अब अचानक ऋतु बदलने सी लगी ठंड का अहसास सा होने लगा प्यार की बारिश में उगती ख्वाहिशें पड़ न जाएं ठंड में पाले के पाले।
अब अचानक ऋतु बदलने सी लगी ठंड का अहसास सा होने लगा प्यार की बारिश में उगती ख्वाहिशें पड़ न जाएं ठंड में पाले के पाले।
मानवता पर प्रहार कर रहे बेटियों पर अत्याचार कर रहे राक्षसों को मिटाने के लिए अवतार का इंतजार नहीं करना है, बल्कि जोरदार मुहिम चलानी है, कुकर्मियों को नानी याद दिलानी है, बुरी नजर को […]
कल ही दर्द ने मुझसे रो कर कहा, बहुत सहन कर लिया मुझे तुमने। खुदा से अब ये इबादत है, रुबरु हो जाए सारी खुशियां तुमसे ।
ना जाने कितनी निर्भया ना जाने, कैसी मर्दानगी बर्बरता की हदें लांघी जुबां तक काटी धरती भी नहीं कांपी कानून को कुछ ना समझे कौन इन्हे इन्सान कहे जानवर भी इनसे हारे भगवान् भी नहीं […]
आह लगेगी उस गुड़िया की, बच तो तुम भी ना पाओगे हर बेटी देश की, आवाज़ उठाएगी, तुम भी बख़्शे नहीं जाओगे “सूली चढ़वाऊंगी, फांसी लगवाऊंगी, अपने हत्यारों को सज़ा दिलाने, पुनर्जन्म ले कर भी […]
इक अरदास करूं तुमसे प्रभू ! मैं रो लूंगी भाग्य को अपने, हर दुःख को चुप्पी से सह लुंगी। बना देना मुझे निर्भया की मां, दिल को अपने समझा लुंगी। मगर न बनाना मुझे, बलात्कारी […]
माँ भारती, अब भी चुप क्यों, फिर बिटिया हुई शिकार दुष्कर्म, असह्य पीङ, कत्ल, कर दिया अंतिम संस्कार । अपमान हर महिला का, हर पिता हुआ शर्मसार अनवरत् चलता है, थमता नहीं, होता बारम्बार ।। […]
नहीं हूं मैं हिन्दू पहले, न ही दलित की बेटी हुं। मैं निर्भया आज की , इंसाफ़ मांगती, मैं पहले देश की बेटी हुं। क्यों नहीं पसीजा तुम्हारा हृदय, जब हैवानों ने मुझे शर्मसार किया, […]
इस महामारी में आमजन के कष्टों की दासताँ जानना हो तो बस एक दिन गुजारिए उनके बीच, उनसे मिल, जिनके दिन बितते आजीविका तलाशते रातें बीतती आने वाली परेशानियोंको गिन। हमें तो बस उन्ही नीतियों […]
किसी से किया कोई वादा, उसको निभा रहे हैं जीने की चाह नहीं है, बस, जिए जा रहे हैं . *****✍️गीता*****
होते ना अगर तुम, तो छोड़ देते ये दुनियां हम कभी की…. वो हंस दिए, और बोले,.. तो हम हैं ना, ना कहना ..,ये अब कभी भी.. *****✍️गीता*****
सागर में मोती मिलें, गहरे तल में खोज किनारों पर तो बस रेत मिले, चाहे जा बैठो रोज़ …..
कर्म का पेड़, खुदा के जैसा, परख के फल वो देता है, किसी को कड़वा, किसी को मीठा, मगर मिलता हमेशा मेहनत का है।
मैं कितना भी हूं उदास, वो हंसा ही देते हैं, मुरझाईं कली को , फिर से खिला ही देते हैं, करता होगा जमाना मोहब्बत, अपने महबूब से, मगर वो है कि उसे अंजाम तक पहुंचा […]
बदनाम बहुत हुए,वो लोग; जिन्होंने इश्क निभाया है, अंगार कोयले-सा है ये रस्ता, तड़पा बहुत, इस पर , चलकर जो आया है।
तनहाई का आलम पूरा हिमालय हो गया, अब दो दिलों का मिलन , क्षितिज-सा लगता है।
कौन है यहां अपना मेरा, तुझ पर ही है, अर्पित जीवन सारा। कौन-सी मैं व्यथा सुनाऊं, प्रभु! मैं तुझको कैसे पाऊं। कब तक यूं आस लगाऊ। कुछ तो बोलो, हे प्रभु! कब तक मैं यह […]
देखो ना, जिन्दगी आज फिर मैं हार गयी किसी और के लिए फिर से गलत ठहरा दी गयी ।। आज फिर मैं यह जान गयी सच का साथ कोई नहीं देता, मुक दर्शक बन, बस […]
मैं नहीं कहता सबको अपनी बहन मानो , चाहता इतना हूँ कि बहन क्या है ? इतना ही जानो .
सागर-सी गहराई बिन। नदी सुहानी पानी बिन।। नाच के हाथी नहा रहा था। और जहाज भी आ रहा था।। बूटा-बूटा पत्ता -पत्ता गिरिवर भी हर्षा रहा था। ‘विनयचंद ‘ ले रिक्त घड़ा बीच नदी पछता […]
जब याद करती हूं, उन लम्हों को। एक टीस सी उठती है। यह आंखें नम हो जाती है। अगर तुम साथ होते। जिंदगी खुशियों से भर जाती, हम उदास हैं, यह गम नहीं। पर यह […]
एक तन्हाई, मैं खुद से पाना चाहती हूं। अपने संग, कुछ पल बिताना चाहती हूं। जिंदगी में हर रंग भर कर, उसे मिटाना चाहती हूं। जहां कोई न हो मेरे साथ, बस तुम्हें देखकर, मैं […]
बहुत शिकायतें करती हूं मैं, जानते हो तुम। फिर भी कभी शिकायत नहीं करते।
सावन के इस मंच पर कवियों का है संगम। सुंदर सुहानी संध्या में छोड़ें कुछ सरगम।। दो पद हम लिखते हैं दो पद तुम भी गाओ। खेलें हम अन्तराक्षरी निज कवित्त सुनाओ।
मैं देख नहीं पाता हूं तो क्या? महसूस करता हूं, लोगों की खुशियां, और उनके गम । वो जो देखकर भी नहीं करते। इतना महसूस कर चुका हूं। इस दुनिया को, लोगों से कहीं बेहतर […]
वो सिक्सर की तरह लगी, आ सीने पर, दिल जीरो पर, बोल्ड हो गया, खुशी मिली, आईपीएल की तरह, मगर मैच हमारा , टाई हो गया।
रात का पागलपन भी देखो! खत्म होती ही नहीं रात भर, जब होता था, सुकून , तब सोता था, मगर अब , नींद की हिम्मत भी देखो! आती ही नहीं रात भर।
बस कुछ दिन की बात है सब भूल जाएंगे काम – धन्धों में मशगूल हो जाएंगे नईं कहानी का शोर मचाएंगे फिर कोई और निर्भया होगी जीवन की जंग हार जाएगी कोई कुछ ना करेगा […]
ये जो वक्त का सितारा है, वो बेहिसाब- सा बदलता है , और जब बदलता है, तो सारी कयानात बदलती है, फिजाएं भी बदलती हैं, और इंसान भी बदलता है।
ऑनलइन कक्षाओं का आया दौर, विद्यार्थी घर में हो रहे हैं बोर एक बोली मुझसे, मैडम आपकी बहुत याद आए, हम सखियां भी अब मिल नहीं पाएं दूजी बोली, मन नहीं लगे सुबह और शाम, […]
कोहरा देख कर , मैं इक पल को रुकी थी, मैं बढ़ती रही आगे, और कोहरा छंटता गया… *****✍️गीता*****
लो आ गया चौके छक्कों का सफर ये सुहाना आईपीएल का हुआ हर कोई दीवाना गूंजा रण ताली से सारा जमाना आईपीएल का हुआ हर कोई दीवाना बुमराह की यार्कर ,रसेल का सिक्सर आर्चर की […]
कभी जाहिर करना आया ही नहीं, तुम्हारे लिए मेरा प्यार। अब तक खामोश है….. मेरे लब।
क्यों आहत हुई मैं, क्यों मैं गुमसुम रही। सह रही थी, उस दर्द को। जहां जी रही थी मैं। याद है मुझे जब खुशियां, चमक रही थी, इन आंखों में। दमक रही थी, उन ख्वाबों […]
समेटते हुए , आ रहे हैं हम, आज भी , उन दिल के टुकड़ों को, जो वर्षों पहले टूटा था।
इस छोटी सी उम्र में, देखते हो ना मुझे, कभी ढाबों या चाय के ठेले पर, कभी किसी गैराज में, कभी लाल बत्ती पर , अखबार का बेचना, ठेले का धकेलना, कभी सोचा है तुमने, […]
यह कैसी है आपदाएं, कितना विनाश करती हैं! छीन कर सब मेरा, और मुझसे सवाल करती है। बाहर की भीषण तबाही, मेरे भीतर तक मचती है। सुख-चैन गंवा कर जोड़ा था, जिंदगी भी तौबा करती […]
नाकामी की दस्तक पढ़ ली मैंने, फिर भी इंतजार करेंगे। हम अपनी कामयाबी का…..
बेजुबान हम न थे, बस बोलना न आया।
ले देकर कुछ यादें हैं मेरे पास जो दिल की तिजोरी में संभाल के रखीं हैं गरीबी जब आयी करीब मेरे तो लोगों ने हिदायत दी कि कर लूं सौदा कुछ यादों का चंद पैसों […]
यह कौन-सी शाम है, यह कौन-सी रात है। जो न ढलती है, जो न कटती है। बिन तेरे यह जिंदगी हर-पल, सिमटती है….
छोड़कर इन आंसुओं को, भाग ना सके। और थाम भी ना सके। गिरते रहे उसके बूंदों की तरह, और मौसम जवां करते रहे। जमी कुछ पथरा गई थी, इन आंखों की। बिखरते रहे और इसे […]
मुस्कुराकर खत्म कर देती जीवन गाथा, पर उम्मीदों नहीं सोने न दिया।
कितने पर्दे बदले हैं, इस जिंदगी ने। कभी पुराने, तो कभी नए। कुछ फीके, कुछ मटमैले। और कुछ रेशम से नए।
है हिदायतें देती मां मुझे। घर जल्दी आना बेटी देर न करना। मैं सोचती हूं अक्सर! क्या यह देश मेरा घर नहीं! क्या यह लोग मेरा परिवार नहीं! फिर क्यों नहीं सुरक्षित , मैं अपने […]
है निशानियां तेरी, इन फिजाओं में। कभी चांद तो , कभी सितारे कहते हैं। कहते हैं मुड़ कर देख। जिसे तू चाहता है, वह वही है। जिसे हर रोज तू पाता है। याद वही सिमटी […]
मैं चुप हूं, खामोश हूं। एक मौन दरिया हूं। शांत हूं ,निर्मल हूं। कभी एक आहट भी, हिला देता था। मेरे भीतर के तूफान को, विचलित हो जाती थी। मैं अपनी राहों से। कायर थी […]
ॠणी आपके हैं हम सभी, त्याग, तप, पौरूष की गाथा भूलेगे ना कभी । 28 सितम्बर, 1907 का था वो पावन दिवस बसंती चोला धारी, वीर क्रांतिकारी, सेनानी भगतसिंह का पंजाब की , पावन धरा […]
आज सवेरे ही मैने निश्चय किया मन में शत्रुता संभाल अब न रखूगी मेरे नज़र से जो भी मेरे दोषी हैं उनके दोष मन से निकाल देखुगी । खुद को कलुषित करने वाले अंध विचारों […]
ज़िन्दगी में जो ख़ुशी मिली है ए दोस्त, बिन तेरे उस खुशी का क्या करूं….. उसमें मुझे तेरा साझा भी चाहिए।
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