तुम्हें आज मैं कथा – सार यहाँ सुनाने आया हूँ तुमको शुकदेव –परीक्षित का संवाद बताने आया हूँ इंद्रिय शक्ति अगर चाहो तो इन्द्र पूजन करो ब्रह्म – तेज की चाह अगर हो वृहस्पति- कृपा […]

हर राह मुश्किल होती है, हर मोड़ पे कठिनाइयां मिलती है, फिर भी पत्थरों से टकराती, हर बाधा को ध्वस्त करती, धारा बहती है, जितने की ज़िद हमें आगे बढ़ने की हिम्मत देती है, जीतना […]

कुछ थकी थकी सी, कुछ रुकी रुकी सी हो गई है ज़िंदगी, जी रहे हम सब यहां, पर जीवन से कहीं दूर हो गई है जिंदगी, क्यूं हम खुद के प्रतिद्वंदी हो गए है, क्यूं […]

तुमको सुलाने की खातर कितनी रात मेरी काली रही, मुझे ठीक से याद नहीं के देखकर तुम्हें बेखयाली रही, बातें करती रहीं तुम मुझसे यूँही सपनों की दुनियां में, सुबह जब तुमने मुझे देखा आँखें […]

मुझको यूँ कुचलने पर तुम्हें वो समन्दर नहीं मिलेगा, तुम्हारी आँखों को जो चाहोगे वो मंज़र नहीं मिलेगा, बड़ी बेरहमी से मुझे रास्तों पर छोड़कर जाने वालों, तुम्हें ढूंढने से भी इस जहां में कोई […]

गुनाह तो कोई ज़रूर बहुत ही बड़ा कर रहा हूँ मैं, सबकी नज़रों से होकर पल- पल गुज़र रहा हूँ मैं, रास्ते ठहरे हैं मगर जाने क्यों चलते नज़र आते हैं, जिस पल से ज़िन्दगी […]

जलाकर रख दिए ख़त मगर यादों को अग्नि दगा दे गई, मुट्ठी में दबाकर रखी थी मगर खुशबू को हवा उड़ा ले गई, बेबाक यूँही नशे में गुज़र रही थी लडखड़ाती हुई ज़िन्दगी, आई एक […]

जिनको देनी हैं वो हमको दुआयें देंगे, बेवफाई के बदले भी हमको वफायें देंगे, हम गुनाह कुबूल कर बैठेंगे उनके आगे, पर वो जब भी देंगे हमको सजायें देंगे, घुप्प अँधेरे में दूर तक नहीं […]

न चाह कर भी बहुत कुछ कह जाना पड़ता है, हो रूठना तो पहले किसी को मनाना पड़ता है, मुस्कुराते सबको नज़र आते हैं क्या कहें वो, जिन फूलों को काँटों संग रह जाना पड़ता […]

सावन की पहली बारिश जब तपती सूखी सी धरती को, पहली बूंदों से छू लेती , तब लगता जैसे हंसती हो कमसिन सी नार अकेले में । साड़ी में लिपटी सोई हुई , जैसे चटक- […]

आजाद हिंद के आज आजाद हैं हम, खुला आसमां है आज हमारे सर पर, नहीं किसी की हुकूमत है हम पर, उन्मुक्त गगन के आज आजाद पंछी हैं हम, श्रेय इसका है उन वीर सपूतों […]

मैं तो खुली किताब हूँ, यूँ भी कभी पढ़ा करो। अच्छा लगता है, बेवजह भी कभी लड़ा करो। मेरे कदम तेरी ओर उठते, तुझपे ही रूकते हैं, एक कदम मेरी ओर, तुम भी कभी बढ़ा […]

आरक्षण बनाम वोटों की राजनीति __________________________ आरक्षण उन लोगो के लिये था जो पढना चाहते हैँ पर पैसे से लाचार है। लेकिन अपने निजी स्वार्थ व वोटो के राजनीति के चलते नेताओ ने इसे जातिवाद […]

एक-एक मोती से एक, फिर माला बन जाएगी धीरे धीरे करो पहल तो क्रांति देश में आएगी। याद करोगे बलिदानों को , देशभक्ति जागेगी। आग हृदय में बुझ गई जो फिर अंगारे बना दो। देशवासियों […]

अनहोनी यह कैसी है ! काली छाया जैसी है। हंसते हुए फूल से चेहरे , मुरझा गए एक ही पल में । काल की कराल गति से, विमुख हुए प्रिय जनों से। अपशगुनी ये कैसी […]

आठों प्रहर के बाद ,सूर्य देव देखो उग रहे। प्रहरो के चक्र में फंसे हुए से दिख रहे। ऐसे ही मनुष्य को लगाने पड़ते फेरे हैं, जन्म- मृत्यु चक्र से निकाले प्रभु के डेरे हैं। […]

पाषाण से दरिया बनने दो , मुझे अपने हक में लड़ने दो। मैं छुईमुई सी गुड़िया नहीं , मुझे लक्ष्मीबाई बनने दो । आजाद परिंदा बनने दो, ना काटो पंख मुझे उड़ने दो। निमिषा सिंघल

रंग के बहाने पी को आज छुआ जाए सखी! चलो भंग के बहाने कुछ बहक – बहक जाएं सखी ! बहकने -महकने का आज लुफ्त उठाएं सखी ! रंग के बहाने थोड़ा आज जिया जाए […]

खुश रहना हंसना तुम सीखो। दुखों से भी लड़ना तुम सीखो । तूफानों को झेलना सीखो। चट्टानों सा बनकर देखो । आकाश में उड़ते पंछी देखो। कैसे नदिया बहती देखो। काम करें सब अपना सीखो। […]

पूर्णता की खोज संपूर्ण होने के लिए , पूर्ण होने के लिए। नये मार्ग ढूंढता रहा आगे ही मै बढ़ता रहा। पर बाद में समझा ये शब्द। मोक्ष प्राप्ति ही पूर्णता है, जग में फैली […]

संगीत दिलों में बजता हैं जब, धड़कने सुरीली हो जाती। हर आहट एक मीठी दस्तक, चेहरे पर हंसी खिला जाती। खुद से बातें करते रहना, खोए खोए से यूं रहना, बात करें यदि तुमसे कोई, […]

जीवन में मिले थे लोग बहुत, कुछ छूट गए कुछ साथ चले। कुछ से अद्भुत सा रिश्ता मिला, कुछ ने अनसुलझे एहसास दिये। कैसा आत्मीयता का बंधन था, शायद पिछले जन्म का चंदन था। जो […]

जिंदगी के सुरों में यदि तासीर चाहिए, तो वफा ईमानदारी और बस प्यार चाहिए। वरना सारे सुर , बेसुरे नजर आएंगे। प्रेम को वो सौंदर्य पूर्ण … समुंद्र सी गहराईया ना दे पाएंगे। इंद्रधनुषी रंग […]

मेरी बूढ़ी नानी आंखों पर चश्मा , सन से सफेद बाल , सुंदरता की आज भी मिसाल। कांपती सी आवाज, थोड़ा कम सुनते से कान लेकिन आज भी उनका व्यक्तित्व, है बेमिसाल प्यार और दुआएं […]

फूल लताओं को समेट कर रखता मेरा गांव नल कूप को सहेज कर रखता मेरा गांव रिस्ते को मदमस्त खुशहाल रखता मेरा गांव मिट्टी की खुशबू को सहेज कर रखता मेरा गांव महेश गुप्ता जौनपुरी

गरीबी का दर्द क्या दर्द देखेगी दुनिया तेरी सुख गया है आंखों के पानी रिमझिम बारिश की फुहार में समेट रखा है आंचल में गरीब तेरी कहानी को उपहास बनायेगी ये दुनिया तू कल भी […]

वीर शहीद भगत सिंह भगत सिंह सुखदेव राजगुरु थे वीर बहादुर आजादी के तराने के लिए झूल गये फांसी पर भारत मां का नारा लगा कर चूम गये माटी को हमें अभिमान है वीर जवान […]

मां बाप की लाडली होती बिटिया जीवन को रोशन करती है बिटिया घर परिवार को समेट कर रखती बिटिया रिस्ते कि बागडोर को निभाती बिटिया सुख दुख में साथ निभाती बिटिया जिम्मेदारी से कभी ना […]

नौ दिन क कलशा रखले बाडी माई होके शेरवा पर सवार आई जइतु गऊआ हमार चमचम चमकेला बिंदिया ए माई सुनर सुनर पऊआ में लागल बा महावर हाथवा में सोहेल गंदा चक्र ए माई महेश […]

मेरे गलती पर साहब भौं भौं करके दौड़ लगाते, कानुनी नियम का पाठ पढ़ाकर पैसा जनता से खुब ऐंठते, ये कैसा कानून व्यवस्था है हमको भी बतलाओ यारों, नेता गिरी है या दादागिरी कोई तो […]

काली आधी रात में, दुनिया देख रही थी सपने | आलस का आलम था चहु ओर रात भी लग रही थी ऊंघने | तब मैंने छत से देखा, बतखो के झुण्ड को तलाब में | […]

वह राणा अपना कहाँ गया , जो रण में हुंकारें भरता था। वह महा प्रतापी कहाँ गया, जिससे काल युद्ध में डरता था । जिसके चेतक को देख – देख , मृगराज दंडवत करता था। […]

स्वार्थी कुटिल लोगो पर ध्यान ना दो, जैसे बहता नदिया का नीर | विपरीत परिस्थिति में भी अडिग रहो, ना होना कभी अधीर | जो दुखी करें सबको ओर बने बड़ा ही वीर ऐसे दुष्टो […]

जब डगमगा जाये तेरा हौसला, अपने दिल को पत्थर समझ लेना | राम नाम लिखकर उसपर, दरिया में फेंक देना | जो होगा देखा जायेगा, राम नाम पे भरोसा कर लेना | कहना “हे राम […]

जीवन मेरा बहुत कठिन है, पर ना चाहूं मुड़कर देखना | रख ली है कुछ पुरानी यादे समेटकर, ना चाहूँ उनको फेंकना | झूठा मुखौटा लगाकर, क्यों चाहते हो, जज्बातों से यूँ खेलना | दिल […]

लोगो की नफरतो के आगे, खुद्दार कभी झुकता नहीं| अडचन चाहे कितनी भी आये, चलते चलते वो रुकता नहीं| महफिलों की रौनको से, फर्क उसे पड़ता नहीं| संघर्ष की मशाल लिए वो, भागता हुआ थकता […]

साम दाम दण्ड भेद से मुकाम तो पा लोगे। पर आईने में खुद से, क्या नजरें मिला लोगे? काबिलियत कितनी है, गिरेबां में झाँक लो, काबिल हकदार से उसका हक तो चुरा लोगे। पर आईने […]

सह आंखो से देखे तो पड़ जाता है पाला कोई हाथों से छीनकर खा जाता निवाला क्या होगा यहां उन मासूम पंख परिंदो का आज कल बस्तियो में खूब होता है घोटाला

छप्पन भोग लगा कर बेटा आज नदी के पास बैठा है पिण्ड बनाकर मेवे का ढोंग देखो रचा कर बैठा है जो मर गये एक निवाले के लिए घुट-घुट कर चार दिवारी में क्या क्या […]

मंजर वो आते हैं याद, नहीं भूल सकती वो याद, था छोटा सा गांव अपना, कितने मस्त थे हम वहां, सब कुछ लगता था अपना. जो बन गया अब सपना, वो था बचपन अपना. लगे […]

हर तरफ उजाला हो ये जरुरी तो नहीं मुझे धीमी रोशनी भी अच्छी लगती है यहाँ हर कोई एक आरज़ू ओढ़े बैठा है पर सबकी जरुरी हो ये जरुरी तो नहीं मुझे कमियां भी अच्छी […]

बेटी कभी तेरी पायल की झंकार सुनाई देती है, बेटी कभी तेरी चीखों की पुकार सुनाई देती है। बेटी ये देश है तुझ जैसी महान वीरांगनाओं का, बेटी तुझ में वीरांगना सी ललकार सुनाई देती […]