बहुत कोशिश की मैने तुम से दूर जाने की हर कोशिश जाया ही जाती रही हरदम तुम ही दिखाई देते हो, आँखे बंद कर के भी । गजब का अहसास है तेरा रह पाता नहीं […]
बहुत कोशिश की मैने तुम से दूर जाने की हर कोशिश जाया ही जाती रही हरदम तुम ही दिखाई देते हो, आँखे बंद कर के भी । गजब का अहसास है तेरा रह पाता नहीं […]
अभिव्यक्ति बस दिल से:- ************** रोते नहीं हैं हम बस सिसकते रहते हैं तेरी यादों में आहें हम भरते रहते हैं नासमझ है तू जो नहीं चाहता मुझको ना जाने कितने दिल हैं जो मेरी […]
अभिव्यक्ति बस दिल से:- *************** गुजारी हैं तमाम रातें हमने तेरे बगैर ये तो छोटी-सी जिंदगी है ! गुजर जाएगी…
यूं तो आसमां पर नहीं ठिकाना अपना फिर भी हौसलों के पंख लिये जा रहे हैं उड़ना नहीं आता मगर ना जाने कैसे उड़ते जा रहे हैं..
दिनकर ऐसा सूर्य है जिसने हिन्दी जगत को अपनी लेखनी की किरणों से चमकाया देशहित में लिखकर देश का गौरव खूब बढ़ाया जिनके सूर्यातप के आगे शशि भी मलिन हो जाए ऐसे राष्ट्रकवि को प्रज्ञा […]
हिन्दी साहित्य के कर्णधार हे हे प्रकाशपुंज नक्षत्र हे दिनकर । हे राष्ट्रकवि आजादी के योद्घा रामधारीसिंह के जन्मदिवस पर।। पद पंकज में दे पुष्पांजलि हम प्रणमति शीश झुकाते हैं। हिन्दी के साहित्य उपासकों हम […]
ड्रग्स रैकेट से देश होता जा रहा है छिन्न-भिन्न कहाँ से शुरू हुई थी सुशांत की कहानी जाकर कहाँ पहुँची सितारों की जिन्दगानी मर रहा है देश का भविष्य गरीबी में ड्रग्स लिए जाते हैं […]
एक दौर हुआ करता था जब नित वंदन करता था नन्दन.. पिता के चरण दबाकर ही शयनकक्ष में जाता था नित उठकर मात-पिता को अभिनन्दन करता था नन्दन… अब समय हुआ परिवर्तित आई कलयुग की […]
किश्तों में ही मिली, तेरी मुहब्बत हमें। जो ना मासिक थी, न ही सालाना। पल दो पल की मुलाकातें थीं। ना रूठना हुआ, ना मनाना। कभी एक-मुश्त मिले होते, तो हम करते जी भर के […]
सोचता हूं लाइफ रिपेयरिंग की कोई शॉप खोल लूं, बहुतों की यहां बिगड़ी पड़ी है।।
सही मायने में उजाला है, जहां बेटियों ने मां-बाप को संभाला है। चाहे मां पिता हो या मां पिता से सास-ससुर, उन्हीं से ही परिवार का सवेरा है।
मैं जताती नहीं, प्यार तो क्या। उसे महसूस कर लेना , जब तुम्हारी जरूरत का ख्याल , मुझे तुमसे पहले हो…
क्यों खामोशी का कारवां है , तेरे और मेरे बीच , ना तुम उसे तोड़ते हो , ना मैं उसे लांगती हूं।
साई भजन – तुही तू है | साई तेरी दुआ से दुनिया मे रोशनी है | गर कर दे तू करम यहा कुछ नहीं कमी है | तेरी रहमतों से कायम ये दुनिया जहा है […]
दुख के क्षणों में जो शख्श ऊबता नहीं सुख के क्षणों में अपनो को भूलता नहीं पुरुषों में है सदियों से ही अज्ञानता गलत संगत से निज ज्ञान भी ढका औरों की बात मन में […]
यूं तो मैं बहुत खुश हूं कि तुम्हे मिल गया वो जिसकी चाहत थी तुम्हे मगर इक टीस जरूर है जो दिल को कचोटती रहती है
जीवनबाबु अपने मोहल्ले में प्रतिष्ठत व्यक्ति थे। वह एक साहित्यकार भी थे। हमेशा किसी न किसी पत्र व पत्रिकाओं के लिए रचनाएं तैयार करते थे। उनकी पत्नी रुपा इतनी सुंदर थी कि वह कभी कभार […]
आपके बिन अब तो गुजरते नहीं जिंदगी के एक भी पल रोज रातों को आपकी तस्वीर से पूछता हूं कि काटेंगे कैसे तुम्हारे बिना कल।
मेरे सपनों का रास्ता गुजरता है आपकी जिंदगी से । मर्जी आपकी ठुकरा दे हमें या लगा ले गले खुशी से।
पहली रात के मिलन का वो एहसास याद रखना । हवाएं भी चलेंगी थम-थम कर मौसम भी होगा खास याद रखना।
किट्टी पार्टी हो या हो कोई गेट – टुगेदर , बिना फ्रेंड्स के ना हो ये पॉसिबल कमी कहीं पर देखें तो…. झड़ी लगा दें खुशियों की, दोस्त जीवन में निहायत ही ज़रूरी, फ्रेंड्स के […]
मेरी बिटिया रानी, क्या वह चाहे, व वह ही जाने। हम उसकी, सदा ही माने। इशारों में भी, इतराती है। हम सब पर, रोब जमाती है। कभी इधर, कभी उधर, वो भागे। ना जाने, उसको […]
पिता का साया, छांव है शीतल सी। जो धूप से बचाती है, बचपन को बचाती है। वह कठोर हाथों का स्पर्श, बेशक तुम्हें अच्छा ना लगे। पर उसके पीछे की मेहनत, तुम बखूबी जानती हो। […]
जाना ही था उसको,चला ही गया वो, जाते-जाते बेजान कर गया वो।। जाने वाले को रोक पाया है कहाँ कोई होता है वही जो, नसीब में सबके होई जिन्दा हैं पर जान ले गया वो […]
भोजपुरी गजल – का कसूर बा | आँख से बहल आँसू तू पानी कहा सब मंजूर बा | बहल काहे ई पानी बतावा हमार का कसूर बा | कईल तोहसे प्यार का ई गुनाह हो […]
बारी-बारी लूटा मुझको बारी-बारी रौंदा नारी होने पर बेबस थी खत्म हो गया जीवन का औधा ना..री…ना रो एक दिन मिलेगा तुझको इन्साफ सबने यही समझाया जब कोर्ट में सवालों ने किया शर्मिंदा कुछ भी […]
किसी के लिए दोस्त फरिश्ते हैं किसी के लिए जिन्दगी जीने का बहाना मेरे लिए सिर्फ आस्तीन का सांप हैं नहीं है दिल में अब दोस्तों के लिए कोई ठिकाना…
दोस्त होते हैं वो फ़रिश्ते , मदद कर जाते हैं हंसते-हंसते टूट जाएं जब पंख उत्साह के, दौड़ कर आते हैं, दोस्त की इक आह पे पंख अपने दे कर फिर बताएं, भर ले उड़ान […]
क्यों जताया जाता है प्रतिपल मैं दूसरे घर की लक्ष्मी हूँ हूं कुछ दिनों की मेहमान क्यों कहा जाता है हर पल यह एहसास होता है कि किस घर की हूँ मैं अपने ही माँ-बाप […]
लोग कहने लगे है, हम इश्क़ में पागल हो गए है। मैं कहता हूँ इश्क़ में पागल तो कोई कोई होते है।। शाहजहाँ भी मुमताज़ के लिए ही पागल हो गया। इसलिए आगरा में मुमताज़ […]
**************** मेरी किस्मत रंगी है काले रंग में दर्द ही है जीवन के हर अंग में.. आँसुओं की लकीरें कभी मिटती नहीं बल्कि और गहरा जाती हैं जब किसी की बातें मेरे दिल को दुःखाती […]
हमने उड़ते हुए बादल से पूछा कब तुम्हें बरसना है। उसने कहा नादान यह भी कोई पूछने की बात है ।। सभी को वफा के आशियाना तो एक मर्तबा बनाने दो। फिर देखना कैसे हम […]
ज़िंदगी मे डाली से गिरता हुआ पत्ता भी हमे सिखाता है कि अगर तुम बोझ बन जाओगे तो अपने भी तुम्हे गिरा देंगे.
उनकी आंखों में मुहब्बत का जल है। हमने समझा था बस वो काजल है। यकीन मानिए कि इस तरह कभी हमने उनकी आंखों की तरफ गौर से देखा भी न था। इस कदर मानता होगा […]
नारी की उपस्थिति भी अनुपम है, आभास इसका नमक सम है मौजूदगी किसी को नहीं पता चलती, बस, गैर- मौजूदगी सदा खलती है ।
फकत रोने से काम नहीं चलता है, अत्याचार तो अत्याचार है, सबको खलता है प्रतिकार करो , मत करो सहन क्षमता से अपनी जीतो दिल बात पते की कहती हूं, अत्याचार सहना बढ़ावा है एक […]
देखते घड़ी की सुइयों को बार- बार हैं पढ़ते हैं तेरी पाती बार – बार हैं। कहां हो तुम कि आज इन्तजार है।
जब वो मेरे घर आई मेरी नन्हीं परी कहलाई उसको देख के मोहित हो गई मैं, उसके मंजुल रूप में खो गई मैं वो, जैसे इक पौधे की डाली बड़ी ही नाज़ुक, नाज़ुक सी, पर […]
दोष तुम्हारा क्या है अबले तुम काहे को घबड़ाती हो। मिले दण्ड अब उन दोषी को जो तुझको हर पल तड़पाती हो।। मर जाओगी खुद जाओगी बस अपनी हस्ती मिटाकर। तेरे जगह कोई और आएगी […]
मेरे जो अपने थे ,न जाने आज वो किधर गये जो सपने संजोये थे ,वो सारे टूटकर बिखर गये खुशियां मेरे आंगन की ,न जाने कहाँ बरष गयीं और एक हम जो बूँद बूँद को […]
हर घर की यह बस मिलती-जुलती गाथा है बेटी का कुछ वर्षों का मैके से नाता है । हीना रचने से पहले थी अलहङ अब चौका-चुल्हा बना भाग्य विधाता है थोड़ी सी भूल, भूलवश हुई […]
कयी प्रश्न है मानस पर उभरे यहाँ दस्तूर भी हैं कैसे-कैसे अपने भी हैं क्यूँ पराए जैसे माँ-पापा ने भरपूर स्नेह दिया फिर क्यों कर खुद से दूर किया जन्म दिया, पालन पोषण करके क्यू […]
मेरी रैना की शुरुआत है तुझसे इन नैनन की बरसात है तुझसे तुम जो दो मीठे बोल भी दो हर दर्द कबूल मुझे, जो मिले हैं तुझसे
मत अजमा मेरी मोहब्बत को तेरी एक झलक पाने को, सौ बार तेरी गलियों से गुजरा हू, जब सब छोड़ दिये शहर को- कोरोना का काल मे, तेरी कसम ! तुझसे मिलने के लिए सौ […]
हम शिक्षक हैं शिक्षा की लौ दिखलाते हैं देश के नौनिहालो में उम्मीद की किरण जगाते हैं । समाज की प्रतिष्ठा हमसे है हम भारत भाग्य विधाता हैं मुल्क का मान बढ़ाने को, हम ज्ञान […]
मेरे कुल का दीपक तुझसे छाया प्रकाश है आया है तू जबसे आलोकित आकाश है । बहनों की तू आशा माता का लाल है सबो की तू आशीष से चमका तेरा भाल है सलामत रहें […]
माँ तेरी निश्छल ममता की, छाया नशा कुछ ऐसा है कुछ भी तो नहीं बदला हममें, हाँ सब पहले जैसा है आज भी माँ की आँचल में उम्मीदों की मोती पाती हूँ सुख की घङियो […]
संसद साहित्य और सिनेमा । सत्य और संस्कार का है खेमा।। पर्दे और पुस्तकें सब कल्पनाओं का संसार है। कल्पना कहाँ दुनिया में सत्य का ही एक प्रसार है।। संसद के शिक्षित व संस्कारी नेताओं […]
कविता- एक बात बोलू —————————– एक बात बोलू.. क्या जरूरत थी, एक फोटो के खातिर- इतना सजने कि! जो अपनी सुन्दरता से चांद को भी कायल करदे, जग के सब अन्धो को भी अपनी जुबां […]
हम उस राह से गुजरना नहीं चाहते, जिस राह में खड़े हो जाए दिल्लगी। कह दो पागल आशिक़ दीवानो से, मुझे पसंद नहीं है किसी की आवारगी।।
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