मेरा साया
May 29, 2021 in शेर-ओ-शायरी
तू ऐसा रम गया मन में
ना कुछ अब तो पराया है,
मैं तेरी रूह जैसी हूँ और
तू मेरा साया है।
by Pragya
May 29, 2021 in शेर-ओ-शायरी
तू ऐसा रम गया मन में
ना कुछ अब तो पराया है,
मैं तेरी रूह जैसी हूँ और
तू मेरा साया है।
by Pragya
May 29, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
तू जर्रों की तरह उड़कर
मेरी सांसों में मिलता है
ये मन योगी हुआ
तन भस्म देखो मलता रहता है
अन्तस में दिये जलते
रोशनी आसमां तक हो
पुष्प जोगी बने फिरते
कहो फिर इश्क कैसे हो !!
by Pragya
May 29, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
जाने कहां और
कितनी दूर चली,
चलकर हिमालय की
पर्वत श्रृंखला में पहुंच गई
वहां पड़े पारस पत्थर को उठाया अर्ध निंद्रा में ही थी-
सरोवर में बहते सुंदर
नीले जल पर
कमल की पंखुड़ियों से लिख दिया “वह सिर्फ मेरा है”
तभी फोन की घंटी बजी और आंख खुल गई….
मुझे सब याद था,
वह हिमालय, वह सरोवर और पारस पत्थर।।
Comments Off on वह सरोवर और पारस पत्थर
by Pragya
May 29, 2021 in शेर-ओ-शायरी
कभी झांक कर देख मेरी नजरों में
हो जाएगा तू दीवाना।
एक बार दिल में आकर तो देख
आ तुझे मैं लबों से छू लूं
तू कभी मेरा गीत बन कर तो देख।
by Pragya
May 29, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
मोहब्बत के सफर में एक नया
आगाज़ कर देना
मैं तुझसे दूर गर जाऊं
तो फिर आवाज दे देना
मैं लिखती हूं तुझे हर रोज
अपने दिल के पन्नों पर
कभी फुर्सत मिले तो
उन गीतों को तुम गुनगुना देना।।
Comments Off on तो फिर आवाज दे देना
by Pragya
May 29, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
कागजी प्रेम,कागज़ के
कुछ पन्नों तक ही सिमट कर रह जाता है।
कुछ आंशिक शब्दों से
शुरू होकर,
आंशिक ही रह जाता है।
विश्वास की डोर बड़ी
कच्ची होती है
प्रेम की मिठास बस
जिस्म तक होती है
रूह तक एहसास ना पहुँच कर
जिस्मानी ही रह जाता है
कागजी प्रेम,
कागज के कुछ पन्नों तक ही सिमट कर रह जाता है।
by Pragya
May 29, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
आसमानी रंग में
अब तो रंगी दुनिया
नेह के दीपक तले
जल रही तनहाईयाँ
दूधिया रोशनी में सज रहा प्रियतम
मेरी चुनरी ओढ़ कर
पवन ले रही अंगड़ाइयां
बारिश की बूंदों से
दिल की सज रही महफिल
अश्क तकिए पर पड़े हैं
मुस्कुरा रही हैं दह की उर्मियाँ।।
by Pragya
May 28, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
आकाश की बाहों में
चुप जाने को जी चाहता है
सूरज की गर्मी में तप जाने को
जी चाहता है
रात की दहलीज़ पर
नंगे पांव रखकर
चांद की चांदनी में नहाने को
जी चाहता है
शराब की बोतल में
बन्द कर दूं सारे जख्म
आज खुशगवार हो जाने को जी चाहता है।
by Pragya
May 28, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
अभिनय की इस परंपरा को
मैंने अब तक खूब निभाया
दिल के आंसू छुपा लिया और
झूठी मुस्कान से सब को रिझाया
बात बना ली, जख्म छुपाए
रात-रात भर नींद ना आए
चंदा से आंख मिचोली करके
खेल-खेल में उसे हराया।।
by Pragya
May 28, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
सुबक-सुबक कर निकल रहे हैं
गम के आंसू ढलक रहे हैं
कुछ गालों से रेंग रेंग कर
कवि के मन को भिगा रहे हैं
कुछ आंचल के छोटे टुकड़े में
अपने अस्तित्व को छुपा रहे हैं
कुछ गालों पर ढुलक रहे हैं
कुछ कंठ के नीचे तक जा रहे हैं
क्या किसी ने इनका
अपमान किया है ?
या अपनों ने अनजान किया है ?
या समय की बलिवेदी पर चढ़कर
सब ने अपना मुंह फेर लिया है !
क्या बीता इस बेचारी पर,
जो जीवित ही बेजान किया है !!
by Pragya
May 28, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
इन बूढ़ी-सी झुर्रियों में
जाने कितने राज़ हैं
नजरों को है इंतजार और
जाने कितने ख्वाब है
उम्र की दहलीज पर
बैठा तन का मेमना
बूंद आंखों में छुपी है
ह्रदय में जाने कितनी बरसात हैं
तन जला और मन जला है
जिंदगी के कोयले में
भाप बन कर उठ रहे हैं
यह दिलों के आगाज हैं।।
by Pragya
May 28, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
कुछ राहतों की बात हो
कुछ चाहतों की बात हो
आओ सपनों में रंग भरे
कुछ रंगतों की बात हो
आभार करें ईश्वर का हम
कुछ मन्नतों की बात हो
आज भूल जायें हम सारा जहान
कुछ तेरी मेरी बात हो।।
by Pragya
May 28, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
चल देते हैं दिल को राहतें
करते हैं कुछ मनमर्जियां
सपनों को लगा दे पंख
जी ले अपनी जिंदगी
ना करें दुनिया की फिक्र
हो जाए थोड़ा बेशर्म
जो भी सवारे सपनों को
दे दें उसको अपना मन।
by Pragya
May 28, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
जो चेहरे से नहीं होती
मोहब्बत किससे होती है ?
जो आंखों से नहीं होती
मोहब्बत किससे होती है ?
दिल तो आजकल बिकते हैं
सरेआम बाजारों में,
अगर दिल से नहीं होती
मोहब्बत किससे होती है??
by Pragya
May 27, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
रात किसकी मोहब्बत में
भला सारी रात जगती है
उसे किससे मोहब्बत
जो ना पलकों को झपकती
चांद को बंद करके मुट्ठी में
पूँछ लूंगी आसमान से
रात क्या दिन से मिलने खातिर ही
सारी रात तड़पती है।।
by Pragya
May 27, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
आपकी यादों में अक्सर
सुबह से शाम होती है
ना अब दिन ही गुजरते हैं
ना अब तो रात होती है
खुदा भी सामने मुझसे
कभी मिलने को आ जाए
बता देंगे उसे भी हम
इबादत किसकी होती है ??
by Pragya
May 27, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
मेरी मुस्कान में कुछ राज हैं
जो राज रहते हैं
वो मेरे हैं आजकल ये
भरे बाजार में कहते हैं
मेरे महबूब में दिखते हैं
मुझको देवता सारे
मुझको दोस्त मेरे
आजकल बीमार कहते हैं।।
by Pragya
May 27, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
ये हमदर्दी की बातें
बस किताबों में ही दिखती हैं
मोहब्बत तो आजकल यार
बाजारों में बिकती है
भरोसा किस पर करें और
प्यार भी किससे करें आखिर
आजकल तो दिल की दुनिया
महज अपनों से लुटती है।।
by Pragya
May 27, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
मैं तेरा ख्वाब हूं
तू मेरा ख्वाब है
मैं तेरा जुनून हूं
तू मेरा रूआब है
तेरी साँसों की खुशबू से
तुझे पहचान लेती हूँ
मैं तेरी गज़ल हूँ
तू मेरे दिल का साज है।।
Comments Off on मैं तेरी ग़ज़ल हूं
by Pragya
May 27, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
जुनून है तेरे दिल में हम तो
अपना घर बनाएंगे
तुझ में डूब जाएंगे तुझी में खो जाएंगे
करे कोशिश अगर जुदा करने की हमें कोई
तुझसे बिछड़ के हम तो तय है मर ही जाएंगे।
Comments Off on ये तय है
by Pragya
May 26, 2021 in अवधी
अवध में बाजे चहुँ ओर बधइया।
राजा दशरथ के भवन में
जन्म लियो चारों भैया
ब्रह्मा, विष्णु, शंकर नाचत
धन्य कौशल्या मैया
अवध में बाजे चहुँ ओर बधइया।
भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न
राम के छोटे-छोटे भईया
अवध में बाजे चहुँ ओर बधइया।
अवध की प्रजा बहुत ही हर्षित
रिझि-रिझि लेत बलइया
अवध में बाजे चहुँ ओर बधइया।।
by Pragya
May 26, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
अंतरनाद हो रहा देखो
प्रकृति में चहुं ओर
नित नवीन गुंजन उठे
बादल उठे घनघोर
ढोल मृदंग बज रहे सब
अप्सराएं भी गुणगान करें
राम ने अवध में जन्म लिया
हर्षित है पूरा लोक।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
काश ! हम सीख पाते तुमसे
साहित्य की कुछ नवीन विधाएं
पर ना जाने कहां तुम खो गई
ओ सखी! तुम कहां चली गई
यूँ तो उम्र में तुम मुझसे
बहुत बड़ी हो
पर हमारा रिश्ता तो दोस्ती का है ना
काश! तुम समझ जाती
कि मैं तुम्हें कितना प्यार करती हूँ
हर रोज तुम्हारा इंतजार करती हूँ तुम्हारी कविताओं को पढ़ कर
हँस देती हूँ,
और उन जज्बातों में थोड़ा जी लेती हूँ।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
तुम्हारे होठों पर वो लफ़्ज़
कभी ना आए
जो हम सुनने के लिए बेकरार रहे
मिलने तो रोज आते रहे तुम
पर दिल के जज्बात
कभी ना कहे
देने को रोज
लाते रहे गुलाब तुम
पर हमेशा पीठ के
पीछे छुपाते रहे,
कहा नहीं जो कहना था मुझसे
बस यूं ही उम्र भर पछताते रहे।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
तुम्हारा सहयोग,
तुम्हारा प्रेम पाकर
मैं कृतार्थ हुई
मैं तुम्हारे सहयोग की आभारी हूं
तुम्हारा सहयोग,
तुम्हारी संवेदनाएं,
तुम्हारी भावनाएं
तुम्हारे लफ्जों में यूं ही
बलवती होती रहे
मैं तुम्हारा सम्मान करूंगी
तुम्हारे मन में भी
मेरे सम्मान की बातें चलती रहे
जब तुम मेरा हर कदम पर
साथ दोगे
तो भला मैं पीछे कैसे रहूंगी
तुम्हारी अर्धांगिनी हूं मैं
तुम्हारे हर सुख दुख में
तुम्हारा साथ दूंगी।।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
कोरोना की तीसरी लहर के लिए
आदित्यनाथ योगी हैं तैयार
अबकी बार कोरोना का
बच्चों पर है वार
बच्चों पर है वार,
कैसे जान बचेगी
बच्चे इतने कोमल हैं
कैसे सरकार उनका ध्यान रखेगी
कहती है यूपी सरकार
आक्सीजन के लिए है आत्मनिर्भर
वैक्सीनेश प्रक्रिया भी
अब है अपने चरम पर
प्रार्थना है ईश्वर से
सफल हो यूपी सरकार
अबकी बार कोरोना का
बच्चों पर है वार।।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
किसी की आंखों को
दो जीवन ज्योति
किसी के जीवन में
भरो रोशनी
कोई तो हो जो
तुम्हारे जाने के बाद भी
तुम्हारी आँखों से
यह दुनिया देख पाए
बुझे चिरागों को दो रोशनी
मिटा दो जीवन का तम
मानव होकर मानवता दिखलाओ
नेत्रदान करने का लो प्रण।।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
कैसे दिन आये हैं!
नौकरी की बात करो तो
उज्जवला योजना गिनवाते हैं
बेरोजगारी का मुद्दा उठाओ तो आत्मनिर्भर का पाठ पढ़ाते हैं
इतना पढ़ लिख कर यदि
पकौड़े तलना था
तो आखिर हमने क्यों
दिन रात किताबों को सीने से लगाया
आत्म निर्भर ही बनना था तो
क्यों मां बाप ने पढ़ाया
हम भी तो अपने मां बाप का व्यवसाय चुन सकते थे
उनकी गरीबी में उनका हाथ बटा सकते थे
सोचा था मां बाप ने
बेटा पढ़ लिख कर बनेगा अफ़सर तभी तो तूने खूब पढ़ाया
खेतों में मेहनत कर कर कर
अब बैठा है घर में बेटा
परचून की दुकान लगाकर
बाप की छाती फटे और
बेटा बन गया आत्मनिर्भर।।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
कल तक गुंजाइश थी
तुम्हें माफ कर देने की
आज ना रही
कल अगर तुम
अपने सर को झुका लेते
तो आज मेरे दिल में
जगह भी पा लेते
पर अब हमारा रिश्ता
माफी से बहुत दूर जा चुका है
सच कहूं,
तो मेरे दिल में
कोई और घर बना चुका है
बहुत रुलाया, तड़पाया तुमने मुझे
बहुत ढाये सितम
अब मुझ में ताकत ना रही
भुला दिया
मैने तेरा दिया हुआ हर गम।।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
तुम्हें याद है वो मंजर
जब हम तुमसे मिला करते थे
तुम्हारे हाथों में हाथ रखकर
अपने दिल की हर बात कहा करते थे
तुम रोज सोचते थे कि
बता दोगे मुझे
अपने दिल की बात और हम भी तुमसे वह लफज सुनने के लिए बेकरार रहते थे
तुम आते थे गुलाब का फूल
अपने हाथों में लेकर,
मुझे देखते ही उसे छुपा देते थे कहना कुछ चाहते थे और
कह कुछ जाते थे,
फिर निराश होकर तुम चले जाते थे।
मैं भी तुम्हारे इस भोलेपन पर
हंस देती थी,
सोचती थी कि शायद कल
बोल दोगे अपने दिल की बात
पर तुम कभी ना कह पाये
दिल में ही छुपाये रहे जज्बात
तुम्हें याद तो है ना वह मंजर..!!!
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
आज तुम्हारे साथ
कुछ वक्त बिताने को जी चाहता है हां, तुम्हारी याद
बहुत जोरों से आ रही है
क्या है तुम्हारे पास वक्त मेरे लिए ?
अगर है,
तो आ जाओ वहीं
जहां हम रोज मिला करते थे,
कॉलेज खत्म होने के बाद
जहां आ जाया करते थे
वह बूढ़ा बरगद
आज फिर
हमारे इंतजार का तलबगार है।
आज फिर मेरे पास
आकर कुछ देर बैठो,
अपनी जिंदगी की कुछ सच्चाई मुझसे बया करो और
मुझसे कुछ सुनो।
क्यों ना फिर हम
पहले जैसे दोस्त हो जाए
काश! हमारी मुलाकात हो और
वह पल वहीं पर थम जाए।।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
अपनी दूरदर्शिता से
मैं देख पा रही हूं
अंधी हूं मगर
सपने देखती जा रही हूं
देखती हूं यह सपना
की एक दिन देखूंगी मैं दुनिया
फूल चुनूगी चमन से
बिखरा दूंगी कलियां
कोई तो होगा
जो मेरे जीवन में भरेगा ज्योति
कल सुबह देखूंगी दुनिया
यही स्वप्न लेकर हूँ सोती।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
निस दिन गिरता जाए
मानव देखो यार
बातें मुंह पर मीठी करें
पीठ पीछे गरियाए
घोल के शर्बत जहर का
पीने को देता है
इतना छल है संसार में
मानव धोखे देता है।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
कृषक हमारा दुखी है
फसल नहीं हो पाई
पानी दिया था, बीज बोए थे,
की थी खूब रोपाई
फिर भी ना उपजा अन्न
आया ऐसा मानसून
बाढ़ में सारी फसल हुई बर्बाद
रोटी भी ना हो पाई दो जून
क्या खुद खाते, क्या बच्चों को खिलाते
प्रश्न यही था
मस्तिष्क में घूम रहा
नहीं उत्तर कोई सूझा
बस एक ही चढ़ा जुनून
मार दिया हमने खुद को
कर दिया हालात के आगे समर्पण
करते भी तो क्या करते
जब जीवन में थी इतनी अर्चन।।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
रोज रोज बढ़ते रहे
मंजिल की ओर कदम
निस दिन किया प्रयास फिर
कैसे गिनते दिन
कैसे गिनते दिन
जब परीक्षा सिर पर थी
प्रण कर लिया था
आगे बढ़ने का,
ऐसी ही जिद थी
हुई परीक्षा आया परिणाम
पाया हमने सबका मान ।।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
वृक्षारोपण कर रहे
अब देखो कितने लोग
जब प्रकृति ने दिखला दिया
है अपना रोष
पहले ही सचेत होते तो
ना लगाने पड़ते ऑक्सीजन वाले वृक्ष
अब एकदम कैसे उग आये
धरती पर कल्पवृक्ष ।।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
राजनीति की बात कर
राजनीति के लोग
राजनीति ही कर रहे
राजनीति के लोग
राजनीति के गुरु रहे
वंशीधर श्री कृष्ण
जिन्होंने से खिला दिया
रहना प्रेम से सब हिल मिल।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
अद्भुत दुनिया की रीत है
अद्भुत है संसार
अद्भुत रिश्ते नाते हैं
अद्भुत नदी की धार
अद्भुत सुंदर पुष्प है
अद्भुत पर्वत श्रृंखला
अद्भुत धरती आसमां
अद्भुत है श्रृंगार।।
by Pragya
May 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
लुटा हुआ सँसार जब
देखे है रानी गुड़िया
सिसक सिसक रह जाती है
मन ही मन ढलकाती
आँसू के अंगारे
कैसी विपदा आन पड़ी
जो बिछड़ गए माँ बाप
प्रेम ही अब तो हो गया
जीवन का अभिशाप।
by Pragya
May 24, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
सुंदर सपनों के आंगन में
बैठा है चितचोर
मन का मयूर नाचता
प्रेम की चुनर ओढ़
प्रेम की चुनर उड़ के
छम छम नाचे मयूरा
अंग-अंग भीगे ऐसे
सावन में मोरा।
by Pragya
May 24, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
ये शारीरिक महामारी है या
मानसिक महामारी?
मुझे तो ये लगता है कि
ये है आर्थिक महामारी
कोई कहे अदृश्य इसे तो
कोई बोले दृश्य
इस महामारी ने लूट लिये
चलते फिरते मनुष्य
कैसे घर में बैठे सब हैं
रोटी को हैं लाले
किसी गरीब से जाकर पूँछो
उसने कैसे बच्चे पाले!
जूझ रहे आर्थिक तंगी से
जाने कितने परिवार
हाय! ये कैसी महामारी आई दुखी हुआ संसार।।
by Pragya
May 24, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
हे प्रभु इतना दे मुझे,
ना फैलें किसी के आगे हाथ
देने को आतुर रहें
हर मानव का साथ,
हर मानव का साथ मैं दूं
आगे बढ़-चढ़कर
निस्सहाय की सहायता करूं
मैं हँस हँस कर
जो मांगे मेरी रोटी तो
दे दूँ थाली
भले ही मेरा पेट रहे बिल्कुल खाली।।
by Pragya
May 24, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
मातृत्व सुख
जीवन का सबसे अनमोल
उपहार है
जब नवजात शिशु
अपनी नन्हीं- नन्ही उंगलियों से
मां को स्पर्श करता है
ऐसा आभास होता है कि
गुलाब की सुंदर पंखुडियां
स्नेह से तन को
सहला रही हैं
अपनी नन्ही-सी आँखों में
वो ढेर सारे सपने सजाए होता है
माँ को अपने आगमन से
परिपूर्ण कर देता है
मां का हृदय वात्सल्य से भर जाता है।जब भी वह अपने
बच्चे को नजर भर के देख
लेती है ।
by Pragya
May 24, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
मेरे वजूद को धिक्कार कर
मेरे जहन ने
कुछ लकीरें खींची
और कहने लगीं
बढ़ चल उस सफ़र पर
जो तेरी यादों में
कब से जाग रही हैं
रेशमी धागों से बुन ले स्वप्न
और डूब जा
उन स्वप्नों के सुन्दर स्वर्ग में
भूल जा अपने मन के
छालों को,
लगा दे नेह का शीतल मरहम।।
by Pragya
May 24, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
अकिंचन ही कर्तव्य पथ पर
बढ़ते गए कदम
सुध नहीं थी किस ओर
गए कदम
रास्ते में मिले अनेक राहगीर
कुछ बने मित्र
कुछ बने हमदर्द
कुछ बन गए राहगीर
जीवन के इस सफ़र को
और भी खूबसूरत बनाया
उन सभी का शुक्रिया।।
by Pragya
May 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
किसी को मोहब्बत का नशा है
किसी को दौलत का नशा है
किसी को वर्चस्व का नशा है
किसी को दारू का नशा है
किसी को शोहरत का नशा है
किसी को वफा का नशा है
हमें किसी का नहीं बस
कलम का नशा है।
by Pragya
May 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
गौ रक्षा को
उठ रहे
मानव के दो हाथ
गौ माता की पूजा कर
यह है जन्नत की सौगात
मानव कुल में जन्म लिया तो
जीवों से कर प्रेम
गौ माता में दिख रहे हैं
लाखों देव
उसकी पूजा करने से
मिटते सारे पाप
स्वर्ग की प्राप्ति हो जाती है
मिटते हर संताप।
by Pragya
May 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
हे ईश्वर!
कृपा कर
अपने बनाये इंसानो की
रक्षा कर
मत फैला ऐसी जानलेवा बीमारी
जिससे होता जा रहा
प्रकृति का हनन
मानव का क्षरण
रोंक मरते मानवों को
बचा ले प्राण,
ऐसे ना कर घरों की बर्बादी
बचा ले दुनिया की आबादी।
by Pragya
May 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
मेरी हर कविता
तुम्हारे ऊपर निशाना नहीं होती
कभी किसी तथ्य पर होती है
कभी किसी प्रश्न पर होती है
कभी होती है कल्पना
कभी किसी की अल्पना
कभी तुम्हारे प्रश्नों के उत्तर
कभी होती किसी की नाराजगी
कभी प्रेम का आधार
कविता है जीवन का आधार।।
by Pragya
May 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता
तुमसे नफरत हम नहीं करते
तुमसे ईर्ष्या भी नहीं करते
तुम्हारे कारण ही तो लिख पाते हैं
अंदर से प्रेरित हो पाते हैं
साहित्य साधना को बढ़ रहे हैं
तुम्हारे दिखाए रास्ते पर ही चल रहे हैं
पुरानी बातों को हमने कब का भुला दिया
तुम्हारे रास्ते को ही अपना लिया
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