बस-दस पंद्रह साल में, इस दुनियां के माया – जाल से, एक पीढ़ी विदा हो जाएगी अफसोस ,जुदा हो जाएगी इस पीढ़ी के लोग ही कुछ अलग हैं रात को जल्दी सोने वाले, भोर होते […]
बस-दस पंद्रह साल में, इस दुनियां के माया – जाल से, एक पीढ़ी विदा हो जाएगी अफसोस ,जुदा हो जाएगी इस पीढ़ी के लोग ही कुछ अलग हैं रात को जल्दी सोने वाले, भोर होते […]
मत हिलो देखकर दूजे की चकाचौंध को तुम जो भी है पास अपने खुश रहो, संतुष्टि पाओ। पेट भरने को भोजन और वस्त्र हों ढके तन सिर छुपाने को छोटा सा भवन हो खुश रहे […]
करो कितनी भी कोशिश आप हमसे दूर जाने की, मगर जिद है हमें भी आपको अपना बनाने की। मगर हम वो नहीं जो एकतरफा प्यार से छीनें, जबर्दस्ती करें पाने को गंदी राह अपनाएं। हमें […]
तंग आ चुके दुनियां के ताने से, उस बेचारे काने ने पत्थर की आंख लगवाली, नज़र तो फ़िर भी नहीं आया मगर दुनियां की नज़र बदल डाली ।। *****✍️गीता
दिल दरिया है तेरा तो मेरा भी कोई सरोवर नहीं। झाँक के देखो तो इन अँखियों में समन्दर मिलेगा।।
दीवानगी का आलम कुछ यूं है जिधर भी देखती हूँ मैं लगता है बस तू है कितनी भी कोशिश कर लूं मैं तुझे भूल जाने की पर मेरी तो हर साँस में मौजूद तू है…
तुम्हे याद हैं वो लम्हे जब हम साथ पढ़ा करते थे तुम्हारी कॉपी से देखकर परीक्षा में लिखा करते थे तुम मुझे कॉफी के लिए रोज़ पूंछते थे और हम मना कर दिया करते थे […]
दरख्तों से गिरते पत्ते उठा करके रोये जब भी खुल गई आँखें फिर हम ना सोये जब भी आई मेरे सामने तुम्हारी सहेली लिपट करके उससे तेरी यादों में रोये…
शिद्दत से उठाओ तुम मेरा जनाजा हम ना कहेंगे किसी से कि जिन्दा अभी हैं हम…
दुबले-पतले बापू जी ऐनक पहने बापू जी राष्ट्रपिता कहलाते सबकी नोट पे रहते बापू जी नमक आन्दोलन हो या फिर असहयोग आन्दोलन हो सबका नेतृत्व आगे बढ़कर करते बापू जी देश को किया आजाद और […]
बार-बार वही खत खोलकर पढ़ती हूँ मैं कि आखिर क्या लिखा करते थे तुम हमारे लिये उठाकर तुम्हारा खत सीने से लगा लेती हूँ जब भी कभी तुम्हारी याद आती है यूँ महसूस कर लेती […]
इरादे हम जो कर लें गर फलक से तोड़ लें तारे! तो तेरा गुरूर फिर बोल कब तलक यूं ठहरेगा…
देख प्रज्ञा! तेरी मोहब्बत में दीवाने हो बैठे हैं वो हँस रहे हैं मुझ पर जो लोग सामने बैठे हैं तुमने जो शर्माकर फेर दीं निगाहें मुझ पर आबरू की आरजू में बेआबरू हो बैठे […]
आरजू बस तुम्हारी की मगर अफसोस इतना है सब कुछ हुआ हासिल एक तुझे छोंड़कर..
सारा आलम भीगा-भीगा है तेरा आंचल क्यों फीका-फीका है लगा ले मेरे प्यार का काजल जो तेरी नजरों से भी तीखा-तीखा है…
रंगीन है तिरंगा मेरे महबूब की तरह बेरंग है ये दुनिया मेरे रकीब की तरह..
जख्म बाबस्ता है तुम्ही से और तू ही है इस दिल का मरहम बस तुझे ही मागे ये दिल तू ही है बस मेरा हमदम
तुमको हमदर्द बनाया हमने कुछ इस तरह दिल को दर्द बनाया हमने सालों रहे तेरी मोहब्बत में बिगड़े संभल गये जब धोखा खाया हमने…
दुबली-पतली कद काठी थी धोती पहनकर चलते थे आँखों में थे अनमोल सपने ऐनक लगाकर चलते थे राष्ट्रपिता थे प्यारे बापू सबकी आँख के तारे थे अंग्रेजों के छक्के छूटे जब वह सत्याग्रह पर जाते […]
लैला मजनू ने सिखाया मोहब्बत में फना होना वरना हम तो तेरे साथ जीने के ख्वाब देख रहे थे जो ख्वाब कभी पूरे हो नहीं सकते थे हम तुझसे जुदा रह नहीं सकते थे मरने […]
मुहोब्बत में इतने अश्किया न बनिये, मुहोब्बत है कोमल, संभल कर ही चलिये। मुहोब्बत हो दोनों तरफ तब नफा है, नहीं तो मुहोब्बत सजा ही सजा है।
बंदिशें कितनी लगाई गईं पहरे कितने दिये गए फिर भी ना मिट सकी मोहब्बत हीर-रांझा कितने ही चल बसे प्रगाढ़ होती गई मोहब्बत हद से बढ़ता गया जुनून जितनी तकलीफें मिली मजनुओं को सब सहते […]
खुले आसमान तले सुकून मिलता है बंद कमरे में घुटन होती है जब नींद के आगोश में होता है जहान प्रज्ञा किसी की यादों में बहुत रोती है…
हँसते-हँसते चले जाएगे जहान से हम बस एक बार तुम मुस्कुरा के मुझे देख लो आ ही जाओगे मेरी बातों में अपनी रातें सजाकर देख लो….
हँसते-हँसते चले जाएगे जहान से हम बस एक बार तुम मुस्कुरा के मुझे देख लो आ ही जाओगे मेरी बातों में अपनी रातें सजाकर देख लो….
चिंता में डूबे हुए ओ मनुज सुन चिंता न कर तू चिंता चिता है। चिंता से होता नहीं लाभ कुछ भी, होता है वो जो रब ने लिखा है। भले ही तुझे कष्ट घेरें अनेकों […]
सबसे खूबसूरत तोहफा है गुरू रब से भी पाक होता है गुरू ढूंढ लो चाहे सारी दुनिया में ना है जहान में कोई तुम-सा गुरू
गुरू से पूछा चेले ने, चलते चलते एक मेले में ऐसी पत्नी को क्या कहें, जो पति के साथ खुशी-ख़ुशी रहे ना करे कभी भी लड़ाई वो, अच्छी जिसकी लम्बाई हो सुन्दर भी सबसे ज्यादा […]
मिन्नतें खूब कर लेंगे इबादत खूब कर लेंगे तू एक बार तो सही तुझे बाँहों में भर लेंगे…
अचरज में हूं मैं न जाने कब से भारी भरकम आदमी की बोली हल्की कैसे हल्के आदमी की बातों में वजन है कैसे चींटियां आंख बिन चढ़ती दुर्गम पहाड़ों पर आंखवालों की कमर टूटती बिस्तर […]
मेरे गम में तुम शामिल , मेरी खुशियों में भी शामिल आपके साझे के बिन , खुशियां है मेरी अधूरी मेरी खुशियों में शामिल हो खुशियां कर दी मेरी पूरी हम जानते हैं ये भी […]
जो सुख-दुख में साथ देते हैं, रिश्ते बस, वे ही नहीं होते, रिश्ते तो वे भी हैं, जो अपने पन का अहसास देते है ..
शब्द हूँ भुने चने सा सूखा सा, आपकी रसना के रस में मिलकर मिठास दूँगा। कह डालो कि मैं भी आपका हूँ फिर मैं भी अपनेपन का एहसास दूँगा।
विपरीत समय है, मानवता पर संकट के बादल छाए हैं। जहां-तहां महामारी ने सबके चेहरे मुरझाए हैं। ऐसे में संयम रखना है और नहीं इससे डरना है, मुंह पर मास्क लगाए रख कर इस संक्रमण […]
वृक्षों को काट-काट कर, इति करे सब वन प्रकृति का सर्वनाश किया है, कमाने को केवल कुछ धन। दोहन कर-कर प्रकृति का भी, चैन मनुज को ना आया पशु , पक्षियों को बेघर किया है, […]
रेत सी है अपनी ज़िन्दगी रेगिस्तान है ये दुनिया, रेत सी ढलती मचलती ज़िन्दगी कभी कुछ पैरों के निशान बनाती और फिर उसे स्वयं ही मिटा देती, कांटों को आसानी से पनाह देती फूलों को […]
समन्दर का वो किनारा साथी है हमारा, जहां बैठ घंटों है वक्त हमने गुजारा, जैसे कि उनसे सदियों से नाता हो हमारा, बहुत बार तो मिलना नहीं हुआ है पर एक अनोखा रिश्ता सा कायम […]
किसी पिंजरे में कैद पंछी की तरह जैसे हमारा मन भी कैद हो गया है, सामने खुली चांदनी नजर आती है पर चार दिवारियों के बाहर नहीं निकल पाती, कुछ रस्मों की दीवारें हैं कुछ […]
मैं हिन्दी हूं भारत की भक्त हिन्दी, संस्कृत मेरी जननी जिसमें अंकित है संस्कृति, उस संस्कृति की अब मैं उत्तराधिकारणी, उद्धरित हुई मेरे संग कई और बहने भी, उर्दू, पंजाबी, गुजराती, सिंधी, कश्मीरी, हरियाणवी, गढ़वाली […]
अजीब नौटंकी लगा रखी है जमाने ने मेरी विकलांगता पर खुल के हंसते हैं और अपनी कमी को दिन रात रोते हैं; गिर पड़ी जब ठोकर खाकर पत्थर से अंधा बताकर हमे मज़े लेते रहे […]
जीवन के इस सफर में टूटी हूं कई बार, घायल होकर दर्द में तड़पी हूं कई बार, पर हर दर्द का अपना हिसाब रहा, कोई बस तन पर एक दाग बन जमा रहा, और कोई […]
सोच रही हूँ डालने को बालू समंदर में ताकि राह खुल जाये मुसाफिर की; अजीब दास्ता है ये, हो सकता नहीं ये संभव, पर है ये दुनिया असंभव को संभव करने वाली, हर सपने की […]
पूर्ण समृद्ध न तो मैं हूं और न ही कोई अन्य, सर्वज्ञ तो इस जहाँ में कोई भी नहीं, हर किसी में कुछ न कुछ रिक्तता है जैसे, किसी भी ह्रदय का ज्ञान सम्पूर्ण नहीं, […]
हैं बहुत यहाँ एक से बढ़कर एक, है काबिलों की बस्ती ये जहाँ , हैं कितने ही माहिर आये यहाँ और आकर चले गए न जाने कहाँ, कोई रहा कहाँ एक वक़्त जीकर यहाँ, हर […]
धूल, कंकड़, पत्थर, पहाड़ सबकी अपनी शान है, अपना मान है; हवा, जल, अग्नि सबकी अपनी पहचान है, कौन किससे भला समान है? समान कुछ नहीं यहां सबका बस अपना स्थान है छोटी सी झोपड़ी […]
हो चाहे कैसी भी घड़ी, आंधी तूफ़ान की लगी हो लड़ी, या मन को झुलसा रही हो अग्नि, डर हो यदि आगे हार जाने की, या फिर अपना सब खो देने की, शुरुआत जरूरी है; […]
विरोध भी करना है तो जायज कीजिये, अन्यथा विरोध की सोच गायब कीजिये। प्यार से रहना ही सर्वोत्तम है झगड़े में कौन किस से कम है।
निर्भया कितनी दफा रोई दरिंदों की पनाहों में सिसकता ही रहा यौवन वासना की बाँहों में तब तलक रूठेगा बचपन पूँछती है यही नारी मरेगी कब तलक बेटी बचेगा कब तलक अत्याचारी पुरुष की बन […]
आसमान अधूरा है सितारों के बिना ये दिल अधूरा है तेरी दोस्ती के बिना
दो पंक्तियाँ तुम पर न लिख पाऊं तो मैं भी कवि नहीं, स्वप्न तक शायरी न पहुंचाऊं तो मैं भी कवि नहीं। जब कभी मन टूट कर बिखरा हुआ हो, दर्द हो, दर्द तक मलहम […]
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