शर्म आ रही है ना उस समाज को जिसने उसके जन्म पर खुल के जश्न नहीं मनाया शर्म आ रही है ना उस पिता को उसके होने पर जिसने एक दिया कम जलाया शर्म आ […]

उसके सिर्फ दो बेटियाँ थी दोनों सरकारी स्कूल मैं पढती थी अबकी उन्हें सिर्फ बेटा ही चाहिए था लेकिन फिर से बेटी हो गई अभी आधा घंटा ही जी पाई थी अल्लाह को प्यारी हो […]

मांगे जब भी तब उस बेटी की हर हरमाइश् पूरी हो, ऐ खुदा काबिल बना दे, हर बाप को इतना के उसकी कभी जेब ना ढीली हो, उठा दे उन्गली बेटी जिस तरफ ज़माने में, […]

सम्पूर्ण ब्रहमण्ड भीतर विराजत  ! अनेक खंड , चंद्रमा तरेगन  !! सूर्य व अनेक उपागम् , ! किंतु मुख्य नॅव खण्डो  !!   मे पृथ्वी भूखंड ! अति मुख्य रही सदा   !! यहा पर , […]

इस कलि को मुस्कुराने दो कोख से धरती की गोद में आने दो बिखेर देगी चारोंतरफ खुशियाँ खुल के तो इसे मुस्कुराने दो। बेटी को घरस में आने दो।>2 रोपित करो इसे अपने आँगन में […]

*एक विदाई गीत* हरे हरे कांच की चूड़ी पहन के, दुल्हन पी के संग चली है । पलकों में भर कर के आंसू, बेटी पिता से गले मिली है । फूट – फूट के बिलख […]

दुनिया का भी दस्तूर है जुदा, तू ही बता ये क्या है खुदा? लक्ष्मी-सरस्वती, हैं चाह सभी की, क्यों दुआ कहीं ना इक बेटी की ? सब चाहे सुन्दर जीवन संगिनी, फिर क्यों बेटी से […]

बेटी का हर रुप सुहाना, प्यार भरे हृदय का, ना कोई ठिकाना, ना कोई ठिकाना।। ममता का आँचल ओढे, हर रुप में पाया, नया तराना, नया तराना।। जीवन की हर कठिनाई को, हसते-हसते सह जाना, […]

Shakun Saxena उछाल उछाल कर पापा मुझे दिल्ली दिखाते थे, हंस हंस कर पापा को मैं खूब रिझाती थी, भरोसे का अटूट रिश्ता था हमारा, छूट कर हाथो से मैं फिर हाथो में आ जाती […]

बेटा अपना अफसर है.. दफ्तर में बैठा करता है.. जी बंगला गाड़ी सबकुछ है.. पैसे भी ऐठा करता है.. पर क्या है दरअसल ऐसा है.. पैसे भी खूब लगाए हैं.. हाँ जी.. अच्छा कॉलेज सहित.. […]

मुक्तक छंद – वार्णिक (मनहरण घनाक्षरी) सामांत-आई पदांत- है ८८८७-१६-१५ पहले जो पढने में गदहे कहलाते थे उनकी भी दिखती आज नही परछाई है ! नवयुग के बच्चे देते एक भी जवाब नही पता नही […]

मिट्टी से गढ़ी है,  नन्ही सी परी है,  ना माँ की दुलारी, ना बाबा की प्यारी, ये सङकें ही घर है इसका , यहीं सारा जग है जिसका । ना गुङिया,मोटर गाङी,  ना बर्तन,कप-प्लेट,ना रेलगाङी,   […]

आज भी मै बेटी हूँ तुम्हारी, बन पाई पर ना तुम्हारी दुलारी, हरदम तुम लोगों ने जाना पराई, कर दी जल्दी मेरी विदाई। जैसे थी तुम सब पर बोझ, मुझे भेजने का इंतज़ार था रोज़, […]

खाकी – खद्दर पहने हुये , इंसान बिकने लगे कोडियों में यहाँ लोगो के,ईमान बिकने लगे ।। कही मुर्दे तो,कही आज शमशान बिकने लगे, चदरों पे खुदा,पत्थरो में भगवान बिकने लगे ।। सब की सब […]

आँगन में जो फुदक रही थी एक छोटी सी चिड़िया! दौड़ी उसे पकड़ने उसके पीछे छोटी बिटिया!! बोली मैंने आज पढ़ा है तू है दुर्लभ प्राणी! तुझे संजोना है हम सब को देकर दाना पानी […]

तुम्हारे हाथ का हर एक छाला, चुभा जाता है इस दिल में एक भाला, हर एक रेखा जो तुम्हारी पेशानी पर है, एक दास्तां बयां कर जाती किसी परेशानी की है, बता जाती है वो […]

अत्याचार दिन ब दिन बढ़ रहे हैं भारत की बेटी पर। रो-रो कर चढ़ रही बिचारी एक-एक करके वेदी पर ।। भिलाई से लेकर दिल्ली तक प्रतिदिन नई कहानी है। किसने पाप किया है ये, […]