डगमगा जाते हैं कदम आजकल एक जरा से झोंके से मगर, एक वक्त था जब हमारे इरादे बुलंद हुआ करते थे..
डगमगा जाते हैं कदम आजकल एक जरा से झोंके से मगर, एक वक्त था जब हमारे इरादे बुलंद हुआ करते थे..
हुनर सब में है बस तराशने की जरूरत है हीरा बन सकता है हर पत्थर बस पारखी नजर की जरूरत है…
निरुत्तर हो गए हम आपकी बात सुनकर निकल पाया न मुंह से एक भी शब्द छनकर। कह दिया आपने सब कह नहीं पाए थे जो हम, आपकी बात सुनकर सोचते रह गए हम। कभी उस […]
जिंदगी की आरजू में दफ्न हो गये सुकून के कुछ पल थे और कुछ अधूरे ख्वाब !!
वो कहते हैं बलात्कार की घटना हमने सबसे पहले दिखलाई है पीड़िता के घर तक सबसे पहले हमारी पत्रकार पहुंच पाई है हमने दिखलाया सबसे पहले पीड़िता के भाई को पीड़िता की आवाज सबसे पहले […]
मैं जब-जब अकेला होता हूं, दर्द के संताप को, बाहों में लेकर रोता हूं। खो जाता हूं ,उन यादों में, उलझे हुए उन ख्वाबों में, वक्त की जबरई को, गले लगाकर; खोता हूं, जब-जब अकेला […]
जरा सोंच कभी हम ना हों तेरी जिंदगी में कोई गम ना हों कैसे कटेगा वक्त तेरा अगर जुबां हो पर लफ्ज ना हों.
आखिर डूब ही गया ख्वाबों का महल, कितनी दफा रोंका था दिल ने समुंदर पर आशियां बनाने से…
रोज यूं ही नहीं बन जाते हैं अफसाने नये-नये लकीरें वक्त की बनती बिगड़ती रहती हैं…
हैं कितनी कड़वाहटें मन भरी आजकल किसी को देखकर नफरत के दिल में ज्वार उठते हैं…
रात भी खुद के तम से डरी होगी चाँद की चमक भी शर्मिंदा होगी तारों ने ना टूटने की कसम खाई होगी जब बेबसी में उस क्षण की साक्षी होगी।
यूं तो बड़े -बड़े तूफ़ानों से भी गुज़र जाती हूं और कभी एक आंसू , से भी पिंघल जाती हूं । *****✍️गीता *****
औरत का सम्मान , कुछ इस कदर किया जाए सरक जाए गर पल्लू गलती से, तो, झुका नजर को लिया जाए ।
स्वपन में मैं रसोई में खड़ी थी, रसोई में रखे, कैंची, चाकू और बेलन में, ज़बरदस्त जंग छिड़ी थी कि यदि चाहे, तो कौन दे सकता है, ज्यादा घाव मुझे भी हुआ सुनने का चाव.. […]
वित्त – विभूति कहीं जले तो, जल ही उस बुझाए कहीं दिल जले तो क्या किया जाए.. अम्बर से पानी बरसे, तो , छतरी को लिया जाए नयनों से पानी बरसे, तो क्या किया जाए […]
दो पंक्तियों से मेरी ऐसी मिठास फैले, मिट जायें नफ़रतें सब दूर हों झमेले। कविता तो प्रेम को है बस प्रेम ही हो मकसद लिखूं प्रेम लिख दूँ निकलें न पद विषैले। क्या पा सकूँगा […]
छोटी सी मासूम कली थी, अपने घर में, मां की गोद में बड़े लाडों से पली थी मुस्कान के आगे जिसकी, पूरा घर था खिल गया उसको शर्म सार करके, किसी को क्या मिल गया […]
बेटियों के साथ क्यूँ होता यह बार बार मानसिक विचलन है ये कहते जिसे बलात्कार यह सामान्य नहीं क्रूरतापूर्ण व्यवहार है मानसिक विकृति की ओर बढतो की पहचान है
बापू हमारे, जन- जन के प्यारे मिली आजादी बापू तेरे सहारे ।। वर्षों से भारत माता सिसक रही थी पाँवो में गुलामी की बेङी पङी थी दिल में हमारे न कोई ललक बची थी स्वाधीन […]
जिनके तेज के आगे, चाँद की चमक फीकी हो ऐसा कौन है जिसने, अहिंसा से लङाई जीती हो । बिन गोली- बारूद के चला था फ़िरंगी से उलझनें सोचा भी नहीं था कभी, चला है […]
बापू तुम्हारे सपनों को हम साकार करेंगे। हम हिन्द के हैं बालक सेवादार बनेंगे।। इसे प्यार करेंगे।। मूल मंत्र जो दिया आपने, सत्य अहिंसा का सबको। अपनाऐंगे हम जीवन में, जीवन को साकार करेंगे।। हम […]
महात्मा गांधी सत्य अहिंसा को अपनाकर जीवन को साकार किया। एक वस्त्र में खुद को रखकर जन जन का उद्धार किया।। बाल्य काल में शिक्षा सेवा योग मार्ग को अपनाया। जन हितकारी न्याय के खातिर […]
मनुष्य कहां कोई सम्पूर्ण जनता की नजर में सब अपूर्ण दुनियां जिन्हें पूजती बारम्बार स्वदेश में उनके निंदक हजार तिनके की तरह ठुकराई सत्ता कभी भी न पाया कोई भत्ता निठल्ले करते उनकी बुरी बातें […]
अहिंसा के पुजारी, सत्य, प्रेम , करूणा जैसे मानवीय गुणों की हमें दरकार है । किसानों के हिमायती की दृढ़ता को अपनाने हेतु क्या हम पुनः तैयार हैं । अपनी मानवीय संवेदना को रखना हमें […]
उन्हें देख हिल गए, कांप गए अंग्रेज, धोती वाले बापू जी की बात ही निराली थी। उखाड़ा फिरंगी राज, एक किया था समाज, राष्ट्रवादी भावना की, लहर सी ला दी थी। सत्य के अहिंसा के, […]
अपनी दुर्वलताओ से भी अवगत करवाकर दुनिया को बताया, अहिंसा अपनाकर अर्द्ध नग्न फकीर कहा था कभी किसीने। बिना अस्त्र-शस्त्र के ही, चले लाठी ठेकाकर महिला, किसान सबको मोहा उन्मुक्त मुस्कराकर अविश्वसनीय है, आजादी दिलाया, […]
पूर्णिमा का चांद चमका है गगन में आज पूरा। चाँद चमका है तो मन कैसे रहेगा खुश अधूरा। चाँद पूरा मन भी पूरा, क्यों रहे सपना अधूरा। लक्ष्य पर फिर से बढ़ा पग, स्वप्न को […]
बलात्कार हुआ बेटी का बेटी से प्यार किसको है , आग लगा दो या जला दो लाश की परवाह किसको है , गाय मरती तो शहर जलता लाश लड़की की याद किसको है , जिंदा […]
विश्व गुरु की संस्कृति की आज ये यात्रा अंतिम निकल रही, चिता जल रही संस्कारो की मर्यादाएं राख हो रही।। धुंआ हैवानियत का उड़ रहा दरिंदगी की लपटें निकल रही, देवी रूप में जिसकी पूजा […]
दुष्टों ने हिंद की बेटी को पलित किया, हिन्द का दिल सहम उठा l वर्षों पहले दुष्टों के विरोध में नारा उठा था, हिन्द ने केंडल मार्च निकाला था l हिन्द ने न्याय के लिए […]
कोई भी कर्म करो, इतना रखो ध्यान स्वर्ग -लोक में भी, जा पहुंचा है ,इंटरनेट श्रीमान प्रभु के पास भी अब हैं,.. टैब , लैपटॉप , मोबाइल, अब रहते हैं प्रभु भी, हमेशा ही ऑनलाइन.. […]
बापू गांधी और लाल बहादुर, दोनों हैं इस देश की शान एक का नारा सत्य , अहिंसा , दूजे का जय -जवान, जय-किसान अपने इस देश की खातिर, दोनों ने अपने प्राण किए न्यौछावर, दिया […]
मेरे बापू के सपनों का भारत, अब है न जाने गुम कहीं। न एकता की भावना है, न देश प्रेम की बात कहीं। सत्ता की खातिर, जनता को मूर्ख बनाया जाता है। मेरे बापू के […]
ईश्वर का खेल निराला है सब कुछ अपने प्रारब्ध और कर्म से ही मिलता है जैसे तुझे ताली मुझे गाली। सृजनहार ही सब सृजन करता है हमने तो बस गलतफहमी पाली, वही सींचता है लेखनी […]
ज़िन्दगी “मोबाइल” की गुलाम हो गई , “मोबाइल” के संग ही सुबह और शाम हो गई लिखना हो तो मोबाइल, पढ़ना हो तो मोबाइल, अब ये बातें तो आम हो गईं मिलने के भी मोहताज […]
गांधीजी और शास्त्रीजी का जन्मदिन है एक साथ। सम्मान में इनके विनयचंद तू आज झुकाओ अपना माथ।।
दूसरे को मक्कार कहना और खुद को महान मानना छोड़ दे इंसान, मत कर गुमान जीवन है संघर्ष है सब जीते हैं सब चलते हैं, चलने वालों को इस तरह गाली नहीं करते हैं। कलम […]
दुनियां में हैं शख्स लाख ,पर दिल के पास हैं गाँधी अहिंसा ,सत्य ,समता शांति की तलवार हैं गाँधी अटल ,अविजेय ,अविचल ,वज्र की दीवार हैं गाँधी अडिग विश्वास ,जीवन का उमड़ता ज्वार हैं गाँधी […]
स्मृतियों के झरोखो से ऐसे शूल निकल आए हम फिर से, मिले घावों को अनजाने ही कुरेद आये।
हमारे संविधान की विशेषता असंतुष्टो को भी संतुष्ट होने के अवसर उपलब्ध कराती है यही वजह है कि इंसाफ की प्रक्रिया तारीख़ दर तारीख़ चलती जाती है
कैसे कहें ” सुरक्षित हैं तू” —————–******* हम भारत की आधी आबादी, कबतक सहे दुराचार बढता ही जा रहा, थमता नहीं, हिंसक व्यवहार आख़िर क्यूँ नहीं, कोई कर पा रहा इसका निराकार सारी कोशिशें, सारे […]
हम अभिभावकों के लिए यह कहाँ तक संभव है हर जगह बेटियों के साथ, परछाई बन चल पाना क्या यह उचित होगा, फिर से घर की चाहरदीवारी में, रोक पाना हथरस जैसी घटनाएँ, नितप्रतिदिन डरा […]
बताइए क्या जबाब दें, उस मासूम को कैसे कहें, बाहर का कोई ठिकाना नहीं है कहाँ, क्या, कौन भेङिया का रूप लिए है तेरी जिन्दगी महफ़ूज नहीं, लग सकती है दाव पर।
पूछ रही नन्ही परी क्या होता यह दुराचार क्यूँ होता महिलाओं के साथ गलत व्यवहार क्यूँ माँ किसी से बात करने पर टोकती तू क्यूँ लगाती पाबंदी, बाहर निकलने क्यूँ है इंकार
मन के इतने खूबसूरत आप कैसे हो गए, आपको किसने सिखाया इस तरह से स्नेह करना। आप मे इतनी अधिक ममता की बातें हैं भरी, कि आप ऐसी लग रही हो एक मिश्री की डली। […]
किसी ने पूछा पंडितजी क्यों लिखते हो आखिर कविता। क्या कुछ हासिल होता है या फिर यूँही रहे हो समय बिता।। छन्द हमारा पिता बन्धुओं और भाषा अपनी जननी प्यारी। बेशक तुकबन्दी हो अपनी पर […]
सदा सड़क पर बांध के मुखरा घूमने वाली मैं थी जिसका घुटन भला क्यों हो रही आली घूंघट में ,क्या कारण इसका? बेपर्द बनाया जग ने मुझको या दोषी हूँ खुद हीं इसका ? सिर […]
डिप्रेशन सी जिंदगी मे चाय सा सुकून हो तुम सुखे हुए खयालो की संजीवनी बुटी हो तुम तपते रेगीस्तान मे मिली मधुर पानी की बुंद हो तुम बांधे हुए दिल को मिली जशन-ए-आजादी हो तुम […]
पति पत्नी का सम्बन्ध,मनभाव का एक आनन्द होता है यह पुष्पित सुमन का मकरंद होता है यह है पावन प्रणय की उद्भावना यह कविता का एक अनछुआ छन्द होता है यह अन्धेरे में राह दिखाता […]
रात भर मैं नींद में सोया रहा जब उठा अहसास सा होने लगा बीतता बातों ही बातों में चला यह समय तेरा व मेरा जा रहा।
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