हर राह मुश्किल होती है, हर मोड़ पे कठिनाइयां मिलती है, फिर भी पत्थरों से टकराती, हर बाधा को ध्वस्त करती, धारा बहती है, जितने की ज़िद हमें आगे बढ़ने की हिम्मत देती है, जीतना […]

कुछ थकी थकी सी, कुछ रुकी रुकी सी हो गई है ज़िंदगी, जी रहे हम सब यहां, पर जीवन से कहीं दूर हो गई है जिंदगी, क्यूं हम खुद के प्रतिद्वंदी हो गए है, क्यूं […]

आज का यह समाज, चक्रव्यू है पुराने गले सढ़े रिवाजों का, लड़ अभिमन्यु की तरह, अपनी सोच का समाज पे प्रहार कर, सुन ली सब की आज तक, ना रहा वक्त अब लिहजो का, खौफ […]