दुखी वही है जिसका वर्तमान खोया है कल जो बीत गया कल जो आने वाला है दो कल के अदृश्य महलों में मन विचरता रहता है मन कितना निष्ठुर है खुद देख लो, दो कल […]
दुखी वही है जिसका वर्तमान खोया है कल जो बीत गया कल जो आने वाला है दो कल के अदृश्य महलों में मन विचरता रहता है मन कितना निष्ठुर है खुद देख लो, दो कल […]
रोती हैं ख्वाहिशे और तन्हाई मुस्कुराती है **************************** जब कभी भी हम तुझको याद किया करते हैं।
रात-दिन रहते थे हम एक-दूजे के साये में **************************** एक-दूजे के तन से हम बदन को ढका करते थे।
आप चाहते तो हालात बदल सकते थे, आप के आंसू मेरी आंखो से निकल सकते थे । मगर आप तो ठहर गए झील के पानी की तरह, दरिया बनते तो बहुत दूर निकल सकते थे।
चाँद में दाग है ये वो बार-बार कहता था हम चाँद को बेदाग कहा करते थे वो मेरी हर एक बात मान जाता था हम हर एक बात पे उससे सवाल करते थे।
जब से देखा तुमको ऐ सनम, हमसे ही दिल हमारा नहीं जाए संभाला । रात आंखों में ही कट जाती है, लगता है नींद ने आंखों से रिश्ता ही तोड़ डाला।
छुप-छुप के देखती थी मुझको जब नजर उसकी —————————————- तब कितना खुद पे हम गुरुर किया करते थे।
रोज-रोज रूठती थी मैं और वह मनाता था —————————————- अपनी जवानी के ये अंदाज हुआ करते थे।
तेरे इश्क का जुनून मेरे रग रग में बस गया है। ये एहसास मुझे अब हद से ज्यादा होने लगा है।
उसकी दीद में ही मेरी ईद हुआ करती थी —————————————— हम कुरान उसकी इबादत में पढ़ा करते थे।
कल तलक फिरता था वह मेरा बनके दीवाना हम आंखों ही आंखों में बात किया करते थे आज बहुत दूर है वो हमसे मगर फिर भी हम सपनों में उनसे रोज़ मिला करते हैं।
नींदें हैं आजकल ना जाने क्यों रूठी हमसे वो मिलेगा तो यह गुत्थी भी सुलझा लेंगे
दीद हो जाएगी तो बातें चार कर लेंगे रोना आएगा तो उसके कंधे पर सिर रख लेंगे वह जाने लगेगा रूठ कर अगर हमसे हम मनाने के लिए उसके पैर पड़ लेंगे।
उनके आने से मेरा जहान जगमगाया था उनके जाने के खयाल से भी पैर डगमगाते हैं, छोड़ जायेंगे एक दिन वो मुझको तन्हा ही यह सोचकर भी हम तो सिहर जाते हैं।
टूट कर चाहने से कुछ भी नहीं होता है, सब खेल मुकद्दर का होता है ये अब समझ पा रही हूँ मैं।
खुशियों की गुल्लक टूट गई जब अपनों से ही शूल मिला विश्वास करें भी तो कैसे जब कांटो में लिपटा फूल मिला। सगे-संबंधियों ने मुंह मोड़ा शायद कुछ हम मांग न ले कहीं मिले तो […]
जिसके बिन जीना एक पल भी ना मुनासिब था ++++++++++++++++++++ उसके बिना पूरी उम्र जिए जा रही हूँ मैं…
उसके होंठों पे बनके मैं गुलाब टूटी हूँ, *********************** अब तो काँटों से भी मैं प्यार किया करती हूँ।
खाक में मिला के उसने मेरे तन को राख किया कब्र में भी उसी को याद किया करती हूँ ।
मैं तो मरती हूँ उसकी एक-एक शोखी पर रूबरू उसको मैं महसूस किया करती हूँ।। अभिव्यक्ति दिल से ❤❤
अक्सर दिल में बैठकर वो बात करता है मैं आजकल ये एहसास किया करती हूँ । अभिव्यक्ति दिल से ❤❤
दीद हो जाए उसकी एक बार मुझको बस *************************** हर आने-जाने वाले पर इसी वाइस मैं नजर रखती हूँ।
कोई आ ना जाए दिल में मेरे रहने को यही सोंचकर दिल के दरवाजे बंद रखती हूँ। एक बार खा चुकी हूँ पहले प्यार में धोखा इसलिए छाछ भी मैं फूंक-फूंक पीती हूँ।
वह चला जाएगा ये सोचकर मैं रोती थी, रात को रात बनाने से अब मैं डरती हूँ। छोड़कर जा चुका है वह तो मुझे बरसों से लौटकर आएगा ये इंतजार करती हूँ।
हमने बिछाई हैं कई बार राह में पलकें वो भी पलट के देखेगा यह उम्मीद नहीं रखती हूँ जब से देखी है सनम की सूरत मैनें तब से मैं चाँद को चाँद नहीं कहती हूँ!!
क्या मंजिले इतनी जरूरी हैं कि रास्तों की कद्र न हो? मुकाम ए जिंदगी पर तो हे दोस्त राहे ही पहुंचाती हैं!
वो तेरा बार-बार दिल दुखाएगा मगर मत रोना तुम तेरी आंखों में आंसू ले आएगा मगर मत रोना तुम उसकी राहों में बिछाओगे तुम दिल अपना वो तुझको अपनाएंगा यह उम्मीद मत रखना तुम।
वो तेरा बार-बार दिल दुख आएगा मगर मत रोना तुम तेरी आंखों में आंसू ले आएगा मगर मत रोना तुम उसकी राहों में बिछाओगे तुम दिल अपना वो तुझको अपनाएंगा यह उम्मीद मत रखना तुम।
भगवान् की कृपा से मैने आमों के पेड़ों से भरा इक घर पाया हरेक पेड़ ने अलग-अलग रंग रूप पाया सबका आकार अलग,महक अलग फ़िजा में अलग ही महक उठी जब पेड़ों पर बौर आया […]
आज किन रंगों से सजा होगा यह दिन क़ोई पल न गुजरे प्रभु तुझ बिन आज किन रंगों से सजा होगा यह दिन क़ोई पल न गुजरे प्रभु तुझ बिन त्राहि त्राहि कर रही तेरी […]
धूप में बाप और चूल्हे पर मां जलती है, तब कहीं जाकर एक औलाद पलती है।
आप पर दो पंक्तियाँ लिखना तो चाहता था, लेकिन न लिख सकूँगा थक सा गया हूँ दिन भर आंखें हैं नींद पथ पर अब कल सुबह लिखूंगा। सपनों में शब्द चुनकर रफ सी करूँगा कविता […]
तुम सदा मुस्कुराती रहो खिलखिलाती रहो, जीवन के आंगन में मेरे नेह बिखराती रहो। तुम्हारे नेह से क्यारी में घर की खूबसूरत फुलवारी सजी है यूँ ही महकाती रहो खुशबू बिखराती रहो।
यारा! तुझ संग जिंदगी गुजारनी है मोहब्बत में तेरी हर शाम महकानी है, तेरे ही नाम से लहराता है आँचल मेरा तेरी दीवानी बन हर रात महकानी है, बिन तेरे प्यासी हूँ मेरे हमसफ़र प्रेम […]
सितमगर सितम देता ही रहा मैं उसे आखिरी समझ कर झेलती रही वह तो मेरे साथ खेल ही रहा था पर मैं भी अपने वजूद के साथ खेलती रही…
मुबारकबाद देते हो मेरी ना कामयाबी की इतना पत्थर दिल तो पत्थर भी नहीं होता….
यूं तो हम किसी की बात का बुरा इतनी जल्दी नहीं मानते पर दिल ही तो है भावनाओं को ठेस पहुंचेगी तो दिल रो ही पड़ेगा।
कितने करीने से सजा कर रखती हूं मैं तुम्हारी यादों को दिल की अलमारी में! और तुम आकर सब एक पल में बिखेर देते हो !!
ताज्जुब है तुम्हारी यादाश्त पर सारी बातें कैसे याद रहती हैं तुम्हें यही सोचती हूं मैं आजकल क्योंकि मैंने तुम्हें कल लफ्ज़ लफ्ज़ याद किया था और आज भूल गई।
आज बड़े दिनों बाद बात की उनसे दिल में ठंडक सी उतर आई गुजरे जमाने की सारी बातें एक-एक करके मस्तक पटल पर खुलने लगी सारे लम्हे सामने आ गये मन सावन की तरह झूम […]
चलो आज अपनी तन्हा जिन्दगी को नया रूप देते हैं सशंकित ह्रदय में फिर से नव उम्मीदों के बीज बोते हैं । रोज की भागदौड़, दोहरे कामों से मन है बेहाल घर-बाहर की जिम्मेदारियां, फिर […]
इश्क़ हम करते कहाँ है ए दिल ही फिसल जाता है। दिल को क्या समझाएं जब देखो बर्बाद हो जाता है।।
ए अमित इश्क़ भी क्या बीमारी हैं। इश्क़ पे वश न हमारी है न तुम्हारी है।।
सोचा था अपनी मुकद्दर को एक नया नज्म देंगे। उन्हीं नज्म के आर में हम उनकी दास्तां लिखेंगे।।
दिन गुजर गए महीने गुजर गए साल गुजर गए। किसी की चाहत में, हम खुद को ही भूल गए।।
नम्रता ही तो है आभूषण हर्षित करता है सबका मन जीवन में कोई अवरोध नहीं प्रगति भी रुकता है कहीं कर्महीन का सहारा भाग्य उत्साही का तो हर दिन सौभाग्य — सब कुछ वह तुरंत […]
तिलक तुम्हारी माया नगरी बदनाम हो रही है। नशा नग्नता गुण्डागर्दी अब सरेआम हो रही है।। चोरों का आतंक नगर में -डर नहीं लगता । ठगों के गिरोह डगर में – डर नहीं लगता।। ड्रग्स […]
आपने पहले अंक में पढ़ा — जीवनबाबु के घर में अन्न के एक दाना तक नहीं है। रुपा एक भारतीय नारी की परंपरा पर चलने वाली है। वह अपने पति को भूखे पेट सोने देना […]
बोल उठती है तस्वीर भी, मन से मना कर देखिए मन की बात , ज़रा प्रभु को, सुना कर देखिए…… मिलते हैं सबकी बातों के जवाब, मन की सुना कर देखिए.. …..✍️गीता…..
मेरी लिखी नज़्म पर , मिलती है सबकी दुआ और क्या तमन्ना करूं, शुक्रिया है शुक्रिया… नज़्म का अर्थ ——- कविता *****✍️गीता*****
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