ये जो वक्त का सितारा है, वो बेहिसाब- सा बदलता है , और जब बदलता है, तो सारी कयानात बदलती है, फिजाएं भी बदलती हैं, और इंसान भी बदलता है।
ये जो वक्त का सितारा है, वो बेहिसाब- सा बदलता है , और जब बदलता है, तो सारी कयानात बदलती है, फिजाएं भी बदलती हैं, और इंसान भी बदलता है।
ऑनलइन कक्षाओं का आया दौर, विद्यार्थी घर में हो रहे हैं बोर एक बोली मुझसे, मैडम आपकी बहुत याद आए, हम सखियां भी अब मिल नहीं पाएं दूजी बोली, मन नहीं लगे सुबह और शाम, […]
कोहरा देख कर , मैं इक पल को रुकी थी, मैं बढ़ती रही आगे, और कोहरा छंटता गया… *****✍️गीता*****
लो आ गया चौके छक्कों का सफर ये सुहाना आईपीएल का हुआ हर कोई दीवाना गूंजा रण ताली से सारा जमाना आईपीएल का हुआ हर कोई दीवाना बुमराह की यार्कर ,रसेल का सिक्सर आर्चर की […]
कभी जाहिर करना आया ही नहीं, तुम्हारे लिए मेरा प्यार। अब तक खामोश है….. मेरे लब।
क्यों आहत हुई मैं, क्यों मैं गुमसुम रही। सह रही थी, उस दर्द को। जहां जी रही थी मैं। याद है मुझे जब खुशियां, चमक रही थी, इन आंखों में। दमक रही थी, उन ख्वाबों […]
समेटते हुए , आ रहे हैं हम, आज भी , उन दिल के टुकड़ों को, जो वर्षों पहले टूटा था।
इस छोटी सी उम्र में, देखते हो ना मुझे, कभी ढाबों या चाय के ठेले पर, कभी किसी गैराज में, कभी लाल बत्ती पर , अखबार का बेचना, ठेले का धकेलना, कभी सोचा है तुमने, […]
यह कैसी है आपदाएं, कितना विनाश करती हैं! छीन कर सब मेरा, और मुझसे सवाल करती है। बाहर की भीषण तबाही, मेरे भीतर तक मचती है। सुख-चैन गंवा कर जोड़ा था, जिंदगी भी तौबा करती […]
नाकामी की दस्तक पढ़ ली मैंने, फिर भी इंतजार करेंगे। हम अपनी कामयाबी का…..
बेजुबान हम न थे, बस बोलना न आया।
ले देकर कुछ यादें हैं मेरे पास जो दिल की तिजोरी में संभाल के रखीं हैं गरीबी जब आयी करीब मेरे तो लोगों ने हिदायत दी कि कर लूं सौदा कुछ यादों का चंद पैसों […]
यह कौन-सी शाम है, यह कौन-सी रात है। जो न ढलती है, जो न कटती है। बिन तेरे यह जिंदगी हर-पल, सिमटती है….
छोड़कर इन आंसुओं को, भाग ना सके। और थाम भी ना सके। गिरते रहे उसके बूंदों की तरह, और मौसम जवां करते रहे। जमी कुछ पथरा गई थी, इन आंखों की। बिखरते रहे और इसे […]
मुस्कुराकर खत्म कर देती जीवन गाथा, पर उम्मीदों नहीं सोने न दिया।
कितने पर्दे बदले हैं, इस जिंदगी ने। कभी पुराने, तो कभी नए। कुछ फीके, कुछ मटमैले। और कुछ रेशम से नए।
है हिदायतें देती मां मुझे। घर जल्दी आना बेटी देर न करना। मैं सोचती हूं अक्सर! क्या यह देश मेरा घर नहीं! क्या यह लोग मेरा परिवार नहीं! फिर क्यों नहीं सुरक्षित , मैं अपने […]
है निशानियां तेरी, इन फिजाओं में। कभी चांद तो , कभी सितारे कहते हैं। कहते हैं मुड़ कर देख। जिसे तू चाहता है, वह वही है। जिसे हर रोज तू पाता है। याद वही सिमटी […]
मैं चुप हूं, खामोश हूं। एक मौन दरिया हूं। शांत हूं ,निर्मल हूं। कभी एक आहट भी, हिला देता था। मेरे भीतर के तूफान को, विचलित हो जाती थी। मैं अपनी राहों से। कायर थी […]
ॠणी आपके हैं हम सभी, त्याग, तप, पौरूष की गाथा भूलेगे ना कभी । 28 सितम्बर, 1907 का था वो पावन दिवस बसंती चोला धारी, वीर क्रांतिकारी, सेनानी भगतसिंह का पंजाब की , पावन धरा […]
आज सवेरे ही मैने निश्चय किया मन में शत्रुता संभाल अब न रखूगी मेरे नज़र से जो भी मेरे दोषी हैं उनके दोष मन से निकाल देखुगी । खुद को कलुषित करने वाले अंध विचारों […]
ज़िन्दगी में जो ख़ुशी मिली है ए दोस्त, बिन तेरे उस खुशी का क्या करूं….. उसमें मुझे तेरा साझा भी चाहिए।
ये पथ ले जाएंगे, लक्ष्य तक जरूर मत छोड़ना मनुज तू अपना गुरूर हौसले बुलंद ही रखना तू सदा, अंधेरों के बाद ही आती है रौशनी…. *****✍️ गीता*****
सारी रात लड़े हम तेरी यादों से सारी रात बहस करी तेरे वादों से और सुबह तेरे मीठे सपनों ने सुला दिया… *****✍️गीता *****
हाँ कुछ लोगों को समय रहते ही ज्ञान आ जाए अपनी क्षुधा की तृप्ति में, किसी और का चैन न उङाए
खुशी हो या गमी संग नहीं रहती सदा एक-दूसरे से मिलकर भी रहती जुदा-ज़ुदा
खुद को संभाल पाते, इस लायक ही कहाँ छोङा है कई अपनों ने ही, अपनेपन में, अपना बन, दिल तोङा है
एक तेरे बगैर ही न गुजरेगी ये ज़िंदगी…., मैं क्या करूं सारे जमाने की खुशियाँ लेकर….
आजकल हर्फ़ ब हर्फ तोल परख कर लिखतीं हूं न जाने कौन सा मायना निकाल ले दुनिया!!
जब जब ज़ुल्म की जलजले इस ज़मीन पे फन फैलाया। तब तब इन्सान की इंसानियत खून की आँसू ही रोया।।
तू खुद सक्षम बन , ए ! नारी शक्ति! जमाना खुद बदल जाएगा, बैठा है हर ज़हन में रावण, राम कब तक तुझे बचाएगा, तू सीता बन नए युग की, रावण खुद मर जाएगा, ना […]
हर घर की खुशी व रौनक है बेटी उसी से दुनियां शुरू व खत्म होती किलकारी सब को हर्षा जाती हर मात पिता को ही भा जाती परिवार एकता का कारण जो जीवन जीने की […]
शेर की शादी में देखो, गीदड़ बराती आए हैं, ठांट बांट सब रंग चढ़ा कर, ब्याह रचाने आए हैं, बन जाएगा कल से शेर भी गीदड़ खुशी मनाने आए हैं, शेर की शादी में देखो, […]
*अच्छे विचारों का असर आज कल इसलिए नही होता,* *क्योंकि* *लिखने वाले और पढने वाले दोनो ये समझते है कि ये दुसरों के लिए है….!!!!*
जब-जब , मैं रोई! तब-तब , चैन से मां ना सोई, मां ने पाला , मां ने सम्भाला, अपना निवाला, मेरे उदर में डाला, कोने में रोकर , मुझको हंसाया, जिंदगी क्या है, सलीका सिखाया।
अतीत की छाया पड़ने न देना, यादों का साया दुख देता है । खूश रख अपने को फिलहाल से, उम्मीद का सवेरा सुकून देता है, लगा अनुमान मस्तिष्क से तू, कौन बुरा, कौन अच्छा है! […]
बहुत खुश थे हम, दुनिया में अपनी, मगर ये इश्क ! सारी खुशियां खा गया, कब से भुला दिया था तुमको, तेरी यादों को, मगर फिर अचानक क्यों, मुझे रोना आ गया।
बहुत ही है मुश्किल औरों में सुधार लाना बेहतर है खुद को ही निश दिन सुधारते जाना काम बहुत है सारे हर दिन पांव पसारे कुछ कर नाम कमाते तो कोई कल पर टारे दिन […]
जज्बा जो जगा है ज़हन में, कुछ पाने का, उसे कैंसर से कम ना समझना, उबल रहा है हौसला, फौलाद-सा, कभी गलती से पस्त ना समझना।
बहुत मनाता है दिल मुझे , उसके लिए, मगर मैं कैसे विचलित होती, ठोकरों से उभरना सीख जो लिया ।
छोड़ दिया है हमने; आजकल, उनके दिल में रहना भला कैसे सांस लेते! पसंद नहीं हमें भीड़ में रहना!
वे जानते हैं हमारे बारे में , मगर , थोड़ा आड़ में रखते हैं , पसंद नहीं है हमें उनका रूस जाना, मगर , वह कभी-कभार रूठ जाते हैं।
इस बार अगर ठुकरा दिया तूने तो फिर कभी लौटकर ना आएगे चली गई साँस भी मेरी तो भी तुझसे कंधा ना लगवाएगे….
मैं कविताएं नहीं लिखती ना लिखना ही जानती हूँ बस अपनों के दिये दर्द ही बयां करती हूँ..
मरने की कगार पर पहुँच गये हैं हम पर लोगों ने आज भी मुझ पर चिल्लाना नहीं छोंड़ा…
आँखें पथराई हैं तेरी राह देखकर मुलाकात को बेचैन हैं इतना पर तू तो ईद का चाँद हो गया है..
जलते चिराग़ों से कह दो, कहीं और जा के जलें , ख़ुशी बहुत है यहां जलने वालों का काम नहीं… ……….✍️ गीता………
महफ़िल में हमसे हर शख्स खफा था, क्यूंकि, जो दिल में है, लब पर वही हर दफा था । *****✍️गीता*****
न्यूज़ ना देखना दोस्त ! वहां केवल भ्रम फैलाया जाता है । कुछेक मुद्दो के पीछे, सत्ता को बचाया जाता है। सब कुछ पहले से तय होता है बहस जिस मुद्दे पर , उसे गर्व […]
बचपन में खेल का तकाजा, जवानी में मौसम के तकाजा तो बुढ़ापे में उम्र की तकाजा ।। जब आ जाए अंतिम घड़ी , उठ जाता है हम सब के जनाजा ।।
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