आखिर खुश तोह हो ना तुम कभी यह ही मायने रखा करती थी किताबों के बीच वोह सुखी गुलाब आज भी बहुत कुछ कहती है किस्मत ने खिंची कैसी यह डोर मै यहा और तुम […]

एक-एक करके चले गए, जो बने थे मेरे सब अपने क्रम-क्रम से बिखर गये वो सुन्दर रचित मेरे सपने अब तो तन्हा हूँ, तन्हाई है बाकी कुछ अब शेष नहीं सब मिट गया, इक अधंड […]

रिमझिम सावन की बरसात उस पर आए तेरी याद…….. भीगी भीगी सावन की वो रात, हौले हौलै बारिश की वो रात, टिम टिम करते तारों की वो रात, पल पल आए तेरी यादों की बारात, […]

आई सावन की फुहार , छाई रूत में खुमार, घटाएं छाई है घनघोर, रह-रहकर दामिनी दमके, हवाएं मचा रही शोर, बारिश की लगी है झडी, जैसे झरनों की हो फुलझड़ी, भीगा भीगा सा ये रुत […]

जितना सुलझाती है उतना ही उलझाती है मुझको, उधेड़कर पहले खुद सिलना सिखलाती है मुझको, खोलकर दिल को जोड़ने में माहिर बताने वाली वो, सच को रफू कर बस झूठ ही दिखलाती है मुझको।। राही […]

सच में सब कुछ बदल गया इंसान का जुबान बदल गया राजाओ की कहानी बदल गया अल्हड़ मदमस्त जवानी बदल गया यारो की यारी बदल गया फितरत होश जिन्दगी बदल गया सच में बहुत कुछ […]

प्रकृति धरोहर वृक्ष धरा कि हैं आभूषण मनमोहक छवि बिखरती चन्द्र रवि के किरणो से जीवन हर्षित करती है कोयल की मृदुगान प्यारी जग को रोशन करती ओश की सुनहरी बूँद चमचम सी करती हैं […]

संवाद – वायु मानव चन्द वायु की लड़ियों ने आकर मुझको घेर लिया सिसक सिसक कर कहने लगी पेड़ो क्यों काट रहे हो मैं दंग अचम्भा देखता रहा पूछ बैठा सवाल ये वायु तेरा क्या […]

नवजीवन का राग/03 ज्ञान का प्रकाश तुम धैर्य रख जलाये चलो अग्यानता को दुर कर साक्षरता बढाये चलो दिन क्या रात क्या खुशी के गीत गाये चलो अंधकार से प्रकाश में जीत का जश्न मनाये […]

नन्हा सा परिन्दा एक नन्हा सा परिन्दा खोज रहा हैं आसमान… अपने हौसले से उड़ान भर देखना चाहता हैं आसमान… छोटे छोटे ऑखो से देखना चाहता हैं प्रकृति की खूबसूरती को महसूस करना चाहता हैं […]

तुम पढ़ी लिखी इंग्लिश मिडियम मैं पढ़ा लिखा शुध्द हिन्दी में मैं खाता हूँ गेहूँ चावल प्रिये तुम खाती पिज्जा बर्गर हो मेरा तुम्हारा मेल हैं क्या छुप छुप कर मिलना खेल हैं क्या तुम […]

सुबह की लालिमा सुबह सुबह सूर्य की लालिमा मुझसे कुछ कहती हैं भोर हुआ जग जा प्यारे चिड़िया ची – ची करती हैं नदियाँ झरना जंगल के बुटे सबसे अनोखे से लगते हैं ओंस की […]

मैं भारती हूँ मैं भारत देश का वासी हूँ वन्दन सबसे करता हूँ देश हित के लिए शीश अर्पित करता हूँ हिन्दू हूँ हिन्दी हैं पहचान राष्ट्र का सेवा करता हूँ धर्म कर्म की बात […]

किसान हाँ मैं ही हूँ किसान साहब जो खोतो में काम करता हैं बैल को भाई मानता खेत को धरती माता हल को पालन हार मानता जीवन को खेत में निकाल देता शहर से कोशो […]

मेरे कलम से……. बदलने चले थे हम संसार दो कदम में हो गये बेकार नसीहत से बदल देते बुरे को अच्छा बना देते ख्वाब हर पल देखते थे सुनहरे संसार को बदलने को बदल ना […]

क्या बयॉ करे…… क्या बयॉ करे अपने लफ्जो से हंसकर दर्द छुपाता हूँ दिल के गहरे घाव को अपने किस्मत को मैं कोसता हूँ सुबह शाम दर्द को झेलता हूँ क्या बयॉ करे अपने लफ्जो […]

😰😰😰😰😰😰😰😰😰😰 मन की सोच से…… आईने को जब देखता हूँ खुद को घुटता पाता हूँ लगता हैं नहीं दे पायेगे खुशी इस जमाने में खुद को जीतना छिपाना चाहता हूँ बेवसी मुझ पर हँसती हैं […]

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 सिर्फ तुम्हारे लिए….. तुम ख्वाब हो अरदास हो मेरे दिल की धड़कन हो तुम प्यार हो पहचान हो मेरे जीने की वजह हो तुम जीवन हो हकिकत हो मेरे सपनो की मुस्कान हो तुम […]

रक्षा करना बहना का सूत के बन्धन का प्यार के रिस्तो का भाई बहन के दुलार का बचपन की ठिठोली का टूटने ना देना रिस्ते की बुनियाद को रक्षा करना बहना का दरिन्दो की आड़ […]

किसान की वेदना खुले आसमान के तले रोटी का निवाला लिए ऑखो में बेरुखी नाप रहे धरती की छाती ना सोने के लिए हैं शीश महल ना रहने को हैं राजमहल किसान के लिए हैं […]

जीवन की परछाई जीवन मरण कहानी हैं सुन्दर छवि अलौकिक क्या लेकर तुम आये थे क्या लेकर तुम जाओगे रिश्ते को निभाते रहना जीवन की कमाई हैं धन दौलत सब रह जायेगा घमण्ड क्यो हैं […]

राजनीति राजनीति के गलीयारे में ऊच नीच सभी बह जाते हैं जिसको दुध पिलाकर पाला सपोले बनकर डस जाते हैं राजनिति की परछाई में पड़कर देश को खोखला कर जाते हैं शौहरत नाम के लिए […]

नारी की गाथा जीवन में रंग को भरने वाली प्यारी भोली नारी हो तु घर ऑगन को सँवारने वाली तुम फूलो कि क्यारी हो माँ बहन बेटी बनकर तुम घर को अलंकित करती हो मुझसे […]

नया साल का पहरा खेत खलिहान के सरहद पर रंग बिरंगे फूलो का बसेरा होगा ठंड बसन्त के हवाओ से नया साल का उजाला होगा मदमस्त महकती फिजा होगी घर अॉगन में रौनक चॉदनी धरा […]

वृक्ष दिन प्रतिदिन कटते जा रहे हैं वन्य पेड़ झाड़ियॉ प्रदुषण की ललकार ने पैरो में डाल दी रोगो की बेड़िया घुटते जा रहे हैं इंसान अपने कर्म की अठखेलियो से पेड़ को काटकर….. उजाड़ […]

नेता जी का सत्ता मैं इंसान हूँ इंसान ही रहने दो मुझे जनजाति में ना बाटो नेता जी कभी हिन्दू तो कभी मुश्किल का बाटाधार करके वोट ना माँगो नेता जी नफरत का जहर जहन […]

हौशला…. अपने हौशले की उड़ान से उड़ना चाहता हूँ समुन्दर के लहरो का तूफान देखना चाहता हूँ ये हवा तेरे गर्दिश का मैं दिदार करना चाहता हूँ पत्थर दिल लेकर पत्थर से टकराना चाहता हूँ […]

माँ कि ममता टुटे छप्पर के द्वार पर महलो के किनार पर जाते हुए फुटपाथ पर ममता दिखती रहती हैं | बोलते हुए इंसान में बेजुबान के ललकार में पछीं के आवाज में ममता दिखती […]

( माँ ) माँ ओ मेरी प्यारी माँ जग से सुन्दर मेरी माँ गले मुझे लगाती तन मन को शीतल कर देती प्यार बहुत लुटाती माँ जग से सुन्दर है तू मेरी माँ मेरे जीवन […]

गीत – प्रभु से वन्दन हमें प्रेम बहुत हैं रघुवर तुमसे अपने चरण में बुला लेना थोड़ा सा दया हम पर करना मुझको भव से पार लगा देना मैं दीन दुःखी आभागा हूँ किस्मत का […]

रंग बिरंगे सपने नव गीत नव सृजन को मैं गुनगुनाना चाहता हूँ आसमान की ऊँचाई को मैं नापना चाहता हूँ हौसले की उड़ान से सब कुछ बदलना चाहता हूँ रंग बिरंगे सपनो को मैं अपना […]

फौलादी मन किसी शाख कि मोहताज नहीं हूँ साहब जमींर जिन्दा हैं मेहनत करके खाता हूँ बैसाखी का नंगा नाच करके क्या हैं फायदा मुझे अपने ऊपर हैं चट्टानो सा भरोसा मेरी खुद्दारी का हाल […]

उस सूखे पेड़ पर क्या चिड़िया फिर न चहचहाएंगी सूख गया जो शजर वक्त की बेवक्त मार से क्या उस शजर की डालियाँ फिर न लहराएगी जिन्दगी बन गयी गुमसुम और, हम गुमनाम बनकर रह […]

ऊपर वाले ने कहर बरसाया है एक बूंद धरा पर न आया है धरती पर देखो आई दरार चारों ओर मचा हाहाकार कर्ज तले दबे हैं कितने किसान क्या करें सोचते हैं सुबह शाम घर […]

सात सुरों के संगम का एक जैसा सबको, रियाज़ कराया जाता है, फिर आपस में ही एक दूजे में क्यों सबको, इम्तियाज़ बताया जाता है, जब ज़मी आसमां चाँद सितारे हम सबसे, कोई भेद न […]

तुम मेरे ज़िन्दगी खरीद सकते हो पर ख्वाब तोह आज़ाद है तुम मेरे तन को गुलाम कर सकते हो पर लब तोह आज़ाद है तुम मुझे मौत दे सकते हो पर सोच तोह आज़ाद है […]

समन्दर के कभी दो किनारे नहीं मिलते, हमसे तो आकर ही हमारे नहीं मिलते, बात ये है के विचारधारायें भिन्न हैं सभीकी, तभी तो ढूढे से किसी को सहारे नहीं मिलते।। राही (अंजाना)

(जब किसी परिवार का एक बेटा शहीद हो जाता है और चंद सालों बाद सारी दुनिया उसके परिवार के दुखों को भुला देती है, उस समय उसके घर के दरवाजे से गुजरती पुरानी हवाये जो […]

जरा सी बात में टूट जाता हूं , गुस्से से आकर फुट जाता हूँ। लोग समझते है आदत है मेरी मैं हर बात पर रुठ जाता हूँ। हृदय पर हल्की घाट होती है, बिना बात […]

बहुत दिनों के बाद नई तस्वीर बनाने बैठा हूँ, मुझसे रूठी थी जो मेरी तकदीर बनाने बैठा हूँ, इल्जामों की सबने जो फहरिस्त लगाई है मुझपे, कोरे कागज़ पे मैं अपनी तहरीर बनाने बैठा हूँ, […]

वो अकेला हैं , इसलिए साथ चाहिए , जो समझ सके , उसके हालत, उसकी पीडा । वो किसान हैं, वो अन्नदाता हैं , कोई और नहीं वो एक पेड पर फिलहाल लटकता हुआ , […]

जो छूले मन कोई मेरा मुझे अभिमान हो जाये, क्या होती है हृदय धड़कन मुझे भी ज्ञान हो जाये, किसीकी बात सुनकर मैं भटक जाऊँ नमुमकिन है, वो दे आवाज़ तो मैं ज़िंदा हूँ मुझे […]