तेरी आरजू का कैसा ये असर है? ख्वाबों का सफर भी जैसे एक कहर है! जिन्दगी बेचैन है चाहत में हरपल, धड़कनों में शामिल यादों की लहर है! मुक्तककार- #महादेव'(22)

साँसें अपनी रोक कर तुझे छूने की तमन्ना, और हल्का सा छू कर ख़ुशी ख़ुशी वापस लौट आना जैसे की सारा जहाँ जीत लिया हो,     इसी को कबड्डी कहते है…..?? कभी कभी खेल कूद भी लिया करो, मोहब्बत के मरीजों…………??

दौर-ए-सितम में सभी यार चले जाते हैं! दौरे-ए-सितम में वफादार चले जाते हैं! हर आदमी की जिन्दगी लेती है करवटें, हौसले मंजिल के बेकार चले जाते हैं! मुक्तककार- #महादेव’

न वो वक़्त रहा न याद है क़िस्सा कोई। मेरे हिस्से में ही नहीं है मेरा हिस्सा कोई।। , ये किया है ख़िज़ाँओ ने जहाँ घर अपना। गुजरे जमानों में था यही गुलिस्ताँ कोई।। , […]

गला भरा है , दिल जला है, आँखों का सागर भरा है चुभे जो तेेरे शब्द तीर , दिल का जख्म अब तक हरा है ।। मान के बैठा तुझे मैं, दोस्ती का नाम दूजा, मित्रता के इस मंदिर में मैने की थी तेरी ही पूजा धूप में तेरी छाँव बना तो, काँटों में तेरा पाँव बना महकाई बस्ती गुलाबों की , पर आज तेरे अल्फाजों का घाव बना पराया हूँ तेरे लिए , सुन यार तेरा सौ बार मरा है चुभे जो तेरे…… सुना लगा बैठी तू दिल किसी से,  पर एक बात मुझे सताएगी दोस्ती ही ना निभा पायी, तू प्यार कैसे निभाएगी कमजोर बनाती आशिक़ी पगली , दोस्ती तो दिलों की ताकत है पर मिले गर तुझे प्यार में धोखा , तेरे दोस्त का कन्धा सलामत है देख सैलाब मेरी आँखों का, अब समंदर भी डरा है चुभे जो तेरे….  

मेरी बातों में बस तुम थी , मगर मेरी बात कम आंकी तेरे यारों के कुनबे में , मेरी जात कम आंकी अपने अल्फाजों से मुझे दो पल में पराया करने वाले तूने प्यार के […]

भरी हो हुस्न से महफ़िल , तुझ बिन बात नहीं होती गरजते हो घने बादल , मगर बरसात नहीं होती रचायी ना हो मेहँदी तो , दुल्हन खास नहीं होती सितारे व्यर्थ ही चमके यूँ […]

वो कहता था ,की सोनिये तेरी आंखां तो काजल जच्चदा सी, फेर मैंने वी पूछ लिया मुझे क्यों रुला कर तू चला गया। मैंने पूछा क्यों चूम जाते हो होंठो को यूँ तुम, वो मरजाना […]

चला जा रहा हूँ , दूर बनके मुसाफिर करके हौंसले मजबूत , आँखों को किये काफिर . कैसा है ये सफर , जहाँ मंजिल का भी पता नहीं , कहाँ चला जा रहा हूँ मैं […]

Being a civil engineer,for all civil engineers…hahahaha.. गुजारी है ज़िन्दगी मैंने , सीमेंट और रेत मिलाने में कैसे भला कोई इश्क़ करे, हम मजदूरों के घराने में अब खुद के सपनों का घर बसाने की […]

टूट कर ही जुड़ा हूँ यूँही नहीं बना हूँ मैं, गिरा हूँ सौ बार फिर सौ बार उठा हूँ, यूँही नहीं सीधा खड़ा हूँ मैं, बिखरा हूँ कभी सूखे पत्तों की तरह, तो काटों सा […]

भ्रमर कितना ही फैलाएं पर, उड़ना तो बस तितलियों को आता है चुप रहकर भी सब कुछ कहना, इनकी कत्थई अँखियों को आता है और नादान थे, नादान ही रहेंगे लड़के, जवान होना तो बस […]

तेरी जुदाई से मैं हरपल डर रहा हूँ! तेरी बेरुखी से मैं हरपल मर रहा हूँ! कबसे भटक रहा हूँ मैं तेरे ख्यालों में, शामें-मय़कशी तेरे नाम कर रहा हूँ! मुक्तककार- #महादेव’

यहाँ आमो का सस्ते मे बिकना आम बात नहीं, लेकिन इंसानो का बिकना आम है ! यहां महफ़िलो के काफिले होना आम बात नहीं, लेकिन हर किसी का तन्हा होना आम है ! यहां रोते […]

लगे मैले हर साल, मालायें भी पहनायी फूलों की पथरायी मूर्तियों को कई बार मगर पत्थर की मूरत कभी मुस्कुराई नहीं कभी एक भी बार पता नहीं क्यों!     Please like & share my […]

सहम गया है चाँद भी देखो, उतरी जब दुल्हन की डोली रे मन को भायी जैसे बजायी कहीं मोहन ने मुरली रे बहके हैं सब देखो जैसे , पूरी मधुशाला पी ली रे कैसे संभालेगा […]

सहम गया है चाँद भी देखो, जब उतरी की डोली रे मन को भायी जैसे बजायी कहीं मोहन ने मुरली रे बहके हैं देखो सब जैसे , पूरी मधुशाला पी ली रे कैसे संभालेगा खुद […]

यूँ तो रिश्ते रोज़ ही बनते हैं इस जहां में कुछ टूट जाते हैं कुछ बिक भी जाते हैं लेकर बहाने तरह–तरह के लेकिन टिकते हैं रिश्ते वो ही जिन रिश्‍तों में दोनो पक्षों ने […]

जिसको जरूरत होती है वही साथ चलता है बिन जरूरत वाला तो बस तनक़ीद करने को ही मिलता है।   अपना मतलब न सोचे दूसरे की मदद करते वक़्त आज़ इस दुनियाँ में ऐसा इंसान […]

किसी के इश्क़ में जगती है तू तेरे नैन कहते हैं किसी ने कुछ नहीं समझा मगर तुझे हम समझते हैं यहाँ सब लोग कहते हैं कि तू चंदा सी रोशन है मगर चंदा की […]

जो मेरा हो नहीं पाया , मैं उसको याद करता हूँ , फिर उसको भुलाने की भी मैं फ़रियाद करता हूँ भुलाने के उसे मैं सौ बहाने ढूंढ लूँ चाहे उसी का जिक्र सबसे मैं […]

खुद से दूर क्यूँ तुम हो , बड़े मगरूर क्यूँ तुम हो जो तेरा है नहीं उसके ,  नशे में चूर क्यूँ तुम हो तेरी मायूसी दिखती है , घनी रातों के साये में यूँ […]

तेरे लिए मैं अपना ठिकाना भूल जाता हूँ! तेरे लिए मैं अपना जमाना भूल जाता हूँ! मदहोश हो चुका हूँ तेरी चाहत में इतना, तेरे लिए जाम का पैमाना भूल जाता हूँ! मुक्तककार- #महादेव'(26)

कैद अपने ही घरों में हमारी आजादी रही थी, सूनी परिचय के बिन जैसे कोई कहानी रही थी, आसमाँ खाली रहा हो परिंदों की मौजूदगी के बगैर, कुछ इसी तरह मेरे भारत की जवानी रही […]

कुछ मेरी औकात नहीं , कि तुझ पर कलाम चलाऊं मैं कुर्बानी तेरी करे बयां , वो शब्द कहाँ से लाऊं मैं नाम तेरा लेने से पहले पलकों को झपकाउं मैं भूल गए जिन पन्नो […]

कुछ मेरी औकात नहीं , कि तुझ पर कलाम चलाऊं मैं कुर्बानी तेरी करे बयां , वो शब्द कहाँ से लाऊं मैं नाम तेरा लेने से पहले पलकों को झपकाउं मैं भूल गए जिन पन्नो […]

“एक ये भी होली है एक वो भी होली थी जो शहीदों ने खेली थी, देश को आज़ाद कराने की ख़ातिर…मेरी कविता 23 मार्च पर शहीद दिवस के उपलक्ष्य में शहीदों को नमन करती है…..” […]

एक बार मैं गरीबी से तंग आकर ऐसा सोचने लगा कुछ नहीं दिया भगवान तूने मुझे ऐसा कहकर उसे कोसने लगा फिर दूसरी और नजर गुमाई मैने दो व्यक्तियो को देखा एक के पास आंखे नहीं थी और के पास टाँगे […]

सफ़र फासलों का है ये बड़ा दर्द भरा, गर हो मुम्किन,तो कोई और अज़ाब दो ना बड़ा नहीं देखूँगा तेरी सूरत मैं कभी, इन आँखों को कोई और पता दो ना ज़रा बातों-बातों में बनी […]

हम तेरे वादों की जब गहराई में उतरे। सदमा सा लगा जब सच्चाई में उतरे।। , तुमको ढूंढते रहें थे महफिल महफिल। पर सुकून मिला जब तन्हाई में उतरे।। , जिसनें चाहा जैसा वैसा बनाया […]

नहीं नहीं अब सही ना जाये ये बेरण तन्हाई मुझसे भी कोई प्यार करे करे थोड़ी दिल की लगाई   जहर हो चूका जीवन सारा , रीता कलश है पूरा भर के कोई प्यार का […]

भीड़ भरी इस तन्हाई में जीना एक अलग नज़रिए के साथ कितना जरुरी बन गया दिन–ब–दिन बदलता यहां हर मुकाम मुझे ये जाहिर कर गया।   शोर भरे सन्नाटे में कैसे मैं ढ़ल गाया ये […]

। भगत सिंह और राजगुरु के संघर्षों बलिदानों की, ये धरती है वीर बहादुर चौड़ी छाती वालों की, ब्रिटिश राज को धूमिल कर मिट्टी में मिलाने वालों की, माँ के आँचल को छोड़ तिरंगे की […]

इक अरसे से कोई ख्वाब नहीं देखा हमने। जब से तुम गए आफ़ताब नहीं देखा हमने।। , लफ्ज़ दर लफ्ज़ हम क्या क्या नहीं हुए थे। पर खुद का लिखा किताब नहीं देखा हमने।। , […]

उसके दर्द को क्या करू बया … उसकी रूह की  चीखें  गूंज रही … उसके आसुओ का इन्साफ मागने वाले …. उसे अपना  सकेगे ये वो खुद से  पूछ रही …. उसे दिया जिस जिस […]

दिया जल कर कभी बुझने नहीं दिया उम्मीद का.. भुला कर खुद को कर दिया रोशन नारी ने जिस जहाँ को.. काश वो कभी खुद भी उस जहा में सम्मान से जी पाती.. हर रिश्ते […]

‘आजादी’ आखिर क्या है आजादी होना क्या होता है आज़ाद होना ईमान से आज़ाद हो गए, थाम दामन बेइमान हो गए हम प्यार से आज़ाद हो गए, अदावत पर फ़िदा हो गए हम शहीदी को […]