँ से जाओ दूसरे भी हैं लगे लाइन […]
आठ महीने की गुड़िया ने आज पा पा बोल दिया धीरे-धीरे साफ शब्द कहकर वाणी को खोल दिया। वैसे तो गुड़िया रानी, अपनी भाषा में गाती है, कहती है कुछ, इठलाती है देखो तो मुस्काती […]
मेरा कानपुर वाला दोस्त आज बहुत याद आ रहा है एक अर्से के बाद दिल में उसका खयाल आ रहा है हनी सिंह के गाने मेेरे कहने पर गुनगुनाता था नाराज होती थी जो तो […]
कैसी है ये दरिन्दगी? हाथरस की बेटी संग जो होता है कुकर्म उसे जनता से छुपाया जाता है.. मीडिया की आवाज को आखिर क्यों दबाया जाता है… पहुँचते हैं कुछ राजनीतिक दल राजनीतिक रोटियाँ सेंकने […]
हास्य कविता,सोना बाबू ————————- रात रात जग के हम पढ़ाई करते थे| मेरे पड़ोसी- फोन पकड़ के चुमा करते थे| आया समय जब पेपर का, वो रोया करते थे| सोना बाबू फेल हुए, बाबू लड़की […]
हर एक के लिए सुरक्षित सुनियोजित आयोजन फिर भी क्यूं हम करते रहते भविष्य का प्रबंधन दूरदर्शिता की हुईं हैं सभी को बिमारी वर्ष अंत का आरक्षण शुरू में करायी चहुंओर बंदी से हुई है […]
सुंदरता सुख तो देती है पर साथ दुख भी आता है गुलाब के फूलों के साथ कांटा स्वयं चला आता है नये आकर्षण से बंधकर मन को आराम तो आता है काम का बोझ भी […]
यह दिशा नहीं राजनीति की पीड़ित परिवार के घर जाओ यह दिशा नहीं राजनीति की रेप जैसी घटना पर राजनीतिक रोटियां सेकों यह दिशा नहीं राजनीति की घर में ही नजरबंद करो यह दिशा नहीं […]
हम उस देश के वासी हैं जहाँ तिरंगा लहराया जाता है भारत माता की जय हो’ यह नारा खूब लगाया जाता है पर अफसोस है इस बात का हमको यह कैसी है राजनीति! जब लुटे […]
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