कोई आ ना जाए दिल में मेरे रहने को यही सोंचकर दिल के दरवाजे बंद रखती हूँ। एक बार खा चुकी हूँ पहले प्यार में धोखा इसलिए छाछ भी मैं फूंक-फूंक पीती हूँ।
कोई आ ना जाए दिल में मेरे रहने को यही सोंचकर दिल के दरवाजे बंद रखती हूँ। एक बार खा चुकी हूँ पहले प्यार में धोखा इसलिए छाछ भी मैं फूंक-फूंक पीती हूँ।
वह चला जाएगा ये सोचकर मैं रोती थी, रात को रात बनाने से अब मैं डरती हूँ। छोड़कर जा चुका है वह तो मुझे बरसों से लौटकर आएगा ये इंतजार करती हूँ।
हमने बिछाई हैं कई बार राह में पलकें वो भी पलट के देखेगा यह उम्मीद नहीं रखती हूँ जब से देखी है सनम की सूरत मैनें तब से मैं चाँद को चाँद नहीं कहती हूँ!!
क्या मंजिले इतनी जरूरी हैं कि रास्तों की कद्र न हो? मुकाम ए जिंदगी पर तो हे दोस्त राहे ही पहुंचाती हैं!
वो तेरा बार-बार दिल दुखाएगा मगर मत रोना तुम तेरी आंखों में आंसू ले आएगा मगर मत रोना तुम उसकी राहों में बिछाओगे तुम दिल अपना वो तुझको अपनाएंगा यह उम्मीद मत रखना तुम।
वो तेरा बार-बार दिल दुख आएगा मगर मत रोना तुम तेरी आंखों में आंसू ले आएगा मगर मत रोना तुम उसकी राहों में बिछाओगे तुम दिल अपना वो तुझको अपनाएंगा यह उम्मीद मत रखना तुम।
भगवान् की कृपा से मैने आमों के पेड़ों से भरा इक घर पाया हरेक पेड़ ने अलग-अलग रंग रूप पाया सबका आकार अलग,महक अलग फ़िजा में अलग ही महक उठी जब पेड़ों पर बौर आया […]
आज किन रंगों से सजा होगा यह दिन क़ोई पल न गुजरे प्रभु तुझ बिन आज किन रंगों से सजा होगा यह दिन क़ोई पल न गुजरे प्रभु तुझ बिन त्राहि त्राहि कर रही तेरी […]
धूप में बाप और चूल्हे पर मां जलती है, तब कहीं जाकर एक औलाद पलती है।
आप पर दो पंक्तियाँ लिखना तो चाहता था, लेकिन न लिख सकूँगा थक सा गया हूँ दिन भर आंखें हैं नींद पथ पर अब कल सुबह लिखूंगा। सपनों में शब्द चुनकर रफ सी करूँगा कविता […]
तुम सदा मुस्कुराती रहो खिलखिलाती रहो, जीवन के आंगन में मेरे नेह बिखराती रहो। तुम्हारे नेह से क्यारी में घर की खूबसूरत फुलवारी सजी है यूँ ही महकाती रहो खुशबू बिखराती रहो।
यारा! तुझ संग जिंदगी गुजारनी है मोहब्बत में तेरी हर शाम महकानी है, तेरे ही नाम से लहराता है आँचल मेरा तेरी दीवानी बन हर रात महकानी है, बिन तेरे प्यासी हूँ मेरे हमसफ़र प्रेम […]
सितमगर सितम देता ही रहा मैं उसे आखिरी समझ कर झेलती रही वह तो मेरे साथ खेल ही रहा था पर मैं भी अपने वजूद के साथ खेलती रही…
मुबारकबाद देते हो मेरी ना कामयाबी की इतना पत्थर दिल तो पत्थर भी नहीं होता….
यूं तो हम किसी की बात का बुरा इतनी जल्दी नहीं मानते पर दिल ही तो है भावनाओं को ठेस पहुंचेगी तो दिल रो ही पड़ेगा।
कितने करीने से सजा कर रखती हूं मैं तुम्हारी यादों को दिल की अलमारी में! और तुम आकर सब एक पल में बिखेर देते हो !!
ताज्जुब है तुम्हारी यादाश्त पर सारी बातें कैसे याद रहती हैं तुम्हें यही सोचती हूं मैं आजकल क्योंकि मैंने तुम्हें कल लफ्ज़ लफ्ज़ याद किया था और आज भूल गई।
आज बड़े दिनों बाद बात की उनसे दिल में ठंडक सी उतर आई गुजरे जमाने की सारी बातें एक-एक करके मस्तक पटल पर खुलने लगी सारे लम्हे सामने आ गये मन सावन की तरह झूम […]
चलो आज अपनी तन्हा जिन्दगी को नया रूप देते हैं सशंकित ह्रदय में फिर से नव उम्मीदों के बीज बोते हैं । रोज की भागदौड़, दोहरे कामों से मन है बेहाल घर-बाहर की जिम्मेदारियां, फिर […]
इश्क़ हम करते कहाँ है ए दिल ही फिसल जाता है। दिल को क्या समझाएं जब देखो बर्बाद हो जाता है।।
ए अमित इश्क़ भी क्या बीमारी हैं। इश्क़ पे वश न हमारी है न तुम्हारी है।।
सोचा था अपनी मुकद्दर को एक नया नज्म देंगे। उन्हीं नज्म के आर में हम उनकी दास्तां लिखेंगे।।
दिन गुजर गए महीने गुजर गए साल गुजर गए। किसी की चाहत में, हम खुद को ही भूल गए।।
नम्रता ही तो है आभूषण हर्षित करता है सबका मन जीवन में कोई अवरोध नहीं प्रगति भी रुकता है कहीं कर्महीन का सहारा भाग्य उत्साही का तो हर दिन सौभाग्य — सब कुछ वह तुरंत […]
तिलक तुम्हारी माया नगरी बदनाम हो रही है। नशा नग्नता गुण्डागर्दी अब सरेआम हो रही है।। चोरों का आतंक नगर में -डर नहीं लगता । ठगों के गिरोह डगर में – डर नहीं लगता।। ड्रग्स […]
आपने पहले अंक में पढ़ा — जीवनबाबु के घर में अन्न के एक दाना तक नहीं है। रुपा एक भारतीय नारी की परंपरा पर चलने वाली है। वह अपने पति को भूखे पेट सोने देना […]
बोल उठती है तस्वीर भी, मन से मना कर देखिए मन की बात , ज़रा प्रभु को, सुना कर देखिए…… मिलते हैं सबकी बातों के जवाब, मन की सुना कर देखिए.. …..✍️गीता…..
मेरी लिखी नज़्म पर , मिलती है सबकी दुआ और क्या तमन्ना करूं, शुक्रिया है शुक्रिया… नज़्म का अर्थ ——- कविता *****✍️गीता*****
मौन की शक्ति को हमने जाना है, मौन की आवाज़ को पहचाना है शब्द जब अपना सामर्थ्य खोने लगें आंखों के अश्क पलकें भिगोने लगें, मौन ने ही मौन को पहचाना है… *****✍️गीता*****
दांतों तले आंचल दबा लेना। उफ़… कहाँ गया वो ज़माना।।
अधरों पर कभी आया तेरा नाम नहीं नयनों में तेरा प्यार छलक आया हमें चाह नहीं तुझे पाने की दूरियाँ ही मुझे रास आया
समझ में बिलकुल नहीं आता ये कैसी फितरत है इनकी जहाँ देखा नफ़ा अपना हाथ थाम ली उनकी । हल्ला मचा करके बस बात रखनी है फिक्र कहाँ इनको, अपनी भेट भरनी है हमारे धरतीपुत्र […]
ए रास्ते ! मिट भी जाओ, अब आंखें मंजिल नहीं ढूंढती , बस रास्ता देखती है ,खत्म होने का।
तुम फिर से मेरी यादों का हिस्सा मत बनो, ना वजह बनो, मेरे मुस्कुराने की।
तुम बांध लो अपना सामान, कुछ भूल ना जाना, यह सुनते ही, बेटी का दिल बोला! यह घर भी, अपना-सा नहीं लगता। चार दिन बीत जाने के बाद, दोहराए जाते हैं यही सवाल! कि कब […]
मत दो मुझे फुलों-सी मुस्कान, पर; कांटो सी चुभन भी नहीं चाहिए।
वो किसे दिखाएं; अपना साफ मन , जहां तन की बात पहले होती है।
जाने कहाँ चले जाते हैं सांस उखड़ी, धड़कन रुकी उड़ जाते हैं पखेरू, फिर जाने कहाँ चले जाते हैं। कुछ देर पहले ही बोलना सारी संवेदना महसूस करना कुछ देर बाद ही मौन हो जाते […]
सितारों की दुनिया में कैसा नशा छा रहा। दिल ने आदर्श बनाया मन ठगा जा रहा।। जन- जन ने हीरो बनाया था जिसको वही आज कैसे ड्रग के लिए मरे जा रहा।।
दिल ले के दर्द देना, यह अदा सिखे कहाँ से। बताइए न यह राज़,आपने ने सिखे कहाँ से।।
दीवानो की तरह हम उन्हें चाहते हैं वो हमें नखरे हजार दिखाते हैं…
जहर की जरुरत नहीं पड़ी मुझे मारने के लिए, तुम्हारे ऐसे बरताव ने ही मुझे मार डाला.
कमाल की जादूगरी आती है लोगों को…! अब देखो ना.. चेहरे से मुस्कान ही गायब कर देते हैं लोग…!!
मुखौटे से भरे हुए मैंखाने हैं…. किस पे भरोसा करें यहां तो अपने ही बेगाने हैं।
कुछ तो खास है उसकी मुस्कुराहट में, जब भी देखता हूं, दिल मिजाज़ करने लगता है। लाख समझा लूं मैं इस दिल को मगर कमबख्त, तुझे देखकर बेवजह ही धड़कने लगता है। शाम की चादर […]
मैं नाखुश-सी हूं आजकल, इसका कोई मलाल नहीं। मगर तू खुश रहे सदा , तेरी तकलीफों की सौगात; अपने लिए, खुद हमने खुदा से मांगी थी।
कब तक रहोगे यूं मायूस तुम ! जब आयेगे दुल्हन बनकर तो कहाँ जाओगे रूबरू होंगे जब हम तुम्हारे तो बाहुपाश में आ ही जाओगे…
सितारों से आसमान सजा हुआ है पर चाँद फिर भी तन्हा है भीड़ है मेरे आसपास रिश्तों की मगर जाने क्यों दिल उदास है !!
वो कुछ कहते नहीं आजकल बड़ा गुमसुम से रहते हैं लोग कहते हैं अवसाद के शिकार हो गये हैं..
बादल राजस्थान की सूखी जमीन की तरह लग रहे थे मगर फिर भी बरसात हो गई मेरा मन हरा-भरा था फिर भी रो ना सका..
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