भाग रहे मन को वश में कर ध्यान ज़रा तू ख़ुद पर भी धर तू आज़ाद है है एक परिंदा क्या पाया होकर तूने ज़िंदा भटक रहा है तू भी वैसे और यहाँ पर भटकें […]
भाग रहे मन को वश में कर ध्यान ज़रा तू ख़ुद पर भी धर तू आज़ाद है है एक परिंदा क्या पाया होकर तूने ज़िंदा भटक रहा है तू भी वैसे और यहाँ पर भटकें […]
पैसे की चाहत ने ॥ मन तो मेरा कोमल था ॥ तेरी चाहत ने खुदगरज बना दिया ॥ हर रिश्ता अपना सा था ॥ बेगाना बना दिया ॥ शान्ति,नीद अपनी थी ॥ पर बीमारी के […]
देखना उनकी नियत भी बे-असर हो जायेगी, चालबाज़ी जब हमारी कारगर हो जायेगी. देखना है खेल मुझे साफ़ पौशाको का उस दिन, भोली जनता जब कभी भी जानबर हो जायेगी. बिगडे लोगो के लिए बिगडे […]
जी रहा हूँ तेरा मैंइंतजार करते करते! अब उम्र थक रही है ऐतबार करते करते! कबतलक मैं देखूंगा राह उम्मीदों की, खत्म हो रहा हूँ मैं प्यार करते करते! Composed By #महादेव
वो कहते हैं अपनी सरकार आते ही बदल गया है देश, रंग है बदला रूप है बदला और बदल गया परिवेश, बेवजह झूठे दावे करने की इनको लगी बीमारी है, भुखमरी, भ्रष्टाचार, महंगाई से से […]
तेरी बुराईयों को हर अखबार कहता है, और तू है मेरे गाँव को गँवार कहता है. ऐ शहर मुझे तेरी सारी औकात पता है, तू बच्ची को भी हुश्न-ए-बहार कहता है. थक गया है वो […]
****बगावत कर लेंगे::गज़ल**** छुप के बैठे हैं कई अल्फाज़ मेरे होठों की तहों में, तुम कोई बात करोगे तो ये बेबात बगावत कर लेंगे l बड़ी मुश्किल से मेरे हालात मेरे काबू […]
**…..TERA NAAM…..** Mere Honthoon Per Jab Bhi Tera Naam Aaya Aankh Main Aansu, Haath Main Jaam Aaya Tere Ishq Ki Talab DIl Ko Aaisi Padi Yaad Dil Ko Tu Subah-Shaam Aaya Mere Honthoon Per Jab […]
It was music, this subtle sound A serenity, rhythmic joy abound Pit a pat on the eaves t’was rain My emotions lent free, no refrain Tickling the fresh duranta leafs In sync, as though the […]
ચિંતન મનન કરતા કરતા મારે કંઈક કહેવું છે, ખબર નથી શું? પણ છતાં મારે કંઈક કહેવું છે. જીવન છે ટૂંકું, રસ્તો છે લાંબો, છતાં મારે કંઈક કહેવું છે, આ સ્વાર્થી દુનિયાના સ્વાર્થી લોકો વિષે મારે […]
रहम करना ज़रा मौला, नमाजी हूँ तेरा मौला। तू ही तो मीत है मेरा, तू ही तो गीत है मेरा॥ किसी को गैर ना समझूं, किसी से बैर ना रख्खूं।। मेरा दिल बस यही […]
ऊंचाई कितनी ही मिल जाये परिंदे को मगर, बुझाने प्यास उसको भी ज़मीं पर आना पड़ता है। नहीं उड़ती पतंग भी हरपल आकाश में, उसे भी वक़्त आने पर कट जाना पड़ता है। ना ये […]
चलो चले … किसी नदी के किनारे किसी झरने के नीचें | जहाँ तुम कल कल बहना झर झर गिरना और… और मैं मंत्रमुग्ध हो झरनों की लहरों की अंतर्धव्नि से राग लेकर लिखता जाऊँगा […]
मित्रता बड़ा अनमोल रतन मैं कर्ण और तु दूर्योधन | मैं बंधा हुआ एक अनुशासन तु परम् स्वतंत्र दु:शासन || उपाध्याय…
इक हाथ सम्हलती बोतल… दूजे में ख़त होता है… मैं रोज नशा करता हूँ… गम रोज गलत होता है… तरकश पे तीर चड़ाकर… बेचूक निशाना साधूँ… उस वक्त गुजरना उनका… हर तीर गलत होता है… […]
https://ritusoni70ritusoni70.wordpress.com/2016/07/04 वो अनछुए पल, जिनको मैंने जिया नहीं, उन्मुक्त जीवन की छटा थी, या कि नव सृजन. की कपोल. कल्पित परिकल्पना । जो भी थी मुमक्षा, विलय होने की , उनमें समा जीने […]
विविध उलझनों में जीवन फंसा हुआ है किंचित ही दिखने में सुलझे हुए है लोग | स्वार्थ की पराकाष्ठा पर सांसे है चल रही अपने बुने जंजाल में उलझे हुए है लोग || उपाध्याय…
विविध उलझनों में जीवन फंसा हुआ है किंचित ही दिखने में सुलझे हुए है लोग | स्वार्थ की पराकाष्ठा पर सांसे है चल रही अपने बुने जंजाल में उलझे हुए है लोग || उपाध्याय…
जमीं वही है मगर लोग है पराये से जो मिल रहे है लग रहे है आजमाये से! शफक नही नकॉब में फरेब है मतिहीन सभी दिखते मुझे हमाम में नहाये से!! उपाध्याय…
मस्जिदों में काश की भगवान हो जायें मंदिरों में या खुदा आजान हो जाये ! ईद में मिल के गले होली मना लेते काश दिवाली में भी रमजान हो जाये !! बाअदब मतिहीन मिलते मौलवी […]
चुभेगा पांव में कांटा तो खुद ही जान जायेगा जो दिल में दर्द पालेगा तड़प पहचान जायेगा | किसी की आह चीखों को तवज्जो जो नही देता जलेगा जब कदम अपना तपन वह जान जायेगा […]
दर्द है आह! है मोहब्बत में मजा भी तो है इश्क गुनाह है मुसीबत है सजा भी तो है ! दो दो जिस्म में एक जान है रजा भी तो है जिन्दगी है यही फिर […]
थी मोहब्बत दिल में पहले हो गई नासूर अब पूछता न था कोई पर हो गई मशहूर अब ! उसका दिल रखने हजारों दे दिया कुर्बानियाँ और ओ फितरत से अपने हो गई मगरूर अब […]
लोगों की बातों में आकर मुझको ना तुम निराश करो मैं प्रणय निवेदन करता हूँ बस इतनी पूरी आश करो | वे भी उन्मादी प्रेम रथी पर में पर वंचन करते है सो हृदयंगम कर […]
मोहब्बत है गमो की हसिन दांस्ता | इसकी न कोई मंजिल ,न कोई रास्ता || बस सफर-दर-सफर चलते है प्यार में, मगर हाथ न कुछ किसी को आता || खाते है कसमें वफा की लोग […]
एक मुक्तक चढा सूरज भी उतर जायेगा तपन पर मेघ बरस जायेगा | देख अंधेरा धैर्य को रखना तिमिर को चीर प्रकाश आयेगा || उपाध्याय…
ये आँखे मेरी निर्झर जैसे झर जाती तो अच्छा होता जिग्यासा दर्शन की मन में मर जाती तो अच्छा होता | तुम पथिक मेरे पथ के ही नही तुम दूजे पथगामी हो मेरे पागल मन […]
खुली हुई खिड़कियों से झांकते ही रह गये कट गया कोई मनहूस ताकते ही रह गये | गिरने का हद बढता गया जाना नही कभी गैरों की बस औकात आंकते ही रह गये || अपने […]
………पानी बचा लो…….. पानी नही बचा तो धन करोगे क्या बटोर कर पानी बचा लो अपना कोई जतन निहोर कर | कब तक पिलाएगी धरा छाती निचोड़ कर गिरते ही जा रहे हो सब सरहदों […]
पुष्प की अभिलाषा -(एक मुक्तक) …………………………………………….. टूट कर शाख से शायद बिखर गया होगा कुचल कर और ओ गुल निखर गया होगा | जिसके जज्बे में वतन पे शहीद था होना मुल्क के वास्ते मर […]
प्राण प्रग्या को बचाये चल रहा हूँ कर प्रकाशित मै तिमिर को जल रहा हूँ | अल्प गम्य पथ प्रेरणा देता मनुज मैं उतुंग गिरि सा शिखर अविचल रहा हूँ || शिथिल वेग स्निग्ध परियों […]
रूह उठती है काँप जमाने की तस्वीर देख कर खुशनसीब और बदनसीब की तकदीर देख कर | कोई हाजमे को परेशां है कोई रोटी की खातिर बहुत हैरत में हूँ हथेलियों की लकीर देख कर […]
अनुभव कंटक-जालों का बस उसी पथिक को होता है जिसका चरण अग्निपथ चलकर कभी जला होता है | मखमल और कंचन पर सोने वालों पता तुम्हें क्या है जीवन सच में आतप अंधड़ में जीने […]
बिस्तर से उठ चुके हैं मगर अब भी सोये है न जाने कैसे ख़्वाब में मतिहीन खोये है | गैरत ईमान का खतना बदस्तूर है जारी आँखों ने कर दिया बयां छुप छुप के रोये […]
कुछ अंध बधिर उन्मूलन किया करते है अथवा पंगु गिरि शिखर चढा करते है | कुछ सीमित आय बंधन में बांध हवा को क्षैतिज उदीप्त किरिचों पर चाम मढते हैं || लेकिन कौन जो रोक […]
“गान मेरे रुदन करते”(मेरी पुरानी रचना) गान मेरे रुदन करते कैसे मैं गीत सुनाऊँ जैसे भी हो हंस लेते तुम क्यों मैं तुझे रुलाऊँ | हृदय वेदना बतलाऊँ या जीवन सार सुनाऊँ दोनों का रिश्ता […]
“बच्चे के जीवन में माँ का महत्व” …………………………………………. माँ तपती धूप में ओस की फुहार है माँ ममता है धरती का सबसे सच्चा प्यार है | माँ है तो बचपन खिलखिलाता फूल है माँ नही […]
मस्जिदों में काश की भगवान हो जायें मंदिरों में या खुदा आजान हो जाये ! ईद में मिल के गले होली मना लेते काश दिवाली में भी रमजान हो जाये !! बाअदब मतिहीन मिलते मौलवी […]
“मातृ दिवस पर चंद पंक्तियां ” …………………………………………….. जमाने में जो सच है जरा उसको बताइए दौर-ए भरम है युं नही बातें बनाईए | युं कहकहे लगा करार आये कब तलक चेहरे से बंया है न […]
मेरी पुरानी रचना… ……………………….. खाक पर बैठ कर इतना भी इतराना क्या दर्द चेहरे पे लिखा है इसे छिपाना क्या…! कब कहां किस तरह से क्या होगा , जब चले जाना है जहाँ से तो […]
“अशिक्षा पर एक छोटा सा व्यंग मुक्तक ” हिन्दी लिखते शर्म आती है अंग्रेजी में लोला राम चुप है जब तक छुपा हुआ है खुला मुंह बकलोला राम अकल बडी या भैस समझ पाया ना […]
उष्णत्तर उरदाह की अनुभूति क्या तुम कर सकोगे कृत्य नीज संज्ञान कर अभिशप्तता मे तर सकोगे ! एक एक प्रकृति की विमुखता पर पांव धर कर जी लिये अपने लिये तो दुसरों पर मर सकोगे […]
भूल कर भूल से ये भूल मत किया किजे कभी किसी को भरोसा नही दिया किजे | मुकर गर जाइये करके करार दिलवर से इस अदावत पे कभी प्यार मत किया किजे || जो पीछे […]
ღღ_कल फ़िर से दोस्तों ने, तेरा ज़िक्र किया महफ़िल में; कल फ़िर से अकेले में, तुझे सोंचता रहा मैं देर तलक! . कल फ़िर से तेरी यादों ने, ख़्वाबों की जगह ले ली; कल फ़िर […]
……………गजल…………. हम समंदर को समेटे चल रहे है ठंडे पानी में भी हम उबल रहे है ! दुश्मनों के पर निकलते जा रहे है देख अपनो की खुशी हम जल रहे है || है बडी […]
……………..गजल……………. चल नही सकते तो टहल कर देखो तुम अपनी सोच बदल कर देखो ! दर्द के फूल किस तरह निखर जाते है आ मेरे बज्म किसी दिन गजल पर देखो || ओ बुरा मान […]
नही नव्य कुछ पास में मेरे सपने सभी पुराने है आधे और अधूरे है पर अपने सभी पुराने है | कुछ विस्मृत हो गये बचे कुछ यादों के गलियारों में आज भी मतिहीन की आँखों […]
नही नव्य कुछ पास में मेरे सपने सभी पुराने है आधे और अधूरे है पर अपने सभी पुराने है | कुछ विस्मृत हो गये बचे कुछ यादों के गलियारों में आज भी मतिहीन की आँखों […]
चुप रहते है तो अंजान समझ लेते है बोल देते है तो नादान समझ लेते है | बात न माने तो कहते है मानता ही नही मान लेते है तो फरमान समझ लेते है || […]
…………गीतिका……….. श्रृंगार उत्पति वही होती जब खिली फूल की डाली हो कुछ हास्य विनोद तभी भाता हंसता बगिया का माली हो | कलरव करते विहगों की जब ध्वनि प्रात:कान में आती है बरसाती मधुरसकंण कोयल […]
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