रोया हूं बहुत चादर में मुंह छुपा कर के, लायक हूं ना लायक नहीं, जो मरा नहीं किसी के प्यार में, गले में रस्सी का फंदा लगा करके| वह छोड़ दी तो कोई बड़ी बात […]

किसी भी आलोचक के लिए सबसे अहम उसका आलोचनात्मक विवेक होता है | इस गुण के बिना आलोचक कवि या काव्य की आत्मा में प्रवेश ही नहीं कर सकता है | आचार्य राम चन्द्र शुक्ल […]

#एक_लड़की_से_मैने_पुछा:- तुमने यह Artificial Ear #Rings_Locket_aur_Ring क्यों पहनी है। तुम्हारे Branded 👌🥼👕कपड़ो से तो तुम गरीब नहीं लग रही। #लड़की_बोली:- आज कल #असली गहने पहनने का जमाना नहीं, गली गली 🤺🤺चोर घुम रहे है। घरवाले […]

जब मिली रोटी किसी ने नखरा दिखाया जब मिली रोटी किसी ने भूख को मिटाया यह कैसी माया है तेरी भगवान् जब मिली रोटी किसी को तु नज़र आया।

मेरे प्रिय बापू रंग गोरा काला कहकर रंग भेद की आग जलती हैं,तबतब इस चिगांरी बुझाने को मसीहा तेरी कमी खलती हैं।तब तब आगे बढ़ने को प्रिय बापू आप मुझे प्रेरित करते हैं।। उँच नीच […]

               किसी ने कहा है कि प्रेम की कोई जात नहीं होती, कोई मजहब नहीं होता ।मगर हर किसी की समझ में कहां आती है ये बातें। कुछ लोगों के लिए समाज में इज्जत से […]

है बुद्धिदाता,बुद्धि का सबको दान करो। है चिंताहरण,संसार की सब चिंता हरो। है विघ्नहर्ता ,सृष्टि के सब विघ्न हरो। है पापहर्ता ,नर नारी के सब पाप हरो। है वक्रतुंड,निर्विघ्न सब मेरे काज करो। है सूर्यकोटि,दूर […]

पपीहे की आस जैसी खुशी बच्चे के पैदा होने पर होती हैं ,शायद उससे भी ज्यादा खुशी किसान  को बारिश होने पर होती हैं यही खुशी प्यारेलाल की आंखों में दिख रही है, आज बसंत […]

                         रोने वाले पापा                                मुकुल कितना भी गुस्सा हो ,मगर जब भी वह अपनी बेटी से मिलता हमेशा खुश और जिंदादिली दिखाता । दिनभर की उसकी सारी थकान  एक ही सेकंड में फुर हो जाती […]

                एक दर्द ,अनकहा सा साल में कितने सारे मौसम आते हैं और चले भी जाते हैं, मगर जब भी वसंत और बारिश का मौसम आता है, काव्या का वो दर्द फिर से हरा हो […]

सृष्टि कल्याण को कालकूट पिया था शिव ने, मैं भी जन्म से मृत्यु तक कालकूट ही पीती हूं।                                                    मैं स्त्री हूं।                                              (कालकूट – विष) मचा था चारों ओर घोर त्राहिमाम जब,कोई ना था […]

वो मां का हाथ पकड़कर चलना, वो दौड़कर भाई का पकड़ना। वो दादी के किस्से कहानी सुनना, वो धागे में हाथ पिरोना। वो गर्मी में नानी के घर जाना, वो मामा का गोद में उठाना […]

एक प्यारा सा सपना! है जिंदगी, तेरी जुल्फों का लटकना !है जिंदगी, तेरी आंखो का काजल! है जिंदगी, मैने कहा तू मेरी! है जिंदगी। तेरे पैरो कि पायल, हैं जिंदगी! तेरे हांथो का कंगन, है […]

मध्य प्रदेश की राजनीति का खेल बड़ा निराला था, पांच साल की सत्ता को दो वर्षो में ही मारा था। महाराज के सारे सपने एक वर्ष में टूट गए, महाराज कांग्रेस से बिल्कुल देखो रूठ […]

पहले जब होती थी मुलाकात तो अधरों पर उभरी मुसकान देती थी दिखाई आज जब मास्क लगाऐ मिले तो वही खिलखिलाहट नज़रों ने सुनाई।

शिक्षक सम संसार में हितकारी ना कोइ। सकल सृष्टि के भाग्य का एक विधाता सोइ।। कहिए द्विज, शिक्षक, गुरु या कहिए उस्ताद। परमेश्वर को पूजिए गुरु पूजन के बाद।। लेकर गुरु की चरण- रज मस्तक […]

यह इतना धैर्य तुम कहाँ से लाएं तभी तो तुम शहीद् कहलाए शस्त्र तुम्हारे हाथ में था देश के मान के लिए अडे रहे अपने बाहुबल से ही शत्रु मार गिराए तभी तो तुम शहीद् […]

बहुत कष्ट सहे जिनका गोकुल में जन्म हुआ दुष्ट के साथ कूटनीति, गीता का ज्ञान दिया ना जाने कितने असुरों ने मारने का प्रयास किया फिर भी इतिहास रचा ,धर्म और प्रेम को मान दिया […]

दोष नहीं दर्पण का थोड़ा सदा सत्य दिखलाता है। कपटी क्रूर कपूत घमण्डी दर्पण को दोषी कहता है।। सत्य असत्य के चक्कर में पत्थर से पंगा मत लेना। देख ‘विनयचंद ‘सीसा हो तुम इसको मत […]

अभी और भी तीर हैं,तरकश में तेरे बाक़ी, हार से पहले रोता क्यूं है। इस युद्ध में तेरे विरूद्ध हैं कुछ लोग, कुछ लोग तेरे साथ भी हैं,। पलकें भिगोता क्यूं है।

रंगों से ही समा बांधे जाते हैं, रंगों से ही ये ज़मीं आसमां जाने जाते हैं। जनाब पर अब तो रंग भी धर्म के नाम पर बाँट दिये जाते हैं, और ये रंग गुरूर की […]

न तुमने देखे न मैंने देखा। बहते पवन को किसने देखा? जुल्फ चुनरिया उड़ते जब जब। बहती हवाएँ समझो तब तब।। बादलों को जो चलते देखा। बहते पवन को उसने देखा।। न तुमने देखे न […]

दिल में लगा एक घाव हो गया हर प्रश्न का जवाब हो गया हमे पता ना चला शायद हमे भी उनसे लगाव हो गया ! देर तक सोते थे अब खुली आँखों का ख्वाब हो […]

हम कवियों की श्रेष्ठता का निर्णय जबसे सॉफ्टवेयर करने लगा, तब से हम इतने सुपरफास्ट हो गए, कि एक घंटे में बीस बीस कवितायें लिखने लगे, एक घंटा कहाँ हम लगातार चार पांच घंटे के […]

फिर याद आया मुझे, सावन के वो…. दो पहरी। भीग रहे थे हम दो, थी हमारे पास एक ही छतरी।। उनसे कभी चिपक जाना, फिर अलग हो जाना। हवा के झोंको से कभी, उड़ जाती […]

सुविचार:- कभी-कभी अपनी बात पर अटल रहने से झुक जाना ही अच्छा होता है। जैसे जब आँधी आती है तो बड़े पेड़ गिर जाते हैं। क्योंकि वह अपनी अकड़ में होते हैं परंतु छोटी-छोटी झाड़ियां […]

यह विपक्ष की कैसी राजनीति? अपने आप ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारते हैं। अपने नेताओं की फोटो खुद ही फाड़ते हैं और जब उनके नेता दूसरी पार्टी में जाते हैं तो ताने सरकार को […]

शीर्षक:- “जीने का लें संकल्प, आत्महत्या नहीं है विकल्प” आत्महत्या यानी खुद ही खुद की हत्या कर लेना।अपने आप ही अपने प्राण ले लेना अर्थात् आत्महत्या कर लेना उचित नहीं है। आत्महत्या एक जघन्य अपराध […]

झूठे थे वादे सभी झूठे तेरे इरादे भी लफ्ज़ भी शर्मिंदा है तुझे बयाँ कैसे करें कुत्सित तेरी सोच थी कुटिल थी फितरत तेरी लफ्ज़ भी शर्मिंदा है तुझे बयाँ कैसे करें ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति […]

मैंने तुझे जितना समझाया तू क्यों उतना बिफरता गया तुझे राह सच की दिखाई जो तू क्यों फिर भी बिगड़ता गया तुझे सुलझाने की कोशिश की तू क्यों उतना उलझता ही गया क्या वजह है […]

ज़िन्दगी खूबसूरत है इसे खुल कर जियो छोड़कर द्वेष का भाव हँस कर सबसे मिलो किसी की कष्ट न दो मुस्कराहट की वजह बनो ज़िन्दगी खूबसूरत है इसे खुल कर जियो सही कहा गया है […]

फिर हुआ नई सुबह का आगाज़ है नया दिन नयी उम्मीदों का राज है चहचहाते पंछियों की गूंजती आवाज़ है सरसराती सुबह की ठंडी बयार है उस पर पड़ती सावन की फुहार है हर तरफ […]

खुशियों को आने का मौका दो कभी तो बेवजह मुस्कुराओ यक़ीनन बहारें लौट आएँगी तुम ज़रा धीमे से खिलखिलाओ ढलती उम्र सी हर पल ये ज़िन्दगी ज़र्रा ज़र्रा हाथ से फिसलती है ज़िन्दगी सोचते क्यों […]

वो सब्र का पाठ तो पढ़ाते थे बेसब्र ना हो,सब ठीक होगा ! फिर इम्तिहानों के दलदल में खुद बेसब्र हो,अकेला छोड़ जाते थे! हालातों से लड़ते हम वहीँ के वहीँ रह जाते थे! वो […]

खौफ खातीं है सर्द मौसम की हवाएं भी मुझसे सीने में दहकते सूरज सी जिंदादिली रखती हूँ हौसला परवान पर है उम्र हारी है ढलती उम्र है तो क्या जज़्बा ज़िन्दगी जीने का, खुद के […]

गहनता से लिख रही हूँ मैं लफ्ज़ कम लगते हैं गर लिखने बैठो ज़िन्दगी की किताब चंद लम्हे फुर्सत मिली बाकी रहा ज़िम्मेदारियों का दबाव यादों को तक सँजो ना सके रखते रहे पल पल […]

हर रोज़ पहुँच जाती हूँ उस श्वेत निर्मल घरोंदे में न जाने किस जन्म की कहानी शायद कैद है उन दीवारों में जहाँ पहुँच कर अतीत के पन्ने करवटों की तरह बदलते है शीतल पवन […]

ना…री तू बिलखना नहीं किसी सहारे को अब तरसना नहीं तू स्वयंसिद्ध और बलवान है नहीं महत्वहीन तू खुद सबकी पहचान है सशक्त है तू नाहक ही छवि तेरी कमज़ोर है पर तेरे जोश का […]