सभी मित्रों को हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ जाने कहां जा रही आज की पीढ़ी, नए नए ढंग है इनके, नई नई सोच है इनकी, नया जमाना अब है इनका, साड़ी सलवार पुरानी हो चुकी […]

राष्ट्रभाषा हिंदी —————– है शान मेरी, पहचान मेरी , देवो के स्वर सी, ज्ञानमयी। हम जन्मे है इस भूमि पर , जहां देवनागरी बोली है। कई भाषाओं की हमजोली है। जग में देती है मान […]

क्या है जीवन !! सोचो तो उलझ सी जाती हूं । जितना सुलझाना चाहती हूं , ओर -छोर नहीं पा पाती हूं। बालक का जन्म, घर में रौनक, घर किलकारियों से गूंज मान। नटखट सी […]

साज़ …….. बुझती… बंद होती.. यादो की मोमबत्तीयाँ…. दे जाती हैं याद… आज भी मधुरिमा। याद रह जाते हैं …कुछ शब्द…गूंज बनके… कहकहे हवाओं में गूँजते हैं साज़ बनके।। निमिषा …….।

भटके राही क्यू भटके हो??क्यू बिखरे हो?? क्यू बहके हो??क्यू खोये हो?? टुकङे जो देश के कर दोगे, कत्ल उम्मीदो का कर दोगे। बरबादी देश की करके तुम, ममता की छाया क्या पाओगे?? दो जख़ […]

मातृ दिवस :::::::::::::::: माँ जैसा …कोई ना जग में, तोल तराजू ..रख सब इसमें। तब भी पलड़ा …पार ना आये, ममता की ..कीमत ना पाये। ममता का हैं ..मोल निराला, एक हँसी.. जग वारा सारा. […]

370 तो झांकी है, पीओके अभी बाकी है, चला था कश्मीर लेने वो, अब तो उसे खुद की साख बचानी है, दर-दर की खाकर ठोकरे, लौट के आया बुद्धू घर पर, अब तो उसे पर […]

कुछ ऐसा कर जाएंगे, सारा शहर देखेगा। मेरे शहर का, अब हर एक बशर देखेगा। मेरे सितारे भी चमकेंगे एक दिन यकीनन, गुज़रूं जहां से, हर शख्स एक नज़र देखेगा। कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश […]

शमा और लौ ———- नवयोवना शमा और चमकती लौ एक साथ जीवन,लेकिन कहानी दो। लौ अपनी तेजी बढ़ाती गई, शमा को हर घड़ी दबाती गई। साथ तो दिया! पर हाय री धोखेबाज, शमा को , […]

पुकारता साहिल समंदर का, मत दूर जा ओ लहरें मुझसे, लहरें कहां सुनी साहिल की, वह तो चली जाती है दूर, खुद को तन्हा पाकर,होता है पछतावा उसे, जब वो निकल आती है दूर , […]

झूठे लोग बिना दर्द के भी आंसू बहाते है सच्चे लोग दुसरो का दर्द देखके ही रोने लग जाते है झूठे लोग दुख का बहाना बनाते है सच्चे लोग दुखो मे भी मुस्कुराते है

होली आई रे, आई रे ,होली आई रे। यादों की धूल उड़ाती सी , खूनी मंजर दोहराती सी, चहरों की फीकी रंगत पर रंगों का जामा चढ़ाती सी फिर देखो होली आई है। मन मस्त […]

आज कल ओझल हो गयी है हिंदी एसे महिलाओं के माथे से बिंदी जैसे कभी जो थोड़ा बहुत कह सुन लेते थे लोग अब उनकी शान में दाग हो हिंदी जैसे लगा है चसका जब […]

मै हूँ देश का युवा आतंकवाद को जवाब दे के रहूँगा मेरे देश के लिए दिलमे नफरत रखने वालो के सीने मे गोलियाँ उतार दूंगा ऐ पाकिस्तान तू मेरा नाम जान ले अपना परिचय तो […]

खबरें खुलकर बेशुमार हर रोज़ इश्तेहार में डालते हैं, दिलओ दिमाग के किस्से बेगुनाह बाज़ार में डालते हैं, मार पीट गैंग रेप मडर मदर-फादर को भी लपेट कर, आये दिन छत की मुँडेर पर कभी […]

हाँ ये सच है, कई बार हुआ है प्यार मुझे हर बार उसी शिद्दत से हर बार टूटा और सम्भ्ला उतनी ही दिक्कत से हर बार नया पन लिये आया सावन हर बार उमंगें नयी, […]

हमारी रूह पर क़ब्ज़ा जमाने आ गई फिर से। ये लड़की प्यार में पागल बनाने आ गई फिर से।। , हमारे कब्र का रसता किसी से पूँछकर शायद। वो पागल नींद से हमको जगाने आ […]

क्या सोचके निकले थे, और कहाँ निकल गये हैं ७२ साल में आज़ादी के, मायने ही बदल गये हैं आज मारपीट, दहशत और बलात्कार आज़ादी है पथराव, लूटपाट, आगजनी, भ्रष्टाचार आज़ादी है आरक्षण और अनुदान […]

कल कालेज के एक पुराने मित्र से मुलाकात हो गयी देख कर भी नहीं पहचाना, कुछ अजीब बात हो गयी मैं बोला, क्यों भाई, पुराने यारों से याराना तोड़ लिया कालेज के मोटू से आज, […]

कौन हूँ मैं, और क्या वजूद है मेरा। जहाँ में क्या पहचान मौजूद है मेरा। शायद ऊँचा कोई मुकाम पा न सका, और कोई नहीं, ये कसुर खुद है मेरा। गर कोई पूछे, क्या हासिल […]

पहले खयाल ए ख्वाब भी आस-पास न थे, आज तुमसे मिलके ज़िन्दगी ख्वाब हो गई है॥ चन्द जवाब थे मगर सवाल आस-पास न थे, आज तुमसे मिलके ज़िन्दगी सवाल हो गई है।। राही अंजाना

तुम छुपे हो कहां तुझे ढूंढूं मैं यहा….. बिना तेरे जीवन मेरा अधूरा यहां, तेरी यादों का दीपक मैं जलाऊं यहां , आ जाओ तो फिर एक बार तुम यहां , तुम छुपे हो कहां […]

मैं तेरे प्रेम में कृष्णा,अपना नाम कर दूंगी, जो तू न आया तो तेरी याद में सुबह शाम कर लूगी, मैं राधा नही मीरा नहीं मैं भी एक योगन हूं, तेरी मुरली की धुन सुनने […]

••• only a small poisonous drop of misunderstandings and egoism may lead within a jiffy split second into perishable circumstance to a delicate tree of beautiful healthy relationship which was grown up in the past […]

बढ़ती उम्र का मतलब ये नहीं कि इंसान जीना छोड़ दे सारे काम बन्द कर मौत का इंतज़ार करना शुरू कर दे सेवानिवृति एक पड़ाव है जहां थोड़ा कुछ बदल जाता है थोड़ा पीछे छूट […]

कोई बारिश से कहदे, उसको हद में रहना होगा गर बरसना है तो हमारी शर्तों पर बरसना होगा बेलगाम, बेखौफ, बेवक्त कहीं भी यूं बरस पड़ना और झमाझम बरस के सड़कों पर हंगामा करना ये […]

सुन सदा मेरी, वो चल निकले। मेरे अपने ही संगदिल निकले। जिन पे भरोसा किया था हमने, वो भी साजिशों में शामिल निकले। ना रही कोई उम्मीद उनसे अब, मेरे जज़्बातों के, वो कातिल निकले। […]

सारे पिंजरे तोड़ चुका वो . मन की मर्जी से जीता है. कवि तो उड़ता पंछी है जो उमंगो के आसमान मे उड़ता है कवि तो बहुत ही प्यासा है बस भावनाओ मे बहती नदी […]

जो सब लोग की कहन है कहन कर रहा हूँ मैं, किसी को क्या पता कितने जतन कर रहा हूँ मैं, बड़ा छोटा सबका तो सम्मान रखा करता हूँ मैं, आते जाते हर किसी को […]

मेरी छाँव मे जो भी पथिक आया थोडी देर ठहरा और सुस्ताया मेरा मन पुलकित हुआ हर्षाया मैं उसकी आवभगत में झूम झूम लहराया मिला जो चैन उसको दो पल मेरी पनाहो में उसे देख […]

दस्तकश कहां जाओगे। क्या मुझे भूल पाओगे। मैं तो तुम्हारी आदत हूं, क्या आदत बदल पाओगे। ख्वाब में मैं, जेहन में मैं, हर-शू मुझे हर पल पाओगे। इतना आसां नहीं भूल पाना, बगैर मेरे संभल […]

हम उनसे प्यार और वो बेक़रार करते रहे कहना था कुछ और, और ही कुछ कहते रहे वो दौर-ए-जवानी मुझे सारा मेहखना दे रही थी लेकिन हम तो बस अपनी आँखों से ही पीते रहे […]

सालो से भीख मांगती भिखारन सोचती मेरे नसीब मे ये ही सही. पेट की ना सही पर दिल की आवाज़ सुनी तो सही. भिखारन कहकर सालो तक दुत्कारा आज कलाकार कहकर पुकार तो d सही.

नीले रंग से यह कैसा खुमार नील कंठ तुझसे यह कैसा प्यार आदी योगी शिव शम्भू भांग धतूरा से सज्जित तुझपे यह जान समर्पित नंदी बैल और भूत साथ तुम्हारे दुर करती पीर हमारे जय […]

वो तरस रहा था माँ की ममता बाबा के दुलार को_ मगर तकदीर में अनाथ होना था सड़क उसकी बिछौना था_ पल-पल हर शख्स में उसने ढूँढा था वही एक तो उसका सपना था_ कई […]

वो तरस रहा था माँ की ममता बाबा के दुलार को_ मगर तकदीर में अनाथ होना था सड़क उसकी बिछौना था_ पल-पल हर शख्स में उसने ढूँढा था वही एक तो उसका सपना था_ कई […]

हर पहर गुज़र जाता हैं छूकर मुझे एक अन्जाना सा_ हम ज़िन्दगी थामकर तेरे ही ख्वाबों को तराशते रहते हैं_ तु अन्जान सही मुझसे ज़िंदा हैं पर साँसे मेरी ही तुझसे_ तुझे भूला सकुं पास […]

वो दिन अब दूर नहीं जब, होगा चांद हमारी मुट्ठी में, तो क्या हुआ जब रह गया फासला थोड़ी दूरी का, हौसला तो अभी बाकी है, मंजिल भी पा लेंगे हम, कल का सपना देख […]

नारी होना अच्छा है पर उतना आसान नहीं मेरी ना मानो तो इतिहास गवाह है किस किस ने दिया यहाँ बलिदान नहीं जब लाज बचाने को द्रौपदी की खुद मुरलीधर को आना पड़ा सभा में […]

तुम्हें देख फीका लगने लगा माहताब। चुरा लिया तुमने, मेरी नींदें मेरे ख्वाब। शाने पे रख के सर, जुल्फों से खेलना, तुम्हें गले लगाकर जाना, क्या है शबाब। तुम्हारा समझाना, हद से न गुजर जाना, […]