इतना गुरुर ना कर अपनी खुबसुरती पड़ यह तोह उम्र के साथ चला जायेगा जितना उस खुदा ने प्यार और शिद्दत ने तुझे बनाया काश उतना अच्छा दिल दिया होता तोह इतनी ज़िंदगियां बर्बाद ना […]

(I) मैया, ओ मेरी मैया! क्यूँ कहती मुझे कन्हैया? कृष्ण और मैं — वो द्वापर का दुलारा, मैं कलयुग का मारा। वो नयनों का तारा, मैं दिलों से हारा। वो जगत में सबसे न्यारा, मैं […]

होश में रहने वाले ही अक्सर बेहोश निकले, बिना पिए ही पीने वालों से मदहोश निकले, बोलने वालों की भीड़ का जायज़ा किया हमने, न बोलने से बोलने वाले ज्यादा ख़मोश निकले, जो बहाने बनाते […]

वह दर्द बीनती है टूटे खपरैलों से, फटी बिवाई से राह तकती झुर्रियों से चूल्हा फूँकती साँसों से फुनगियों पर लटके सपनों से न जाने कहाँ कहाँ से और सजा देती है करीने से अगल […]

मुझे बारिश में भीगना पसंद था, तम्हें बारिश से बचना… तुम चुप्पे थे, चुप रह कर भी बहुत कुछ कह जाने वाले। मैं बक-बक करती रहती। बस! वही नहीं कह पाती जो कहना होता। तुम्हें […]

जब चलते-चलते थक जाओ तो कुछ देर ही सही थाम लेना पैरोँ के पहिए.. बहाने से उतर जाना पल दो पल ज़िन्दगी की साइकल से.. देखना ग़ौर से मुड़कर कहीँ बहुत पीछे तो नहीँ छूट […]

तकनीकी की लय में रिश्ते अब ढल रहें हैं , पीर की नीर हो अधीर जल धारा बन बह रही है, मन्तव्य क्या, गन्तव्य क्या, भावनाओ की तरंगे सागर की लहरो सी, विक्षिप्त क्रंदन कर […]

तकनीकी की लय में रिश्ते अब ढल रहें हैं , पीर की नीर हो अधीर जल धारा बन बह रही है, मन्तव्य क्या, गन्तव्य क्या, भावनाओ की तरंगे सागर की लहरो सी, विक्षिप्त क्रंदन कर […]

इन हाथों में अरसों तक थी उनके हाथ की खुशबु। जैसे रातरानी से महकती रात की खुशबु। इत्र हो गई जो बूंदें लिपटकर उनसे, दुनिया को ये भरम कि ये बरसात की खुशबु।

ज़मीन मुझको समझ कर खुद आसमान लिखा था उसने, मैं था परिंदा वगैर परवाला खुद को उड़ान लिखा था उसने, मौत को देखा है मैं करीब से अपने मुझको पुतला खुद में Jaan लिखा था […]

रोशनी दिन मे थी अंधेरी शाम लिखा था उसने, वाकिब मैं था जैसे खुद को अंजान लिखा था उसने, नज़रे पलट ली निगाहों से अपने मुझको मिट्टी खुद को शान लिखा था उसने, अरे बेवफा […]

कभी ना हो सके जिसका खात्मा, ऐसा इम्तिहान लिखा था उसने। वर्षों की दुश्मनी थी जैसे ऐसा, इंतेकाम लिखा था उसने।। अधूरी कहानी अधूरी मोहब्बत अधूरी जिंदगी में, मैं खुश हूँ खुद परेशान लिखा था […]

मंजिल मेरी वो मुझको श्मशान लिखा था उसने, है गरीब खुद ऐसा खानदान लिखा था उसने। रहता मै पक्के घरों में अब(पहले खपरैल मे रहते थे), झोपड़ी में है वो ऐसा मकान लिखा था उसने।। […]

मुहब्बत न मिटने का पैगाम लिखा था उसने, इश्क़ तुमसे है एसा अंजाम लिखा था उसने । बेवफा हूँ मैं ऐसा सोच कर वो , हाथों पे किसी और का नाम लिखा था उसने। Please […]

एक मासूम सी ज़िन्दगी को यूँ दगा दे गई, उड़ाकर खुशियाँ सारी गमों को सजा दे गई, कहते हैं जो मरहम लगाने आई थी वो यारों, बेवजह वही ज़ख्मो को खुल के हवा दे गई, […]

समंदर के किनारे बैठे कभी लहरों को गौर से देखा है एक दूसरे से होड़ लगाते हुए .. हर लहर तेज़ी से बढ़कर … कोई छोर छूने की पुरजोर कोशिश करती फेनिल सपनों के निशाँ […]

मैं वो तस्वीर नहीं जो आइने से गुजर जाता हूँ खुश्बू भी नहीं जो लोगो मे बिखर जाता हूँ बिखरती हैं शामे दिन निकलने से पहले मै शायरी हूँ जो हर पन्ने पे उतर जाता […]