“फागुन आया” फागुन आया चल रंग श्रृंगार कर ले। अपने तन मन को रंग प्रेम व्यापार कर ले रंग ले आज तु यह जग सारा, आया रंगो का मौसम रंगीला, उड़ा-उड़ा गुलाल नाचती गोपियां, देख […]

मन मन्दिर में जिसकी मूरत उसको दुनिया कहती माँ है माँ ममता की सच्ची मूरत जग में दुख को सहती माँ है ।। पुत्र नही तो दुख का मंजर पुत्र प्राप्ति पर भी दुख ऊपर […]

जरूरी नहीं , हम गले ही लगाएँ । जरूरी नहीं ,आप मिलने ही आएँ। अमर प्रेम का ,ऐसा बंधन हमारा, करें याद हम , हम तुम्हें याद आएँ। ******जानकी प्रसाद विवश********** प्यारे मित्रो , पावन […]

निर्मम सिमट सिकुड़ वो सोया था अंधेरे चौराहेे चौखट पे वो खोया था चादर ओढ़े सिर छुपाए, पांव फिर भी निकली थी सन सनाती हवा चली पैरो को छू, निगली थी कांप गए बदन मेरे […]

संस्कार में दबे बच्चे से घूरते हुए अध्यापक ने सवाल पूछा, बेटा ये बताओ हम कौन? बच्चा मुस्कुराते बोला, अध्यापक जी आप गुरु हम शिष्य यानी गुरु धाम में हम पढ़ रहे आप पढ़ा रहे […]

सोंचा नहीं था समन्दर के इतना किनारे निकल जाऊंगा, जिनसे डरता था उन्हीं लहरों के सहारे निकल जाऊंगा, जहाँ बनाता ही नहीं बह जाने के खौफ से रेत के मकाँ कोई, वहीं शौक से किरदार […]

तिरंगे के नीचे शान्ती के घोष में, मिशाले जलाली खूब हमनें!! मान मर्यादा स्वाभिमान का आवाहन, हाथो में बंदूके तलवारें उठाना हमकों!! इतियास दुहरा रहा गजनी की चाल, फिर से वगदादी दुहरा रहा हैं !! […]

जब मेरी तेरी बात हो, लब्ज़ों को आराम हो बस आँखों ही आँखों में,अपनी दुआ सलाम हो कभी दूर से देख के मुझको, मन ही मन मुस्काती है, और बुलाती पास मुझे, पलकों के परदे […]

मुझसे वो अब बड़ी तंगदिली से मिलता है ऐसे लगता है जैसे किसी अजनबी से मिलता है।। अब उसके मिलने में वो पहली जैसी बात कहाँ जमाने को दिखाने को ही शायद गले मिलता है।। […]

“**मोह रही मन”** मोह रही मन सभी के फागुनी बयार । शनैः शनेः उभर रहा है सृष्टि का निखार । धडकनें सुवह की सरगमें सुहावनी। भावनाएँ रंगभरी हुईं लुभावनी । कामनाओं पर चढ़ा छटा काअब […]

बाबुषा कोहली के साथ एक शाम बात ये 2017 की थी मैं साहित्य की साइटें खोज रहा था गूगल को खूब टटोल रहा था मिली मुझे फिर इसमें सफलता अच्छी रचनाओं का था उसमें छत्ता […]

आपकी ख्बाहिसों को पूरा करना जानता है दिल, चले आओ सजा लें हम किसी दिन, स्वप्न की महफिल । जानते हैं सभी, सपनों को इक दिन, टूटना पड़ता, टूटता तन, टूटता मन, छूट जाती है, […]

“**प्रातः अभिवादन “** प्यारे मित्रो , सपरिवारसहर्ष फागुनी सवेरे की उमंगों से भरे हर पल की शुभकामनाएँ स्वीकार करें । सविनय आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश,

“**जिन्दगी के तजुर्बे”** ************ जिंदगी के तजुर्बे सताते बहुत हैं , हँसाते बहुत हैं , रुलाते बहुत हैं । कभी हों अकेले , हाँ बिल्कुल अकेले, तजुर्बे साथ मन से निभाते बहुत हैं । *********^^^^^^^^************ […]

“**प्रातः अभिवादन “** *********** मित्रतामय जगत सारा , मित्रता ही महकती है । गुलाबों की तरह हर पल दुख के शूलों के संग रहती। निभा कर साथ, सुख दुख में , मित्र के सुख दुख […]

नानकुन डेरा नानकुन डेरा , दू कोस के घेरा………. I दिन गनवा जिनगी के , सपना लाख हजार परगेस काबर फांदा म , जीयत तैं सरकार मोर मोर गठियावय , असल परय बदरा सुख्खा म […]

**छू पाना आसमां को “** ************* छू पाना आसमां को , माना जरा कठिन है । छू जाना दिलों का तो , आसान बहुत होता । विश्वास किसी को भी हो पाए नहीं इस पर […]

*फागुनी सवेरे का अभिनन्दन “* ^^^^^^^^^^^^^^^^-^^^^-^ मित्रता का महकता रहे चंदन , मित्रता का मन करे वंदन. । अमर रहें मित्रता कोष मे , जग करे मित्रता अभिनन्दन । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो , […]

*मन थिरक उठो…”* *********** कभी पुराने नहीं रहेंगे ये रसभरे , सुरीले गीत । सदा नयापन। देंगे मन को , यह है इन गीतों की रीत। आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश

चिरागों की बात मत करो उनका काम जलना है जब तन्हा मैं होता हूँ मेरे साथ जलते है जब साथ होती हो तुम मेरे हमें देख ये सारी रात जलते है बे बात जलते है […]

जिंदा की ललकार का वल कहाँ? मृत्यु का आवाहन करते हों? आत्ममंथन कर स्वयं विचार करो? नारी सम्मान में कितने शीष कटते है? इतियास पन्नो पर आहाकार करते हो? मन चंचल मे क्या क्या उमडता […]

**मोह रही मन”** मोह रही मन सभी के फागुनी बयार । शनैः शनेः उभर रहा है सृष्टि का निखार । धडकनें सुवह की सरगमें सुहावनी। भावनाएँ रंगभरी हुईं लुभावनी । कामनाओं पर चढ़ा छटा काअब […]

देख कर खामोश है, शहर मेरा. इतनी भी क्यां गिला तेरा. जब छोड़ कर आये मंजिल तेरी. सब चाह रहे दिल जवां मेरा. बड़े नाजुकाना संबंध मेरे मौकिल के. ऐसे ही नही दिल लगाना तेरा. […]

मैंने सारे जवाब जो तुझे ख़त किये है. दिल के फरमान काग़ज़ी किये है. बहोत उदास तेरी चाहतो का शोहबर इन दिनो. हमनें अपनी फरमाईश जो कियें है। शौहदा अवध लिखे भी कैसे शहर बदनाम […]

मुखौटे सजाये फिर रहे हो आजकल. दिल में जख्म़ लिये जिये जा रहे हो. हर किसी ने ओढ़ रक्खा मतलबी नकाब. एक दुशरे को दर्द दिये जा रहे है। न मंसूबा मेरी जवां हसरतें मुल्तवी […]

बड़े सलीके से मुखौटे के पीछे वो अपना चेहरा छुपा लेता है, अपनों की हंसी की खातिर वो अपना दर्द भुला लेता है, कितना मुश्किल है किरदार उस गरीब का यारों, जो गरीबी की एक […]

जब एक दिन तुम बिना बताये दूर कही मुझसे चली जाओगी वापस फिर से आओगी क्या वापस फिर से आओगी क्या मैं नाराज था तुमसे उस पल मुझे मनाने वाला कोई नही था अब फिर […]

सागर लहरें आग पानी जीवन की बस यही कहानी, ये जो है झीनी चादर जिंदगानी हमने- तुमने मिल बुनी है, रेशे-रेशे में घुली है तेरे-मेरे जज़्बातों की जवानी। सागर लहरें आग पानी जीवन की बस […]

परिस्थियों के एक जाले में बचपन बुना दिखता है, लकड़ी के फट्टे जैसा ये जीवन घुना दिखता है, लेखनी पकड़ने वाले हाथों का किस्सा ऐसा, मानो हर क्षण खुशियों का ईंटों से चुना दिखता है।। […]

दिल मे क्या दर्द है बताऊं क्या बोलो सहारा दोगे दिखाऊँ क्या।। आंखों में सन्नाटा नही ये आग है बोलो बुझाओगे करीब आऊं क्या।। तन्हाइयां बसी है मेरी दुनिया मे घंटियां बजाओगे लगवाऊं क्या।। होठों […]

सादर नमन ‘सावन’ २/२/२०१८ शीर्षक- ‘मुखौटा’ ———————————————– चहरे पर चहरे का खेल है, सूरत सीरत से बेमेल है, कोई हमको नहीं भाता, किसी को हम नहीं भाते, जाहिर सी बात है साहेब, मुखौटे बदलने के […]

नानकुन डेरा नानकुन डेरा , दू कोस के घेरा………. I दिन गनवा जिनगी के , सपना लाख हजार परगेस काबर फांदा म , जीयत तैं सरकार मोर मोर गठियावय , असल परय बदरा सुख्खा म […]

कोन गुनह के सजा म कोन गुनह के सजा म , जेमा आज धंधागेंव मय | रिस्ता नत्ता जाने कोन , बंधन म बंधागेंव मय || कोन घड़ी कोन पल रिहिस , जेमा हाँथ ले […]

मन के दर्पण पर कुछ प्रतिबिम्ब सा छा गया कुछ कहा नही उसने पर फिर भी कुछ कह गया जैसे भोर में कोई नया पुष्प खिल गया हलचल सी हुई फिर हृदय के कोने में […]

**माधवी – सवेरे”** ********* सुप्रभात माधवी-सवेरे का मन से अभिनन्दन , सुप्रभात, मंगलमय मित्रों का वन्दन । प्राची की लाली की टेर है सुहानी , रजनी की कालिमा का थमता स्पंदन। ^^^^^*** जानकी प्रसाद विवश […]

ਸਮਾਂ ਬਦਲ ਰਿਹਾ ਹੈਂ, ਲੋਕ ਬਦਲ ਰਹੇ ਨੇ। ਸੱਚ ਆਖਾ, ਸਭ ਦੇ ਸੌਂਕ ਬਦਲ ਰਹੇ ਨੇ। ਚੰਦ, ਸੂਰਜ ਤਾਂ ਓਹੀ ਜਾਪਦੇ ਬਸ ਮਨੁੱਖ ਹੀ ਬਦਲ ਗਏ ਨੇ। ਧਰਮ ਤਾਂ ਬਸ ਦਿਖਾਵਾ ਲਗਦਾ ਅੱਜ ਧਰਮੀ ਲੋਕ […]

तुम निश्चित ही सम्मान की हकदार होती पद्मावती तुम निश्चित ही सम्मान की हकदार होती पद्मावती बशर्ते तुमने सीता और अहिल्या की बजाय द्रौपदी का अनुसरण किया होता रानी झांसी की तरह लड़ा होता माना […]

बोल दू ! जो बातें दबी है इस दिल में बोल दू! जो साँसे महसूस होने लगी है। मोड़ दू! इन नगमों का रुख तेरी तरफ। जैसे कड़ी धूप में पिघलती बर्फ के पानी मे […]

हाथों की लकीरें बनाकर भूल बैठा है, शायद खुदा मुझसे रूठ के बैठा है, कहानी में मेरा किरदार ‘गरीब’ लिखकर, वो मिट्टी से मेरा जीवन जोड़ बैठा है॥ राही (अंजाना)

बदल गया है दुनियाँ अब,यहां पैसे वालों का बोलबाला है, पहले रुतबा ज्ञानी का था,अब रुतबा बेईमानी का है!! सब कुछ पैसा ही है,हर जगह यही पाठ पढ़ाई जाती है, इंसान दूर हो रहे एक […]

इक मुखौटा है जिसे लगा कर रखता हूं जमाने से खुद को छुपा कर रखता हूं दुनिया को सच सुनने की आदत नहीं सच्चाई को दिल में दबा कर रखता हूै बस रोना आता है […]

छोटे हैं मगर ये बड़ी बात कह रहे हैं, दो रोटी को तरसते ये हालात कह रहे हैं, छोड़ने को तैयार नहीं एक दूजे को अकेला, हाथों में डाले ये हाथ कह रहे हैं, ये […]