तोहमत लगाने की आदत कब की छूट चुकी है मैं गुलाम ही सही मुझे सबकी आजादी की पड़ी है मुक्त होती है रुह मरकर ही मुझे मुक्त होना है जीते जी ही इक बीज किसी […]

कूड़े के ढेर में खोजने में लगे थे नन्हें नन्हें हाथ, तन्मयता के साथ, जरूरत की चीजें, दे रहे थे सामाजिक जीवन को, सच्ची सीखें। पूछा तो बोले उनके घरों से निकला हुआ यह कूड़ा […]

तेरे घर की रोशनी क्यूँ देखूँ जब मेरे घर में अंधेरा हो आखिरी रात न हो जाए कही जब तक हर ओर सबेरा हो उसकी ख़ुशी हमारे किस काम की जिसे अहंकार के भूत ने […]

आकाश की सुंदरता बढ़ाता कपासी बादल नहीं धरती का प्रियतम है वह काला बादल जो अपने प्रेम से करता है धरा का शृंगार.. कानों में रस घोलती सुरीली तान फूटती है काली कुरूप कोयल के […]

दसो दिशाओ मे बड़े बड़े मोटे मोटे अजगर पड़े हैं तैयार उत्सुक हैं निगल जाने को संसार वो हमारे पास भी आते हैं और कभी हम अपने काम से उनके पास चले जाते हैं इस […]

निभा तो सही सबसे इंसानियत का नाता है कड़ी धूप और बरसात से बचाने वाला छाता है परहित से बड़ा कोई धर्म नहीं होता तेरा ही करम तेरे भाग्य का निर्माता है

आज 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाते हैं, इसी मलेरिया के कारण हजारों लोग अपनी जान गंवाते हैं, इलाज से बेहतर होता स्वयं का बचाव करना, कोशिश करें फुल कपड़े पहनने की, घर में […]

बह रही पवन ,खिल रहे सुमन, कितना अदभुद यह नजारा है, छंट गया तिमिर, बीती यामिनी, रवि की किरणों ने पैर पसारा है। नभ में चिड़ियाँ,कलरव करतीं, गुंजन यह मधुरिम छाया है, आलस्य त्याग हे […]

आज भी नहाते हैं लोग सुबह उठकर फिर दर्पण के सम्मुख जाते हैं दर्पण मे देखकर चेहरा अपना मुह बनाते हैं, रोते हैं, चिल्लाते हैं फिर उस दर्पण को छोड़ कर या तोड़कर बड़े आकार […]

पर्यावरण बचाइए, हे मानव समुदाय सुख समृद्धि शांति, का है जो पर्याय नदिया पर्वत वन और, वन्य जीव समुदाय मानव दानव से हमे, कोई लेव बचाय धरा वायु जल सब हुए, दूषित सुनो पुकार प्रकृति […]

इन्सान की रफ्तार थम गई, और मोबाइल चलने लगा। मोबाइल के सहारे ही, कुछ वक्त कटने लगा। बात करनी हो किसी से, तो मोबाइल काम आया। आजकल इसके बिना, ना किसी ने चैन पाया। जा […]

राहुल बोला.. यह कोरोना कहाँ की बीमारी आई है, इसने कैसी आफत मचाई है। इन्सान, इन्सान से डरने लगा, अदृश्य जीवों से मरने लगा। बस घर में ही पड़े रहो, चलाते रहो मोबाइल। ना कहीं […]

घर की दहलीज जब लागी तो ऐसा मंजर देखा जिन्होंने अपनों को खोया उनके लिए कोरोना महामारी जो इससे बचकर घर वापस आए उनके लिए ये बीमारी अभी भी सड़कों पर खुला तुम क्यूं घूम […]

घर की दहलीज जब लाघीं तो ऐसा मंजर देखा जो भाई आपस में प्यार से रहते थे , परिवार में खुशियां लुटाते थे आज भाइयों के बीच बंटवारे हुऐ ,जो कभी एक थाली में साथ […]

घर की दहलीज जब लाघीं तो ऐसा मंजर देखा कहीं हो रही पार्टियां, कहीं हो रही शादियां कुछ लोग ठाठ से जीते ,कुछ बच्चे होते दिखे गाड़ियां भूखे प्यासे बच्चों को रोटी के लिए तरसते […]

इतना करना आज तू, उम्मीदें मत छोड़, टूटन में भी टूट मत, ले आ नूतन मोड़, ले आ नूतन मोड़, स्वयं के जीवन मे तू, नहीं हताशा रखूं, ठान ले अब मन में तू, कहे […]

घर की दहलीज जब लाघीं ‌तो ऐसा मंजर देखा‌ यह आंखों देखी सच्चाई ,नहीं कोई रूपरेखा मैं पहले बताती हूं परिवहन का किस्सा क्योंकि मैं भी शामिल थी इसमें बन हिस्सा खुद को महामारी से […]

स्थिति कैसी भी आये मगर तू रखना मन में हिम्मत। हिम्मत से ही जीत मिलेगी, हारेगी कठिनाई। कभी घड़ी कठिन आ जाये, समझ परीक्षा आई। भय मत करना आये चाहे कैसी भी कठिनाई। तुझे लगेगा […]

आपकी मुस्कान से, नयनों के दीप रौशन हुए। महक उठा ऑंखों का काजल, मुस्कुरा उठे लब मेरे। मुझसे जुदा होने की बातें, न करना कभी हमदम। जुदा होकर आपसे , जी कर क्या करेंगे हम। […]

श्रीराम हरो पीड़ा मनुज अब सुमिरन करता है। जहां तहाँ फैली महामारी, दुखी हुई प्रजा यह सारी, दूर करो रजनी अंधियारी, सुमिरन करता है, मनुज अब सुमिरन करता है। संकट से घिर गए हैं सारे […]

अपने लोक की ये कथा है, अपनी मां धरनी बसुन्धरा है निज सुत की करनी से दुःखी हो व्याकुल हो त्राहि-त्राहि करने लगी वो तब उसने तप का लिया सहारा त्रिलोक के स्वामी को जाके […]

अपराध नहीं है शेर का हिरण को खाना चिड़ियों का चुगना दाना पेड़ का कड़ी धूप में मुस्कुराना अपराध नहीं है शेर चिड़िया, पेड़ का पाठ शाला न जाना क्यूँकि पाठशाला में जाता है केवल […]

भारत माता कह रही, एक जुट हो सब लाल शत्रु की ईंट जवाव दो, पत्थर से तत्काल भारत माता कह रही, संकट में इंसान मत भूलो इंसानियत, सब मारो शैतान भारत माता कह रही, ईश्वर […]

बेटी और बेटे में इक फर्क समझ में आया ससुराल में रहकर भी मैके का साथ निभाया। दूर रहकर भी ‌मन‌से ममत्व नहीं मिट पाया पास रहकर भी यह पुत्र समझ नहीं पाया। पुत्र को […]

पाँच साल में अब नहीं, हो हर साल चुनाव बहती गंगा प्रेम की, होते दूर तनाव पढ लिख कर नौकर बने, या होते बेकार एक बार नेता बनो, दो कई पीढ़ी तार कानो को प्यारे […]

एक थी नारी सबको थी प्यारी सब चाहते थे हो जाए हमारी ममता की मूर्ति और दुनिया पुजारी तभी एक दिन दवे पांव आया नरवाद ममता के मंदिर में मचाया हाहाकार स्वार्थ और अहं से […]

कई दिनो से सोच रहा था पंत की तरह प्रकृति चित्रण करूं पद्मकार की तरह ऋतु वर्णन करूँ परंतु एक दिन सुबह का अखबार पढ़कर मेरा विचार बदल गया अखबार का शीर्षक था मनुष्य ने […]

शक्कर पानी ज्यों घुले, ऐसे घुलमिल देश शर्बत पी लें शांति का, यह भारत संदेश भारत है एक बाग सा, कई प्रजाति के फूल औ माली भगवान् हैं, सींच रखे अनुकूल भाषाए होंगी अलग, होंगे […]

देश में मचा हाहाकार है, बीमारों की भरमार है। ऑक्सीजन और दवा की कमी हुई, चिकित्सक भी लाचार हैं। रैड लिस्ट में आया हिंदुस्तान, बचा लो बीमारों की जान। कोरोना से पीड़ित है देश, कोरोना […]

भीड़ के बीच में ख्याल खुद का रखो, हर सको दर्द दूजे का नुस्खा रखो। वेदना हो भले दिल के भीतर भरी मगर होंठ में आप मुस्कां रखो। यह न अहसास हो दूसरे को कभी […]

आज कयी बच्चों के एक पिता को दवा के अभाव में तङपते देखा है ना उसके भूख की चिन्ता न परवाह उसकी बीमारी की गज़ब दास्तां है, बुढ़ापे की लाचारी की। बिस्तर पर पङे, पर […]