उम्मीदों का ठेला लेकर रोज निकल जाता है कोई, कागज़ कोरे जेब में लेकर रोज निकल जाता है कोई।। कलम कीमती है कितनी ये भटक राह में जाना है, तभी बैग में स्याही लेकर रोज […]

गलतफहमियों की कितनी और किश्तें बाकी रह गईं, इंसानों की कितनी और देखनी किस्में बाकी रह गईं।। नज़र-नज़ारे दिल-दिमाग और जुदाई सबपे लिखा मैंने, कहना मुश्किल है के और कितनी नज़में बाकी रह गईं।। राही […]

जर्रा को आफ़ताब बना दे वो नज़र मेरे दोस्त की हैं_ मैं इतनी क़ाबिल तो नहीं की इंसा के लिबास में फरिश्ता नज़र आऊं_ बना दे मुझे जो फरिश्ता वो नज़र मेरे दोस्त की हैं_ […]

ज़माना पुछता हैं चेहरे में गज़ब की कशीश- ए-खामोशी हैं_ कैसे कहे_? हरसू से नूर का तिरगी से भी वास्ता हैं मैं नियूश सा सुनता हूँ दिल हर वक़्त उसका शोर मचाता हैं_ -PRAGYA-

ज़माना पुछता हैं चेहरे में गज़ब की कशीश- ए-खामोशी हैं_ कैसे कहे_? हरसू से नूर का तिरगी से भी वास्ता हैं मैं नियूश सा सुनता हूँ दिल हर वक़्त उसका शोर मचाता हैं_ -PRAGYA-

शब भर यादें तिरी शबनम सी दिल को भिगोती रहीं_ दूरियाँ इस कदर दरम्यां हमारे सिमट गई की मैं छूती रहीं हर याद तिरी वो अब्तर हो बिखर गई_ -PRAGYA-

यूँ तो बीत गये कई पल बिन तेरे भी_ पर संग तेरे बीते वो अनमोल पल भुलाये नहीं भूलते_ ताजिंदगी तुझे चाहने की रज़ामंदी हैं इस दिल की_ मगर वफ़ा का तेरी मुझे यकीं के […]

तू उड़ता रह आसमाँ में कहीं, मैं ज़मीं का हूँ तो रहूंगा यहीं, मैं अब तुझे दिखाई भी नही देता, तू मेरा इम्तेहान क्या लेगा? सर को गोद में रखे मैं सज़दे में रहा, मैं […]

ये नज़्म पोछ के आँखों से.. इन्हें कानों में पहन लो तुम, तो एक आवाज़.. दौड़ के पास आएगी, और..मेरा पता गुनगुनाएगी. फुरसत हो तो आ जाना .

बारिश में भीगे कुछ ख्वाब.. कल उठा कर लेता आया, सुखा कर इन्हें, पूछुंगा आज.. कहाँ से आए? किसने छोड़ा तुम्हें सड़कों पे? अखबार में इश्तिहार दे दूंगा.. जिसके हों… वो ले जाये.. कुछ दिन […]

बादल जीवन फिर लाए तो ——————————– मधुर मंद -मंद बयार चली, नजरों में भर कर प्यार चली। धरती के सूखे बालों को सहलाती, चिंतित सी नार चली । पीछे पीछे मस्ताना सा, बादल आया दीवाना […]

लो आ गया, गर्मी का मौसम दहकता सूरज, चिलचिलाती धूप, उमस दोपहर, बहता लूं….. बहता पसीना, लगता गुस्से में लाल है सूरज, मानो कह रहा हो सूरज, बुराई अब कम करो तुम मानव, सच्चाई को […]

मैं एक नज़्म तेरी आँखों मे सजा कर, पलकों पे तेरी ख़ुद का पता लिख जाऊंगा. खुर्दबीन से भी ग़र मैं अब नज़र नहीं आता, देखो गिरेबाँ अपना.. शायद वहीं मिल जाऊंगा.

मैं एक नज़्म हूँ मुझे जी कर देखो, कोई ख़्वाब नहीं कि भूल जाओ मुझे, मैं एहसास हूँ मुझे महसूस करो, कोई गीत नहीं कि गुनगुनाओ मुझे.

इस गर्जन का इस तड़कन का , करुण स्वर कुटुंब के तड़पन का, कम हो जाये इससे पहले , कुछ धड़ हमको भी लाने होंगे। विस्मयबोधक विरक्ती का, परिमाण कड़ी निंदा शक्ति का, कम हो […]

उठ तू शहर से पर गांव को याद रख, पहुँच आसमां से ऊपर पर जमीं को याद रख, बेशक मिले होंगे यार हजार पर , जर्रे ए जिगर में इस दुश्मन को याद रख। अगर […]

जब पहला कदम बढ़ाना था कोई उगली पकड़ाया था जब घुटनों मे मेरी चोट लगी कोई मलहम लगवाया था उस चोट से आगे फिर मेरा कदमो का सफर जब बढ़ता है पेनसिल के युग मे […]

जीवन के पथ पर आगे बढ़कर, काल नियंतर परिवर्तित कर, शून्य वेदना अनुनादित कर, प्रश्नचिन्ह को परिभाषित कर, स्वयं रिक्ति को भरना होगा, काल खंड में चलना होगा। हृदय कंठ स्वर निर्मल करके, मन कर्म […]

ज़िंदगीज़िंदगी Tragedy 1 मिनट 273 0 vivek netan © Vivek Netan Content Ranking #3171 in Poem (Hindi) #305 in Poem (Hindi)Tragedy कुछ इस तरह से मुझ से नाराज़ हो गई ज़िंदगी गाँव की खुली गलियों […]

खुशियों की डंका बजा दिया। इनकी तो लंका ढहा दिया।। हो सकते हैं अपने भी, अब सेब के बागान। डल झील में तैरता, होगा अपना भी मकान। दिलों से शंका हटा दिया। खुशियों की डंका […]

एक तरफ धरती मा की करणवयथा तौ दूसरी तरफ मानवमन है। जौ मन मौसकर और सर पकडकर रौ रहा है। धरती के लाल धरती की तरफ देखकर यह कैसी घडी है। बाहार हन जल की […]

खत्म न हो जश्ने-रौनक हँसीन शाम की। आ टकरा लें प्याला और एक जाम की। देखो साकी खाली ना होने पाए पैमाना, ले आओ सारी मय, मयकदे तमाम की। आ टकरा लें प्याला और एक […]

आखिर खुश तोह हो ना तुम कभी यह ही मायने रखा करती थी किताबों के बीच वोह सुखी गुलाब आज भी बहुत कुछ कहती है किस्मत ने खिंची कैसी यह डोर मै यहा और तुम […]

एक-एक करके चले गए, जो बने थे मेरे सब अपने क्रम-क्रम से बिखर गये वो सुन्दर रचित मेरे सपने अब तो तन्हा हूँ, तन्हाई है बाकी कुछ अब शेष नहीं सब मिट गया, इक अधंड […]

रिमझिम सावन की बरसात उस पर आए तेरी याद…….. भीगी भीगी सावन की वो रात, हौले हौलै बारिश की वो रात, टिम टिम करते तारों की वो रात, पल पल आए तेरी यादों की बारात, […]

आई सावन की फुहार , छाई रूत में खुमार, घटाएं छाई है घनघोर, रह-रहकर दामिनी दमके, हवाएं मचा रही शोर, बारिश की लगी है झडी, जैसे झरनों की हो फुलझड़ी, भीगा भीगा सा ये रुत […]

जितना सुलझाती है उतना ही उलझाती है मुझको, उधेड़कर पहले खुद सिलना सिखलाती है मुझको, खोलकर दिल को जोड़ने में माहिर बताने वाली वो, सच को रफू कर बस झूठ ही दिखलाती है मुझको।। राही […]

सच में सब कुछ बदल गया इंसान का जुबान बदल गया राजाओ की कहानी बदल गया अल्हड़ मदमस्त जवानी बदल गया यारो की यारी बदल गया फितरत होश जिन्दगी बदल गया सच में बहुत कुछ […]

प्रकृति धरोहर वृक्ष धरा कि हैं आभूषण मनमोहक छवि बिखरती चन्द्र रवि के किरणो से जीवन हर्षित करती है कोयल की मृदुगान प्यारी जग को रोशन करती ओश की सुनहरी बूँद चमचम सी करती हैं […]

संवाद – वायु मानव चन्द वायु की लड़ियों ने आकर मुझको घेर लिया सिसक सिसक कर कहने लगी पेड़ो क्यों काट रहे हो मैं दंग अचम्भा देखता रहा पूछ बैठा सवाल ये वायु तेरा क्या […]