कोई रोके लाख मगर सवेरा नहीं रुकता! सामने उजालों के अंधेरा नहीं रुकता! हम रोक लेंगे हिम्मत से तूफाने-सितम को, जुल्मों के खौफ से कभी बसेरा नहीं रुकता! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

तेरी याद कभी-कभी मुस्कान देती है! तेरी याद कभी-कभी तूफान देती है! टूटी हुई चाहत भी जुड़ जाती है कभी, कभी-कभी हर आलम सूनसान देती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तेरी आज भी मुलाकात का असर है! तेरे ख्यालों की हर बात का असर है! नींद उड़ जाती है यादों की चोट से, तड़पाते लम्हों की रात का असर है! मुक्तककार-#मिथिलेश_राय

एक ताज़ा ग़ज़ल …….. गुलफिशानी – फूलों की बारिश , बदगुमानी – शक ******************************** मैंने दुश्मन पे गुलफिशानी की … आबरू.. उसकी पानी पानी की …. मुझ पे जब ग़म ने मेहरबानी की ….. मैने […]

इश्तेहार सी हो गयी है ज़िंदगी मेरी जैसी दिखती है, होती नहीं कभी, सभी के हाथों में सुबह सवेरे पहुंच जाती है, मगर नज़रों में किसी के होती नहीं कभी, हर रोज पढ़े जाते है […]

इक तस्वीर है इस दिल के पास। फिर क्यु दिल है उदास – उदास।। माना की तु दुर है सदियों से मगर, तेरी यादे है मेरे दिल के आसपास।। वो लरजते होठो से मेरे गीतो […]

हमारी आन, मान, शान “हिंदी” ……………………………………… भावनाओं का सागर हो दिल में, तो एक कश्ती उतरती है, विचारों की बाहों में बाहें गूँथ कर, लहरों सी सुंदर पंक्तियाँ बुनती है, ये साहसी काम बस, हमारी […]

मैं क्या भरोसा कर लूँ इस ज़हाँन पर? डोलता यकीन है टूटते इंसान पर! हर किसी को डर है तूफाने-सितम का, आदमी जिन्दा है वक्त के एहसान पर! रचनाकार -#मिथिलेश_राय

चलते हुए कदमो के निशां को बदलते हुए देखा हमने। हर रिस्ते नातों को आज बदलते हुए देखा हमने। जो कभी टूट कर चाहा करती थी जमाने हमें, आज उसे ही छोड़ जमाने , जाते […]

तेरा साया मेरे साये में कुछ ऐसे समा जायेगा, के तेरे चेहरे में मेरा चेहरा कोई ढूंढ नहीं पायेगा, जिस तरह रहती है हवा दरमियाँ हर किसी के, हमारा वजूद भी हर किसी के चेहरे […]

तुम्हारे आने की खबर सुन कर  अच्छा लगा | आओ मैं प्रतीक्षा में हूँ लम्बी क़तर में खड़ा पंजों  के बल उचक उचक कर  जैसे कोईइन्तजार  करता है -टिकिट विंडो पर | आओ जैसे पूरनामी […]

भले वक्त में तो सभी ,नित अपनत्व लुटाए , बुरे बक्त , परछांई भी , दूर दूर न दिखाए। जानकी प्रसाद विवश आदरणीय प्यारे मित्रो, सवेरे की मधुर छटा में आप सभी का हार्दिक अभिवादन […]

शीत के सबेरे में , मित्रता की गर्माहट, प्यार मोहब्बत के सूरज की, सुनकर आहट , भावों के पंछी चहक उठते । अंगुलिया ठिठुर जाएँ , भावना उनींदी सी , प्यार के गरमागरम संदेश मगर […]

सुखद है मित्रों का संसार , बरसता निशदिन प्यार अपार। नहीं भौतिक है, है अध्यात्म , मित्र की महिमा अपरंपार । – जानकी प्रसाद विवश

प्यारे मित्रो….. नाचो -गाओ मन, नव-गीत गुनगुनाना , नये वर्ष खुशी खुशी ,सबके मन बहलाना । जन जन का मन से ,यह नम्र निवेदन है , मन की पीड़ा का , प्रस्तुत आवेदन है । […]

रहता है कहाँ है कहाँ घर तेरा, नाम आंसु से परिचय हुआ क्यों तेरा, ख़ुशी-ग़म का आँखों से रिश्ता तेरा, हर इंसा से नाता जुड़ा क्यों तेरा, समझ के रंग सा न किसी अंग सा, […]

कविता ***************************** ये जीवन सरिता ,तुम युं ही बहते रहना। कल कल कर मधुर नांद सै बहते रहना। गर.. लाख मुस्किलें हो राहो मे पर भी, एक लक्ष्य बना ,और आगे बडते रहना । गर […]

कुन्दन सा बदन को एैसा श्रृंगार कर । जो भाये पिया मन एैसा श्रृंगार कर । सरगम पे सुर नया कोई झंकार कर, जो गुंज उठे हर मन के द्वार द्वार पर। रीझाती सपनों को […]

कुन्दन सा बदन को एैसा श्रृंगार कर । जो भाये पिया मन एैसा श्रृंगार कर । सरगम पे सुर नया कोई झंकार कर, जो गुंज उठे हर मन के द्वार द्वार पर। रीझाती सपनों को […]

हरबार तुम एक ही नादानी करते हो! हर किसी से जिक्र तुम कहानी करते हो! हँसते हुए सहते हो अपनों के सितम को, हरबार तुम अपनी कुर्बानी करते हो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

खुल के भले ही न कहा हो कभी पर अपनी “देह-बोली” से कितनी ही बार जताती है वो तुमसे कितना ….. कभी ख्याल किया तुमने तुम्हारे कमरे के करीब से गुजरते वक़्त ठिठक कर कितनी […]

कैसे कहूँ मैं गमज़दा नहीं होता हूँ! कैसे कहूँ मैं यादों में नहीं खोता हूँ! जब अश्कों का सागर है मेरी आँखों में, कैसे कहूँ मैं तेरे लिए नहीं रोता हूँ! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय

खून का रंग- कैसे तय होता है? विज्ञान की मानें तो आर बी सी से परिवार की माने तो माँ-बाप से समाज की माने तो जाति, धर्म,वर्ण से राजनीति की माने तो वोट और नोट […]

आज कुछ खाली – खाली लगता है …२ यूँ जो छोड़ गए तुम मुझके … हर चेहरा सवाली लगता है … आज कुछ खाली – खाली लगता है … हँस के मिलती हूँ जब भी […]

मैं सोचता हूँ तेरा इरादा छोड़ दूँ! तुमसे प्यार करने का वादा तोड़ दूँ! यूँ कबतक देखता रहूँ तेरी अदाऐं, मैं तेरी निगाहों का इशारा मोड़ दूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

जनवरी आता है , नयी उम्मीदों को पंख लगाता है, फरवरी फर्र फर्र न जाने कब बीत जाता है , मार्च सुहाना मौसम लेकर आता है, उम्मीदों को परवाज देते देते पहला तिमाही गुजर जाता […]

मैं अकेला था अकेला हूँ अकेला रह गया, ज़िन्दगी की धूप छाँव सब खुशी से सह गया। टूटा हूँ पत्ते सा क्यूँकि मेरी सूखी डाली है, न खता हवा के झोंकों की न दोसी कोई […]

*ओ बाबुजी…* बहुत याद आते हो ओ बाबूजी दिल को रुलाते हो ओ बाबुजी ।। जीना तुम्हारे बिन गवारा नहीं धड़कते हो सीने में ओ बाबुजी।। अंधेरी है दुनिया अंधेरी है राहें अंधेरी है खुशियां […]

कौन मेरी तन्हाई में हमारा बनेगा? नाकामियों के दौर में बेचारा बनेगा! टूटती मीनार हूँ अपने आशियाने की, अब कौन इन दीवारों का सहारा बनेगा? मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

नभ के अरुण कपोलों पर, नव आशा की मुस्कान लिए, आती उषाकाल नव जीवन की प्यास लिए, दिनकर की अरुणिम किरणों का आलिंगन कर, पुष्प दल मदमस्त हुए,डोल रहे भौंरे अपनी मस्ती में, मकरन्द का […]