लो आ गया, गर्मी का मौसम दहकता सूरज, चिलचिलाती धूप, उमस दोपहर, बहता लूं….. बहता पसीना, लगता गुस्से में लाल है सूरज, मानो कह रहा हो सूरज, बुराई अब कम करो तुम मानव, सच्चाई को […]

मैं एक नज़्म तेरी आँखों मे सजा कर, पलकों पे तेरी ख़ुद का पता लिख जाऊंगा. खुर्दबीन से भी ग़र मैं अब नज़र नहीं आता, देखो गिरेबाँ अपना.. शायद वहीं मिल जाऊंगा.

मैं एक नज़्म हूँ मुझे जी कर देखो, कोई ख़्वाब नहीं कि भूल जाओ मुझे, मैं एहसास हूँ मुझे महसूस करो, कोई गीत नहीं कि गुनगुनाओ मुझे.

इस गर्जन का इस तड़कन का , करुण स्वर कुटुंब के तड़पन का, कम हो जाये इससे पहले , कुछ धड़ हमको भी लाने होंगे। विस्मयबोधक विरक्ती का, परिमाण कड़ी निंदा शक्ति का, कम हो […]

उठ तू शहर से पर गांव को याद रख, पहुँच आसमां से ऊपर पर जमीं को याद रख, बेशक मिले होंगे यार हजार पर , जर्रे ए जिगर में इस दुश्मन को याद रख। अगर […]

जब पहला कदम बढ़ाना था कोई उगली पकड़ाया था जब घुटनों मे मेरी चोट लगी कोई मलहम लगवाया था उस चोट से आगे फिर मेरा कदमो का सफर जब बढ़ता है पेनसिल के युग मे […]

जीवन के पथ पर आगे बढ़कर, काल नियंतर परिवर्तित कर, शून्य वेदना अनुनादित कर, प्रश्नचिन्ह को परिभाषित कर, स्वयं रिक्ति को भरना होगा, काल खंड में चलना होगा। हृदय कंठ स्वर निर्मल करके, मन कर्म […]

ज़िंदगीज़िंदगी Tragedy 1 मिनट 273 0 vivek netan © Vivek Netan Content Ranking #3171 in Poem (Hindi) #305 in Poem (Hindi)Tragedy कुछ इस तरह से मुझ से नाराज़ हो गई ज़िंदगी गाँव की खुली गलियों […]

खुशियों की डंका बजा दिया। इनकी तो लंका ढहा दिया।। हो सकते हैं अपने भी, अब सेब के बागान। डल झील में तैरता, होगा अपना भी मकान। दिलों से शंका हटा दिया। खुशियों की डंका […]

एक तरफ धरती मा की करणवयथा तौ दूसरी तरफ मानवमन है। जौ मन मौसकर और सर पकडकर रौ रहा है। धरती के लाल धरती की तरफ देखकर यह कैसी घडी है। बाहार हन जल की […]

खत्म न हो जश्ने-रौनक हँसीन शाम की। आ टकरा लें प्याला और एक जाम की। देखो साकी खाली ना होने पाए पैमाना, ले आओ सारी मय, मयकदे तमाम की। आ टकरा लें प्याला और एक […]

आखिर खुश तोह हो ना तुम कभी यह ही मायने रखा करती थी किताबों के बीच वोह सुखी गुलाब आज भी बहुत कुछ कहती है किस्मत ने खिंची कैसी यह डोर मै यहा और तुम […]

एक-एक करके चले गए, जो बने थे मेरे सब अपने क्रम-क्रम से बिखर गये वो सुन्दर रचित मेरे सपने अब तो तन्हा हूँ, तन्हाई है बाकी कुछ अब शेष नहीं सब मिट गया, इक अधंड […]

रिमझिम सावन की बरसात उस पर आए तेरी याद…….. भीगी भीगी सावन की वो रात, हौले हौलै बारिश की वो रात, टिम टिम करते तारों की वो रात, पल पल आए तेरी यादों की बारात, […]

आई सावन की फुहार , छाई रूत में खुमार, घटाएं छाई है घनघोर, रह-रहकर दामिनी दमके, हवाएं मचा रही शोर, बारिश की लगी है झडी, जैसे झरनों की हो फुलझड़ी, भीगा भीगा सा ये रुत […]

जितना सुलझाती है उतना ही उलझाती है मुझको, उधेड़कर पहले खुद सिलना सिखलाती है मुझको, खोलकर दिल को जोड़ने में माहिर बताने वाली वो, सच को रफू कर बस झूठ ही दिखलाती है मुझको।। राही […]

सच में सब कुछ बदल गया इंसान का जुबान बदल गया राजाओ की कहानी बदल गया अल्हड़ मदमस्त जवानी बदल गया यारो की यारी बदल गया फितरत होश जिन्दगी बदल गया सच में बहुत कुछ […]

प्रकृति धरोहर वृक्ष धरा कि हैं आभूषण मनमोहक छवि बिखरती चन्द्र रवि के किरणो से जीवन हर्षित करती है कोयल की मृदुगान प्यारी जग को रोशन करती ओश की सुनहरी बूँद चमचम सी करती हैं […]

संवाद – वायु मानव चन्द वायु की लड़ियों ने आकर मुझको घेर लिया सिसक सिसक कर कहने लगी पेड़ो क्यों काट रहे हो मैं दंग अचम्भा देखता रहा पूछ बैठा सवाल ये वायु तेरा क्या […]

नवजीवन का राग/03 ज्ञान का प्रकाश तुम धैर्य रख जलाये चलो अग्यानता को दुर कर साक्षरता बढाये चलो दिन क्या रात क्या खुशी के गीत गाये चलो अंधकार से प्रकाश में जीत का जश्न मनाये […]

नन्हा सा परिन्दा एक नन्हा सा परिन्दा खोज रहा हैं आसमान… अपने हौसले से उड़ान भर देखना चाहता हैं आसमान… छोटे छोटे ऑखो से देखना चाहता हैं प्रकृति की खूबसूरती को महसूस करना चाहता हैं […]

तुम पढ़ी लिखी इंग्लिश मिडियम मैं पढ़ा लिखा शुध्द हिन्दी में मैं खाता हूँ गेहूँ चावल प्रिये तुम खाती पिज्जा बर्गर हो मेरा तुम्हारा मेल हैं क्या छुप छुप कर मिलना खेल हैं क्या तुम […]

सुबह की लालिमा सुबह सुबह सूर्य की लालिमा मुझसे कुछ कहती हैं भोर हुआ जग जा प्यारे चिड़िया ची – ची करती हैं नदियाँ झरना जंगल के बुटे सबसे अनोखे से लगते हैं ओंस की […]

मैं भारती हूँ मैं भारत देश का वासी हूँ वन्दन सबसे करता हूँ देश हित के लिए शीश अर्पित करता हूँ हिन्दू हूँ हिन्दी हैं पहचान राष्ट्र का सेवा करता हूँ धर्म कर्म की बात […]

किसान हाँ मैं ही हूँ किसान साहब जो खोतो में काम करता हैं बैल को भाई मानता खेत को धरती माता हल को पालन हार मानता जीवन को खेत में निकाल देता शहर से कोशो […]

मेरे कलम से……. बदलने चले थे हम संसार दो कदम में हो गये बेकार नसीहत से बदल देते बुरे को अच्छा बना देते ख्वाब हर पल देखते थे सुनहरे संसार को बदलने को बदल ना […]

क्या बयॉ करे…… क्या बयॉ करे अपने लफ्जो से हंसकर दर्द छुपाता हूँ दिल के गहरे घाव को अपने किस्मत को मैं कोसता हूँ सुबह शाम दर्द को झेलता हूँ क्या बयॉ करे अपने लफ्जो […]

😰😰😰😰😰😰😰😰😰😰 मन की सोच से…… आईने को जब देखता हूँ खुद को घुटता पाता हूँ लगता हैं नहीं दे पायेगे खुशी इस जमाने में खुद को जीतना छिपाना चाहता हूँ बेवसी मुझ पर हँसती हैं […]

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 सिर्फ तुम्हारे लिए….. तुम ख्वाब हो अरदास हो मेरे दिल की धड़कन हो तुम प्यार हो पहचान हो मेरे जीने की वजह हो तुम जीवन हो हकिकत हो मेरे सपनो की मुस्कान हो तुम […]

रक्षा करना बहना का सूत के बन्धन का प्यार के रिस्तो का भाई बहन के दुलार का बचपन की ठिठोली का टूटने ना देना रिस्ते की बुनियाद को रक्षा करना बहना का दरिन्दो की आड़ […]

किसान की वेदना खुले आसमान के तले रोटी का निवाला लिए ऑखो में बेरुखी नाप रहे धरती की छाती ना सोने के लिए हैं शीश महल ना रहने को हैं राजमहल किसान के लिए हैं […]

जीवन की परछाई जीवन मरण कहानी हैं सुन्दर छवि अलौकिक क्या लेकर तुम आये थे क्या लेकर तुम जाओगे रिश्ते को निभाते रहना जीवन की कमाई हैं धन दौलत सब रह जायेगा घमण्ड क्यो हैं […]

राजनीति राजनीति के गलीयारे में ऊच नीच सभी बह जाते हैं जिसको दुध पिलाकर पाला सपोले बनकर डस जाते हैं राजनिति की परछाई में पड़कर देश को खोखला कर जाते हैं शौहरत नाम के लिए […]

नारी की गाथा जीवन में रंग को भरने वाली प्यारी भोली नारी हो तु घर ऑगन को सँवारने वाली तुम फूलो कि क्यारी हो माँ बहन बेटी बनकर तुम घर को अलंकित करती हो मुझसे […]

नया साल का पहरा खेत खलिहान के सरहद पर रंग बिरंगे फूलो का बसेरा होगा ठंड बसन्त के हवाओ से नया साल का उजाला होगा मदमस्त महकती फिजा होगी घर अॉगन में रौनक चॉदनी धरा […]

वृक्ष दिन प्रतिदिन कटते जा रहे हैं वन्य पेड़ झाड़ियॉ प्रदुषण की ललकार ने पैरो में डाल दी रोगो की बेड़िया घुटते जा रहे हैं इंसान अपने कर्म की अठखेलियो से पेड़ को काटकर….. उजाड़ […]

नेता जी का सत्ता मैं इंसान हूँ इंसान ही रहने दो मुझे जनजाति में ना बाटो नेता जी कभी हिन्दू तो कभी मुश्किल का बाटाधार करके वोट ना माँगो नेता जी नफरत का जहर जहन […]

हौशला…. अपने हौशले की उड़ान से उड़ना चाहता हूँ समुन्दर के लहरो का तूफान देखना चाहता हूँ ये हवा तेरे गर्दिश का मैं दिदार करना चाहता हूँ पत्थर दिल लेकर पत्थर से टकराना चाहता हूँ […]

माँ कि ममता टुटे छप्पर के द्वार पर महलो के किनार पर जाते हुए फुटपाथ पर ममता दिखती रहती हैं | बोलते हुए इंसान में बेजुबान के ललकार में पछीं के आवाज में ममता दिखती […]

( माँ ) माँ ओ मेरी प्यारी माँ जग से सुन्दर मेरी माँ गले मुझे लगाती तन मन को शीतल कर देती प्यार बहुत लुटाती माँ जग से सुन्दर है तू मेरी माँ मेरे जीवन […]