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  1. असंभव पथों पे चलके, जिसने मंजिल पायी है
    सच में वहीं कर्मयोगी कहलाया है ।।4।।
    ________ जीवन के यथार्थ से अवगत कराते हुए कवि विकास जी ने एक कर्म योगी को परिभाषित किया है और मोह माया से मन को दूर रखने की अति सुंदर रचना रची है… बहुत उम्दा लेखन

  2. असंभव पथों पे चलके, जिसने मंजिल पायी है
    सच में वहीं कर्मयोगी कहलाया है ।
    —– बहुत सुन्दर रचना।

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