लम्हों ने खता की है सजा हमको मिल रही है ये मौसम की बेरुखी है खिजां हमको मिल रही है सोचा था लौटकर फिर ना आएंगे तेरे दर पर बैठे हैं तेरी महफिल में खुद […]
लम्हों ने खता की है सजा हमको मिल रही है ये मौसम की बेरुखी है खिजां हमको मिल रही है सोचा था लौटकर फिर ना आएंगे तेरे दर पर बैठे हैं तेरी महफिल में खुद […]
कूड़े के ढेरों में कुछ तो मिलेगा, जरा सा खुशी का सहारा मिलेगा। नन्हें हैं वे, रात भर सोचते हैं, प्रातः को कूड़े में पथ ढूंढते हैं। बहुत खुश हुए जब मिली एक कॉपी आधी […]
मेरी सांसों पे तेरा अधिकार हो गया। लो सजना मुझे तुमसे प्यार हो गया।। ना सूरत पसन्द, ना शोहरत पसन्द तेरी चाहत पे ऐसा इकरार हो गया। लो सजना मुझे तुमसे प्यार हो गया।। मुझे […]
ले चल साकी! मुझे दरिया के पास मेरा मन बहुत प्यासा है मचल पड़ता है ये कांच का दिल जब वो मेरे करीब आता है बोल दो उसे- “मैं उसका नहीं किसी और का हूँ” […]
नदी की बहती धारा है मोहब्बत सुदूर आकाश का ,एक सितारा है मोहब्बत सागर की गहराई सी है मोहब्बत निर्जन वनों की तन्हाई सी है मोहब्बत ख्वाहिशों की महफिलों का ,ठहरा पल है मोहब्बत शाख […]
ठंड में ये भूख भी ज्यादा सताती है, है नहीं चर्बी मगर हड्डी हिलाती है। भाग पहुँचा रोज खाता हूँ मगर ये भूख भी लौट कर फिर से मेरा मन कुलबुलाती है। सोचता हूँ हम […]
जाने कहाँ विलीन हो जाते हैं, कल तक जो बोलते थे, मुस्कुराते थे अपनी भावना को व्यक्त करते थे वे, जाने क्यों माटी हो जाते हैं। शून्य हो जाते हैं। न कोई अहसास न कोई […]
पहली प्यार की पहली निशानी । संभाल कर रखना ऐ मेरी रानी।। यदि कल हम मिले या न मिले। फिर भी गुलशन में गुल खिले।। मिलन पे मौसम भी बेमिसाल है। क्योंकि मुझे तुम से […]
“राजा दशरथ और श्रवण कुमार” ************************** उठा लिया एक भारी बोझ-सा कंधे पर अंधे माँ-बाप को तीर्थ यात्रा कराई श्रवण कुमार सा हो लाल मेरा यही दुआ करे हर माई’ राजा दशरथ गये आखेट को […]
आपकी किरणें ओ सूरज! सृष्टि को वरदान हैं, मूल हैं प्रकृति का बीज में ये प्राण हैं। पेड़-पौधे , जीव सारे आपके होने से हैं आपकी प्रभा के आगे दीप सब बौने से हैं। पालती […]
आज कोई गीत नहीं है, गीता के, गीतों के गुलदस्ते में रीता है गुलदस्ता मेरा, रीता ही लेकर आई हूं कुछ अपने मन की कहने, कुछ आपके मन की सुनने आई हूं आज जल बहुत […]
कृष्ण ने बाँसुरी बजायी, राधा के मन में प्रीत जगी । सारी दुनिया तम में है सोई, राधा रानी प्रेम-मगन है खोई ।। (मग्न) बोलो राधे-कृष्णा, राधे-कृष्णा, कृष्णा, कृष्णा, राधे-राधे, बोलो राधे-कृष्णा, राधे-कृष्णा, कृष्णा-कृष्णा, राधे-राधे […]
अक्सर आगे बढ़ने पर रुकावटें आती हैं मंजिल बहुत दूर बहुत दूर नजर आती है पर किया भी क्या जाये जब सपनें हों इतने बड़े कि सोने ना दें जागने पर भी चैन से रहने […]
मुह्हबत में तुम्हे आशु बहाना तक नहीं आया बनारस में रहे और पान खाना तक नहीं आया ये कैसे राश्ते से लेकर चले आये तुम मुझको कहा का मयकदा एक चाय खाना तक नहीं आया […]
तेरी परछाई को देख लेता हूँ चेहरे को देखने का मौका कहाँ मिलता। ज़िन्दगी के इस खेल में दौड़-दौड़ दौड़ लेता हूँ चौका कहाँ मिलता।।
माता-पिता अकेले छोड़े हैं गांव में, कोई नहीं सहारा रोते हैं गांव में। तकलीफ और दुःख में पानी भी पूछने को, कोई नहीं है संगी जीवन है डूबने को। ताकत नहीं रही अब हाथों में […]
जिन्हें हम दिल में रखते हैं उसे क्यूँ बता नहीं पाते हमें स्नेह है कितना कभी उनसे जता नहीं पाते । उम्मीदों के बीज मन में पाल कर क्यूँ रखते वजूद नहीं जिनका उन्हीं से […]
पत्थर हूँ मैं जिस पर घिस कर चन्दन माथे पर लगाने लायक होता है, शीतलता देता है, खुशबू बिखेरता है। थोड़ा सा मैं भी घिसता हूँ चन्दन के साथ, लेकिन आपको अहसास तक नहीं होने […]
हर एक कविता लिखता हूँ जो भी लक्षित नहीं कोई स्वयं लक्ष्य हूँ मैं। किसी से नहीं है अधिक प्यार मुझको किसी से नहीं कोई नफरत है मन में। स्वयं की खुशी को लिखता हूँ […]
ऐसे न गीत गाओ दिल को दुखाओ मत खुश रहो दूर रहो औऱ पास आओ मत। भूले हैं मुश्किल से वो दिन पुराने, भूले ही रहने दो और याद आओ मत। निगाहों के भीतर बसे […]
पर्यावरण के असंतुलन की तस्वीर हर ओर दिखने लगी है जिंदगी जीने की एक नई परिभाषा चहुं ओर लिखने लगी है विकट गर्मी का परिणाम दिख रहा है सूख रहे तालाब पेड़ कट कट बिक […]
सन इकहत्तर के जंगी जवानों, आपको हम सभी का नमन, आप जांबाज थे हिन्द के आपको हम सभी का नमन। ऐसी ताकत दिखाई थी सच में देखता रह गया था वो दुश्मन, धूल ऐसी चटाई […]
“गुलमोहर का पुष्प” अति मनमोहक है सुगंध इसकी अद्धभुत है इसकी जड़ें मिट्टी को चारों ओर से जकड़े हैं मानों जैसे हाथों में वक्त पकड़े हैं रात्रि की उनींदी आँखों में कुछ गहरे सपने हैं […]
साथ मिले या ना मिले तुम्हें किसी का, पर साथ दे तु हर किसी का । कर भला तु सदा जहां का, क्या जहां से भला नहीं होता किसी का? साथ मिले या ना मिले […]
कभी-कभी, छोटी-छोटी खुशियां भी दे जाती उल्लास के पल कभी कभी छोटे-छोटे दुख भी, कर जाते दिल को घायल क्या छोटा है क्या बड़ा ये हम ही तो तय करते हैं कभी किसी की एक […]
आज विजय दिवस है 1971 में भारत-पाक युद्ध में, भारत को मिली जीत का उत्सव है आज विजय दिवस है राष्ट्रीय समर-स्मारक पर, अखंड ज्योति जलती है दिल्ली में, उसी ज्योति से अग्नि लेकर, प्रज्वलित […]
बर्फ के फ़ाहे गिरे सारी रात, चिपके रहे टहनियों के साथ सूर्य-रश्मि का मिलते ही ताप, मोती बन बूंद-बूंद बिखर गए, हिम के दूधिया से श्वेत कण धूप में और भी निखर गए कांप रहा […]
गीत ठंडक के गुनगुनाता हूँ, शूल सी चुभ रही हवाओं में खुद ही खुद दांत कटकटाता हूँ, ये जो संगीत है स्वयं उपजा, इसकी धुन में रहता हूँ जिगर को नचाता हूँ। राग में रागिनी […]
ज़िन्दगी भर सहा जिसने अत्याचार, नारी और दलित का किया जिसने उध्दार , कलम था, जिसका हथियार वास्तव में वह था , साक्षात् ईश्वर अवतार
कितना अच्छा होता हर हिंदू मुस्लिम बन जाता हर मुस्लिम हिंदू बन जाता हर घर में अल्लाह आ जाते हर घर में आ जाते राम कितना अच्छा होता हर गरीब अमीर बन जाता हर अमीर […]
छोङ न अपनी लगन में कोई कसर दुनिया देखती रह जाएं मेहनत का असर, साहसी बन तू तू हो निडर हाँ यू हीं हो तू प्रगति पथ पर अग्रसर ।
ये कैसी बेबसी है नाराज़गी को ढो रहे हैं अक्षमता को आकने के बदले दूसरे की कमियों को गिन रहे हैं । ये दिन है कैसा ना उम्मीदों का आसिया है ख़्वाहिशों के जलने की […]
पहले जैसे सनम ! अब हम ना रहे जानते हैं ये हम कुछ बदल से गये… पर करें क्या बता है मेरी क्या खता ! तेरे आने से हम कुछ बदल से गये…. ना रही […]
हां दोस्ती है, इन दिनों रजाई से उसको ओढ़े बिना नहीं कटते सुनहरे पल पहाड़ी रातों के। खुद की तारीफ के न पुल बांधो हम तो कायल रहे हैं वैसे ही तुम्हारी नेह भरी बातों […]
ऐसी क्या बात है सखी, क्या हो तुम मुझसे नाराज सखी करके चुनरी का ओला सखी, क्यूं कर दिया अबोला सखी ना कोई संदेश ना दूरभाष सखी, आती है तेरी बहुत याद सखी क्या मुझसे […]
उत्प्लावन करती हृदय में, अतृप्त अवांछित आकांक्षाएं संकीर्ण एवं सूक्ष्म वेग के व्याकरण’ गढ़ती हैं असंतृप्त आस्थाओं का प्रतीत प्रेम मधुमास की मधुर गर्जना करता है और ले जाता है पीपल की घनी छांव में, […]
जाने क्यूं आजकल खुद पर प्यार आने लगा है अपना ही चेहरा अब हमको रिझाने लगा है पहले डूबे रहते थे हम किसी की आँखों की मदहोशी में अब तो अपना चेहरा ही हमको भाने […]
वो मुझसे यूं बोले, तुम बहुत प्यारी हो तुम सबसे न्यारी हो कभी-कभी कलेजा जलाती हो, फिर भी मुझे बहुत भाती हो लिखती रहती हो कविताएं तुम, इतना सब कैसे कर पाती हो कभी-कभी क्रोधित […]
तुम्हारे कानों के झुमके बहुत ही प्यारे हैं तुमने मुस्कुरा के जब कहा हम तुम्हारे हैं तुम्हारी बोली मुझको भजन-सी लगी तुम्हारी हँसी भी फूलों से प्यारी लगी तुमने जब कहा हम बहुत प्यारे हैं […]
टूटे तारे के बारे में, किसने कब सोचा है उससे मांगे सब दुआ, यह ना पूछे कोई भी बता तेरे संग क्या हुआ क्या कोई तेरा साथी छूटा, तारे क्यूं तेरा दिल टूटा वह टूटा, […]
मैं हूं किसान, आप सा ही एक इन्सान मेहनत से अपनी, बीज बोता हूं ज़मीं में, सींचता रहता हूं पौधे अपनी आंखों की नमी से देखी है बागों की बहारें, मेहनत से हम कभी ना […]
क्या पता इस ज़िन्दगी में, आज सा कल हो ना हो क्या पता इस ज़िन्दगी में, अब जैसा पल हो ना हो आज सी खुशियां ना हो तो.. आज जैसे ग़म ना हों आज मिल […]
अपनी खुशियों पर रहें खुश दूसरों से क्यों भिड़ें, बात छोटी को बड़ी कर पशु सरीखे क्यों लड़ें। जिन्दगी जीनी सभी ने क्यों किसी को ठेस दें, हो सके तो कर भलाई प्रेम का संदेश […]
प्रिये, यह आज तुमने कैसी चाय है बनाई कौन सी लजीज़ वस्तु है मिलाई घूंट-घूंट पीते अजब रूहानी मस्ती है छाई इससे पहले तो कभी ऐसी चाय ना पिलाई। नही जानाँ, आज बस चाय बनाते […]
बिना स्वार्थ के दोस्ती, होती है एक औषधि जहां स्वार्थ और शर्त है प्यार में, वो टिकता कहां संसार में दोस्ती का रिश्ता भी खास है, दोस्ती केवल दोस्ती ही नहीं, एक दोस्त का विश्वास […]
मत बहा आँसू पी जा दर्द भी है तो, काम ले हिम्मत से आंसू हैं अमी का जल, नहीं होना विकल सब कुछ ठीक होगा और आयेगा सुहाना कल। वक्त सब दिन एक सा रहता […]
रात थी बात थी एक मुलाकात की तू मेरे साथ था मैं तेरे साथ थी पढ़ रहे थे तुम रात्रि में रश्मियां आँच में तेरी मैं फिर पिघलती रही चूड़ियों ने कहा जो था कहना […]
मेरी आँखों को ऐसी हँसी आ रही है जैसे मोमबत्ती जलकर पिघलती जा रही है कुछ जल गई रौशनी की फिक्र में कुछ बेखबर-सी पिघलती जा रही है पिघल गई धागे को जलाने के जश्न […]
लौट चल साथी ! यहाँ गम सबसे जियादा (ज्यादा) है बेबुनियादी रस्मोरिवाज में मन उलझा जाता है करते रहे कोशिश लाख जिंदगी संवारने की पर तरुवर में पीत पत्र फल से जियादा है नई सुबह […]
बेईमान-सा मन गिरती-उठती दीवारें आज सिर उठाकर खड़ी हैं यूँ तो सरचढ़ी हैं पर कुछ जिम्मेंदारियां भी हैं छत को संभाले हुए दिन भर खड़ी रहती हैं शाम को थककर चूर हो जाती हैं रात […]
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