saliqe se hawaon mein jo khushbu ghol sakte hain

सलीक़े से हवाओं में जो ख़ुशबू घोल सकते हैं
अभी कुछ लोग बाक़ी हैं जो उर्दू बोल सकते हैं

~ मुहम्मद आसिफ अली

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