जो मेरा हो नहीं पाया , मैं उसको याद करता हूँ , फिर उसको भुलाने की भी मैं फ़रियाद करता हूँ भुलाने के उसे मैं सौ बहाने ढूंढ लूँ चाहे उसी का जिक्र सबसे मैं […]
जो मेरा हो नहीं पाया , मैं उसको याद करता हूँ , फिर उसको भुलाने की भी मैं फ़रियाद करता हूँ भुलाने के उसे मैं सौ बहाने ढूंढ लूँ चाहे उसी का जिक्र सबसे मैं […]
खुद से दूर क्यूँ तुम हो , बड़े मगरूर क्यूँ तुम हो जो तेरा है नहीं उसके , नशे में चूर क्यूँ तुम हो तेरी मायूसी दिखती है , घनी रातों के साये में यूँ […]
तेरे लिए मैं अपना ठिकाना भूल जाता हूँ! तेरे लिए मैं अपना जमाना भूल जाता हूँ! मदहोश हो चुका हूँ तेरी चाहत में इतना, तेरे लिए जाम का पैमाना भूल जाता हूँ! मुक्तककार- #महादेव'(26)
कैद अपने ही घरों में हमारी आजादी रही थी, सूनी परिचय के बिन जैसे कोई कहानी रही थी, आसमाँ खाली रहा हो परिंदों की मौजूदगी के बगैर, कुछ इसी तरह मेरे भारत की जवानी रही […]
उकेरे कई चित्र प्राण के पृष्ठ पर, सब मिट-मिट गए एक तू ही सजा। रंग की कुचियाँ सब हुई बावली, रंग कोई नहीं मुझमें भर सका। अर्चना वर्मा
कुछ मेरी औकात नहीं , कि तुझ पर कलाम चलाऊं मैं कुर्बानी तेरी करे बयां , वो शब्द कहाँ से लाऊं मैं नाम तेरा लेने से पहले पलकों को झपकाउं मैं भूल गए जिन पन्नो […]
कुछ मेरी औकात नहीं , कि तुझ पर कलाम चलाऊं मैं कुर्बानी तेरी करे बयां , वो शब्द कहाँ से लाऊं मैं नाम तेरा लेने से पहले पलकों को झपकाउं मैं भूल गए जिन पन्नो […]
“एक ये भी होली है एक वो भी होली थी जो शहीदों ने खेली थी, देश को आज़ाद कराने की ख़ातिर…मेरी कविता 23 मार्च पर शहीद दिवस के उपलक्ष्य में शहीदों को नमन करती है…..” […]
एक बार मैं गरीबी से तंग आकर ऐसा सोचने लगा कुछ नहीं दिया भगवान तूने मुझे ऐसा कहकर उसे कोसने लगा फिर दूसरी और नजर गुमाई मैने दो व्यक्तियो को देखा एक के पास आंखे नहीं थी और के पास टाँगे […]
सफ़र फासलों का है ये बड़ा दर्द भरा, गर हो मुम्किन,तो कोई और अज़ाब दो ना बड़ा नहीं देखूँगा तेरी सूरत मैं कभी, इन आँखों को कोई और पता दो ना ज़रा बातों-बातों में बनी […]
हम तेरे वादों की जब गहराई में उतरे। सदमा सा लगा जब सच्चाई में उतरे।। , तुमको ढूंढते रहें थे महफिल महफिल। पर सुकून मिला जब तन्हाई में उतरे।। , जिसनें चाहा जैसा वैसा बनाया […]
सूरज भी ढल गया आँचल में , उठ गया घूंघट भी चाँद का कब आओगी ए जाने जिगर , टूट रहा है सब्र इन्तजार का बरस रहे है बादल आँखों से , इंतज़ार है इंतज़ार […]
नहीं नहीं अब सही ना जाये ये बेरण तन्हाई मुझसे भी कोई प्यार करे करे थोड़ी दिल की लगाई जहर हो चूका जीवन सारा , रीता कलश है पूरा भर के कोई प्यार का […]
भीड़ भरी इस तन्हाई में जीना एक अलग नज़रिए के साथ कितना जरुरी बन गया दिन–ब–दिन बदलता यहां हर मुकाम मुझे ये जाहिर कर गया। शोर भरे सन्नाटे में कैसे मैं ढ़ल गाया ये […]
। भगत सिंह और राजगुरु के संघर्षों बलिदानों की, ये धरती है वीर बहादुर चौड़ी छाती वालों की, ब्रिटिश राज को धूमिल कर मिट्टी में मिलाने वालों की, माँ के आँचल को छोड़ तिरंगे की […]
इक अरसे से कोई ख्वाब नहीं देखा हमने। जब से तुम गए आफ़ताब नहीं देखा हमने।। , लफ्ज़ दर लफ्ज़ हम क्या क्या नहीं हुए थे। पर खुद का लिखा किताब नहीं देखा हमने।। , […]
उसके दर्द को क्या करू बया … उसकी रूह की चीखें गूंज रही … उसके आसुओ का इन्साफ मागने वाले …. उसे अपना सकेगे ये वो खुद से पूछ रही …. उसे दिया जिस जिस […]
दिया जल कर कभी बुझने नहीं दिया उम्मीद का.. भुला कर खुद को कर दिया रोशन नारी ने जिस जहाँ को.. काश वो कभी खुद भी उस जहा में सम्मान से जी पाती.. हर रिश्ते […]
‘आजादी’ आखिर क्या है आजादी होना क्या होता है आज़ाद होना ईमान से आज़ाद हो गए, थाम दामन बेइमान हो गए हम प्यार से आज़ाद हो गए, अदावत पर फ़िदा हो गए हम शहीदी को […]
वो माटी के लाल हमारे, जिनके फौलादी सीने थे, अडिग इरादो ने जिनके, आजादी के सपने बूने थे, हाहाकार करती मानवता, जूल्मो-सितम से आतंकित थी जनता, भारत माता की परतंत्रता ने उनको झकझोरा था, हँसते-हँसते […]
हृदय–पटल पर नृत्यमय नुपुर झनक से झंकृत हूँ विस्मित मैं मधु-स्वर से विह्वल अभिराम को आह्लादित तिमिर अंतस को कर धवल— कनक–खनक करके उज्जवल सारंग–सा हो भाव प्रज्जवलित सोम–सुधा सा रुप लक्षित दृग–कामना भी छलक […]
है ज़िन्दगी कहीं हर्ष,कहीं संघर्ष कभी दुःखों की अवनति,कभी खुशियों का उत्कर्ष ऐश्वर्य है ज़िन्दगी,कहीं है ज़िन्दगी परिश्रम ज़िन्दगी का अर्थ लगाना ही–है मन का भ्रम कहीं ज़िन्दगी बन जाती प्यार,कहीं नफ़रत मानवता का पर्याय […]
उस हसीं के चेहरे पर बस हंसी देखने की ख्वाहिश थी , तो उसे हंसाने में कोई कसर हमने भी ना छोड़ी हंसाते हंसाते खुद हंसी बन गया मैं , की मेरे दिल की बात भी […]
हुए बहुत लोग शहीद मेरे देश को बचाने को, पर उन “शहीदों” की “शहीदी” आज खुद शहीद सी लगती है। देश में हो रहे हंगामो में खुद कही गुम सी लगती हैं। जिस दिन औरत-आदमी […]
अंग्रेज रूपी कंश हेतु वह तो कृष्ण कलेवर था , करतूश को भोजन माना फंशी को जेवर था , वतन के लिये डर न पाया जेल की काली रातो से, उसका वर्णन करू मैं कैसे […]
use pyar karna nahi ata or mujhe pyar ke siva kuch nahi ata, duniya me jeene ke do hi tarike hai , ek use nahi ata , ek mujhe nahi ata….
किस्मत हमारी लटक रही है जैसे पाव में पायल , भारत माँ विलख रही है जैसे दीन-दुखी घायल , जिस आँचल में पले- बढे उसमे बम- गोले फुट रहे है , एक सिरे से खुद […]
mai sab kuch hu tera lekin, mai tera kuch nahi lagta bahut kuch pa liya hai phir bhee khali khali sa lagta tujhe pane ki koshish kar raha barso se hoo lekin tu mujhko kho […]
एक ही झटके में सबकुछ समझ जाओ तुम मेरा जीवन ऐसी कोई खुली किताब नहीं राह हासिल करने को गंदी नाली को स्वीकारले ऐसा ये कोई बेवकूफ आब नहीं। -कुमार बन्टी
आँखों से निकले आंसू , तो दुनिया ने कायर कह डाला , जब बह निकले ये लबों के रस्ते, दुनिया ने शायर कह डाला ।।
तेरा दूर-दूर का रहना ले जाये मोर चैना तेरी रहा तकै है अंखिया ताने देती घर गालिया तेरी राह तकै हुए बरसो अब छोड़ भी कल परसो तेरी सोच मे बीती रैना मोर लोटा अब […]
क्यूं बह रहे अश्रु चक्षु से , तान भृकुटि जन जन की फैला भ्रष्ट मेघों का साया , नहीं आवश्यकता व्यर्थ रुदन की सियासी भेड़िये बने नरभक्षी , जब लाज गिरा दी सिंघासन की हो […]
क्यूं बह रहे अश्रु चक्षु से , तान भृकुटि जन जन की फैला भ्रष्ट मेघों का साया , नहीं आवश्यकता व्यर्थ रुदन की सियासी भेड़िये बने नरभक्षी , जब लाज गिरा दी सिंघासन की हो […]
जब जब भारत के इतिहास के पन्ने पलटे जायेंगे, भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरु के नाम भी लिए जायेंगे ! ये वो हैं जिन्होंने अंग्रेजों की ईंट से ईंट बजा दी थी, भारत माँ के लिये अपने प्राणों […]
जब जब भारत के इतिहास के पन्ने पलटे जायेंगे, भगत सिंह,सुखदेव,राजगुरु के नाम भी लिए जायेंगे ! ये वो हैं जिन्होंने अंग्रेजों की ईंट से ईंट बजा दी थी, भारत माँ के लिये अपने प्राणों […]
चल प्यार ना कर , एक बहाना ही बना ले , टूटा जहाँ से दिल तेरा , उस जख्म की दवा बना ले , कहते है दोस्ती दुनिया में सबसे बढ़कर है , उस रिश्ते […]
दिल का मंदिर वीरान है , तेरी तस्वीर लगा लूँ , बैठा रहूँ बस सजदे में , तुझे वो देवता बनल लूँ , परवाह नहीं मुझे जग की फिर , गर तेरे दिल में जगह […]
कई बार वक्त का मैं निशान देखता हूँ! कई बार मंजिलों का श्मशान देखता हूँ! दर्द की दहलीज पर बिखरा हूँ बार-बार, कई बार सब्र का इम्तिहान देखता हूँ! मुक्तककार- #महादेव’
E Hasina kya gajab dha diya tune, is sidhe sadhe insna ko asiq bana diys tune… ankhno m ek khwab sa jaga diya tune, is sidhe sadhe insna ko asiq bana diys tune… na tha […]
भगत सिंह, शिव राज गुरु, सुखदेव सभी बलिदान हुए, इस धरती माँ की खातिर कितने ही अमर नाम हुए, ब्रिटिश राज की साख मिटाने को एक जुट मिटटी के लाल हुए, कभी सीने पर गोली […]
“एक ये भी होली है एक वो भी होली थी जो शहीदों ने खेली थी, देश को आज़ाद कराने की ख़ातिर…मेरी कविता 23 मार्च पर शहीद दिवस के उपलक्ष्य में शहीदों को नमन करती है…..” […]
वज़न उठता नहीं तुमसे दो मण भी कहां गई शक्ति तुम्हारे यौवन की और कहां है अभिव्यक्ति तुम्हारे मन की। चलो ये वज़न तो तुम भारी कह सकते हो इससे इंकार भी कर दो […]
कविता—क्या बताता तब आधी रात होने की कगार पर खड़ी थी लेकिन वो थी कि अपने सवाल पर अडी थी पूंछती थी कितनी मोहब्बत मुझसे करते हो सब झूठा खेल है या सच में मुझपर […]
ye sanskaro ka bhi kya khob najara hai humare maa baap ne hume paida kiya or ek din hume hi unki chita ko jalana hai ye sankaro ka bhi kya khub najara hai ye 5 […]
तेरी देहलीज टपने खातिर काफी दिनों से कुछ किया ही नहीं। ऐसा लगा मानो जिंदा रहके भी इस दौरान मैं जिया ही नहीं।
मेरी उदासी भी मेरे लिए बन गई खूबसूरत ये किसीका कोई असर ही है खूबसूरत। लेकर बैठा रहता मैं जब अपनी रोनी सूरत उस वक़्त भी गढ़ी जा रही होती मेरे भीतर उसकी कोई […]
तुम बार बार नजरों में आया न करो! तुम बार बार मुझको तड़पाया न करो! जिन्दा है अभी जख्म गमें-बेरुखी का, तुम बार बार दर्द को बुलाया न करो! मुक्तककार- #महादेव'(22)
जाने क्यों नदिया सागर से मिल जाती है , मिलो का रास्ता तय कर सागर को मंजिल क्यों बनाती है ! पवित्र है, पावन है, निर्मल जल की धारा है, खारे पानी मे मिलना जाने […]
एक सुबह दे दे ऐसी , जो मेरा इंसाफ क़र दे! एक शाम बीता दे ऐसी , जो मेरे गुनाह माफ़ कर दे ! तमाशा बहुत हो गया बनने और बिगड़ने का, अब तो कोई […]
कुछ न कुछ दिल में चलता रहता है। इक ख़्वाब अनदेखा पलता रहता है।। , क़िस्मत कहें की मुक़द्दर कहें उसको। जो नाम सुबह शाम खलता रहता है।। , वक़्त गुजरा है कुछ इस तरह […]
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