सूख गई धरती दाने दाने को पंछी भटक रहा झंझावात में बिन पानी सांसे लेने में अटक रहा | तिस पर भी प्रतिदिन मानव संवेदन शुन्य हुआ जाता संस्कार प्रकृति नियम अब भी उसके मन […]
सूख गई धरती दाने दाने को पंछी भटक रहा झंझावात में बिन पानी सांसे लेने में अटक रहा | तिस पर भी प्रतिदिन मानव संवेदन शुन्य हुआ जाता संस्कार प्रकृति नियम अब भी उसके मन […]
संदर्भ:- वर्तमान में परिवार की परिभाषा … …………………………………………………. बदल गये रिश्ते नाते बदल गया परिवार बदल गये रीति रिवाज बदल गया घरबार | सिमित हुआ संबंध नही पहले वाली बात गांठ पाल मन में रखते […]
“गजल” चलो इक बार हम एक दुसरे में खो कर देख लें चलो इक बार हम एक दुसरे के होकर देख लें ! बिताएँ है बहुत लमहा अजाब-ए तन्हाई के हम चलो हरेक पल को […]
” मै ही तो हूँ- तेरा अहम् ………………………….. मै ही तो हूँ तुम्हारे अंतरात्मा में रोम रोम में तुम्हारे | मैं ही बसा हूँ हर पल तुम्हारे निद्रा में जागरण में | प्रेम में घृणां […]
चलो चले … किसी नदी के किनारे किसी झरने के नीचें | जहाँ तुम कल कल बहना झर झर गिरना और… और मैं मंत्रमुग्ध हो झरनों की लहरों की अंतर्धव्नि से राग लेकर लिखता जाऊँगा […]
जिन्दगी जब भी मुस्कुराती है गीत उनके ही गुनगुनाती है | पलक गीरते जो पास होती है आँख खुलते ही चली जाती है || कदम-कदम पे मुश्किलें मिलती जिन्दगी हमको आजमाती है | आशना जिसको […]
” मुक्तक ” आँखों से आंशुओं को यूँ जाया नहीं करते। हर बात पर बच्चो को रुलाया नहीं करते।। खुशिंया नहीं दे सकते ना सही मगर कभी जो दिल से चाहे उसको सताया नहीं करते।। […]
ये गुलदान खाली है थोडे गुलाब दे देते मेरा गिलास खाली है थोडी शराब दे देते | कब से खडा मतिहीन है तेरे दीदार को जो दिल में है ओ सामने जवाब दे देते || […]
कोई भी तीर चला ले मगर एक बात है खासिद, हमें भी चोट खाने में महारत कम नही हासिल | कहा मतिहीन करते है तजूर्बें से बडे होना भले ही उम्र कल की है तजूर्बा […]
ये आँखे मेरी निर्झर जैसे झर जाती तो अच्छा होता जिग्यासा दर्शन की मन में मर जाती तो अच्छा होता | तुम पथिक मेरे पथ के ही नही तुम दूजे पथगामी हो मेरे पागल मन […]
अब और परीक्षा नही… अब और परीक्षा नही प्रतिक्षा नही करेंगे | किया नही पर प्रीत हो गई उल्टी जग की रीत हो गई | और तितिक्षा नही वरेंगे || यह अपराध किया ईश्वर ने […]
” मन के मोती…” पानी के बुलबुले से माला के मोतियों से बिखरता है टूट जाता है | बनता है मन का मोती बन कर के फूट जाता है || स्वप्नों में साथियों से मिलना […]
Ahh!! Those ole rainy days, Incessant water pouring through the whole day, You and me walking hand in hand, Towards distant dreamlands, Through the drizzle and sirimiri, Amazed at nature’s glory, The dark sky overloaded […]
Suno–sunaai degi tumhe– Bharat maa ki chittkaar Lahoo bahe– jo mere beto ke Kyu hota ja rahaa bekaar…?? Shahaadat mere laal ki Chup pattharro mei simat gyi hai Mujhpar mar mitna mere bachcho ka– Kyu […]
टूटी नींद मेरी तुम्हारे ही ख्वाब से तुम बस गये हो आँखों में अब महताब से इक सफ्हा ज़िंदगी का पुरानी किताब से कुछ लम्हा -ए- फिराक़ जो गुजरे अज़ाब से मैंने कहा हिसाब बराबर […]
“कुछ दोहे” गुरु की महिमा का हरि करते है गुंणगान | श्रेष्ठ न गुरू से है कोई बता दिये भगवान || नित्य श्रद्धा से लीजिए श्री भगवत का नाम | सब संयम से कीजिए दिए […]
कविता- संवेदना… तू कौन है ..! तू कौन है..! संवेदना ! जो अनछुए अनदेखे पहलुओं को एकाएक होने का आभाष कराती है ! तू कौन है..! जो दूसरे की पीडा का उद्विग्नता का बोध कराती […]
तू कौन है ..! तू कौन है..! संवेदना ! जो अनछुए अनदेखे पहलुओं को एकाएक होने का आभाष कराती है ! तू कौन है..! जो दूसरे की पीडा का उद्विग्नता का बोध कराती है ! […]
“मुक्तक” मुझे क्या हो गया है घर में घर अच्छा नही लगता कोई बेचारगी में दर बदर अच्छा नही लगता ! मुझे सब सोहरते हासिल मगर किस काम की है ये कि सूरज के बिना […]
सरिता पावन हो गई स्निग्ध खुश्बू सी वन में छाई है तु कौन रमणिका जल क्रिडा को चली कहां से आई है! सारा उपवन नतमस्तक हो सादर अभिनंदन करता है तन मन की तपन बढ […]
“गीतिका” मन को छोटा मत कर मानव तन्मय हो धर्म निभाता चल | सोया जग घोर तिमिर तो क्या तू मन का दीप जलाता चल ||मन को.. क्या होगा क्या होने वाला ये सोच के […]
“मुक्तक” हमने पूछा उनसे क्या दूकानदारी चल रही अब नकद है या पहले सी उधारी चल रही ! क्या नमक देश का कुछ रंग भी है ला रहा या कि पहले से भी ज्यादा गद्दारी […]
एक दिन गया बाजार मैं जेब में रूपये दस ! जी चाहे खाऊँ समोसे कुरकुर और भसभस !! पूछन लगा दूकान में देगा क्या सरबस ! बोला पेटले सेठ ने एक का रूपये दस !! […]
“मुक्तक” खुद कभी माना नही जिसको सीखाते है थे कभी बहरे जो दुनियां को सुनाते है ! जिन्दगी जिसकी हुई जाया ही गफलतों में ओ भी हमारी चाल पर उंगली उठाते है !! पीते हुए […]
” दोहा और कुंडलिया ” २१. १२२. २१२. ११. ११. ११२ १२ देखि मुखौटा चूतिया | फंसि मति जइयो जाय || २२ २२ २१ २ १११. १११ ११. १२ सीधे सादे वेश में | सठहि […]
” मुक्तक ” आँखों से आंशुओं को यूँ जाया नहीं करते। हर बात पर बच्चो को रुलाया नहीं करते।। खुशिंया नहीं दे सकते ना सही मगर कभी जो दिल से चाहे उसको सताया नहीं करते।। […]
आज का विषय-मनहरण घनाक्षरी/कवित्त दिनांक-२०/६/१६ विधा- गीत (गौना/भला) वार्णिक छंद मात्राएँ-८ ८ ८ ७ – १६-१५ धरती पर वृक्ष नित्य अल्प होते जा रहे पर्यावरण का कौन रखता खयाल है ! वन काटने का जुगत […]
मुक्तक छंद – वार्णिक (मनहरण घनाक्षरी) सामांत-आई पदांत- है ८८८७-१६-१५ पहले जो पढने में गदहे कहलाते थे उनकी भी दिखती आज नही परछाई है ! नवयुग के बच्चे देते एक भी जवाब नही पता नही […]
“मुक्तक छंद पर चार पंक्तियाँ “(घनाक्षरी) ११. ११२. २. २ २. २१. २. २२ १२. ११ २ पुण्य करना है तो माँ बाप की सेवा जरा कर लो इनके कदमों में जन्नत है के सर […]
इलाहाबाद की बात निराली नगरी वही निराला वाली | एक तरफ प्रयाग राज है दूजी तरफ गंगा मतवाली || इलाहाबाद की बात… गूढ भेद सारगर्भित बातें बडी निराली इसकी रातें | देख उजाला ऐसा […]
मैं किसी सियासत का समर्थन नहीं करता हूँ। भ्रष्टाचार के सम्मुख मैं समर्पण नहीं करता हूँ॥ सरकारी बंदिस को मैं स्वीकार नहीं करता हूँ। राजनीति के चाबुक से भी मैं नहीं डरता हूँ।। मेरी कविता […]
निगाहें मिलाकर भी नज़र तुम चुराते हो! अदाओं से मेरा जिग़र तुम जलाते हो! जिन्द़गी धधक रही है चाहत में तेरी, इसकदर ख्यालों में आग़ तुम लगाते हो! Composed By #महादेव
कविता… हम जाते है स्कूल हाँ हम जाते है स्कूल | अपना भविष्य गढने अनुकूल || हम जाते है स्कूल…… पढ लिख कर होनहार बनेंगे मातु पिता का प्यार बनेंगे | घर आंगन फूलवारी अपनी […]
……..दर्शन……. यह अति नूतन दर्शन है पावन यह परिवर्तन है | सर्वोत्तम ज्ञान का दर्पण है दिव्य दान यह धन है || इसका उत्थान इसी में नित नव्य कला साधन है | है ज्ञान तभी […]
सो रहा कई रातों का जगा तुम आज मुझे जगाना मत | शब्दों के घाव बड़े मतिहीन उर को मेरे पहुँचाना मत || होती रिश्तों की डोर नरम कदापि इसे आजमाना मत | होते है […]
लफ़्जों को खोल दो अपने अरमानों को इनमें भर जाने दो दो जगह अपने दिल में मुझे इनमें मुझे अपना घर बनाने दो
तेरी आँखों में रहूँगी तो सँवर जाऊँगी गर तेरे बदले मिले दुनिया मुकर जाऊँगी ख्याल हूँ कैद न कर तू मुझे इन पलको में खुशबू बन तेरा मै दामन छू गुज़र जाऊँगी छूना मत तल्ख़ […]
ek tanha musafir tha main zindagi ke safar mein; ek manzil ki tallash thi jeevan ke dagar mein; ek khushi ki aas thi kisi apne ka rumana tha; kehta tha sabko main apna magar har […]
oh my angel where are you; come hug me let me with you; the feel is more; but words are few; you know what i need; you know why i cry; no one loves me; […]
भाग दौड़ की, इस दुनियां में, शोर ही शोर है। न बादल है, न बरखा है, केवल नाच रहा, कलयुगी मोर है। माना यह काल परिवर्तन का है, नूतन नवीनतम का है, किन्तु इस बदलती […]
तेरी तस्वीर रू ब रू कर ली जब भी जी चाहा गुफ्तगू कर ली हम ने दिल में बसा लिया तुम को अपनी हर सांस मुश्कबू कर ली प्यार के इक हसीन धागे से जिंदगी […]
” गजल ” जहर मौत और जिन्दगी भी जहर है सिसकती है रातें दहकता शहर है | सदमों का आलम बना हर कही पर सहम अपने घर में हम करते बसर है || ना हम […]
हिसारे जात से बाहर निकल के देखते हैं चलो खुद का नज़रिया हम बदल के देखते हैं … सफर का शौक है हम को कहीं भी ले चलो तुम तुम्हारे साथ भी कुछ दूर चल […]
What’s done in the dark always comes to the light All the sad cries and lies in disguise Nothing is ever alright it’s always some kind of big fight Everyones going through something which might […]
कौन है जिसने ज़ख्मों को सहलाया है चेहरे पर मुस्कान सजाये आया है क्या ग़म है, यह कैसा हाल बनाया है फूल सा हंसमुख चेहरा क्यों मुरझाया है डूब न जाये ये आकाश समंदर में […]
मैहर वाली माई के , मनावै के होई | जागि जागी जगत के , देखावै के होई | दुनिया में माई को , बतावै के होई | नारियल माला फूल , चढ़ावै के होई | […]
दिल रो रहा है। पर आँखों में आँसू नही गम कितना ज्यादा है। पर आँखों में आँसू नहीं मुद्दतो से उनकी याद सता रही है। पर आँखों में आँसू नहीं मै कई दिनों से रोना […]
Har Kissa-e-Mohobbat Aaj Mukkamal Hoti…..! Gar Jo Rasam-e-Bewafai Na Bani Hoti…..!! D K
मिट्टी से गढ़ी है, नन्ही सी परी है, ना माँ की दुलारी, ना बाबा की प्यारी, ये सङकें ही घर है इसका , यहीं सारा जग है जिसका । ना गुङिया,मोटर गाङी, ना बर्तन,कप-प्लेट,ना रेलगाङी, […]
कौन है जिसने ज़ख्मों को सहलाया है चेहरे पर मुस्कान सजाये आया है क्या ग़म है, यह कैसा हाल बनाया है फूल सा हंसमुख चेहरा क्यों मुरझाया है डूब न जाये ये आकाश समंदर में […]
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