राह में काँटे बिछाना काम है उसका मेरे दिल को दुःखाना काम है उसका मैं हँस देती हूँ जो जरा-सा देखकर उसको मेरी हँसी से जल जाना काम है उसका

इल्जाम हमीं पर लगा देते हो मोहब्बत का पर शुरुआत तुमने ही की थी हसीन कितने हो ये जानते नहीं क्या ! दिल में दस्तक तुमने ही दी थी नखरे हजार अब दिखाते हैं हम […]

नन्ही-सी परी मेरी लाडली अब बड़ी हो गई बैग लेकर स्कूल पढ़ने जाने लगी हाथों में कॉपी पेन लेकर लिखने लगी अंग्रेजी में कविता सुनाने लगी आँखों में उसके हैं अनगिनत सपनें मेरी आँखों में […]

उसने हमें जीवन दिया ताकि हम उसकी बनाई दुनिया को और खुबसूरत बनाए । हमने उसी जीवन को किसी और लक्ष्य में लगा दिया, भगवान हंसे कहा ,”तू कब समझेंगा ऐ बंदे !” ।। उसने […]

ना आना हाथों की लकीरों के फरेब में, ज्योतिषी की दुकानों पर, मुकद्दर नहीं बिकता.. तदबीरों से बनाए जाते हैं मुकद्दर, तक़दीर खुद ही आ जाए रफ्ता रफ्ता..

चलो एक होड़ लगाएं, खुद से, खुद को बेहतर बनाने की , झूठ से , फरेब से, ईर्ष्या से, द्वेष से, छुटकारा पाने की, चलो एक होड़ लगाएं , बड़े चाव से , पाक इंसान […]

चलो ऐसा एक ज़हान बनाएं, जहां नहीं होगी , आदमी को आदमी से नफरत, नेकी की राह, नेकी हो सबमें, प्रेम हो सबसे, प्यार की हसरत, कदर करता हो, जहां हर कोई , हर किसी […]

नैतिकता को पढ़ना-सुनना, अक्सर बहुत अच्छा लागे, सबपर पूरा असर , पूरा समर्थन, मगर आचरण में सबके क्यों नहीं? यह सवाल विचित्र-सा, काल्पनिक-सा…..

मेरी बेबसी को मशहूर ना कर, माना बड़ा जालिम है तू जमाने, फिर भी मजबूर ना कर, और मजबूत है बहुत हम अंदर से, माना टूटे हुए दिखते हैं, तू मजबूर ना कर! अक्सर मजबूर […]

जीवन जुड़ा दर्द लिखना जीवन से जुड़ा दर्द पढ़ना मेरी आदत में शामिल है सच कहना, सच को ही सुनना। कवि कुछ सच्ची कविता कह दो जिसमें जीवन की पीड़ा उभरे वो घाव भरने ही […]

सबसे अच्छी औषधि मुस्कान है, इसका नहीं कोई भी नुक़सान है मेरी यह दुआ है आपके लिए, ये औषधि सदा आपके पास रहे.. *****✍️गीता*****

वृद्धाश्रम में छोड़कर बूढ़े पिता को लौट आया घर, जरा सा चैन पाया मुस्का रही अर्धांगिनी ने जल पिलाया आज उसकी रुचि भरा भोजन बनाया। बोली बड़ी आफत हुई है दूर हमसे खांसी की आवाजों […]

चलो आज अपने घर को ऐसा घर बनाते हैं जिसमे बड़े पेड़ के नीचे , नए पौधों को पनपने का सुख दे, खुशी से जिंदगी बिताते हैं, चलो आज अपने घर को ऐसा घर बनाते […]

बहुत कोशिश की मैने तुम से दूर जाने की हर कोशिश जाया ही जाती रही हरदम तुम ही दिखाई देते हो, आँखे बंद कर के भी । गजब का अहसास है तेरा रह पाता नहीं […]

अभिव्यक्ति बस दिल से:- ************** रोते नहीं हैं हम बस सिसकते रहते हैं तेरी यादों में आहें हम भरते रहते हैं नासमझ है तू जो नहीं चाहता मुझको ना जाने कितने दिल हैं जो मेरी […]

दिनकर ऐसा सूर्य है जिसने हिन्दी जगत को अपनी लेखनी की किरणों से चमकाया देशहित में लिखकर देश का गौरव खूब बढ़ाया जिनके सूर्यातप के आगे शशि भी मलिन हो जाए ऐसे राष्ट्रकवि को प्रज्ञा […]

हिन्दी साहित्य के कर्णधार हे हे प्रकाशपुंज नक्षत्र हे दिनकर । हे राष्ट्रकवि आजादी के योद्घा रामधारीसिंह के जन्मदिवस पर।। पद पंकज में दे पुष्पांजलि हम प्रणमति शीश झुकाते हैं। हिन्दी के साहित्य उपासकों हम […]

ड्रग्स रैकेट से देश होता जा रहा है छिन्न-भिन्न कहाँ से शुरू हुई थी सुशांत की कहानी जाकर कहाँ पहुँची सितारों की जिन्दगानी मर रहा है देश का भविष्य गरीबी में ड्रग्स लिए जाते हैं […]

एक दौर हुआ करता था जब नित वंदन करता था नन्दन.. पिता के चरण दबाकर ही शयनकक्ष में जाता था नित उठकर मात-पिता को अभिनन्दन करता था नन्दन… अब समय हुआ परिवर्तित आई कलयुग की […]

किश्तों में ही मिली, तेरी मुहब्बत हमें। जो ना मासिक थी, न ही सालाना। पल दो पल की मुलाकातें थीं। ना रूठना हुआ, ना मनाना। कभी एक-मुश्त मिले होते, तो हम करते जी भर के […]

सही मायने में उजाला है, जहां बेटियों ने मां-बाप को संभाला है। चाहे मां पिता हो या मां पिता से सास-ससुर, उन्हीं से ही परिवार का सवेरा है।

साई भजन – तुही तू है | साई तेरी दुआ से दुनिया मे रोशनी है | गर कर दे तू करम यहा कुछ नहीं कमी है | तेरी रहमतों से कायम ये दुनिया जहा है […]

दुख के क्षणों में जो शख्श ऊबता नहीं सुख के क्षणों में अपनो को भूलता नहीं पुरुषों में है सदियों से ही अज्ञानता गलत संगत से निज ज्ञान भी ढका औरों की बात मन में […]

जीवनबाबु अपने मोहल्ले में प्रतिष्ठत व्यक्ति थे। वह एक साहित्यकार भी थे। हमेशा किसी न किसी पत्र व पत्रिकाओं के लिए रचनाएं तैयार करते थे। उनकी पत्नी रुपा इतनी सुंदर थी कि वह कभी कभार […]

किट्टी पार्टी हो या हो कोई गेट – टुगेदर , बिना फ्रेंड्स के ना हो ये पॉसिबल कमी कहीं पर देखें तो…. झड़ी लगा दें खुशियों की, दोस्त जीवन में निहायत ही ज़रूरी, फ्रेंड्स के […]

मेरी बिटिया रानी, क्या वह चाहे, व वह ही जाने। हम उसकी, सदा ही माने। इशारों में भी, इतराती है। हम सब पर, रोब जमाती है। कभी इधर, कभी उधर, वो भागे। ना जाने, उसको […]