संकल्प हमारी पहचान है फिसलन विषयों में अब-तक राग है उठना ही जिन्दगी है गिरना शोभा तुम्हें देता नहीं है ।। —————————————- उठने में परम आनंद है विषयानुराग मौत-ही मौत है जिन्दगी द्वार खड़ी है, […]
संकल्प हमारी पहचान है फिसलन विषयों में अब-तक राग है उठना ही जिन्दगी है गिरना शोभा तुम्हें देता नहीं है ।। —————————————- उठने में परम आनंद है विषयानुराग मौत-ही मौत है जिन्दगी द्वार खड़ी है, […]
हमें कहने का अधिकार नहीं कि हमने कुछ लिखा है . ————————– क्योंकि जो आप है, वहीं हम है . जो हम है, वहीं आप है. ———————- जो सब है, वो एक है जो एक […]
न हम है किसी के ना हमारा है कोई हम एक है हमारा वस्ता है खूद से ।।1।। ————————————- चंचल मन पे बहकना कामी का काम है मन को जो साधता वह खूद के समीप […]
तेरा कोई भी नहीं है जहां में तु आया है अकेले तु जायेगा अकेले तेरा कोई भी नहीं है जहां में ।।1।। —————————————– ये रिश्ते, ये नाते, ये तेरे, ये मेरे ये कैसा है नर, […]
होगा वही, जो लिखा है उसने व्यर्थ में क्यूँ रोना? जब चलना है अकेले ।।1।। ——————————– ना तुम किसी के हो ना तुम्हारा कोई है सब माया का खेल है हर इंसान खूद में अकेला […]
कैसी यह जमाने की सोच हुई, जब कोख में बेटियां मारी जाती है, तो क्यों नवरात्रि में दिखावे के लिए, कन्या पूजी जाती है?? मां चाहिए, पत्नी चाहिए,बहन चाहिए,
मत कर होड़ा होड़ी बीच सड़क तू चलने में।
बने हुए रास्ते तकदीर वाले पाते हैं हम तो चलते भी हैं और रास्ते बनाते हैं शायद कोई करे पदचिन्ह का अनुकरण कांटो को हटाते हैं और फूल बिछाते हैं
सत्ता के मद में हो गए चूर चूर हैं जनता से आजकल वो दूर दूर हैं भर लो उड़ान कितनी ऊँची आकाश में आना पड़ा धरा में जितने भी शूर हैं
माना कि तुम इस बार फिर से हार गए हो बस जीतने की सोचो मझधार गए हो साहस में कमी अपने आने नहीं देना हर हार से कुछ कमियाँ सुधार गए हो
नहीं मिल रही राह तो बनाकर तुम चलो सुन लो सभी की सुनाकर तुम चलो चलना ही जिंदगी है यह भूलना नहीं मंजिल अभी दूर है सब भुलाकर तुम चलो
मत सुनो उनकी जो नकारात्मकता से भरे है पतझड़ में तलाश करो अभी भी कुछ पेड़ हरे है भीम की तरह कमजोरियों में प्रहार करते रहे हौसला बढ़ाओ उनका जो घन की घोर घटाओं से […]
मत घबराओ सोचकर सांपों का डेरा हो गया है हैरान मत हो जानकार सपेरा हो गया है मत तलाश करो अंधेरे में दीपक और टार्च की जागो तो सही देश में सवेरा हो गया है
छिप गया है सूरज सवेरे फिर आएगा झूठ मत बोलो जमाना जान जाएगा झूठ को बना लोगे व्यवसाय तुम अगर सदा के लिए लोगों का विश्वास चला जाएगा
ठहर जा शिकारी मत करो शिकार पर आज भी जारी है पशु पक्षी का संहार कुछ विलुप्त हो गए धरा से कुछ खड़े हैं कगार जैसे गिद्ध मृत्यु प्राप्त जानवरों को खाते हैं आज कल […]
रिश्वत के बिना आजकल काम नहीं होते हैं सब योजना बेकार है जब दाम नहीं होते हैं बिगड़ी बनाने वाले होते हैं रिश्वत खोर कहते हैं सब कुछ दौलत अब राम नहीं होते हैं
एक दिन मधुसूदन ने,पार्थ को था विचलित देखा, मन बड़ा व्याकुल और व्यथित देखा, पूछते मधुसूदन,पार्थ!कहो क्या है बात , बोले पार्थ, हे मधुसूदन,ऐसा बतला दो कोई राज, यदि बड़ा प्रसन्न मन हो जाए, करो […]
सांप ने कहा अपने साथियों से मैं देख आया हूँ शहर की जमीन वहां चूहों के अनगिनत बिल है आज ही पलायन करो शहर की ओर चूहे भी खाएंगे और बना बनाया घर पाएंगे वहां […]
बेटी के बाप के घर में दहेज का दानव आया है छीन कर खुशियाँ उसकी अपना घर बसाया है इक्कीसवीं सदी में भी जारी है ये अभिशाप बेटी के दोनों पक्षों को जिसने नर्क बनाया […]
हमें तो करोना ने लुटा, तक़दीर तो बहुत बलवान था। एक दीप गलती से जली वहाँ, जहाँ आंधी तूफान था।।
बदलते रिश्ते में हमने अपनो से नफरत देखी है। खुदा की कसम ए दोस्त बहुत ही नाइंसाफ़ी है।।
1 दिन मधुसूदन ने पाक को था विचलित देखा
मैंने नहीं देखा सुना है कि कल अज्ञात गरीब की बेटी का बलात्कार हो गया मैंने नहीं देखा सुना है कि कल पड़ोसी के घर में चोरी हुई मैंने नहीं देखा सुना है कि दबंगों […]
01 मई को मजदूर दिवस की हार्दिक बधाई | कविता- मजदूर बिन विकाश नहीं | मजदूर बिन विकाश नहीं दिया बिन प्रकाश नहीं | खेलकर जान भविष्य राष्ट्र गढ़ते पर अवकाश नहीं | रहते है […]
घर मे रद्दी सामान जब इकट्ठा हो जाता है तब कबाड़ वाला आता है रद्दी सामान ले जाता है कबाड़ वाले सुनो, सुनो अनचाहे हमारे मन मस्तिष्क में भी रद्दी सामान इक्कठा हो गया है […]
लो सीख असफलताओं से,अपने अगले प्रयत्न में तुम जीवन में सफल हो जाओगे। तुम जग में नाम कमाओगे।। जो हंसते थे अब तक तुम पर, वह नाज करेंगे फिर तुम पर, मन में ठानों करो […]
मत हो निराश, करो निरंतर प्रयास, जीवन में सफल हो जाओगे, तुम जग में नाम कमाओगे।। आलोचकों को समझो शत्रु नहीं, यह नई दिशाएं देते हैं, अपने व्यंग्य बाणों से, नया मार्ग प्रशस्त कर जाते […]
भेड़िए से सब तरफ फैले हुए हैं आज भी हैं लगाये टकटकी इज्जत मिटाने दूसरे की। वासना अपनी जहर सी वे उगलते हैं, राह चलती जिन्दगी को वे निगलते हैं। पापियों के पाप पर अब […]
बापू की नहीं सुनते आजाद की सुन ले तू है गुलाब तो काँटे सभी चुन ले नरम गरम दल में अब एकता हुई अब नाश हो आतंक का चलना है ये धुन ले )(2) एककीस्वी […]
सफाई कर्मी को देश की सफाई का निर्देश मिला पहले तो वह सकुचाया फिर हँसा खिलखिला सफाई करने से पहले वह देश के दलालों से मिला झटपट झाडू उठाया और शुरु हुआ सफाई का सिलसिला […]
कोरोना महामारी के हाथों भारत में अनगिनत मौतें हो रही हैं। सत्ता पक्ष कौए की तरह और अधिक सत्ता पाने के लालच में इन भयंकर परिस्थितियों में भी चुनाव पे चुनाव कराती जा रही है तो […]
घर से लेकर देश तक महाभारत के पात्र नजर आते हैं बहुत कम है लोग जो कृष्ण और अर्जुन की भूमिका निभाते हैं करवाते हैं लोग गीता रामायण के पाठ शुभारंभ में बैठा है हृदय […]
हम क्यूं नहीं समझ पाते हैं मजदूरों की लाचारी को, उधारी का ठप्पा लगाकर ना देते पैसे मजदूरों की दिहाड़ी को, मजदूर दिवस मनाने को तो कर दी शुरुआत, ना मजदूरों की मजबूरी को ना […]
जब परमपिता परमेश्वर ने हम सबको है सामान बनाया, ना जाने कितने समाज में ऊंच-नीच ,भेदभाव का नियम बनाया, मजदूरों की मेहनत पर, हम सारे सुखों को भोगते हैं, जिस अन्न को खाते,और जिस घर […]
ईमानदारी से करते हैं श्रम ये है श्रमिक जितनी प्रशंसा करे उतना है कम ऊँची ऊँची इमारतें बनाते हैं सड़क पुल बनाते हैं सुधारते हैं करते हैं खून पसीना एक अपने परिश्रम से दो वक्त […]
मै इंसानियत को खोजने चला हूँ, हैवानों के बाजार में। कहाँ छुपा है इंसानियत, जरा देखें तो उसे क्या हाल है।।
मत कर सीमा में गोली बारी शेर सोते नहीं हैं पल भर में करेंगे शिकार कमजोर होते नहीं हैं मिटकर भी धरा में आने नहीं दे आँच इस मुल्क में आतंक बीज बोते नहीं हैं
शहीदों से सीख लो नेता जी देश को बचाना आतंक का समूल नाश करने वाली नीति बनाना कब तक सैनिकों की पत्नियां विधवा बनेगी सैनिक बचाते हैं देश तुम सैनिकों को बचाना
शहीदों के स्मारक हमे याद दिलाते हैं प्राण न्योछावर कर के जो देश बचाते हैं भूल सकते हम नहीं आप की कुरवनियो को श्रद्धा सुमन में दुश्मनों की लाशें चढ़ाते हैं
आतंक को पालने वाले मत हमे आँख दिखाओ घुन की तरह खोखला कर रहे हैं तुम्हें बचाओ मानवता के लिए अभिशाप है आतंकवाद जरा भी मानवता हो तो इसे दुनिया से हटाओ
आतंक के पालने में जो मुल्क झूल रहा है अंत उसका है निश्चित ये भूल रहा है कायरों ने हमले किए भारत में कई बार शर्मिंदा होने के बजाय कबूल रहा है
हो सकता है, मेहनत से बहुत कुछ हो सकता है। संभावनाएं होती हैं, हर किसी बात की कुछ न कुछ संभावनाएं होती ही हैं। एक आशा की किरण पासा पलट देती है, मंजिल पर सच्ची […]
वो मिस्त्री के साथ काम करने वाला मजदूर, कहना मानने को है मजबूर, ईंट लपका दे, मसाला फेंट दे, थोड़ा गीला बना, थोड़ा सख्त बना, चल टेक लेकर आ, सरिया मोड़, टूटी हुई बल्ली को […]
समय बदल गया , बदल गया दुनिया का दस्तूर। आज धरा मां पुकार रही होकर के मजबूर ।कभी सेहेती थी वाहन देती थी सारे सुख भरपूर । आज धरा मां पुकार रही हो कर के […]
एक तरफ करोना तो दूसरे तरफ पापी पेट। अब तो रिश्ते भी चढ़ गए है करोना की भेंट।।
देश की सीमा में तैनात होकर बगुला सा ध्यान लगाते हैं आतंक की मछहालियो को वन्दूख की गोलियाँ से चबाते हैं मुस्कुराते रहे मेरे देश के सब लोग सदा देश की आन बान और शान […]
देश के वीर सैनिको नमन है तुम्हारे वलिदान को तुम भारत के सपूत हो भारत के अभिमान हो शरहद की हिमालय के जैसे शोभा बढ़ाने वाले कवियों की कलम ललचाती है तुम्हारे गुणगान को
सदियों से भारत अहिंसा का पुजारी है खोएंगे नहीं इसको ये विरासत हमारी है अगर आक्रमण करेंगे कमजोरी समझ कर हमारी फौज ने भी कर रखी पूरी तैयारी है
दुश्मनों ने आक्रमण देश मे कई बार किया है हर बार जिसने दुश्मन को करारी हार दिया है जला कर राख कर देंगे दुश्मन के इरादो को भारत की सेना ने सीमा से ललकार दिया […]
देश की सीमा में खड़ा जवान हो या खेत की मेड़ में खड़ा किसान हो वंदन करते हैं कर जोड़ कर तुम्हारा तुम दोनों भारत माता की शान हो
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