गीत – प्रभु से वन्दन हमें प्रेम बहुत हैं रघुवर तुमसे अपने चरण में बुला लेना थोड़ा सा दया हम पर करना मुझको भव से पार लगा देना मैं दीन दुःखी आभागा हूँ किस्मत का […]

रंग बिरंगे सपने नव गीत नव सृजन को मैं गुनगुनाना चाहता हूँ आसमान की ऊँचाई को मैं नापना चाहता हूँ हौसले की उड़ान से सब कुछ बदलना चाहता हूँ रंग बिरंगे सपनो को मैं अपना […]

फौलादी मन किसी शाख कि मोहताज नहीं हूँ साहब जमींर जिन्दा हैं मेहनत करके खाता हूँ बैसाखी का नंगा नाच करके क्या हैं फायदा मुझे अपने ऊपर हैं चट्टानो सा भरोसा मेरी खुद्दारी का हाल […]

उस सूखे पेड़ पर क्या चिड़िया फिर न चहचहाएंगी सूख गया जो शजर वक्त की बेवक्त मार से क्या उस शजर की डालियाँ फिर न लहराएगी जिन्दगी बन गयी गुमसुम और, हम गुमनाम बनकर रह […]

ऊपर वाले ने कहर बरसाया है एक बूंद धरा पर न आया है धरती पर देखो आई दरार चारों ओर मचा हाहाकार कर्ज तले दबे हैं कितने किसान क्या करें सोचते हैं सुबह शाम घर […]

सात सुरों के संगम का एक जैसा सबको, रियाज़ कराया जाता है, फिर आपस में ही एक दूजे में क्यों सबको, इम्तियाज़ बताया जाता है, जब ज़मी आसमां चाँद सितारे हम सबसे, कोई भेद न […]

तुम मेरे ज़िन्दगी खरीद सकते हो पर ख्वाब तोह आज़ाद है तुम मेरे तन को गुलाम कर सकते हो पर लब तोह आज़ाद है तुम मुझे मौत दे सकते हो पर सोच तोह आज़ाद है […]

समन्दर के कभी दो किनारे नहीं मिलते, हमसे तो आकर ही हमारे नहीं मिलते, बात ये है के विचारधारायें भिन्न हैं सभीकी, तभी तो ढूढे से किसी को सहारे नहीं मिलते।। राही (अंजाना)

(जब किसी परिवार का एक बेटा शहीद हो जाता है और चंद सालों बाद सारी दुनिया उसके परिवार के दुखों को भुला देती है, उस समय उसके घर के दरवाजे से गुजरती पुरानी हवाये जो […]

जरा सी बात में टूट जाता हूं , गुस्से से आकर फुट जाता हूँ। लोग समझते है आदत है मेरी मैं हर बात पर रुठ जाता हूँ। हृदय पर हल्की घाट होती है, बिना बात […]

बहुत दिनों के बाद नई तस्वीर बनाने बैठा हूँ, मुझसे रूठी थी जो मेरी तकदीर बनाने बैठा हूँ, इल्जामों की सबने जो फहरिस्त लगाई है मुझपे, कोरे कागज़ पे मैं अपनी तहरीर बनाने बैठा हूँ, […]

वो अकेला हैं , इसलिए साथ चाहिए , जो समझ सके , उसके हालत, उसकी पीडा । वो किसान हैं, वो अन्नदाता हैं , कोई और नहीं वो एक पेड पर फिलहाल लटकता हुआ , […]

जो छूले मन कोई मेरा मुझे अभिमान हो जाये, क्या होती है हृदय धड़कन मुझे भी ज्ञान हो जाये, किसीकी बात सुनकर मैं भटक जाऊँ नमुमकिन है, वो दे आवाज़ तो मैं ज़िंदा हूँ मुझे […]

इतना गुरुर ना कर अपनी खुबसुरती पड़ यह तोह उम्र के साथ चला जायेगा जितना उस खुदा ने प्यार और शिद्दत ने तुझे बनाया काश उतना अच्छा दिल दिया होता तोह इतनी ज़िंदगियां बर्बाद ना […]

(I) मैया, ओ मेरी मैया! क्यूँ कहती मुझे कन्हैया? कृष्ण और मैं — वो द्वापर का दुलारा, मैं कलयुग का मारा। वो नयनों का तारा, मैं दिलों से हारा। वो जगत में सबसे न्यारा, मैं […]

होश में रहने वाले ही अक्सर बेहोश निकले, बिना पिए ही पीने वालों से मदहोश निकले, बोलने वालों की भीड़ का जायज़ा किया हमने, न बोलने से बोलने वाले ज्यादा ख़मोश निकले, जो बहाने बनाते […]

वह दर्द बीनती है टूटे खपरैलों से, फटी बिवाई से राह तकती झुर्रियों से चूल्हा फूँकती साँसों से फुनगियों पर लटके सपनों से न जाने कहाँ कहाँ से और सजा देती है करीने से अगल […]

मुझे बारिश में भीगना पसंद था, तम्हें बारिश से बचना… तुम चुप्पे थे, चुप रह कर भी बहुत कुछ कह जाने वाले। मैं बक-बक करती रहती। बस! वही नहीं कह पाती जो कहना होता। तुम्हें […]

जब चलते-चलते थक जाओ तो कुछ देर ही सही थाम लेना पैरोँ के पहिए.. बहाने से उतर जाना पल दो पल ज़िन्दगी की साइकल से.. देखना ग़ौर से मुड़कर कहीँ बहुत पीछे तो नहीँ छूट […]

तकनीकी की लय में रिश्ते अब ढल रहें हैं , पीर की नीर हो अधीर जल धारा बन बह रही है, मन्तव्य क्या, गन्तव्य क्या, भावनाओ की तरंगे सागर की लहरो सी, विक्षिप्त क्रंदन कर […]

तकनीकी की लय में रिश्ते अब ढल रहें हैं , पीर की नीर हो अधीर जल धारा बन बह रही है, मन्तव्य क्या, गन्तव्य क्या, भावनाओ की तरंगे सागर की लहरो सी, विक्षिप्त क्रंदन कर […]

इन हाथों में अरसों तक थी उनके हाथ की खुशबु। जैसे रातरानी से महकती रात की खुशबु। इत्र हो गई जो बूंदें लिपटकर उनसे, दुनिया को ये भरम कि ये बरसात की खुशबु।