न करना मन दुःखी किसी की बातों से ये तो दुनिया है रुला देगी, तुम्हें बातों से। भरोसा हो उसी पर जो समझता हो तुम्हें न जुडना भूल कर भी खुदगरज के नातों से

धीरे-धीरे चुपके चुपके पड़ रही है साँझ हम भीतर ही थे पता ही नहीं चला कि कब आई दबे पांव साँझ। अभी तो उजाला था, चहक रही थी चिड़ियाएं, दिख रही थी चारों ओर के […]

आज तुम्हारी मुस्कुराहट में वो बात दिख रही है, जिस पर लिखने को कलम – कागज लिए हजारों हाथ भी काँपते हुए, घबराते हुए असहाय होकर, नहीं लिख पाते हैं, सीधी कविता। असहाय हाथ, उलझी […]

अहो, कविता!! तुम तो बहुत ही खूबसूरत हो, सजाकर भाव रसना से मधुर अभिव्यक्ति करती हो। जीवन का सुख व दुख सब कुछ समेटे हो स्वयं में तुम, समझ संवेदनाओं को विलक्षण रूप देती हो। […]

दस अक्टूबर है आज जीवन के लिए है खास विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस है आज थोड़ा जगाना होगा समाज। जिस तरह जरूरी है तन का स्वस्थ और सुडौल रहना, ठीक उसी तरह तरह जरूरी है […]

तीस किमी दूरी तय करने में पांच बार बाइक रोकता हूँ, मोबाइल खोलकर व्हाट्सएप पर उसका मैसेज खोजता हूँ। फिर आगे बढ़ता हूँ, फिर टुन की आवाज होती है बेचैनी बढ़ती है, मेरी बाइक रुकती […]

छोटा सा बीज पीपल का बड़ा सा पेड़ बनकर हजारों वर्ष तक प्राणवायु देता है जिसे पूजकर हर कोई हुमायूं होता है। इसी तरह न समझो कि छोटा कभी बड़ा नहीं बनता है बल्कि मौका […]

किसी गरीब की कभी मदद न की हो तो आज ही कीजिए, टेंशन न लीजिए देर मत कीजिये खुदा के वास्ते कुछ दान-धरम कीजिये। खुदा भले ही न दे इसके बदले में तुम्हें, मगर अब […]

कहीं बहुत दूर से हवा उड़ा कर ला रही है प्यारी सी सुगन्ध किसी फूल की। निराली सुगन्ध नासिका के भीतरी इन्द्रिय स्थान पर, अपनी उपस्थिति का नया अहसास करा रही है। पवित्र सी सुगंध […]

बदलती प्रकृति के निराले खेल, कितनी उमंग से उगी थी बरसात में, कद्दू, ककड़ी, लौकी की बेल। मौसम बदलते ही मुरझाने लगी, सूखने लगी छोड़ गई अपने निशान, बीतते रहे ऐसे ही दिन-वार ताकता रह […]

नारी, नहीं रौनक हो तुम घर की प्राण हो, जान हो तुम भीतर खुशियों की खनखनाहट बाहर अभिमान हो तुम। माँ-बहन-पत्नी, बेटी रिश्तों का मधुर गान हो तुम कुछ भी कहे कविता मगर जिंदगी की […]

भरी बरसात है फिर भी कलम से प्यास लिखता हूँ, समर्पित हो मगर फिर क्यों वहम को पास रखता हूँ। नजर पर रख कोई पर्दा हमेशा पाप करता हूँ, यहीं पर हीन हूँ मैं बस […]

सुबह कितनी मनोरम है उग चुकी सूर्य की प्यारी किरण है। उस पर तुम्हारी मुस्कुराहट का चमन है। तभी तो आज कुछ ज्यादा चमक है, क्योंकि पायल की सुनाई दे रही मधुरिम खनक है। सूरज […]

मुहल्ले में खड़े टावर में सुनकर कांव कव्वे की, सभी यह सोच कर खुश हैं अब मेहमान आयेगा। मगर वह पाहुना आयेगा किसके घर किसी को भी पता कुछ है नहीं केवल भरोसा है कि […]

दिल का भवन तो आपका बेहद सजीला है, फटे से पांव रखने में मुझे लज्जा सी आती है। ******************* आप हो सामने तो मुस्कुराहट छुप सी जाती है मगर भीतर ही भीतर से तराना गुनगुनाती […]

न रखना आंख अपनी तुम इस तरह से सदा ही नम जरा चिंगारियों के वास्ते स्थान भी रखना। किसी की बात कोई सी न आये आपके यदि मन उसे इग्नोर कर देना मगर अपमान मत […]

बेवजह मत उछालो इस तरह से कीच दूजे पर, जिंदगी मत बिताओ दूसरों से रोज लड़-भिड़ कर। प्यार से भी कभी जी लो करो इज्जत सभी की तुम, स्वयं ही दूर भागेंगे न टिक पायेंगे […]

नारे फिर लगाना शक्ल देखो गौर से मेरी, मुल्क का आक़िबत हूँ आज हालत है बुरी मेरी। खड़ी बेरोजगारी है सामने पर स्वयं देखो लगा नारे मेरे कानों में यूँ पाषाण मत फेंको। शब्दार्थ – […]

भुला के देख लो चुनौतियां हैं तुम्हें, न भुला पाओगे, करोगे याद, अच्छाई से या बुराई से, मगर भुला न पाओगे। करोगे याद नफरत से या मुहोब्बत से, याद तो आयेंगे हम आयें भले ही […]

सदा से ही उपेक्षित हूँ सदा ही हार पाया हूँ भले ही और आगे भी निरन्तर हार पाऊंगा मगर तुझको जमाने आईना पूरा दिखाऊंगा। डरूंगा झूठ से तेरे तो कविता रूठ जायेगी, अपनी लेखनी से […]

गैया तुम तो मैया हो है दूध अमृत तुम्हारा जीने एक सहारा जिससे पोषित होता है मन और शरीर हमारा। हर तरह काम आती हो जीना हो या मरना हो हर जगह जरूरत पड़ती शुभ-अशुभ […]

मुझ में भी कमियां होंगी तुझ में भी कमियां होंगी, तुझ में, मुझ में दोनों में लाखों ही कमियां होंगी। आ कमियां खूबी में बदलें मिलकर कर कदम बढ़ा लें हम दोनों अपनी खूबी से […]

कांटों सी क्यों चुभन रखूं जब मिट्टी में मिल जाना है, कभी किसी ने कभी किसी ने निश्चित ही है जाना है। फूलों सी खुशबू फैला दूं जिधर चलूँ उधर महका दूँ, प्यार का बीजारोपण […]

नया सवेरा नई उमंगें छोड़ो मन की सभी उलझनें, बीते बातें एक तरफ कर जीतो, पा लो नई मंजिलें। रात निराशा की थी जो भी बीत गई सो बात गई, अब वो सारा दर्द भुला […]

विजदेव नारायण साही जी का आज जन्मदिन है, उनको श्रद्धांजलि अर्पित कर लूं यह कवि का मन है। तीसरा सप्तक में उदित हुए, अंदाज कबीरी मिलता है मछलीघर, साखी में उनका बौद्धिक परिचय मिलता है। […]

आठ महीने की गुड़िया ने आज पा पा बोल दिया धीरे-धीरे साफ शब्द कहकर वाणी को खोल दिया। वैसे तो गुड़िया रानी, अपनी भाषा में गाती है, कहती है कुछ, इठलाती है देखो तो मुस्काती […]

हो चुकी है रात चारों ओर छाया है अंधेरा चाँद आया ही नहीं तारों में छाई है उदासी। टिमटिमा कर कह रहे हैं किस तरह से अब कटेगी रात तन्हाई भरी। एक पखवाड़े की होगी […]

प्रेमी दिवस को यदि तुम्हें मैं दे न पाया था गुलाब तो न समझो बेवफा हूँ व्यस्त था मैं बेहिसाब। प्यार की निचली अदालत में सबूतों की जगह ले न जाना तुम इसे टिक न […]

मत हिलो देखकर दूजे की चकाचौंध को तुम जो भी है पास अपने खुश रहो, संतुष्टि पाओ। पेट भरने को भोजन और वस्त्र हों ढके तन सिर छुपाने को छोटा सा भवन हो खुश रहे […]

करो कितनी भी कोशिश आप हमसे दूर जाने की, मगर जिद है हमें भी आपको अपना बनाने की। मगर हम वो नहीं जो एकतरफा प्यार से छीनें, जबर्दस्ती करें पाने को गंदी राह अपनाएं। हमें […]

चिंता में डूबे हुए ओ मनुज सुन चिंता न कर तू चिंता चिता है। चिंता से होता नहीं लाभ कुछ भी, होता है वो जो रब ने लिखा है। भले ही तुझे कष्ट घेरें अनेकों […]

विपरीत समय है, मानवता पर संकट के बादल छाए हैं। जहां-तहां महामारी ने सबके चेहरे मुरझाए हैं। ऐसे में संयम रखना है और नहीं इससे डरना है, मुंह पर मास्क लगाए रख कर इस संक्रमण […]

दो पंक्तियाँ तुम पर न लिख पाऊं तो मैं भी कवि नहीं, स्वप्न तक शायरी न पहुंचाऊं तो मैं भी कवि नहीं। जब कभी मन टूट कर बिखरा हुआ हो, दर्द हो, दर्द तक मलहम […]

मनोरम रात है बिखरी हुई है चांदनी तुम्हारी मुस्कुराहट सी दिखाई दे रही है चांदनी। जिस तरह चाँद खिलता है कभी कुछ दिन महीने में, उसी की भांति तुम भी हो जो हंसते हो महीने […]

सो जा मजे से चैन से तू सोमरस पीकर न कर चिंता हमारी हम भले, भूखे ही मर जाएं, तेरे नशे ने ही हमें सड़कों में ला पटका, तुझे अब भी नहीं है लाज जाएं […]

पड़ चुकी है साँझ घर घर में चमकते बल्ब ऐसे लग रहे हैं, जैसे तारों ने किया धरती में डेरा। और चंदा आसमां में आ चुका है, फुल चमक में, चाँद-तारे और बल्बों का मिलन […]

चाँद देखो, चाँद की शीतल छटा का लाभ लो। दाग-धब्बे खोजने की मंद आदत त्याग दो। इंसान में कमियां भी होंगी और अच्छाई भी होगी बस कमी ही खोजने की मंद आदत त्याग दो। हो […]