अपने मन को कभी न डगमगाना भले ही त्याग दे, तुझको ये स्वारथ का जमाना, अपने मन को कभी न डगमगाना। भले ही लाख परेशानियां आएं तुझ पर। मगर तू लौह सा बन हौसला रखे […]
अपने मन को कभी न डगमगाना भले ही त्याग दे, तुझको ये स्वारथ का जमाना, अपने मन को कभी न डगमगाना। भले ही लाख परेशानियां आएं तुझ पर। मगर तू लौह सा बन हौसला रखे […]
रोशनी आये भले ही कहीं से भी मगर वो आये, अंधेरे को हराने आये। उसकी किरणें हों इतनी तीखी सी आवरण भेद कर भीतर जहां हो मन वहां पहुंचें, मिटा दें सब अंधेरा। और जितनी […]
जिन्दगी ने दिया है तोहफा हो प्राणों की हरेक सांस हो तुम, सजा चमन तुम्हीं से आज मेरा, कल भी जी लेंगे ऐसी आस हो तुम। जबसे आई, बाहर लाई हो लुटाती नेह, चली आई […]
देखो जरा सा बाहर मिट्टी है सब तरफ जी, मिट्टी में हैं जन्मते मिट्टी में खेलते हैं, मिट्टी में जड़ हमारी मिट्टी है सब तरफ जी। रोड़ी- सीमेंट की जिस चमकी छठा में हो तुम, […]
ये उठा पटक लगी ही रहती है दूरियां और करीबी मिलकर, जिन्दगी की कहानी चलती है। कभी बुलंदियों में होते हैं, कभी सतह में पड़े होते हैं, कभी है अर्श का चौड़ा सीना फिर कभी […]
होगा सफल एक दिन निश्चित मेहनत कर ले मेहनत कर ले, मेहनत ही है राह शिखर की, सच्चे मन से मेहनत कर ले। सच्चा यत्न किया है जिसने फल पाया है निश्चित उसने, तू भी […]
हम तो विद्वतजनों के कायल हैं, उनकी सच्चाइयां हैं मित्र अपनी, उनकी अच्छाइयाँ हैं मित्र अपनी, उनकी वाणी से लाभ पायें सभी, उनको कोई भी दुख न होवे कभी।
वो जब भी सामने रहती है सब गम भूल जाता हूँ, नहीं कुछ याद रखता हूँ स्वयं को भूल जाता हूँ। खुशी का गीत है वह प्रेम का संगीत है वह ही उसी के सामने […]
मुझे किन बातों की सजाएं दे रहे हो तुम, टेढ़ी नजरों से तक देख नहीं देते हो। कहीं किसी और की धमक तो नहीं है जो कि, शांत चेहरे उलझन पाले रहते हो। कहीं कोई […]
कविता – मेरे पिया परदेशी (छंदबद्ध कविता) ********************** चारों ओर शरद की धूम मची देख सखी, पिया मेरे आयेंगे न जाने कब तक अब। बीती बरसात आँख सूख गई अब मेरी, नींद नहीं चैन नहीं […]
कविता – हौसला रख आगे बढ़ (रोला छंद का रूप- मात्रा 11-13) *********************** मंजिल पानी है तो, हौसला रख आगे बढ़, विचलित मत हो किंचित, जीत का स्वाद तू चख। अपने को कमजोर, समझ कर […]
कागज!! बड़े काम के हो आप युगों युगों से आप पर कलम अंकित करते आई है, तमाम तरह का साहित्य। आप में अब तक का दुख-सुख, उत्थान-पतन, आशा-निराशा, उत्साह-अवसाद, इतिहास, सब कुछ अंकित है। मानव […]
स्वारथ की खातिर दूजे का दिल नहीं दुखाना है, आज नहीं तो कल सबने मिट्टी में ही मिल जाना है। धुँवा धुँवा होकर उड़ना है, बचा हुआ जल में बहना है, शेष नहीं रहना है […]
धरती तो सचमुच माता है सारा बोझ इसी पर तो है, जन्म इसी पर मरण इसी पर सारा बोझ इसी पर तो है। हम अपने स्वारथ की खातिर पाप कर्म में रत रहते हैं, कभी […]
सुबह की, किरण हो नई रोशनी हो, बहारों भरी हो, नई रोशनी हो। जिन्हें रात भर चैन की नींद आयी, उन्हें जगमगाती, नई रोशनी हो। बिखरते हुये दिल अंधेरा घिरा हो, उन्हें राह देती, नई […]
सोते समय तुम हमें याद करना दवा नींद की बन सुकूँ-चैन देंगे। अगर स्वप्न में दिख गए आपको हम, आवाज देना, मुस्कान देंगे।
हवा आजकल कुछ जवाँ सी जवाँ है, दिले धड़कनें भी जवाँ सी जवाँ है। उदासी नहीं रख कहीं मन लगा ले, अभी तो जवानी जवाँ सी जवाँ है। अंधेरा तुझे रोक पाये कभी ना खिली […]
छोटी सी है बिटिया रानी ऐसी लगती बड़ी सयानी, अपनी ही भाषा में जाने क्या कहती है गुड़िया रानी। वॉकर में बैठाओ कहती उसमें पांव टिकाकर चलती खड़े नहीं हो पाती है पर करती है […]
बाल कविता – स्कूल बैग *********** मेरा प्यारा स्कूल बैग सुन्दर सा है स्कूल बैग, चलती हूँ तो पीठ में रहता न्यारा सा है स्कूल बैग। सभी किताबें और कापियां रहती प्रेम भाव से इसमें, […]
चीन की कठपुतली बनकर कब तक ऐसा व्यवहार करोगे, लड़ना है तो खुलकर आओ कब तक छिपकर वार करोगे। पाकिस्तान, नेपाल आदि तुम अभी समय है संभल भी जाओ, दूजे की बंदूक उठाकर कब तक […]
इस तरह बम पटाखे फोड़ो मत, कान डरते हैं, कान फोड़ो मत। निर्दयी से करो किनारा तुम दया धरम की राह छोड़ो मत। मिलो ऐसे मिलो, दूध में बतासे से कच्चे धागों में खुद को […]
देवी माँ का पूजन कर लो लेकिन अपनी मां मत भूलो, जिसने जनम दिया तुमको वृद्धाश्रमों में ठूँसो। थोड़ा सा सोचो-समझो, बुजुर्गों की इज्जत कर लो, अपने संतोष की खातिर उनको वृद्धाश्रमों में मत ठूँसो। […]
नयन आपके राह भटका रहे हैं, जरा सा चलें तो अटका रहे हैं। हुआ क्या अचानक उन्हें आज ऐसा हमें देख जुल्फों को झटका रहे हैं। इल्जाम हम पर लगाओ न ऐसे, दिल ए द्वार […]
कहीं भीड़ में खो गई है मुहोब्बत पहले है रोटी फिर है मुहोब्बत। जरा पास आओ, हमें कुछ है कहना। नहीं ठीक ऐसे सभी से मुहोब्बत। हमें देखकर फूल भी मुंह चुराते। बिना फूल के […]
कहीं भीड़ में खो गई है मुहोब्बत पहले है रोटी फिर है मुहोब्बत। जरा पास आओ, हमें कुछ है कहना। नहीं ठीक ऐसे सभी से मुहोब्बत। कहीं भीड़ में खो गई है मुहोब्बत पहले है […]
अंधेरे से ज्यादा, करीबी न रखना, अंधेरे से दूरी बनाए ही रखना। भले ही जमाना, तुम्हें कुछ न समझे, मगर हौसले को बनाये ही रखना। चली आंधियां है, धूल उड़ रही है आंखों को अपनी […]
वफ़ा कीजिए खुद वफ़ा ही मिलेगी, धोखे से बस बेवफाई मिलेगी। मुहोब्बत अगर साफ पानी से होगी, दिल ए गंदगी को , जगह ना मिलेगी। सड़क धूल से, इस कदर जब भरी हो, पांवों को […]
आज फिर से हरकतें सीमा में दुश्मन कर रहे हैं, बेवजह उत्पात कर हमको परेशां कर रहे हैं। चीन अपनी बदनीयत से जाल फैलाने जुटा है, पाक को कब्जे में लेकर साजिशें करने लगा है। […]
न करना इस तरह संदेह हम पर आप यूँ हम तो सितारे हैं अमावस को चमकते हैं। निगाहों पर निगाहें डालकर दिल में धमकते हैं, आपके मुस्कुराते होंठ में हम ही चमकते हैं।
अरे, न हो, इतना निराश तू बाधाएं आती रहती हैं, मगर हौसले रहें बुलंद तो खुशियां कदम चूमा करती हैं। असफलताओं से मत घबरा सच्ची में तू मेहनत कर ले, सच्चाई पर विश्वास जगा बाकी […]
मन में नई उमंगें फिर से उमड़ रही हैं, कालिमा की परतें सचमुच उखड़ रही हैं। दुविधाएं आज सारी मिटकर सिमट रही हैं बाधाएं आज सारी पथ की निपट रही हैं। मंजिल को चूमने को […]
राज मत पूछो उन्हें क्यों चाहता है दिल गर बता देंगे हकीकत आप भी जाओगे हिल। इसलिए होंठो को हमने अब दिया है सिल, ताकि भरते घाव कोई फिर न पाये छिल। डॉ0 सतीश पाण्डेय
तुम भले ही मुंह फुला दो मुस्कुराना छोड़ना मत, गीत गायें हम कभी तो गुनगुनाना छोड़ना मत। यदि बताएं बात दिल की बीच में ही टोकना मत, जो कदम आएं हमारी ओर उनको रोकना मत। […]
हम पलों का नहीं पलकों का हिसाब रखते हैं, जिनको दुत्कारते सब उनसे मिलाप रखते हैं। जब कभी नींद नहीं आती है रात भर करवटें सताती हैं, तब लगा ध्यान, बन्द आंखों से खुद का […]
आज है मन खिन्न कवि का देख चारों ओर अपने घिर गई बेरोजगारी धूल में यौवन के सपने। देखकर उस दुर्दशा को क्या लिखें, कैसे लिखें, पढ़ रहे हैं, डिग्रियां हैं, बस पुलिंदे ही दिखें। […]
आंखों में चाहत, सजी हुई है, दिलों की धड़कन, बढ़ी हुई है। न कह सके हैं वो, कुछ भी हमसे, हमें भी हिम्मत, नहीं हुई है। मगर आहटें ये, बता रही हैं, दस्तक तो है […]
हजारी खिल, उड़ा खुशबू बुला भंवरा, सुना संगीत। भेज संदेश, प्यारा सा, बुला तू अब, मेरा मनमीत। रही है जो, भी चाहत सी उसे मकरंद में रखकर सुगंधित कर फिजायें सब, बढ़ा दे ना, परस्पर […]
अश्क मेरे, नैन तेरे बूंद निकली, कब गिरी यह, तू बता दे, बात क्या है, मैं समझता, हूँ नहीं यह। चूक मत यूँ, बोल दे अब। जो हो कहना, आज ही कह। कल कहेंगे, कल […]
मधुमालती छंदाधारित कविता – शीर्षक – मन (कुल 14 मात्रा, विन्यास 2212, 2212) ******************* मन फूल सा, कोमल न हो, पर ठोस हो, तो बात है। मन ही न हो, तब आदमी, क्या आदमी, है […]
रात और दिन का मिलन साँझ है सखी, कब मिलोगे टकटकी में आंख है सखी। आ रही है रात दूर जा रहा दिन खोल कर कपाट दिल के झाँक ले सखी।
रखना लगाव खोलकर के द्वार दिल के तुम। जितना वो दे उससे भी अधिक प्यार देना तुम। कभी किसी दुखी का दर्द मत बढ़ाना तुम, जरा सा नेह देना और गम मिटाना तुम। चूमो शिखर […]
आपकी निगाहों में इस कदर नशा देखा, भरी हो जैसे कोई तेज, तीखी हाला। हम तो हाला कभी सूँघते तक नहीं थे, और खूबसूरती पर लिखते नहीं थे, मगर क्यों हुआ देखने में नशा सा, […]
आपकी नेह भरी सोच की खुशबू यहाँ तक आ रही है, यह पवन दे मंद झोंका, मन ही मन मुस्का रही है। बात पूछो तो न बोली बस इशारा कर रही है। लग रहा है […]
अब बड़ा तू बन चुका है छोटी बातों में न लग ईर्ष्या, विद्वेष, नफरत ऐसी बातों में न खप। अन्यथा था तू अर्श से फिर फर्श में आ जायेगा, फर्श पर हम जैसे छोटे लोग […]
सुबह हो रही है, घौंसले से बाहर आने को आतुर चिड़िया ने पंखों को भुरभुराया, सहलाया, मानो योग कर रही हो, गर्दन इधर की, उधर की फुर्र उड़ी अपने दैनिक कार्य निपटाने चली। समय की […]
यूँ खफा मत रहो भुला दो बात बीती, कब तलक गांठ मन में आप बांधे रहोगे। आप थोड़ा अधिक अच्छे हम जरा सा बुरे हैं तो इंसान ही यूँ फर्क तुम कैसे करोगे। अगर इंसान […]
भानु की ये जवाँ किरणें हमें संदेश देती हैं, बीच से बादलों को भेदकर आगे निकलना है। चमकना है क्षितिज में नफ़रतों का तम मिटाना है, दिलों में गर्मजोशी हो जरा सा ताप रखना है
जरा सी भी तुम्हें असली खुशी गर आज मिल जाये। पकड़ कर कैद कर लेना मगर अभिमान मत करना, उग रहा हो अगर सूरज तो उगने दो, उगेगा ही, उसे तुम देख गुस्से से नयन […]
अंधेरे में घिरा आकाश ठीक वैसा जैसा खुद पर न हो विश्वास। तारामंडल का टिमटिमाना ठोस निर्णय ले न पाना, ठीक एक जैसा है, अपनी बात पर स्थिर न रह पाने जैसा है। कदम उठाना […]
खूबसूरत काव्य सरिता बह रही है आजकल, इस भरी महफ़िल में रौनक सज रही है आजकल। प्रेम है, उत्साह है एक दूसरे की चाह है, है मिलन मधुरिम बहारें औ विरह की आह है। प्रकृति […]
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