जन्मदिन कन्हैया का है आज सबको बधाई बधाई अष्टमी भाद्रपद की सुहानी व्रत लेकर कन्हैया का आई। कंस की कैद में जन्म लेकर रात ही रात गोकुल पधारे, माँ यशोदा की गोदी में खेले नन्द […]

बधाई हो यशोदा मैया आयो कान्हा तेरे द्वार सुर नर मुनि करते स्वागत है बारम्बार । जन्म लियो मथुरा जेल गृह में पोषित भये देवकी के गर्भ में आये दुष्ट कंश के करन संघार बधाई […]

बधाई हो यशोदा मैया आयो कान्हा तेरे द्वार सुर नर मुनि करते स्वागत है बारम्बार । जन्म लियो मथुरा जेल गृह में पोषित भये देवकी के गर्भ में आये दुष्ट कंश के करन संघार बधाई […]

मैने वो तस्वीर फाड़ दी जिस तस्वीर को देख कर, हम कभी बेहतरीन ग़ज़ल लिख लिया करते थे। हकिक़त जब सामने आई तस्वीर को जोडना चाहा , तस्वीर ने कहा मुहब्बत के मामले तुम बहुत […]

कान्हा तेरो स्वागत है बारम्बार ! जनमाष्टमी आए सबके जीवन में हर बार ! मोर मुकुट तेरो सिर पे सोहे तू जन -जन के मन मोहे तेरो महिमा अपरमपार कान्हा तेरो स्वागत है बारम्बार! देवकीसुत […]

मै और मेरी मां तेरा ये शहर जाना,मुझे बीमार कर गया, वेद ने लिखा औषधि में,तेरा दीदार चाहिए।। अधूरा सा ही हूं, मै भी तेरे बिन, पर इस जिंदगी को मां,थोड़ा मुकाम चाहिए।। मुकाम भी […]

कहीं खो गया है आभासी दुनिया में आदमी झुंठलाने लगा है अपनी वास्तविकता को आदमी परहित को भूलकर स्वहित में लगा है आदमी मीठा बोलकर ,पीठ पर वार करता है आदमी चलता जा रहा है […]

आज वे भी चले गए उस यात्रा में जहाँ से फिर कोई लौट कर नहीं आता है। अक्सर बीमार ही रहते थे जब से सेवानिवृत होकर घर लौटे थे, तब से बीमार ही तो देखे […]

राम हैं दयाल जग मैं, राम ही कृपाल हैं राम ही कवच हैं मेरे, राम मेरी ढाल हैं.. जिसका एक बाण सागरों को भी सुखा सके, कोई कण नही कि जिसमे राम ना समा सकें […]

फूलों ने जब साथ दिया, मैं भी महकना सीख गया चिड़ियों ने जब साथ दिया, मैं भी चहकना सीख गया चलना गिरना, गिरकर चलना, लगा रहा यह जख्मो भर पापा की जब उंगली थामी, तब […]

कभी माँ का प्यार तो कभी बहन का प्यार। यही प्यार के रिश्ते में बना है हमारा घर संसार।। काश!!! यह पवित्र रिश्ते हम में नहीं होते। जरा सोचो, कैसे चल पाता हमारा घर संसार […]

आज मेरी मां के चेहरे पर मायूसी छाई है फिर भी देख कर मुझे वह मुस्कुराई है मेरी रोटी के खातिर जल जाते थे जो हाथ पहली बार मां के उन हाथों मे कम्पन अाई […]

तीसरी मुलाक़ात दूजी मुलाक़ात जब से हुई जज्बातों में चिंगारी सुलग रही, बाट बेसब्री से जिसकी जोह रहे घड़ी आखिर वो आ ही गई।। वक़्त से पहले हम पहुंचे वो भी वक़्त पर आ गए, […]

एक खरोंच भी लगे तो दर्द होता है तो कैसे उसने ख़ुद अपनी जान ली होगी नक़ाब के पीछे छिपे है चेहरे कई मिलके उन काफ़िरों ने साज़िश की होगी उसकी मुस्कान बताती है कितना […]

रात थी गहरी, काली, अंधियारी जब जन्मे थे, गोपाल – गिरधारी। भाद्रपद का मास था, कृष्णा पक्ष की अष्टमी, दिन, उस दिन बुधवार था, नक्षत्र था रोहिणी। वसुदेव, देवकी के खुल गए ताले, सो गए […]

वो मुकाम पाऊँ! बस एक ही तमन्ना है जीतेजी ही नहीं मरके भी सबो के काम आऊं सारी खुबिया हो मुझमें पसंद बनू हर मन की वो मुकाम पाऊँ ! दिया तो बहुत कुछ है, […]

मेरे भारत की युवा शक्ति तू जाग नया, उत्साह जगा ले, मन में मत रख हीन भावना प्रगति पथ पर कदम बढ़ा ले। अपनी पुरातन संस्कृति का नवयुग से तालमेल करा ले, सच्ची में तू […]

वैसे नींंद नहीं आती , आजकल मुझे। जबसे देखा हैं , हमदम तुझे किस्मत में हैं, या नहीं तू पर कोशिशें  करता हूँ , अब सो जाने की काश इक पल सपनों में ही , मिल जाए […]

याद आते हैं वो पल जो बिताये साथ तेरे अब नहीं रौनक रही तेरे बिना कुछ पास मेरे। खोजता हूँ पल वही बीते दिनों को ढूंढता हूँ , अवसर गंवाकर खो दिया तू शून्य है […]

था आंखों मै तेरी जादू या नज़रों का मेरी कसूर था। हां मेरे दिल ने तुम्हें चाहा पर तुमको भी ये मंजूर था।। गुमशुदा गर मै हुआ कभी तो , वो तुम्हारा ख्याल था। तुम्हारे […]

कविता- दुआ बदुआ या समझ, या दुआ तु समझ| जैसा कहके है छोड़ी मुझे, वैसा पाके समझ| जो दिया है मुझे, वही देता तुझे| खुशियाँ है ना मिली, ना मिलेगी तुझे| रोता रहता था मै, […]

एक दिन, ऐसे ही मैंने कोशिश की , खुद को खुद में ढूंढने की, अपने वजूद को ; गहराइयों में टटोलने की, अरे! कौन हूं मैं? लिंग ,नाम, पहचान , गौत्र, जाति ,धर्म,देश, सब पर […]

एक दिन ऐसे ही मैंने कोशिश की , खुद को खुद में ढूंढने की, वजूद को गहराइयों में टटोलने की, अरे! कौन हूं मैं? लिंग ,नाम, पहचान ,गौत्र, जाति ,धर्म,देश सब पर विचार किया, फिर […]

इंसान एक कठपुतली है ,जो वक्त के हाथों चलती है आती जाती सांसों पर ,वक्त की गिनती रहती है वक्त जब अंगड़ाई लेता है ,सूर्य ग्रहण लग जाता है वक्त सौदागर होता है ,प्रतिपल जीवन […]

जीवन गढ़ने का अधिकार कहाँ *******************? इन्सान हैं कुछ भी मुश्किल नहीं चाह ले अगर क्या मुमकिन नहीं लव कुछ भी कहे चाहे जैसे भी रहे पर मन से वो हमेशा साथ रहे अपने हमेशा […]

🍀🌹🙏सादर प्रणाम आप सभी सम्मानित जनों को 🍀🌹🙏,,,,,,,,,,कर्ष्ण लीला,,,,,,,, 🍀🌹🙏 तेरी लीला है अपरंपार,, ओ जग के हे पालनहारा ,,,,,,🌻🌻 जनम लियों है मथुरा बीच मैं,,,, तेरे नैन (आखं) खुल्यों है गोकुल मां,, 🍀🌸 मुक्त […]

🍀🌹🙏सादर प्रणाम आप सभी सम्मानित जनों को 🍀🌹🙏,,,,,,,,,,कर्ष्ण लीला,,,,,,,, 🍀🌹🙏 तेरी लीला है अपरंपार,, ओ जग के हे पालनहारा ,,,,,,🌻🌻 जनम लियों है मथुरा बीच मैं,,,, तेरे नैन (आखं) खुल्यों है गोकुल मां,, 🍀🌸 मुक्त […]

आज जितना भी बरसता है बरस जाने दो, फिर तो सावन भी चला जायेगा, सींच कर कोना-कोना धरती का फिर तो सावन भी चला जायेगा। आज जितना भी चाहो भीगो तुम प्यार ही प्यार भरा […]

41: महत्वाकांक्षा की क्षुधा ******************* अपनी जिद की बलि वेदी पर, नौनिहालो को कुर्वान मत होने दो । अपनी महत्वाकांक्षा की क्षुधा को , बस शान्त रहने दो ।। अधूरे स्वप्न अपने वंश के , […]

एक तो तुम बड़ी मुश्किल से मुस्कुराती हो, दूसरा मन ही मन में सारे गम छुपाती हो। जब कभी चाँद को बादल चुरा सा लेता है, तब हमें रोशनी बन रास्ता दिखाती हो।

*कृष्ण लीला* तू दधि चोर तो; तोही न छोडूं, पकड़ बांह तोरे; कान मरोड़ूँ ! लल्ला मेरो मोही हिय ते प्यारा तोसे कुढ़त गोकुल ब्रिज सारा *खा सौं अब तू मोरी,* *न करिहउँ अब मै […]

परिश्रम की अग्नि में तपकर सफलता का रंग बिखरता है काटों का भी संग देखो ,फूलों को नहीं अखरता है इस दुनिया में कुछ करके दिखाओ दिन जल्दी जल्दी ढलता है बीज भी तो मिट्टी […]

बहुत ढूंढा, बहुत कोशिश की, बहुत आवाज लगाई। लेकिन वह वापस ना आया, वह बचपन था मेरे भाई। गांव की गलियों में खेलना, कूदना, दौड़ना, भागना, गलती छुपाने के लिए हर बात पर, मां की […]

बारह बरस की कोमल कली थी, अपने ही घर पर, पर, अकेली थी। जाने कहां से आए थे दानव, दानव ही थे वो, बस दिखते थे मानव। कोयल सी बोली थी, दिखने में भोली थी, […]

यह संसार बदलाव का है और पल पल बदलता रहा है कोई मिलता है कोई बिछुड़ता, चक्र ऐसा ही चलता रहा है। वश किसी का रहा है न इसमें वश किसी न इसमें रहेगा, जिंदगी […]

जो सोचते हैं कि उन्होंने सच को भागने पर मजबूर कर दिया अब झूठ के सहारे फिर बुलंदियों पर चढ़ जायेंगे वो भूल जाते हैं कि सच सच है सच की ही सत्ता है, एक […]

दानव तो है, यूं ही बदनाम ग्रंथ-पुराणों में , मैंने देखा है,शैतान! इंसानों में। रूह कांप जाए; हृदय फट जाए, हैवानियत की हदें पैर फैलाए‌। शर्मसार होती है मानवता ; सुर्ख़ियों के गलियारों में, मैंने […]