….गणतंत्र दिवस…. लो फिर आ गई २६ जनवरी, नौजवानों को समझाने, क्या होता गणतंत्र ये, बलिदानों का गुण गाने, आज के हर युवा का फ़र्ज़ है ये, उन संघर्षों, उन वीरों को पहचानें, मौत चली […]
….गणतंत्र दिवस…. लो फिर आ गई २६ जनवरी, नौजवानों को समझाने, क्या होता गणतंत्र ये, बलिदानों का गुण गाने, आज के हर युवा का फ़र्ज़ है ये, उन संघर्षों, उन वीरों को पहचानें, मौत चली […]
“**देख लिया”** ****** डूबकर देख लिया , जिस घड़ी से , तेरी आँखों में । नहीं अब डूबने से , जरा सा भी , डर हमें लगता । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो . सवेरे […]
“**वसंतोत्सव-अभिनन्दन”** ******^^^****** कोयल के स्वर पड़े सुनाई , यह वसंत बेला सुखदायी । मधुऋतु में , माधुर्य पगा है, जीवन का हर क्षण । …..जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो वसंत पंचमी के ऋतु पर्व पर […]
वर्जिन मैं वर्जिन हूँ विवाह के इतने वर्षों के पश्चात् भी मैं वर्जिन हूँ संतानों की उत्पत्ति के बाद भी। वो जो तथाकथित प्रेम था वो तो मिलन था भौतिक गुणों का और यह जो […]
“**प्रात:अभिवादन”** ****^^^^*** तेरी इक मुसकराहट पर बहारें लौट आती हैं । तेरी इक मुसकराहट पर बहारें , गुल खिलाती हैं । महक जाता है तन मन और हर उजड़ा हुआ उपवन , प्यार की वसंती […]
जिंदगी का खेल अब तक समझ न आया वो दाव खेलते रहे, मैं हारता रहा
सुनो अमृता! सुनो अमृता! अच्छा हुआ जो तुम लेखिका थी क्योंकि अगर तुम लेखिका न होती तो निश्चित तौर तुम्हें चरित्रहीन और बदलचलन की श्रेणी में रखा जाता। अच्छा हुआ तुम असाधारण थी क्योंकि साधारण […]
आपके-गीत-क्रमांक-20- दिनांक-16 -01-2018 खूँटी और दीवार गीतकार-जानकी प्रसाद विवश साथ तुम्हारा मेरा…साथ तुम्हारा मेरा जैसे खूँटी ओर दीवार का। साथ हुआ है जिस पल से भी, हम दोनों ही साथ रहे। अपनी भार वहन क्षमता […]
सवेरे की मधुर मुसकान का अर्चन करें मन से । उजाले की अमर पहचान का , वंदन करें मन से । मित्रतामय उमंगों का चिर स्पंदन, निराला है , नमन हो मित्रता तीरथ की महिमा […]
जरूरत पे ली गई क़िस्त की कीमत, जान देकर जब किसी को चुकानी पड़े, बह रहे यूँही जल को बचाने की खातिर किसी को, नल पर भी जब ताले लगाने पड़े, प्यास पानी की हो […]
दिल है धड़कन है अभी तो जान है बाकी, जन्दगी के सफर में कई इम्तेहान हैं बाकी, जो प्रश्न हैं पूछे बड़े ज़ालिम ज़माने ने, निरउत्तर कर दिखाने का अभी अभिमान है बाकी, डुबाने को […]
प्राण से ज्यादा, मित्र हो प्यारे, इस. नश्वर संसार में । तीर्थ राज संगम स्थित है , प्रिय मित्रों के प्यार में । व्यर्थ सभी तीर्थटन होते , बिना मित्रता-तीरथ के । सत्कर्मों के फल […]
जीवन के खत पर लिखा वो पता हैं , मेरे मित्र ,मेरे लिए , देवता हैं। धड़ी चाहे सुख की, या हो चाहे दुख की, किसी पल नहीं वे , हुए लापता हैं । जीवन […]
आप जबसे जिन्दगी में मिल गये हैं! रास्ते मंजिल के फिर से खिल गये हैं! जागे हैं ख्वाबों के पल निगाहों में, जख्म भी जिगर के जैसे सिल गये हैं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
वह बच सकती थी!!! वह बच सकती थी अगर वह चिल्ला सकती उस दिन जब खेल खेल में किरायेदार अंकल उसे गोद मे उठा दुलारने लगे और वह दुलार जब तकलीफदेह होने लगा तब वह […]
चलते-चलते बहुत दूर निकल आई हूँ मैं, बहुत कुछ पीछे छोड़ आयी हूँ मैं, वो खुशियाँ, वो सपने, वो मस्ती के पल अपने… कुछ आँसू, कुछ यादें, कुछ लोगों से की बातें….. बस… छोड़ आयी […]
ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त, कैसा वक्त है, जो कभी होता भी नहीं, कभी गुजरता भी नहीं, ये कैसा रंग, कैसा वर्ण, कैसा रोगन है, जो कभी चढ़ता भी नहीं, कभी उतरता भी नहीं, ये […]
जा रही हूँ आज सबसे दूर, खुद की ही तलाश में। वहीं, जहाँ छोड़ आयी थी खुद को, किसी की याद में। पर अब उससे भी ज़्यादा मुझे ज़रूरत है मेरी। अब ढूंढना है मुझे […]
मैं आसमां की ऊंचाइयों को छू लूंगी, तू पिंजरा तो खोल ज़रा। मैं दिल की गहराइयों को छू लूंगी, तू1मुझे वक्त तो दे ज़रा। मैं हर कदम पर तेरा साथ दूंगी, तू मुझे समझ तो […]
Jb aankh khuli is duniya mein, Tb sbse hi anjaan thi m… Par phir bhi ek ehsas tha jisme Saara sukoon pa leti thi mein. Jb badi hui m thodi si, Tb is anjaano ki […]
अवसाद का विक्षोभ नीरव, चपल मन का क्लांत कलरव देखता पीछे चला है लगा मर्मित स्वरों के पर । शुष्क हिम सा विकल मरु मन, भासता गतिशील सा अब, भाव ऊष्मा जो समेटे बह चला […]
डूबकर देख लिया , जिस घड़ी से , तेरी आँखों में । नहीं अब डूबने से , जरा सा भी , डर हमें लगता । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो . सवेरे की गुनगुनी अनुभूतियों […]
kon yaad rakhta hai raakh ko jismo ke sab diwaane hai iss janam mai nibha na sake saat janmo ki baat karte hai @@ SAGAR @@
sloth goti cholchey gari ajo thomkey daraye eye mon amari khub chena akta goli diye jekhaney hetey chilam bhalobashar sopno niye abujh se mon ajo korey smirti charon soney na kono baron moner ki esechey […]
एक ताज़ा ग़ज़ल …….. गुलफिशानी – फूलों की बारिश , बदगुमानी – शक ******************************** मैंने दुश्मन पे गुलफिशानी की … आबरू.. उसकी पानी पानी की …. मुझ पे जब ग़म ने मेहरबानी की ….. मैने […]
इश्तेहार सी हो गयी है ज़िंदगी मेरी जैसी दिखती है, होती नहीं कभी, सभी के हाथों में सुबह सवेरे पहुंच जाती है, मगर नज़रों में किसी के होती नहीं कभी, हर रोज पढ़े जाते है […]
जय हो , जय हो, नितीश तुम्हारी जय हो। जय हो एक नवल बिहार की , सुनियोजित विचार की, और सशक्त सरकार की, कि तेरा भाग्य उदय हो, तेरी जय हो। जाति पाँति पोषण के […]
इक तस्वीर है इस दिल के पास। फिर क्यु दिल है उदास – उदास।। माना की तु दुर है सदियों से मगर, तेरी यादे है मेरे दिल के आसपास।। वो लरजते होठो से मेरे गीतो […]
हमारी आन, मान, शान “हिंदी” ……………………………………… भावनाओं का सागर हो दिल में, तो एक कश्ती उतरती है, विचारों की बाहों में बाहें गूँथ कर, लहरों सी सुंदर पंक्तियाँ बुनती है, ये साहसी काम बस, हमारी […]
Besak koi bat na bne, Par koi bat kse bne, Jab tak meri mulakaat na bne..!!! #devil
MOhabbat krni jruri h Hakk ho to Jayaj,, Najaj ho to Majburi h mgr, MOhabbat krni jruri h
Zindgi sun jara ,thoda khud ko smjne to de Maana tu kese k liye nhi rukhte Pr muje jene to de jra …..
तेरा साया मेरे साये में कुछ ऐसे समा जायेगा, के तेरे चेहरे में मेरा चेहरा कोई ढूंढ नहीं पायेगा, जिस तरह रहती है हवा दरमियाँ हर किसी के, हमारा वजूद भी हर किसी के चेहरे […]
तुम्हारे आने की खबर सुन कर अच्छा लगा | आओ मैं प्रतीक्षा में हूँ लम्बी क़तर में खड़ा पंजों के बल उचक उचक कर जैसे कोईइन्तजार करता है -टिकिट विंडो पर | आओ जैसे पूरनामी […]
भले वक्त में तो सभी ,नित अपनत्व लुटाए , बुरे बक्त , परछांई भी , दूर दूर न दिखाए। जानकी प्रसाद विवश आदरणीय प्यारे मित्रो, सवेरे की मधुर छटा में आप सभी का हार्दिक अभिवादन […]
शीत के सबेरे में , मित्रता की गर्माहट, प्यार मोहब्बत के सूरज की, सुनकर आहट , भावों के पंछी चहक उठते । अंगुलिया ठिठुर जाएँ , भावना उनींदी सी , प्यार के गरमागरम संदेश मगर […]
सुखद है मित्रों का संसार , बरसता निशदिन प्यार अपार। नहीं भौतिक है, है अध्यात्म , मित्र की महिमा अपरंपार । – जानकी प्रसाद विवश
प्यारे मित्रो….. नाचो -गाओ मन, नव-गीत गुनगुनाना , नये वर्ष खुशी खुशी ,सबके मन बहलाना । जन जन का मन से ,यह नम्र निवेदन है , मन की पीड़ा का , प्रस्तुत आवेदन है । […]
रहता है कहाँ है कहाँ घर तेरा, नाम आंसु से परिचय हुआ क्यों तेरा, ख़ुशी-ग़म का आँखों से रिश्ता तेरा, हर इंसा से नाता जुड़ा क्यों तेरा, समझ के रंग सा न किसी अंग सा, […]
lab dhumil ho gaye gam rageen ho gaye jab kitab main rakhey phool ne uski yaad dila di tasveer na thi uski meri tabeer ban gayi ankhon ke anshu main meri rubayi ban gayi
खुल के भले ही न कहा हो कभी पर अपनी “देह-बोली” से कितनी ही बार जताती है वो तुमसे कितना ….. कभी ख्याल किया तुमने तुम्हारे कमरे के करीब से गुजरते वक़्त ठिठक कर कितनी […]
इक अरसे बाद नजरे मिली उनसे हमारी नजरों ने पहचाना और अन्जान कर दिया
dekh zinda hun main, dekh bandha hun main, jaha tuney choda tha lafz aise the kuch ankahe jo ki aaj abhiman main badal gaye kahani teri meri kuch fashley main hi dah gaye anshu kuch […]
खून का रंग- कैसे तय होता है? विज्ञान की मानें तो आर बी सी से परिवार की माने तो माँ-बाप से समाज की माने तो जाति, धर्म,वर्ण से राजनीति की माने तो वोट और नोट […]
नये साल का हम जशन मनायें कैसे बीता हुआ साल बार बार आकर आंखे नम कर जाता है|
आज कुछ खाली – खाली लगता है …२ यूँ जो छोड़ गए तुम मुझके … हर चेहरा सवाली लगता है … आज कुछ खाली – खाली लगता है … हँस के मिलती हूँ जब भी […]
पागल हैं, वे लोग जो कहते हैं कि, मरने के बाद जन्नत मिलती है ऐ दोस्तो मां की गोद में फिर एक बार सिर रखकर देखो।
दिन, महीने और साल गुजरते जाते हैं और इक दिन आदमी भी इनमें गुजर जाता है|
डूबना तय है हर किसी का जिस समन्दर में, काश उसी समन्दर के ऊपर तैर जाऊँ मैं।। राही (अंजाना) शकुन सक्सेना
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