पिता का साया, छांव है शीतल सी। जो धूप से बचाती है, बचपन को बचाती है। वह कठोर हाथों का स्पर्श, बेशक तुम्हें अच्छा ना लगे। पर उसके पीछे की मेहनत, तुम बखूबी जानती हो। […]
पिता का साया, छांव है शीतल सी। जो धूप से बचाती है, बचपन को बचाती है। वह कठोर हाथों का स्पर्श, बेशक तुम्हें अच्छा ना लगे। पर उसके पीछे की मेहनत, तुम बखूबी जानती हो। […]
जाना ही था उसको,चला ही गया वो, जाते-जाते बेजान कर गया वो।। जाने वाले को रोक पाया है कहाँ कोई होता है वही जो, नसीब में सबके होई जिन्दा हैं पर जान ले गया वो […]
भोजपुरी गजल – का कसूर बा | आँख से बहल आँसू तू पानी कहा सब मंजूर बा | बहल काहे ई पानी बतावा हमार का कसूर बा | कईल तोहसे प्यार का ई गुनाह हो […]
बारी-बारी लूटा मुझको बारी-बारी रौंदा नारी होने पर बेबस थी खत्म हो गया जीवन का औधा ना..री…ना रो एक दिन मिलेगा तुझको इन्साफ सबने यही समझाया जब कोर्ट में सवालों ने किया शर्मिंदा कुछ भी […]
किसी के लिए दोस्त फरिश्ते हैं किसी के लिए जिन्दगी जीने का बहाना मेरे लिए सिर्फ आस्तीन का सांप हैं नहीं है दिल में अब दोस्तों के लिए कोई ठिकाना…
दोस्त होते हैं वो फ़रिश्ते , मदद कर जाते हैं हंसते-हंसते टूट जाएं जब पंख उत्साह के, दौड़ कर आते हैं, दोस्त की इक आह पे पंख अपने दे कर फिर बताएं, भर ले उड़ान […]
क्यों जताया जाता है प्रतिपल मैं दूसरे घर की लक्ष्मी हूँ हूं कुछ दिनों की मेहमान क्यों कहा जाता है हर पल यह एहसास होता है कि किस घर की हूँ मैं अपने ही माँ-बाप […]
लोग कहने लगे है, हम इश्क़ में पागल हो गए है। मैं कहता हूँ इश्क़ में पागल तो कोई कोई होते है।। शाहजहाँ भी मुमताज़ के लिए ही पागल हो गया। इसलिए आगरा में मुमताज़ […]
**************** मेरी किस्मत रंगी है काले रंग में दर्द ही है जीवन के हर अंग में.. आँसुओं की लकीरें कभी मिटती नहीं बल्कि और गहरा जाती हैं जब किसी की बातें मेरे दिल को दुःखाती […]
हमने उड़ते हुए बादल से पूछा कब तुम्हें बरसना है। उसने कहा नादान यह भी कोई पूछने की बात है ।। सभी को वफा के आशियाना तो एक मर्तबा बनाने दो। फिर देखना कैसे हम […]
ज़िंदगी मे डाली से गिरता हुआ पत्ता भी हमे सिखाता है कि अगर तुम बोझ बन जाओगे तो अपने भी तुम्हे गिरा देंगे.
उनकी आंखों में मुहब्बत का जल है। हमने समझा था बस वो काजल है। यकीन मानिए कि इस तरह कभी हमने उनकी आंखों की तरफ गौर से देखा भी न था। इस कदर मानता होगा […]
नारी की उपस्थिति भी अनुपम है, आभास इसका नमक सम है मौजूदगी किसी को नहीं पता चलती, बस, गैर- मौजूदगी सदा खलती है ।
फकत रोने से काम नहीं चलता है, अत्याचार तो अत्याचार है, सबको खलता है प्रतिकार करो , मत करो सहन क्षमता से अपनी जीतो दिल बात पते की कहती हूं, अत्याचार सहना बढ़ावा है एक […]
देखते घड़ी की सुइयों को बार- बार हैं पढ़ते हैं तेरी पाती बार – बार हैं। कहां हो तुम कि आज इन्तजार है।
जब वो मेरे घर आई मेरी नन्हीं परी कहलाई उसको देख के मोहित हो गई मैं, उसके मंजुल रूप में खो गई मैं वो, जैसे इक पौधे की डाली बड़ी ही नाज़ुक, नाज़ुक सी, पर […]
दोष तुम्हारा क्या है अबले तुम काहे को घबड़ाती हो। मिले दण्ड अब उन दोषी को जो तुझको हर पल तड़पाती हो।। मर जाओगी खुद जाओगी बस अपनी हस्ती मिटाकर। तेरे जगह कोई और आएगी […]
मेरे जो अपने थे ,न जाने आज वो किधर गये जो सपने संजोये थे ,वो सारे टूटकर बिखर गये खुशियां मेरे आंगन की ,न जाने कहाँ बरष गयीं और एक हम जो बूँद बूँद को […]
हर घर की यह बस मिलती-जुलती गाथा है बेटी का कुछ वर्षों का मैके से नाता है । हीना रचने से पहले थी अलहङ अब चौका-चुल्हा बना भाग्य विधाता है थोड़ी सी भूल, भूलवश हुई […]
कयी प्रश्न है मानस पर उभरे यहाँ दस्तूर भी हैं कैसे-कैसे अपने भी हैं क्यूँ पराए जैसे माँ-पापा ने भरपूर स्नेह दिया फिर क्यों कर खुद से दूर किया जन्म दिया, पालन पोषण करके क्यू […]
मेरी रैना की शुरुआत है तुझसे इन नैनन की बरसात है तुझसे तुम जो दो मीठे बोल भी दो हर दर्द कबूल मुझे, जो मिले हैं तुझसे
मत अजमा मेरी मोहब्बत को तेरी एक झलक पाने को, सौ बार तेरी गलियों से गुजरा हू, जब सब छोड़ दिये शहर को- कोरोना का काल मे, तेरी कसम ! तुझसे मिलने के लिए सौ […]
हम शिक्षक हैं शिक्षा की लौ दिखलाते हैं देश के नौनिहालो में उम्मीद की किरण जगाते हैं । समाज की प्रतिष्ठा हमसे है हम भारत भाग्य विधाता हैं मुल्क का मान बढ़ाने को, हम ज्ञान […]
मेरे कुल का दीपक तुझसे छाया प्रकाश है आया है तू जबसे आलोकित आकाश है । बहनों की तू आशा माता का लाल है सबो की तू आशीष से चमका तेरा भाल है सलामत रहें […]
माँ तेरी निश्छल ममता की, छाया नशा कुछ ऐसा है कुछ भी तो नहीं बदला हममें, हाँ सब पहले जैसा है आज भी माँ की आँचल में उम्मीदों की मोती पाती हूँ सुख की घङियो […]
संसद साहित्य और सिनेमा । सत्य और संस्कार का है खेमा।। पर्दे और पुस्तकें सब कल्पनाओं का संसार है। कल्पना कहाँ दुनिया में सत्य का ही एक प्रसार है।। संसद के शिक्षित व संस्कारी नेताओं […]
कविता- एक बात बोलू —————————– एक बात बोलू.. क्या जरूरत थी, एक फोटो के खातिर- इतना सजने कि! जो अपनी सुन्दरता से चांद को भी कायल करदे, जग के सब अन्धो को भी अपनी जुबां […]
हम उस राह से गुजरना नहीं चाहते, जिस राह में खड़े हो जाए दिल्लगी। कह दो पागल आशिक़ दीवानो से, मुझे पसंद नहीं है किसी की आवारगी।।
तुम से दूर रह कर भी, हमने अब जीना सिख लिया है। कौन है अपना कौन है पराया, हमने यह देख लिया है।।
प्रेम की नदिया बहा दो द्वेष नफरत छोड़ दो देश के जन जन में एका की जगा दो भावना। दूर फेंको भेदभावों को सभी को प्यार दो, नफ़रतों के पोषकों को त्याग दो, दुत्कार दो। […]
निस्तेज-सी स्तब्ध-सी असहाय-सी अधूरी-सी निर्वेद-सी बैठी थी.. दुनिया की सबसे दुःखी आत्मा मैं ही थी… आपा खोकर भी मौन थी तुमसे दो टूक करने के बाद सारे ऱिश्ते खत्म करने के बाद क्रोध में आकर […]
वो जवानी ही क्या जिस जवानी में कोई कहानी ही न हो। वो मुहब्बत मुहब्बत ही नहीं जिसमें कोई अश्क ही न हो।।
आज फिर फलक से सितारे जमीं पर आने लगे है। शायद उनका ईशारा होगा जो मेरा एक अंदाज़ है।।
हर संतान है विशेष यहां अवसर भी भरमार है मालिक की नई रचना पुराने से हमेशा खाश है फिर भी हर पिता को पुत्र में कमी नजर आता है मंदिरों में सर झुका पाता जिसको […]
समय के साथ समझ बदल जाती है चाहने वालों की चाहत बदल जाती है प्यार करने वाले गलतियां सहित अपनाते हैं भरोसा है जिसपर कभी तोहमत न लगाते हैं ऐतवार हो तो प्यार हो ही […]
प्रभु ने कुछ और भी बाते समझाई थीं 20-25 साल हुए थे,नन्हे फ़रिश्ते ने कुछ भुलाई थीं किसी -किसी के याद रही, पर कोई फरिश्ता भूल गया प्रभु ने कुछ यूं समझाया था ……… फ़िर […]
मेरी जिंदगी की एक शाम थी मैं घर जा रही थी कोई नहीं था साथ में अकेली ही आ रही थी.. कुछ मनचले पीछा कर रहे थे रोज की तरह मैंने भी नजरंदाज कर दिया […]
राहें खत्म होती ही नहीं, इस जिंदगी की, हर मोड़ पर नया हुजूम मेरा इंतजार करता है, मुड़ जाऊं इस राह से, खामोशी को तोड़कर , आगे बढ़ने को जी चाहता है मगर यह ऐसा […]
कितनी कशिश थी, उनकी मासूमियत में। भूल जाते थे सारा जहां। जो बदल गए अब, एक तूफान के बाद। अब न झलक मिलती है, ना निशान दिखते हैं।..
कितने कोरे कागज रंग डाले, तुम्हारे लिए। फिर भी ना कह पाए, जो कहना था….
प्रभु ने कहा , नन्हे फ़रिश्ते से, तुम्हे धरा पर जाना होगा मानव रूप मिलेगा तुमको इस धरा को स्वर्ग सा सुंदर बनाना होगा नन्हा फरिश्ता पूछे प्रभु से, उस दुनियां में कैसे रह पाऊंगा, […]
*एक अनदेखे जंतू ने किया सबको ढेर* क्या नही तुमने किया क्या नही हमने कीया कंबरे मे रेहके बंद सबने नजाने काटे कितने पेहेर एक अनदेखे जंतू ने किया सबको ढेर सेवको के लिये ताली […]
किसी पर आख बंद कर एतवार मत करना किसी से टूट- टूट कर प्यार मत करना।। प्यार तो वो है जहाँ खोने का डर नहीं यह वो इवादत है जहाँ पाने की चाहत नहीं प्यार […]
मालिक मेरे ततू मुझे शरण दे बहुत थक चुका हू मै अब ना ढोया जाए ये बैरी दुनिया लब पर आए ना कोई नाम बस तू ही तू है हर शाम लोग मीठे बस स्वार्थ […]
कथाओं में जिन राक्षसों का जिक्र होता है, वे कोई राक्षस जाति नहीं थी बल्कि ये वे दरिन्दे ही थे जो आज भी अक्सर सरे राह बदतमीजी करते हैं छेड़ाखानी करते हैं, नारियों पर कुदृष्टि […]
मुक्तके – दौलत आखिरी | पाँच गज कफन दो गज जमीन दौलत आखिरी | लाखो करोड़ो की चाह हंगामा बदौलत आखिरी | आना जाना खाली हाथ लड़ाई किस बात की है | सब कुछ रह […]
प्रेम हमारे लिए इबादत है ईश्वर की दी हुई सबसे खूबसूरत इनायत है प्रेम विश्वास का दूजा नाम है विश्वास नहीं तो बस यह हिमाकत है
जीवन के पहले प्रभात में ली मैंने अंगड़ाई बाल्यकाल था बीता किशोरावस्था की बेला आई.. रोंक-टोंक थी ज्यादा मुझ पर समझ नहीं मैं पाती थी बचपन से मैं ट्यूशन पढ़ने चाचा जी के घर जाती […]
वो गोरी भी ना थी, ज्यादा सुंदर भी ना थी, ना देती थी प्रेम कभी, फ़िर भी वो योग्य बहुत थी कदम से कदम मिलाती थी वो साथ मेरे आती जाती थी मैं चाहता तो […]
सुबह सवेरे , आखोंदेखी घटना का है यह मंजर अरूणोदय से पहले पहुँची,बच्चों की टोली चलकर दौङ लगाते लगते थे, जैसे हो मंजिल पाने को तत्पर स्वाबलम्बी बनने को आतुर, पर मर्यादा का नाम नहीं […]
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