विविध काव्यों से सजा है न्यारा कविवर ने है जिसे संवारा समालोचना की मुखरता से मिलकर सबने जिसे निखारा छन्द- अलंकार की बहती धारा हाँ, वह है “सावन” मंच हमारा। बनी एक पहचान हमारी खुद […]
विविध काव्यों से सजा है न्यारा कविवर ने है जिसे संवारा समालोचना की मुखरता से मिलकर सबने जिसे निखारा छन्द- अलंकार की बहती धारा हाँ, वह है “सावन” मंच हमारा। बनी एक पहचान हमारी खुद […]
कब अपनी इबादत “उन्हे ” तस्लीम होगी सभी सुताओ की ख्वाहिशे महफ़ूज होंगी ।
कोई ख्वाहिश कहाँ कोई पछतावा भी नहीं पतझङ-सी है वीरानी बसंत आया ही नहीं दूर तक फैला है सूनापन जैसे शून्य निकल आया हो हाँ, कुछ इस तरह तेरा ख़याल आया हो । काली निशा […]
कुछ वक्त की ज़िन्दगी है, फ़िर तो हमको है जाना कुछ समझौते भी हुए यहां, कुछ उपहार मिले माना खाली हाथ ही तो आए थे, खाली हाथ ही है जाना ये तो निर्भर, करता है […]
बातों का सिलसिला कुछ यूं ख़त्म हो गया, कि कायनात से दूरियां, मांगी होंगी उसने ।।
तीर, तलवार और तंज की धार से, जब निष्प्राण हुआ शरीर अनुप्रास ही दिखे कवि को, यहां घायल पड़ा शरीर ।। *****✍️गीता*****
ओस की बूंद अब तुम भी न दो यूँ ठेस पांवों में अभी तो चुभ रहे हैं हम कई पैनी निगाहों में।
चाँद देखो, चाँद की शीतल छटा का लाभ लो। दाग-धब्बे खोजने की मंद आदत त्याग दो। इंसान में कमियां भी होंगी और अच्छाई भी होगी बस कमी ही खोजने की मंद आदत त्याग दो। हो […]
दिल वालों की दिल्ली देखो , हो गई है बीमार कहीं किसी का साथी छूटा, कहीं किसी का प्पार दिल्ली का तो अब ये नसीब हो गया हो गया वहीं दूर, जो करीब हो गया […]
बेरुखी से बड़ी सजा ही नहीं , खता क्या थी, पता ही नहीं वो इस कदर दूर हो गए , कभी पास भी थे क्या, अब तो ऐसा लगता ही नहीं ।।
चले जाएंगे तेरी अंजुमन से हम, सुना है किसी के जाने से सूना नहीं होता ।। *****✍️गीता*****
ना मुस्कुराएंगे कभी वैसे, मुस्कुराते थे कभी जैसे कुछ टूट सा गया है अंदर , दिखाई देगा नहीं बाहर से ।।
बादलों से चाँद जैसे निकल आया हो आके अपनी छटा से सारी गम की परछाई को मुझसे छिपा आया हो हाँ, कुछ इस तरह तेरा ख़याल आया हो।
क्या ग़लत है क्या सही, बात बस इतनी सी है तुमने वो समझ लिया, जो हमने कहा ही नहीं ।।
कड़ी बेरोजगारी से दुखी है हर युवा देखो धरी ही रह गई तैयारियां परीक्षा रुक गयीं देखो। निराशा के भंवर में पड़ न जाए देश का यौवन समय रहते करो मिलकर संवारो देश का यौवन।
न कह मुझसे सुनाने को नज्म कोई मुहब्बत की सयाना हो रहा हूँ अब ज़रा सा शर्म करता हूँ।
अधूरे अरमानों की झांकी आज गुजरी मेरे दरम्यां से इक जिंदगी जो जी नहीं, वो देखी आज मैनें
तुम्हारे हाथ में अपनत्व की जो कुछ लकीरें हैं उन्हीं में एक मैं भी हूँ जरा सा गौर से देखो। आईना सामने रख खुद की नजरों में जरा देखो, मिलूंगा नीलिमा में तुम जरा सा […]
आपकी और अपनी दोस्ती साबुन व पानी की तरह हो एक दूसरे का साथ देकर अपने भी और संपर्क में आने वालों के भी। दाग -धब्बे दूर कर दें
वे सो रहे हैं व्यवस्था को, जेब में लेकर, हम रो रहे हैं , हाथ में मोमबत्तियां लेकर! वे जागते हैं अक़्सर चुनाव में, और हम हादसों में ….
डगमगा जाते हैं कदम आजकल एक जरा से झोंके से मगर, एक वक्त था जब हमारे इरादे बुलंद हुआ करते थे..
हुनर सब में है बस तराशने की जरूरत है हीरा बन सकता है हर पत्थर बस पारखी नजर की जरूरत है…
निरुत्तर हो गए हम आपकी बात सुनकर निकल पाया न मुंह से एक भी शब्द छनकर। कह दिया आपने सब कह नहीं पाए थे जो हम, आपकी बात सुनकर सोचते रह गए हम। कभी उस […]
जिंदगी की आरजू में दफ्न हो गये सुकून के कुछ पल थे और कुछ अधूरे ख्वाब !!
वो कहते हैं बलात्कार की घटना हमने सबसे पहले दिखलाई है पीड़िता के घर तक सबसे पहले हमारी पत्रकार पहुंच पाई है हमने दिखलाया सबसे पहले पीड़िता के भाई को पीड़िता की आवाज सबसे पहले […]
मैं जब-जब अकेला होता हूं, दर्द के संताप को, बाहों में लेकर रोता हूं। खो जाता हूं ,उन यादों में, उलझे हुए उन ख्वाबों में, वक्त की जबरई को, गले लगाकर; खोता हूं, जब-जब अकेला […]
जरा सोंच कभी हम ना हों तेरी जिंदगी में कोई गम ना हों कैसे कटेगा वक्त तेरा अगर जुबां हो पर लफ्ज ना हों.
आखिर डूब ही गया ख्वाबों का महल, कितनी दफा रोंका था दिल ने समुंदर पर आशियां बनाने से…
रोज यूं ही नहीं बन जाते हैं अफसाने नये-नये लकीरें वक्त की बनती बिगड़ती रहती हैं…
हैं कितनी कड़वाहटें मन भरी आजकल किसी को देखकर नफरत के दिल में ज्वार उठते हैं…
रात भी खुद के तम से डरी होगी चाँद की चमक भी शर्मिंदा होगी तारों ने ना टूटने की कसम खाई होगी जब बेबसी में उस क्षण की साक्षी होगी।
यूं तो बड़े -बड़े तूफ़ानों से भी गुज़र जाती हूं और कभी एक आंसू , से भी पिंघल जाती हूं । *****✍️गीता *****
औरत का सम्मान , कुछ इस कदर किया जाए सरक जाए गर पल्लू गलती से, तो, झुका नजर को लिया जाए ।
स्वपन में मैं रसोई में खड़ी थी, रसोई में रखे, कैंची, चाकू और बेलन में, ज़बरदस्त जंग छिड़ी थी कि यदि चाहे, तो कौन दे सकता है, ज्यादा घाव मुझे भी हुआ सुनने का चाव.. […]
वित्त – विभूति कहीं जले तो, जल ही उस बुझाए कहीं दिल जले तो क्या किया जाए.. अम्बर से पानी बरसे, तो , छतरी को लिया जाए नयनों से पानी बरसे, तो क्या किया जाए […]
दो पंक्तियों से मेरी ऐसी मिठास फैले, मिट जायें नफ़रतें सब दूर हों झमेले। कविता तो प्रेम को है बस प्रेम ही हो मकसद लिखूं प्रेम लिख दूँ निकलें न पद विषैले। क्या पा सकूँगा […]
छोटी सी मासूम कली थी, अपने घर में, मां की गोद में बड़े लाडों से पली थी मुस्कान के आगे जिसकी, पूरा घर था खिल गया उसको शर्म सार करके, किसी को क्या मिल गया […]
बेटियों के साथ क्यूँ होता यह बार बार मानसिक विचलन है ये कहते जिसे बलात्कार यह सामान्य नहीं क्रूरतापूर्ण व्यवहार है मानसिक विकृति की ओर बढतो की पहचान है
बापू हमारे, जन- जन के प्यारे मिली आजादी बापू तेरे सहारे ।। वर्षों से भारत माता सिसक रही थी पाँवो में गुलामी की बेङी पङी थी दिल में हमारे न कोई ललक बची थी स्वाधीन […]
जिनके तेज के आगे, चाँद की चमक फीकी हो ऐसा कौन है जिसने, अहिंसा से लङाई जीती हो । बिन गोली- बारूद के चला था फ़िरंगी से उलझनें सोचा भी नहीं था कभी, चला है […]
बापू तुम्हारे सपनों को हम साकार करेंगे। हम हिन्द के हैं बालक सेवादार बनेंगे।। इसे प्यार करेंगे।। मूल मंत्र जो दिया आपने, सत्य अहिंसा का सबको। अपनाऐंगे हम जीवन में, जीवन को साकार करेंगे।। हम […]
महात्मा गांधी सत्य अहिंसा को अपनाकर जीवन को साकार किया। एक वस्त्र में खुद को रखकर जन जन का उद्धार किया।। बाल्य काल में शिक्षा सेवा योग मार्ग को अपनाया। जन हितकारी न्याय के खातिर […]
मनुष्य कहां कोई सम्पूर्ण जनता की नजर में सब अपूर्ण दुनियां जिन्हें पूजती बारम्बार स्वदेश में उनके निंदक हजार तिनके की तरह ठुकराई सत्ता कभी भी न पाया कोई भत्ता निठल्ले करते उनकी बुरी बातें […]
अहिंसा के पुजारी, सत्य, प्रेम , करूणा जैसे मानवीय गुणों की हमें दरकार है । किसानों के हिमायती की दृढ़ता को अपनाने हेतु क्या हम पुनः तैयार हैं । अपनी मानवीय संवेदना को रखना हमें […]
उन्हें देख हिल गए, कांप गए अंग्रेज, धोती वाले बापू जी की बात ही निराली थी। उखाड़ा फिरंगी राज, एक किया था समाज, राष्ट्रवादी भावना की, लहर सी ला दी थी। सत्य के अहिंसा के, […]
अपनी दुर्वलताओ से भी अवगत करवाकर दुनिया को बताया, अहिंसा अपनाकर अर्द्ध नग्न फकीर कहा था कभी किसीने। बिना अस्त्र-शस्त्र के ही, चले लाठी ठेकाकर महिला, किसान सबको मोहा उन्मुक्त मुस्कराकर अविश्वसनीय है, आजादी दिलाया, […]
पूर्णिमा का चांद चमका है गगन में आज पूरा। चाँद चमका है तो मन कैसे रहेगा खुश अधूरा। चाँद पूरा मन भी पूरा, क्यों रहे सपना अधूरा। लक्ष्य पर फिर से बढ़ा पग, स्वप्न को […]
बलात्कार हुआ बेटी का बेटी से प्यार किसको है , आग लगा दो या जला दो लाश की परवाह किसको है , गाय मरती तो शहर जलता लाश लड़की की याद किसको है , जिंदा […]
विश्व गुरु की संस्कृति की आज ये यात्रा अंतिम निकल रही, चिता जल रही संस्कारो की मर्यादाएं राख हो रही।। धुंआ हैवानियत का उड़ रहा दरिंदगी की लपटें निकल रही, देवी रूप में जिसकी पूजा […]
दुष्टों ने हिंद की बेटी को पलित किया, हिन्द का दिल सहम उठा l वर्षों पहले दुष्टों के विरोध में नारा उठा था, हिन्द ने केंडल मार्च निकाला था l हिन्द ने न्याय के लिए […]
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