दिलों को सिलने वाला कारीगर ढूंढ निकाला, हार कर जितने वाला बाज़ीगर ढूंढ निकाला,
दिलों को सिलने वाला कारीगर ढूंढ निकाला, हार कर जितने वाला बाज़ीगर ढूंढ निकाला,
majdur pel bhar ke sunkon ko dil me sama jaye kahi se roti mila to dil me nigl jaye maa bahan ki pyaar ki sima ko jo jan jaye ma ki mamta per jo anso […]
Majdur main majdur hun siksha s e dur hun koe meri madad karo mai bahut ehsani hun sabki meharcni hun mere liye jamin bhi paraya hai ankhon me nami pyasa man pyasa tan buhi meri […]
Majdur main majdur hun siksha se dur hun koe meri madad karo mai bahut ehsani hun sabki meharcni hun mere liye jamin bhi paraya hai ankhon me nami pyasa man pyasa tan buhi meri nigahe […]
Majdur main majdur hun siksha se dur hun koe meri madad karo mai bahut ehsani hun sabki meharcni hun mere liye jamin bhi paraya hai ankhon me nami pyasa man pyasa tan buhi meri nigahe […]
कब इश्क़ की इलायची जिंदगी में घुलती है जिंदग़ी में महक तभी ताउम्र ठहरती है
लोग पूछते है मेरी जात क्या है, उन सबके लिए मेरी माँ का नाम ही काफी है।
जब होगा दीदार रब का तो पूछुंगी मैं की तेरी इबादत मोहब्बत में इतनी अड़चने क्यों हैं
कोई क्या कहता है परवाह किसे है आंखे जब मुहब्बत से रोशन है तो रातो दिन की फिक्र किसे है
इतना गुरुर ना कर अपनी खुबसुरती पड़ यह तोह उम्र के साथ चला जायेगा जितना उस खुदा ने प्यार और शिद्दत ने तुझे बनाया काश उतना अच्छा दिल दिया होता तोह इतनी ज़िंदगियां बर्बाद ना […]
(I) मैया, ओ मेरी मैया! क्यूँ कहती मुझे कन्हैया? कृष्ण और मैं — वो द्वापर का दुलारा, मैं कलयुग का मारा। वो नयनों का तारा, मैं दिलों से हारा। वो जगत में सबसे न्यारा, मैं […]
होश में रहने वाले ही अक्सर बेहोश निकले, बिना पिए ही पीने वालों से मदहोश निकले, बोलने वालों की भीड़ का जायज़ा किया हमने, न बोलने से बोलने वाले ज्यादा ख़मोश निकले, जो बहाने बनाते […]
खूब निभाया था जिसने वो मुश्किल की बात थी मिला मुकद्दर मे जो मेरे meri औकात थी Rajjneesh
वह दर्द बीनती है टूटे खपरैलों से, फटी बिवाई से राह तकती झुर्रियों से चूल्हा फूँकती साँसों से फुनगियों पर लटके सपनों से न जाने कहाँ कहाँ से और सजा देती है करीने से अगल […]
हमारे हर लम्हे की कोशिश तुम्हारी रूह तक जाने की थी मगर अफ़सोस आप ही इससे अनजाने थे
वो जो कमी थी मैं काबिल न हुआ, मेरे नसीब मे मुहब्बत कभी काबिल न हुआ। Rajjneesh
तेरे मुहब्बत मे न जाने कितने तराने थे, मै आशिक था जब तेरे फ़साने थे।
मुझे बारिश में भीगना पसंद था, तम्हें बारिश से बचना… तुम चुप्पे थे, चुप रह कर भी बहुत कुछ कह जाने वाले। मैं बक-बक करती रहती। बस! वही नहीं कह पाती जो कहना होता। तुम्हें […]
जब चलते-चलते थक जाओ तो कुछ देर ही सही थाम लेना पैरोँ के पहिए.. बहाने से उतर जाना पल दो पल ज़िन्दगी की साइकल से.. देखना ग़ौर से मुड़कर कहीँ बहुत पीछे तो नहीँ छूट […]
प्रेम कवितासबने प्रेम पर जाने क्या-क्या लिखा फ़िर भी अधूरी ही रही हर प्रेम कविता
सो जाते हैं जो सोचकर, उन्हे ख्वाब नहीं मिलता। जिनकी परछाइ होती है मुहब्बत, उन्हे जवाब नहीं मिलता।
तेरे जाने पे खुद को समेट लिया था सोचा था ज़िन्दगी खत्म है ना नींद थी ना चैन था इश्क़ इबादत थी कभी ना रैन था बात दिल की लफ़्ज़ों में थी पर लब पे […]
हुई थी खता हमसे, हमारा ही वो नजर था रखा था कदम जिस गली मे, वो गली ही उनका शहर था। By Rajjneesh
देखते हो उस शख्स को तुम, By जिसे तुम शाद करते हो। नाम मुहब्बत रहता है बस , Rajjneesh बाकी तुम बर्बाद करते हो।
बहती है हवा रातों को, तो कभी चमकता सितारा होता है। होती है मोहब्बत जिसे बार बार, उसे बेवफ़ाई का सहारा होता है। By Rajjneesh
तकनीकी की लय में रिश्ते अब ढल रहें हैं , पीर की नीर हो अधीर जल धारा बन बह रही है, मन्तव्य क्या, गन्तव्य क्या, भावनाओ की तरंगे सागर की लहरो सी, विक्षिप्त क्रंदन कर […]
तकनीकी की लय में रिश्ते अब ढल रहें हैं , पीर की नीर हो अधीर जल धारा बन बह रही है, मन्तव्य क्या, गन्तव्य क्या, भावनाओ की तरंगे सागर की लहरो सी, विक्षिप्त क्रंदन कर […]
इन हाथों में अरसों तक थी उनके हाथ की खुशबु। जैसे रातरानी से महकती रात की खुशबु। इत्र हो गई जो बूंदें लिपटकर उनसे, दुनिया को ये भरम कि ये बरसात की खुशबु।
फ़ुर्सत मिले तो पढ़ लिया करो 2 लाइने मेरे शायरी की, ये वो शायरी है जो कभी गलत नहीं होती।
चलाता रहता हूँ बैठ के साख पे अपनी mobile, गर्मी है साहब पसीने से भीगना नहीं चाहता। Shayar Rajjneesh kann
मुहब्बत है मुहब्बत का अंजाम बता दो, जिसे शायरी पसंद है वो अपना नाम बता दो। Shayar Rajjneesh kann
खाक हुआ मेरा, तेरे फसाने मे। मै पागल हुआ, तेरी तस्वीर बनाने मे। Shayar Rajjneesh kann
ज़मीन मुझको समझ कर खुद आसमान लिखा था उसने, मैं था परिंदा वगैर परवाला खुद को उड़ान लिखा था उसने, मौत को देखा है मैं करीब से अपने मुझको पुतला खुद में Jaan लिखा था […]
रोशनी दिन मे थी अंधेरी शाम लिखा था उसने, वाकिब मैं था जैसे खुद को अंजान लिखा था उसने, नज़रे पलट ली निगाहों से अपने मुझको मिट्टी खुद को शान लिखा था उसने, अरे बेवफा […]
कभी ना हो सके जिसका खात्मा, ऐसा इम्तिहान लिखा था उसने। वर्षों की दुश्मनी थी जैसे ऐसा, इंतेकाम लिखा था उसने।। अधूरी कहानी अधूरी मोहब्बत अधूरी जिंदगी में, मैं खुश हूँ खुद परेशान लिखा था […]
मंजिल मेरी वो मुझको श्मशान लिखा था उसने, है गरीब खुद ऐसा खानदान लिखा था उसने। रहता मै पक्के घरों में अब(पहले खपरैल मे रहते थे), झोपड़ी में है वो ऐसा मकान लिखा था उसने।। […]
मुहब्बत न मिटने का पैगाम लिखा था उसने, इश्क़ तुमसे है एसा अंजाम लिखा था उसने । बेवफा हूँ मैं ऐसा सोच कर वो , हाथों पे किसी और का नाम लिखा था उसने। Please […]
हम साये थे तेरे मंजिल ए इश्क के, फितूर कोई लाया होगा। मुकाबिल न थे हम तेरे, तुम्हें तो आशिको ने बुलाया होगा। Shayar Rajjneesh kann. Please contact me for any show 6393465662
आशिक थे उसके, तो जिक्र और पहचान थी हमारी, उसकी खुशी में ही, तो jaan थी हमारी।
कोई साथी नहीं अपना, बेगाने लाख होते हैं , जो होते हैं दिलो के आग, वही तो राख होते हैं।
एक मासूम सी ज़िन्दगी को यूँ दगा दे गई, उड़ाकर खुशियाँ सारी गमों को सजा दे गई, कहते हैं जो मरहम लगाने आई थी वो यारों, बेवजह वही ज़ख्मो को खुल के हवा दे गई, […]
सच और झूठ के माईने बदल गए, ऐसा हुआ क्या के आईने बदल गए, साध के बनाई जब हाथों की लकीरें, तो राहों में लोग क्यों लाईने बदल गए, राही अंजाना
बहुत दिनों बाद सावन के द्वार आया पहले की तरह इसको अपना ही पाया सभी कवि लोगों को नमस्कार है सावन की आयी जो बहार है
बदरा घिर घिर आयी देखो अम्बर के अंसुअन बरसे है कोई न जाने पीर ह्रदय की पी के मिलन को हिय तरसे है यह मधुमास यूँ बीत न जाये नैनों से झरता सावन है जब […]
और एक दिन दे दिये शब्द सारी व्यथाओं को लिख डाली एक कविता अपनी पहली कविता …
समंदर के किनारे बैठे कभी लहरों को गौर से देखा है एक दूसरे से होड़ लगाते हुए .. हर लहर तेज़ी से बढ़कर … कोई छोर छूने की पुरजोर कोशिश करती फेनिल सपनों के निशाँ […]
लफ्ज़ो को बढ़े करीने से सजाया है इस नज़्म में नूर ए इश्क़ को बहाया है कुछ समन लाकर रख दिये है इसके करीब अपने होठों से हमने इसे गाया है
न तुम थे न हम थे न वो बात रही, न ये रुतबा मिला न वो औकात रही ।
कोई साथी नहीं अपना, बेगाने लाख होते हैं , जो होते हैं दिलो के आग, वही तो राख होते हैं।
मैं वो तस्वीर नहीं जो आइने से गुजर जाता हूँ खुश्बू भी नहीं जो लोगो मे बिखर जाता हूँ बिखरती हैं शामे दिन निकलने से पहले मै शायरी हूँ जो हर पन्ने पे उतर जाता […]
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