कोई भी कर्म करो, इतना रखो ध्यान स्वर्ग -लोक में भी, जा पहुंचा है ,इंटरनेट श्रीमान प्रभु के पास भी अब हैं,.. टैब , लैपटॉप , मोबाइल, अब रहते हैं प्रभु भी, हमेशा ही ऑनलाइन.. […]

बापू गांधी और लाल बहादुर, दोनों हैं इस देश की शान एक का नारा सत्य , अहिंसा , दूजे का जय -जवान, जय-किसान अपने इस देश की खातिर, दोनों ने अपने प्राण किए न्यौछावर, दिया […]

मेरे बापू के सपनों का भारत, अब है न जाने गुम कहीं। न एकता की भावना है, न देश प्रेम की बात कहीं। सत्ता की खातिर, जनता को मूर्ख बनाया जाता है। मेरे बापू के […]

ईश्वर का खेल निराला है सब कुछ अपने प्रारब्ध और कर्म से ही मिलता है जैसे तुझे ताली मुझे गाली। सृजनहार ही सब सृजन करता है हमने तो बस गलतफहमी पाली, वही सींचता है लेखनी […]

ज़िन्दगी “मोबाइल” की गुलाम हो गई , “मोबाइल” के संग ही सुबह और शाम हो गई लिखना हो तो मोबाइल, पढ़ना हो तो मोबाइल, अब ये बातें तो आम हो गईं मिलने के भी मोहताज […]

दूसरे को मक्कार कहना और खुद को महान मानना छोड़ दे इंसान, मत कर गुमान जीवन है संघर्ष है सब जीते हैं सब चलते हैं, चलने वालों को इस तरह गाली नहीं करते हैं। कलम […]

दुनियां में हैं शख्स लाख ,पर दिल के पास हैं गाँधी अहिंसा ,सत्य ,समता शांति की तलवार हैं गाँधी अटल ,अविजेय ,अविचल ,वज्र की दीवार हैं गाँधी अडिग विश्वास ,जीवन का उमड़ता ज्वार हैं गाँधी […]

हमारे संविधान की विशेषता असंतुष्टो को भी संतुष्ट होने के अवसर उपलब्ध कराती है यही वजह है कि इंसाफ की प्रक्रिया तारीख़ दर तारीख़ चलती जाती है

कैसे कहें ” सुरक्षित हैं तू” —————–******* हम भारत की आधी आबादी, कबतक सहे दुराचार बढता ही जा रहा, थमता नहीं, हिंसक व्यवहार आख़िर क्यूँ नहीं, कोई कर पा रहा इसका निराकार सारी कोशिशें, सारे […]

हम अभिभावकों के लिए यह कहाँ तक संभव है हर जगह बेटियों के साथ, परछाई बन चल पाना क्या यह उचित होगा, फिर से घर की चाहरदीवारी में, रोक पाना हथरस जैसी घटनाएँ, नितप्रतिदिन डरा […]

बताइए क्या जबाब दें, उस मासूम को कैसे कहें, बाहर का कोई ठिकाना नहीं है कहाँ, क्या, कौन भेङिया का रूप लिए है तेरी जिन्दगी महफ़ूज नहीं, लग सकती है दाव पर।

पूछ रही नन्ही परी क्या होता यह दुराचार क्यूँ होता महिलाओं के साथ गलत व्यवहार क्यूँ माँ किसी से बात करने पर टोकती तू क्यूँ लगाती पाबंदी, बाहर निकलने क्यूँ है इंकार

मन के इतने खूबसूरत आप कैसे हो गए, आपको किसने सिखाया इस तरह से स्नेह करना। आप मे इतनी अधिक ममता की बातें हैं भरी, कि आप ऐसी लग रही हो एक मिश्री की डली। […]

किसी ने पूछा पंडितजी क्यों लिखते हो आखिर कविता। क्या कुछ हासिल होता है या फिर यूँही रहे हो समय बिता।। छन्द हमारा पिता बन्धुओं और भाषा अपनी जननी प्यारी। बेशक तुकबन्दी हो अपनी पर […]

सदा सड़क पर बांध के मुखरा घूमने वाली मैं थी जिसका घुटन भला क्यों हो रही आली घूंघट में ,क्या कारण इसका? बेपर्द बनाया जग ने मुझको या दोषी हूँ खुद हीं इसका ? सिर […]

डिप्रेशन सी जिंदगी मे चाय सा सुकून हो तुम सुखे हुए खयालो की संजीवनी बुटी हो तुम तपते रेगीस्तान मे मिली मधुर पानी की बुंद हो तुम बांधे हुए दिल को मिली जशन-ए-आजादी हो तुम […]

पति पत्नी का सम्बन्ध,मनभाव का एक आनन्द होता है यह पुष्पित सुमन का मकरंद होता है यह है पावन प्रणय की उद्भावना यह कविता का एक अनछुआ छन्द होता है यह अन्धेरे में राह दिखाता […]

रात भर मैं नींद में सोया रहा जब उठा अहसास सा होने लगा बीतता बातों ही बातों में चला यह समय तेरा व मेरा जा रहा।

मानवता पर प्रहार कर रहे बेटियों पर अत्याचार कर रहे राक्षसों को मिटाने के लिए अवतार का इंतजार नहीं करना है, बल्कि जोरदार मुहिम चलानी है, कुकर्मियों को नानी याद दिलानी है, बुरी नजर को […]

ना जाने कितनी निर्भया ना जाने, कैसी मर्दानगी बर्बरता की हदें लांघी जुबां तक काटी धरती भी नहीं कांपी कानून को कुछ ना समझे कौन इन्हे इन्सान कहे जानवर भी इनसे हारे भगवान् भी नहीं […]

आह लगेगी उस गुड़िया की, बच तो तुम भी ना पाओगे हर बेटी देश की, आवाज़ उठाएगी, तुम भी बख़्शे नहीं जाओगे “सूली चढ़वाऊंगी, फांसी लगवाऊंगी, अपने हत्यारों को सज़ा दिलाने, पुनर्जन्म ले कर भी […]

इक अरदास करूं तुमसे प्रभू ! मैं रो लूंगी भाग्य को अपने, हर दुःख को चुप्पी से सह लुंगी। बना देना मुझे निर्भया की मां, दिल को अपने समझा लुंगी। मगर न बनाना मुझे, बलात्कारी […]

माँ भारती, अब भी चुप क्यों, फिर बिटिया हुई शिकार दुष्कर्म, असह्य पीङ, कत्ल, कर दिया अंतिम संस्कार । अपमान हर महिला का, हर पिता हुआ शर्मसार अनवरत् चलता है, थमता नहीं, होता बारम्बार ।। […]

नहीं हूं मैं हिन्दू पहले, न ही दलित की बेटी हुं। मैं निर्भया आज की , इंसाफ़ मांगती, मैं पहले देश की बेटी हुं। क्यों नहीं पसीजा तुम्हारा हृदय, जब हैवानों ने मुझे शर्मसार किया, […]

इस महामारी में आमजन के कष्टों की दासताँ जानना हो तो बस एक दिन गुजारिए उनके बीच, उनसे मिल, जिनके दिन बितते आजीविका तलाशते रातें बीतती आने वाली परेशानियोंको गिन। हमें तो बस उन्ही नीतियों […]

मैं कितना भी हूं उदास, वो हंसा ही देते हैं, मुरझाईं कली को , फिर से खिला ही देते हैं, करता होगा जमाना मोहब्बत, अपने महबूब से, मगर वो है कि उसे अंजाम तक पहुंचा […]

कौन है यहां अपना मेरा, तुझ पर ही है, अर्पित जीवन सारा। कौन-सी मैं व्यथा सुनाऊं, प्रभु! मैं तुझको कैसे पाऊं। कब तक यूं आस लगाऊ। कुछ तो बोलो, हे प्रभु! कब तक मैं यह […]

सागर-सी गहराई बिन। नदी सुहानी पानी बिन।। नाच के हाथी नहा रहा था। और जहाज भी आ रहा था।। बूटा-बूटा पत्ता -पत्ता गिरिवर भी हर्षा रहा था। ‘विनयचंद ‘ ले रिक्त घड़ा बीच नदी पछता […]

जब याद करती हूं, उन लम्हों को। एक टीस सी उठती है। यह आंखें नम हो जाती है। अगर तुम साथ होते। जिंदगी खुशियों से भर जाती, हम उदास हैं, यह गम नहीं। पर यह […]

एक तन्हाई, मैं खुद से पाना चाहती हूं। अपने संग, कुछ पल बिताना चाहती हूं। जिंदगी में हर रंग भर कर, उसे मिटाना चाहती हूं। जहां कोई न हो मेरे साथ, बस तुम्हें देखकर, मैं […]

सावन के इस मंच पर कवियों का है संगम। सुंदर सुहानी संध्या में छोड़ें कुछ सरगम।। दो पद हम लिखते हैं दो पद तुम भी गाओ। खेलें हम अन्तराक्षरी निज कवित्त सुनाओ।

मैं देख नहीं पाता हूं तो क्या? महसूस करता हूं, लोगों की खुशियां, और उनके गम । वो जो देखकर भी नहीं करते। इतना महसूस कर चुका हूं। इस दुनिया को, लोगों से कहीं बेहतर […]

रात का पागलपन भी देखो! खत्म होती ही नहीं रात भर, जब होता था, सुकून , तब सोता था, मगर अब , नींद की हिम्मत भी देखो! आती ही नहीं रात भर।

बस कुछ दिन की बात है सब भूल जाएंगे काम – धन्धों में मशगूल हो जाएंगे नईं कहानी का शोर मचाएंगे फिर कोई और निर्भया होगी जीवन की जंग हार जाएगी कोई कुछ ना करेगा […]

ये जो वक्त का सितारा है, वो बेहिसाब- सा बदलता है , और जब बदलता है, तो सारी कयानात बदलती है, फिजाएं भी बदलती हैं, और इंसान भी बदलता है।