मैं चाहती हूं मेरे लफ्जों में गहराइयां हों छूता चले मेरा हर अल्फाज आसमान को मेरे भावों में वो ऊंचाइयां हो तितली से रंग भरे हों पन्ने और जवानी की अंगड़ाइयां हों भवन में पसारा […]
मैं चाहती हूं मेरे लफ्जों में गहराइयां हों छूता चले मेरा हर अल्फाज आसमान को मेरे भावों में वो ऊंचाइयां हो तितली से रंग भरे हों पन्ने और जवानी की अंगड़ाइयां हों भवन में पसारा […]
कैसे कहें कि क्या खोया है हमने और क्या पाया है हमने दर्द के सिवा कुछ मिला नहीं जो तू ना मिला तो गिला भी नहीं ————————- आकाश की ऊंचाइयों से तू ना घबराना गर […]
आज आ गया समझ में जिंदगी कितनी छोटी होती है एक पल में होती है हमारी तो दूजे पल में हमसे कोसों दूर होती है। यूँ रोज टूटते हैं सितारे आसमान से लेकिन किसी एक […]
शिरोमणि संसार का, भारत देश महान। उच्च शिखर आसीन हो, प्यारा हिंदुस्तान।।(१) *********************** विविधता में एकता, है इसकी पहचान। बोली भाषाएं अलग, धर्म और परिधान।।(२) *********************** प्रहरी बना हिमालय,नदियां करें निनाद। संस्कृति फूले फले सदा, […]
उदासी का समन्दर है इन नयनों में, उठती हैं लहरें बेचैनी की। फिर ऑंखों से रिसता है पानी, यही है इस जीवन की कहानी। कोई जब लेकर आए इक नाव, निकालने को इस समन्दर से, […]
गिरगिट रंग बदलता है, यह बचपन से जाना। साॅंप डॅंक मारता है , यह भी हमने माना। शेर शिकार करके खाए, हाथी नकली दाॅंत दिखाए । इनकी प्रकृति ऐसी ही है, ये प्रकृति ने ऐसे […]
तुम्हारे छिन जाने से मानो सब छिन गया दिल गया, चैन भी छिन गया स्मृति ही शेष रह गई अब तो हाँथों से सर्वस्व छिन गया बैठे हैं हम सागर के किनारे आयेगी एक लहर […]
महारानी ———– समस्त आकांक्षाओं का वृहद आकाश.. और पतंग सी वह। उड़ती ..खिचती.. डोर से बँधी ऊँचा उड़ने का माद्दा रखती..वह। इंद्रधनुषी रंगो से सजे.. ख्वाब.. हृदय में सजाएँ, पेंडुलम सी झूलती वह। भीगे आँचल.. […]
मजदूर ——- मुट्ठी में बंद उष्णता, सपने, एहसास लिए, खुली आँखों से देखता है कोई ….. क्षितिज के उस पार। बंद आँखों से रचता है इंद्रधनुषी ख्वाबों का संसार। झाड़ता है सपनों पर उग आए […]
भर लो आगोश में, आओ कि सहारा दे दो, इश्क है कि नहीं थोड़ा सा इशारा दे दो। 1.हम भरम में रहे कि इश्क है तुमको हमसे करो न याद सितमगर तो भुलावा दे दो। […]
तुम्हारी हँसी तुम्हारा रुदन, तुम्हारी स्मृतियाँ संँजो रखी हैं कीमती दस्तावेजों की तरह कागजों पर मैनें। तुम्हारी आंँख से टपके आँसू ..मोती बन स्वर्णाक्षर से लिख गए हैं वहाँ। कागज के उस जादुई कालीन पर […]
कोकिला ———– कानों में मिश्री सी घोले, काली ‘कोकिला’ मीठा बोले। रूप रंग लुभाते हैं…. पर गुणों के अभाव में तिरस्कार ही पाते हैं। गुण अमूल्य समझाती है, मीठी तान सुनाती है। पतझड़ हो या […]
कृपाचार्य दुर्योधन को बताते है कि हमारे पास दो विकल्प थे, या तो महाकाल से डरकर भाग जाते या उनसे लड़कर मृत्युवर के अधिकारी होते। कृपाचार्य अश्वत्थामा के मामा थे और उसके दु:साहसी प्रवृत्ति को बचपन […]
वह थी बिजली की कौंध सी वह थी निश्चल प्रेम सी वह थी सावन की फुहार लड़कियाँ जैसे पहला प्यार लड़कियाँ जैसे पहला प्यार। गीत गाता हो जैसे सावन मन हो जाता पुलकित पावन आये […]
क्यों ! मैं बुद्ध जैसी बनूँ….. मैं बुद्ध नही हूँ.. जो चल दिये अपना सारा संसार छोड़कर; मैं एक अदना सी नारी कैसे कह दूं बेटा मेरा नहीं बेटी मेरी नहीं पति मेरा नहीं मां-बाप […]
एक थी प्यारी निशा कल्पना की तरह नव आकर्षण लिए सबकी ख़ुशी के लिए उम्मीद भी न थी साथ होगी कभी देर से मिली सही आई बनकर खुशी हंसी मनमोहक सी सबकी ही प्रिय बनी […]
यह समय बड़ा बलवान है समय पर लिखना कितना आसान है पर समझ पाना मुश्किल जितना उलझो इसे समझने में उतना ही जटिल किसी के लिए हाथों से फिसलती रेत तो किसी के लिए बेवफा […]
दुनियां कितनी बदल जाए अगर इंसानों की तरह प्रकृति में भी प्रतिस्पर्धा हो जाए घोसले की जगह चिड़ियों की भी अट्टालिकाएं बन जाए फूलों में सुंदरता को लेकर प्रतियोगिताएं हो जाए वृक्ष भी अपने फलों […]
अर्थ होते हैं त्वरित परिमाण होते हैं गीत होते हैं स्वयं के साज होते हैं है धरा मुर्छित हुई जब जब म्यान में तलवार है दूर कितना है सवेरा चहुँ ओर अन्धकार है है विदुर […]
तुम्हारे खूबसूरत चेहरे पे जो गुस्सा रहता है जैसे हर गुलाब की हिफाजत में कांटा रहता है जंगल में किसी कस्तूरी हिरन सी लगती होगी जब अपने पायल की खनक से तुम खुद डर जाती […]
अपनी सुरक्षा खुद करो औरों के भरोसे मत रहो मदद नमक की तरह ही लो जिम्मेदारी में आलस न करो सुरक्षा कर्मी लगाकर अगर निश्चिंत हो होते हो इंदिरा की तरह कीमती जिंदगी खोते हो… […]
हाथ फैला कर श्वेत कुमुदिनी सी, वो कर रही थी मेरा इंतज़ार। ना जाने कब से करता था मैं उससे प्यार । वो मेरा रुहानी प्यार.. जिसका कभी न किया मैनें इज़हार वो समझी तो […]
============================ इस दीर्घ कविता के पिछले भाग अर्थात् सोलहवें भाग में दिखाया गया जब कृपाचार्य , कृतवर्मा और अश्वत्थामा ने देखा कि पांडव पक्ष के योद्धाओं की रक्षा कोई और नहीं , अपितु कालों के […]
उदास बाजार में भी खुशी आ जाती है बेरंग बाजार रंगीन हो उठता है जब बाजार में बिकने राखी आ जाती है खुद न आए तो भी उसकी राखी हर साल आती है भाइयों के […]
विचारों की विचार गाथा पर हम तो शंकित रह गए पुष्प जो हर्षित खिले थे औंधे मुंह मुरझा गए थी प्रणय की आस किन्तु आस मेरी मृत हुई दूर बैठी अप्सरा यह देख कर हर्षित […]
बूंद की किंचित उदासी बूंद ही सुन ले अगर क्यों मिले सागर में जाकर गुत्थी ये सुलझे अगर तो स्वयं ही हो समाधानों की अविरल बारिशें क्यों हृदय में हो मिटाने की अमिट फरमाईशें।।
भोजपुरी कजरी गीत -सवनवा में ना अइबो ननदी | आई गइली बरखा बहार हो , सवनवा में ना अइबो ननदी | सावन के फुहार तन में अगिया लगावेला | सखी सब मिलीजुली झुलवा झुलावेला | […]
कविता- धागा राखी का | धागा राखी का भाई बहन का है प्रेम बंधन | तोड़ने से टूटे ना लगाए बहना टीका चन्दन | बहना की दिया रक्षा का वादा निभाना भईया | तुम ही […]
भोजपुरी कजरी गीत – काहे भूली गइला | तोहरे खातिर तड़पे हमरो परनवा | काहे भूली गइला हमके सजनवा | सावन के बहार रहे बरखा के फुहार रहे | बिरह में बरसे मोर नयनवा | […]
अजीब इत्तिफाक था याद है…… छत पे हमारा चोरी छिपे मिलना तुम्हारे पिताजी के आते ही बिजली का चले जाना अजीब इत्तिफाक था एक छतरी में कॉलेज से घर आना तुम्हारा गले मिलने का मन […]
वृक्षों पर आ गया सूरज, धरा पर छा गया सूरज। बिखराकर अपनी स्वर्ण रश्मियाँ, गीत कोई गा गया सूरज। हल लेकर निकल पड़े किसान, देखो आ गया सूरज। अंधकार मिटाने धरा से, सदियों से आता […]
तालिबान ने यह कैसी हालत कर दी अफगानिस्तान की बैठे बैठे मृत्यु आ गई कीमत कम हो गई अब तो जान की। फिल्मों जैसा हाल हो गया अफगानी नागरिकों का, प्लेन से मानव ऐसे गिरते […]
ये उत्तराखण्ड है हिमालय की गोद में उत्तर का एक अखंड प्रदेश पहाड़ों के बीच खड़ा एक दुखों का पहाड़ लिए कुछ आपदा का शिकार कुछ राजनीति का जन्म एक बार नामकरण दो बार अजीब […]
कोरोना से आजादी की जंग में, जो नित वैक्सीन लगा रहे हैं स्वतंत्रता सेनानी से कम नहीं हैं, वो चिकित्सक देश को बचा रहे हैं। गाँव-गाँव, नगर-नगर में जाकर, इस रोग के विरुद्ध कैम्प लगा […]
इस दीर्घ कविता के पिछले भाग अर्थात् सोलहवें भाग में दिखाया गया जब कृपाचार्य , कृतवर्मा और अश्वत्थामा पांडव पक्ष के बाकी बचे हुए जीवित योद्धाओं का संहार करने का प्रण लेकर पांडवों के शिविर के […]
सोच बिंदास है आपकी दान है यह महा दान है, दान अंगों का करने की सोच का दिल से सम्मान है। मुक्ति की चाह में खाक होकर उड़ते रहे हम धुँवा बन सीमित रहे निज […]
शत् शत् नमन है मेरा उन वीरों को, जिन्होंने देश को आजादी दिलवाई। आज स्वतंत्रता दिवस की है सबको बधाई। भारत माँ की रक्षा खातिर, अपने सीने पर गोली खाई। जय हिन्द का गूॅंज उठा […]
*यह कविता एक ऐसे व्यक्ति पर आधारित है जो की अपनी मृत्यु के पश्चात अपनी व्यथा सुना रहा है* मैं अब दुबारा जीना नहीं चाहता जब जिंदा था तब कौन सा जीने दिया तुमने अब […]
मुझे यह बताते हुए हर्ष होता है की यह कविता मेरी पहली कविता थी जो मैंने दिनांक 22-11-2010 को लिखी थी आशा करता हूं कि आप सब लोगों को भी यह पसंद आएगी । जब […]
जिन्हें कुछ न है पता किसी खाश चीज का फिर भी वो बताते हैं समझाना दिखाते हैं दया का पात्र बनते हैं या फिर गुस्सा दिलाते हैं माखौल खुद का उड़ाते ही औरों का दिल […]
अन्याय हुआ था अगर इंसाफ की दरकार थी परिवार ही गायब हुआ खौफ बदनामी की थी ऐसे भेड़ियों को तब किसने सिंघासन दिया न्याय की अ ब स भी जिसे नहीं मालूम थी सर्वदा जिसने […]
जब तुम थे मिले बहार आ गई थी जिंदगी में सुबह की पहली किरण भी हमसे मिलकर जाती थी पंछी हमें देख गाते थे झरने हमें देख झरते थे अपने अलग अंदाज में क्योंकि, तब […]
तुम्हारी बेवक्त आने की आदत एक दिन मुझे खो देगी इंतजार करते करते चला गया तो तुम रो दोगी अभी सावन है आ जाओ सितंबर के बाद ये बरसात न होगी मैं शहर चला जाऊंगा […]
बस इतनी सी ख्वाइश है जैसे आज मिले हो, हर बार यूं ही मुस्कुरा कर मिलोगे क्या दौलत शोहरत ज्यादा मिले ना मिले एक ही घर में मां पिताजी के साथ रहोगे क्या ये गुलाब […]
बीते सुनहरे पल तब क्यों याद आते हैं जब बैठो अकेले यादों की दरिया के किनारे यादों की एक लहर सी आती है सुर्ख दिल की सुर्ख रेत को गीला कर देती है दिल आज […]
हे प्रभु, कभी जन्म लो इस धरा पर , बन कर एक इंसान। फ़िर महसूस करो उस दर्द को, जब बिछुड़ जाए निज संतान। अब इसके आगे क्या कहूँ, खुलती नहीं जुबान। खिसक गई पैरों […]
इस दीर्घ कविता के पिछले भाग अर्थात् पन्द्रहवें भाग में दिखाया गया जब अर्जुन के शिष्य सात्यकि और भूरिश्रवा के बीच युद्ध चल रहा था और युद्ध में भूरिश्रवा सात्यकि पर भारी पड़ रहा था […]
वृक्ष हैं कुदरत का वरदान, इन्हें क्यों काट रहा इन्सान। वृक्ष होंगे तो होगी हरियाली, वसुंधरा पर होगी खुशहाली। नियत समय पर वर्षा आएगी, सूखी धरती भी अन्न उपजाएगी। वृक्ष देते औषधि, फल और फूल, […]
जीवन है अनमोल, इसे व्यर्थ में ना गंवाइए, चलना सदा सत्य पथ पर, बाधाओं से ना घबराइए। ***************** कर अथक निरंतर प्रयास, सफलता को पाइए, मन में जो पाले ख्वाब बड़े, उन्हे सार्थक कर दिखाइए। […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.