मुश्किलें किसके जीवन में नहीं आतीं ये दृढ़ता से समझना होगा खुद की कोशिश नाकाम नहीं होतीं विजय पथ पर खुद अग्रसर होना होगा जब कोई अपने हिसाब से लड़ता जाता है कुछ बेख़ौफ़ बढ़ते […]

वो प्रीत के मनोरम स्वर्णिम पल दफ़न क्यों हुए चारदीवारी में, वो जुड़ रही थी या टूट रही थी जलते से या बुझते अरमानों में, वो प्रेम या वेदना के पल कहूं या तार तार […]

डर का वजूद कुछ नहीं ये स्वयं जनित मनोभाव है आसन्न खतरे की चिंता से उत्पन्न भय निराशावाद है एक अंतहीन भ्रम की स्थिति हक़ीक़त के धरातल पर भय का ना कोई ओर छोर है […]

दो दिल जुड़ते हैं जब सच्चाई से चंचलता निरंतर जवान होती हैं किसी से प्यार हो जाना बेहद सुखद अनुभूति हैं खुशनुमा अहसासों में डूबकर कल्पनाएँ सोती हैं आलिंगन किये रहते हैं उमड़ते जज़्बात हर […]

कानून के दहलीज़ पर पहुँचने से पहिले मारा गया कानून के रक्षक का हत्यारा। कोई तो बतलाओआखिर कब तक जिन्दा रहेगा बाँकी कानून का हत्यारा।।

बेशक जहरीले होते हैं फिर भी इनकी होती अर्चन। कालव्याल से कालक्षेप हित करते हम सब वन्दन।। ऐसा धर्म सनातन अपना जिसका न कोई शानी है। ‘विनयचंद ‘ संग सारी दुनिया दिल से ये सब […]

जटिल है किसी को पूर्णतः समझना  अस्थिरता रहती है सबके जीवन में क्यों मानक तय करना किसी के लिए गुज़रता है हर कोई अलग संघर्षों से हर शख्स में दो किरदार जीवित हैं  अपनी सच्चाई […]

गुरुवर तव चरणन में, है तीन लोक राजित। जिसने लिया सहारा, वो खुशियों में विराजित।। लाखों कमल है जग, तव चरण कमल आगे। दिल में बसा ‘विनयचंद ‘ बन जाओगे बड़भागे।।

कवियों की तो बात ही कुछ और है | सोच की उनका नहीं कोई ठौर है, मन की गति उनकी , प्रकाश से भी तेज़ है| दुनिया में उनसे आगे , नहीं कोई विशेष है […]

( दुनियां ) एक सोच में डूबी हूँ क्या करूँ और किस काम को छोड़ दूं…. महाकाल , भयावह काल , कोरोना काल का यह समय किस तरफ़ मोड़ दूँ….. समय माँगे जा रहा है […]

योग के अलौकिक गुणों के माध्यम से कोरोना को दें मात रोगी के शरीर को योग के माध्यम से धीरे धीरे रोग मुक्त कर दें उसे हम योग कहते हैं योग के कई परिभाषा हैं। […]

कैसे कहूँ, किससे कहूं कि हाल ए दिल क्या है, रोना अकेले ही है अंजाम ए बयान क्या है। जब तक खुश रहती हूँ, लोगों की हंसी सुनाई देती है। जब दुखी होती हूँ बस […]

1971 में जब इन्दिरा गाँधी जी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े किये थे। तब चीन मुँह ताकता रह गया था। उफ़ तक ना निकली थी मुँह से और अमेरिका, रूस जैसे देश चूँ तक ना […]

जिस तरह अंग्रजों के सामान को और उन्हें बहिष्कृत किया था। उसी प्रकार चीनी सामान को अपने जीवन से दूर करो। और आत्मनिर्भर बनो। अपनी दैनिक आवश्यकताओं का सामान खुद ही देश में बनाओ।

शहीदों की सूची में पंजाबियों का नाम है अव्वल। आज भी चार सिंघों ने देकर शहादत काम किया है अव्वल।। प्रणाम करो ऐ ‘विनयचंद ‘ बार बार बन हम्बल।

आप एक बार अपने नियमों में बदलाव कीजिये । दुश्मन पर वार करने का फैसला, सेना के विवेक पर छोड़िए। उसे पाकिस्तान की तरह आजाद कर दीजिये। 🙏🙏🙏आपसे अनुरोध है इसमें राजनीति मत कीजिये।

अपनी राजनीति को सुरक्षाबल से दूर रखो राजनीति हर जगह करो पर सैनिकों को इससे दूर रखो। जब हमारी सेना राजनीति से दूरियाँ बनाये तो भारत सरकार तुम भी अपने कदमों को सेना से दूर […]

जिनके नाम से दुश्मन थर थर कांपा करते है बलिदान हुए वीर जवानो को हम सब नमन करते है ये सच्चे देश भक्त है ऐसे नहीं जायेंगे दुश्मनो को अपनी रूह से भी हराएंगे देश […]

शहीद कुन्दन ओझा तुम शहीद हो गए। सारे भारत में देशभक्ति के बीज बो गए।। सारे झारखंड संग बिहार भी सलाम कर रहा। ‘विनयचंद ‘ऐसे ब्राह्मण पूत पर गुमान कर रहा।। कुन्दन ओझा का बलिदान […]

कुन्दन था मेरा कुन्दन यादव कुन्दन बन के बीच सितारों में। फिर गहना बन निकलोगे तुम खालिस हो कर अंगारों में।। तेरी शहादत अमर रहेगी हर बच्चा बच्चा गाएगा। गान तुम्हारे नाम का ये ‘विनयचंद […]

जब वो पेदा होती है तो, हर कीसी के दिमाग में उदासी छा जाती है, बाप के सिर का बोझ भी कहीं जाती है, लेकिन उसी बाप के सिर का ताज बन जाती है, अपनों […]

हर कविता को ‘नाइस’, ‘गुड’ कहकर झूठी तारीफ़ कहने की वजाए हम सही मूल्यांकन करे तो बेहतर होगा. तभी हम सब अपनी कविता में कुछ बेहतर कर सकेंगे. आप लोगों के क्या कहना है?

एक दिन रस्ते पर मिले दो नौजवान मैंने पूछा दोनो से क्या है आपका शुभ नाम पहला बोला मेरा नाम है सच सब सोचते मैं हूँ ढीठा दूसरा बोलै मेरा नाम है झूठ दुसरो से […]

की विनती थी भीमसेन ने प्रभु वेद व्यास के चरणों में। उपवास एकादशी करते हैं रख प्रीत सभी हरि चरणों में।। वृक अग्नि नित जलती है पितामह मेरे पेट के भीतर। शांत न होती तबतक […]

मैं गुजारिश करता हूं तुझसे तू सामने नहीं आ सकती पर ख्वाबों में आ मेरे दर्द खुद एक और मेरे दर्द पर मेरे घाव पर एक मरहम की पट्टी तो लगा मैं गुजारिश करता हूं […]

मैं गुजारिश करता हूं तुझसे तू सामने नहीं आ सकती पर ख्वाबों में आ मेरे दर्द खुद एक और मेरे दर्द पर मेरे घाव पर एक मरहम की पट्टी तो लगा मैं गुजारिश करता हूं […]

जो नारी 9 महीने पेट में पालती है उसी को सब गाली क्यों देते हैं जिसकी वह पूजा करनी चाहिए सर पर बिठाना चाहिए उसे लोग पैरों की जूती क्यों समझते हैं यह विडंबना है […]

सच सभी जानते हैं क्या है बस तेरी ही आंखों पर पट्टी बंधी है क्योंकि तूने जो अहंकार की पट्टी अपनी आंखों पर बचपन से बांध रखी है वह कभी हटाने की कोशिश ही नहीं […]

सच सभी जानते हैं क्या है बस तेरी ही आंखों पर पट्टी बंधी है क्योंकि तूने जो अहंकार की पट्टी अपनी आंखों पर बचपन से बांध रखी है वह कभी हटाने की कोशिश ही नहीं […]

बहुत मशरूफ है हम अपनी जिंदगी में पर कभी-कभी वक्त निकाल लेते हैं तुम्हारे लिए तुम्हारे पास भी थोड़ा समय हो हमारे लिए तो हमारे दिल की धड़कनों को कभी कान लगाकर सुनो तो वह […]

गाय की सेवा करना हमारा परम कर्तव्य है उसमें हजारों देवताओं का वास होता है और गाय का मांस खाना बहुत ही बड़ा पाप है तो गाय की सेवा करें क्योंकि वही है जो बिना […]