आह ! ना लेना कभी, किसी गरीब की हर किसी को मिल जाती है, अपने नसीब की.. *****✍️गीता
आह ! ना लेना कभी, किसी गरीब की हर किसी को मिल जाती है, अपने नसीब की.. *****✍️गीता
धीरे-धीरे लौ जलती रही, धीरे-धीरे शमा पिघलती रही परवाना दूर से ही मचलता रहा, हर मोहब्बत की कहानी है यही *****✍️गीता
तुम मुझे प्यार नहीं करते हो यही सोंचकर मैं बहुत उदास थी ! तुम आये जब घर तो कुछ आस जगी.. मैंने जल्दबाजी में बनाई थी अपने लिये जो एक कप कॉफी थोड़ी पी ली […]
उलझनें रात को उबाती हैं दिन में नहीं तन्हाई रात को तड़पाती है दिन में नहीं.. पीर महसूस करने का वक्त दिन में नहीं मिल पाता है इसीलिए कवितायें रात को लिखती हूँ दिन में […]
ओ मेरे प्रियतम कान्हा !! मुझको तेरी बेरुखी से डर लगता है, तुम्हारी आँखों से साफ पता चलता है… तुम जिस तरह मायूस निगाहों से मेरी तरफ देखते हो, अपनी लाचारी साफ बयां करते हो… […]
चोरी से चुपके से तुम सब कुछ देखा करते हो मैं जानती हूँ तुम ऑनलाइन भी रहते हो जाने क्या बैठ गया है तुम्हारे मन में ! पास होकर भी तुम मुझसे कटते रहते हो […]
नि:संतान थे राजा प्रियंवद, पुत्र-प्राप्ति हेतु किया हवन प्रशाद की खीर खाकर, रानी मालिनी ने दिया एक पुत्र को जनम किन्तु पुत्र जीवित ना था राजा ले जा रहे थे पुत्र का अंतिम संस्कार करने […]
आई आई छठ पूजा है आई, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को जाए ये मनाई छठ पूजा की धूम देखो, चारों ओर है छाई बच्चों और सुहाग का, मंगल करती है छठ […]
मानवता बिलख रही है दानवता विहँस रही है है आह आवाजों में अस्मिता सिसक रही है ये दिल बहार दुनियां कितनी बदल रही है || ये शाम रंगीली ,सुबह नशीली उनकी हो रही है जहाँ […]
अगर राधा ना होती तो श्याम से प्रीत कौन करता ? अगर मीरा ना होती तो भक्ति के पद कौन गाता फिरता ? यही तो है प्रेम में हमेंशा नारियों ने अपने आपको सराबोर कर […]
तू जब हुआ करता था मेरे करीब तो एक अलग एहसास हुआ करता था आज जब दूर है मुझसे तो कोई एहसास ही नहीं होता…!!
कोशिश बहुत करता है वो मुझे तोड़ने की, मगर मैं वो चट्टान हूँ जो पिघल तो सकती है मगर टूट नहीं सकती…
विविध आबम्बरो से दूर, श्रद्धा-आस्था से सरावोर महापर्व है छट्ठ, जन-गण है उपासक, आराध्य है दिनकर!
हम आधुनिक होते जा रहे हमारी आस्था आज भी वही हम उपासको के लिए सूर्य परिक्रमण कर रहा पृथ्वी है स्थिर। दर्शाता रह पर्व लोक-आस्था विज्ञान पर है भारी सदियो से प्रारम्भिक रूप मे सूर्य […]
अभी तक अस्तित्व पर ना कोई सवाल उठा था जो देखता था मुझको बस वाह ! करता था मेरी खुशियों की झोली बहुत थी भारी ख्वाबों में अपना उधार चलता था किस्मत की लकीरें मिट […]
तू क्यों नहीं समझती मेरे दिल के जज्बातों को… क्या तेरे सीने में दिल नहीं…? पत्थर है शायद ! दिल होता, तो धड़कता जरूर | मैं वर्षों से एकटक लगाये तुझे देख रहा हूं, और […]
मैं नन्हीं-मुन्हीं बच्ची हूँ अकल की थोड़ी कच्ची हूँ मां अपनी गोदी में सुला ले मैं तो तेरी बच्ची हूँ थक जाती हूँ खेल-खेलकर सब मुझको देखें हँस-हँसकर सब कहते हैं मैं अच्छी हूँ मैं […]
खाद्य-निरीक्षक की चलती थी, रिश्वत से रोजी-रोटी लाला ने इन्कार किया तो, धमकी आ गई मोटी-मोटी लाला जी के होटल में, खाना बनता था शुद्ध लेकिन बिन मोटी रिश्वत के, अफ़सर हो गया थोड़ा क्रुद्ध […]
तुलसी है जीवन का अमिय, तुलसी है विष्णु को प्रिय पावन पौधा तुलसी का, प्रदूषण से बचाए पूजनीय है इतना कि, रोग कीटाणु पास ना आएं सर्दी खांसी या है बुखार, तुसली, औषधि गुण समेत […]
सुबह-सुबह रसोई से, चाय की सुगंधि आ रही है सर्दी के मौसम में मुझे, अदरक इलायची और तुलसी की चाय लुभा रही है ऐसी चाय सुबह-सुबह मिल जाए, तन-मन में स्फूर्ति आ जाए *****✍️गीता
कविता : सफलता ,ऊँची उड़ान जीवन है छणिक तुम्हारा भूल कभी कोई न जाना बनकर सूरज इस वसुधा का जर्रे जर्रे को चमकानां || सूरज ,चांद सितारे छुपते हम ,तुमने भी है एक दिन जाना […]
धूप सुनहरी बिखर गई है, सूरज की झोली से लाल, गुलाबी पीले-पीले, रंग लगें मौली से रंगोली के रंग हैं सातों, धूप संग हैं आए सूरज ने देखो ना कितने, सुंदर रंग बिखराए ।। *****✍️गीता
तमाशा नहीं जिन्दगी हकीकत है, जी लो जी भर के कल किसको फुर्सत है… रोज़ लड़ते हो तुम धन-दौलत के पीछे, उतना ही कमाओ जितनी जरूरत है.. यह धन-दौलत सब यहीं धरा रह जायेगा, जो […]
रात को ये कैसे-कैसे ख्वाब आते हैं ! तेरे खयाल मेरी रूह को छू जाते हैं बिस्तर ये जाने क्यूँ काटने को दौड़ता है ! तेरी यादों से मेरा तन-मन पिघलता है जागती हूँ रातभर […]
रात-दिन रतजगे किये हैं हमने इश्क में हम तो अपने यार की धूनी रमते हैं इश्क में…. लौटकर वो आएगा ये सोंचकर अभी खड़े जहाँ वो छोंड़कर गया वहाँ रुके हैं इश्क में…. कभी गिरे […]
गलतफहमियों में जीना अच्छा लगता है….. मुझको तेरा हर एक बहाना अच्छा लगता है….. कभी तू रोये कभी तेरी बातें मुझे रुलायें मुझको तेरा इठलाना अच्छा लगता है….. कभी नजर उठाकर तू बोले मुझसे तौबा […]
जरा-सा मजाक हमने क्या कर दिया आप तो रूठ गये.. जरा-सी तवज्जो हमने क्या दी आप तो रूठ गये.. कितना हुनर बख्शा है आपको ऊपर वाले ने हमने शरारत जो की आप तो रूठ गये..
तुम अपने हो तभी शिकायत कर देती हूँ जो मन में आता है कह देती हूँ तुम्हें हरगिज बुरा लगता है यह भी जानती हूँ पर तुम्हें अपना मानती हूँ तभी सब कुछ कह देती […]
मुखौटे लगा कर, आते हैं कुछ लोग कभी हंसाकर कभी रुलाकर, चले जाते हैं कुछ लोग कभी जोकर का मुखौटा, लगाकर हंसाया कभी भूत-प्रेत का मुखौटा, लगाकर डराया मुखौटे लगा कर, मन बहलाते हैं लोग […]
तुम कितनी भोली हो बाला तेरा कितना रूप निराला मीठी-मीठी बातों से तुम मुझको रोज रिझाती हो सुबह होते ही तुम जाने कहाँ गुम हो जाती हो ! सांझ होते ही मैं तुम्हारी प्रतीक्षा करने […]
बैंगनी चूड़ियां ************** तुमने पहली मुलाकात में जो भेंट की थी बैंगनी चूड़ियां उनकी खनक आज भी कानों में गूंजती है जब टूटा था हमारा प्यार भरा रिश्ता एक गलतफहमी से तो चूंड़ियों का टूटा […]
इंसानियत कब इंसान की जिंदा होगी क्या तब जब हर आत्मा से निंदा होगी जागो देखो सोचो सुलग रहा है समाज कब तक बंद रखोगे अपनी आवाज बोलो जो चाहते हो, कहो जो सोचते हो […]
प्यारी-प्यारी बिटिया रानी, कहे मां कह एक कहानी राजा हो या रानी मां तेरी कविता लिखती है, कैसे कहे कहानी फ़िर भी सुन, ओ बिटिया रानी एक थी झांसी की रानी, मनु नाम था बचपन […]
आधुनिक नारी ने तोड़ दी हैं गुमनामी की जंजीरें बढ़ाई है अपनी ताकत अपनी मेहनत से पाया है बुलंदियों का आसमां कभी खैरात में नहीं मांगी उसने खुशियां नारी ने तो हमेशा से त्याग, तपस्या […]
तिरस्कृत महिला **************** तिरस्कार मनुष्य को जीवित ही मार देता है ये वह जहर है जो धीरे- धीरे असर करता है शेक्सपियर भी कह गये हैं मित्रों ! “बदला लेने और प्रेम करने में नारी […]
कभी धूप है खुशियों की, कभी दर्द की छांव कभी जीत की आशा, कभी हार के थक गए पांव बस, यही तो है ज़िन्दगी.. *****✍️गीता
चम्पा के फूलों की ख़ुशबू, ले आई इस ओर रंग-बिरंगे फूल यहां पर, कोयल का है शोर पीले, लाल गुलाब हैं खिलते, देखो इस उपवन में मीठे-मीठे सपने खिलते, अक्सर मेरे मन में *****✍️गीता
कविता बहुत कही होंगी अब तक, कहानी कोई कहो तो जानें सभा तो बहुत सजाई होंगी अब तक, तन्हा कभी वक्त गुजारो तो जानें अंजुमन से निकलना है बहुत आसां, मन से निकल कर दिखाओ […]
कल रात चाँद ने कहा मुझसे कुछ तो परेशानी है तुम्हें जो रोज़ चले जाते हो तुम समुंदर किनारे… जब रात को सब सो जाते हैं चादर तान के तो तुम मुझे देखते रहते हो […]
ढ़ल गई है सांझ देखो, धूमिल सा मंज़र हुआ चांदी की चादर ओढ़ के, हर पर्वत सो गया चांद भी ठिठुरता सा, बादलों में खो गया श्वेत-श्वेत दूधिया सी, सारी नगरी हो गई हिम की […]
तुम्हारी मौजूदगी और मेरी तड़प थक गई हूँ अब मैं एक जगह रुककर, तुम जब आते हो दिल का दर्द क्यों बढ़ जाता है? रूबरू होने का कहाँ हमको वक्त मिल पाता है आते हो […]
हम समझते थे इस चमन को अपना सदा और करते थे प्रीत इसकी धूल से गुजारते थे शाम इसकी गोद में घास पर बैठकर स्वर्ग पाते थे मगर हम परदेशी हैं यह चमन अपना नहीं […]
जिसे अपना मानते आये हर बात पर, नुक्श निकालने को आमदा , देखते ही देखते ये कैसे बेगाना हुआ । दर्द जब हद से बढ़ा दिल पर बोझ बढने लगा बोझिल सा यह मन अश्क […]
हर रीति रिवाज से परे करूँ बस अपने मन का। मन कहता मेरा जो अपमानित करते मेरे जननी जनक का । उनकी पहुँच से दूर कहीं ले जाऊँ करूँ बस अपने मन का। कैसी खटास […]
सुगंधि सी है मौसम में, सितार से बज रहे हैं महक मौसम को मधुर, अच्छा हो अगर कर दो गीत गाता है कोई प्रीत के अगर, छू के अधरों से, उस गीत को अच्छा हो […]
पगडंडियां जिंदगी के सफर में बहुत कुछ सिखा जाती हैं। कभी नफरत के साए में जीना कभी प्यार का पाठ पढ़ा जाती हैं। जिंदगी की पगडंडियों पर चलते हुए उम्र के कई पड़ाव पार कर […]
गुलाबी धूप की, ओढ़ चुनरिया देखो सर्दी आई है ठंडा कोहरा आसमान में, बादल भी संग लाई है पर्वतों का सा,मौसम हो जाता चाय सुहाती है हरदम बिन शॉल और बिन स्वेटर तो, निकला सा […]
तुम्हारी बेरुखी को प्यार समझूं या खता समझूं तू ही बता ना आखिर क्या समझूं ? सामने आकर भी मुह फेर लेते हो बेबसी समझूं या बेवफाई समझूं तू ही बता ना आखिर क्या समझूं […]
बन पाता है जो मुझसे उतना योगदान मैं देती हूँ जितनी मेरी क्षमता है उतनी ही सेवा करती हूँ| थक जाती हूँ जब मैं ज्यादा बिस्तर पर पड़ जाती हूँ फिर तो अपने आप भी […]
द्वार पर खड़ी हूँ भीख दे दो सीख नहीं कुछ अन्न-जल दे दो तेरे बाल- बच्चे सलामत रहें, घर-द्वार फूले-फले, बड़ी भूंख लगी है कुछ खाने को दे दो सीख नहीं कुछ अन्न-जल दे दो… […]
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