दुखी वही है जिसका वर्तमान खोया है कल जो बीत गया कल जो आने वाला है दो कल के अदृश्य महलों में मन विचरता रहता है मन कितना निष्ठुर है खुद देख लो, दो कल […]

आप चाहते तो हालात बदल सकते थे, आप के आंसू मेरी आंखो से निकल सकते थे । मगर आप तो ठहर गए झील के पानी की तरह, दरिया बनते तो बहुत दूर निकल सकते थे।

जब से देखा तुमको ऐ सनम, हमसे ही दिल हमारा नहीं जाए संभाला । रात आंखों में ही कट जाती है, लगता है नींद ने आंखों से रिश्ता ही तोड़ डाला।

कल तलक फिरता था वह मेरा बनके दीवाना हम आंखों ही आंखों में बात किया करते थे आज बहुत दूर है वो हमसे मगर फिर भी हम सपनों में उनसे रोज़ मिला करते हैं।

उनके आने से मेरा जहान जगमगाया था उनके जाने के खयाल से भी पैर डगमगाते हैं, छोड़ जायेंगे एक दिन वो मुझको तन्हा ही यह सोचकर भी हम तो सिहर जाते हैं।

खुशियों की गुल्लक टूट गई जब अपनों से ही शूल मिला विश्वास करें भी तो कैसे जब कांटो में लिपटा फूल मिला। सगे-संबंधियों ने मुंह मोड़ा शायद कुछ हम मांग न ले कहीं मिले तो […]

कोई आ ना जाए दिल में मेरे रहने को यही सोंचकर दिल के दरवाजे बंद रखती हूँ। एक बार खा चुकी हूँ पहले प्यार में धोखा इसलिए छाछ भी मैं फूंक-फूंक पीती हूँ।

हमने बिछाई हैं कई बार राह में पलकें वो भी पलट के देखेगा यह उम्मीद नहीं रखती हूँ जब से देखी है सनम की सूरत मैनें तब से मैं चाँद को चाँद नहीं कहती हूँ!!

वो तेरा बार-बार दिल दुखाएगा मगर मत रोना तुम तेरी आंखों में आंसू ले आएगा मगर मत रोना तुम उसकी राहों में बिछाओगे तुम दिल अपना वो तुझको अपनाएंगा यह उम्मीद मत रखना तुम।

वो तेरा बार-बार दिल दुख आएगा मगर मत रोना तुम तेरी आंखों में आंसू ले आएगा मगर मत रोना तुम उसकी राहों में बिछाओगे तुम दिल अपना वो तुझको अपनाएंगा यह उम्मीद मत रखना तुम।

भगवान् की कृपा से मैने आमों के पेड़ों से भरा इक घर पाया हरेक पेड़ ने अलग-अलग रंग रूप पाया सबका आकार अलग,महक अलग फ़िजा में अलग ही महक उठी जब पेड़ों पर बौर आया […]

आज किन रंगों से सजा होगा यह दिन क़ोई पल न गुजरे प्रभु तुझ बिन आज किन रंगों से सजा होगा यह दिन क़ोई पल न गुजरे प्रभु तुझ बिन त्राहि त्राहि कर रही तेरी […]

आप पर दो पंक्तियाँ लिखना तो चाहता था, लेकिन न लिख सकूँगा थक सा गया हूँ दिन भर आंखें हैं नींद पथ पर अब कल सुबह लिखूंगा। सपनों में शब्द चुनकर रफ सी करूँगा कविता […]

तुम सदा मुस्कुराती रहो खिलखिलाती रहो, जीवन के आंगन में मेरे नेह बिखराती रहो। तुम्हारे नेह से क्यारी में घर की खूबसूरत फुलवारी सजी है यूँ ही महकाती रहो खुशबू बिखराती रहो।

यारा! तुझ संग जिंदगी गुजारनी है मोहब्बत में तेरी हर शाम महकानी है, तेरे ही नाम से लहराता है आँचल मेरा तेरी दीवानी बन हर रात महकानी है, बिन तेरे प्यासी हूँ मेरे हमसफ़र प्रेम […]

ताज्जुब है तुम्हारी यादाश्त पर सारी बातें कैसे याद रहती हैं तुम्हें यही सोचती हूं मैं आजकल क्योंकि मैंने तुम्हें कल लफ्ज़ लफ्ज़ याद किया था और आज भूल गई।

आज बड़े दिनों बाद बात की उनसे दिल में ठंडक सी उतर आई गुजरे जमाने की सारी बातें एक-एक करके मस्तक पटल पर खुलने लगी सारे लम्हे सामने आ गये मन सावन की तरह झूम […]

चलो आज अपनी तन्हा जिन्दगी को नया रूप देते हैं सशंकित ह्रदय में फिर से नव उम्मीदों के बीज बोते हैं । रोज की भागदौड़, दोहरे कामों से मन है बेहाल घर-बाहर की जिम्मेदारियां, फिर […]

नम्रता ही तो है आभूषण हर्षित करता है सबका मन जीवन में कोई अवरोध नहीं प्रगति भी रुकता है कहीं कर्महीन का सहारा भाग्य उत्साही का तो हर दिन सौभाग्य — सब कुछ वह तुरंत […]

तिलक तुम्हारी माया नगरी बदनाम हो रही है। नशा नग्नता गुण्डागर्दी अब सरेआम हो रही है।। चोरों का आतंक नगर में -डर नहीं लगता । ठगों के गिरोह डगर में – डर नहीं लगता।। ड्रग्स […]

आपने पहले अंक में पढ़ा — जीवनबाबु के घर में अन्न के एक दाना तक नहीं है। रुपा एक भारतीय नारी की परंपरा पर चलने वाली है। वह अपने पति को भूखे पेट सोने देना […]