भुज पे आई कहा से,एै रूपसी, नेह निश्छल निर्मल लिये प्यारी। स्वरों की हो,शायद तुम जादुगरी। रीझाती उर-उर तुम क्यों हमारी। तितली की सी लगती,होतुम बागो की, वादियों मे दहकने लगी,देख तुम्हे सुर्ख सुमन बावरी। […]

तेरा जब मुझे रुखसार याद आता है! तेरे हुस्न का दीदार याद आता है! यादों से जुड़ जाती हैं वक्त की कड़ियाँ, सब्र का दिल से तकरार याद आता है! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय

नये साल की पवन बेला पर पहुचे तुम्हे बधाई.. देश प्रेम है धर्म हमारा,हम सब हैं भाई भाई .. मान और सम्मान बढे,जीवन हो श्रेष्ठ शिखर पर.. मानवता हो कर्म हमारा,हर जाती धर्म से बढ़कर.. […]

भूल जाना मोहब्वत को मुमकिन नही भूल जाने की तुम यूँ ही जिद्द न करो अश्को को तुम छुपा लोगे माना मगर इन नजरों को कैसे संभालोगे तुम ये होठो की लाली झूटी सही इन […]

#selflove #happiness जिसे ढूंढा ज़माने में, जाने छुपी थी किस ठिकाने में आधी उमर निकल गयी पता लगाने में, जाने छुपी थी किस ठिकाने में खोजा तुझे अपने चाहने वालो में, तलाशा तुझे पुरानी यादो […]

जल उठे थे बुझ के हम, शमा – ए – लौ से प्यार की; फिर तेरी हर एक झलक, पे नज़रों को झुका जाना; गर कही जो चल पड़े, तेरे बुलाने पे सनम; वो तेरा […]

बदला बदला सब कुछ लगता हरपल अदल-बदलती आशा । करवट वक्त ले रहा जानेअब कैसी बदली पल पल रिश्तों की परिभाषा । प्यारे मित्रो ,सवेरे की मधुर बेला में सपरिवारसहर्ष , पुलकित मंगलकामनाएँ स्वीकार करें […]

रंग क्या होंगे—? ————————- लिखेगी लेखनि कौन सा अक्षर स्याही के रंग क्या होंगे–? लफ़्जें कहेंगी कहानी कौन सी कथाओं में उमंग क्या होंगे—? झलकेगा इनमें कौन सा रूप झूठ बोलेगा,सच होगा चुप उपहासें या […]

मुशायरा महीन अहसासों को बुनता हुआ, अल्फ़ाजों को सहजता हुआ एक ऐसा कारवां है जहां हर शख्स, हर शब्द अपने वजूद को महसूस करता है| यहां कुछ ऐसा ही कारवां बन जाये तो क्या बात […]

ग़ालिब के जन्मदिन पर सभी शायरों, कवियों को हार्दिक शुभकामनाये… ग़ालिब ये किस जहान में तू हमे छोड़ गया है ना सच्चाई है ना अफसाने ना यार रहे ना दीवाने @प्रदीप सुमनाक्षर

एक नई कविता”अंग्रेजी न्यू ईयर”के आगमन पर …समर्पित (डा0दिलीप गुप्ता,घरघोड़ा.रायगढ़.छ0ग0) 0 **स्वागत हे नव वर्ष क्या लेकर आए हो.. विषाद की बोरियां या बिंडलों मे हर्ष !! या ओढ़कर भेंड़ की खाल आये हो !! […]

तुम पास नहीं हो तो कुछ भी नहीं है! तुम जहाँ हो मेरी हर खुशी वहीं है! खुद को ढूंढता हूँ अज़नबी सा मैं, मैं कहीं हूँ मेरी जिन्दगी कहीं है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तेरी यादों का समन्दर कभी सुखता नही। आँखों में खुशी है मगर दर्द मिटता नही। चौमासें सावन सा बरसता गम है सीने में, जुदा-ए-सनम तुम बीन दिल अब लगता नही। लाख बोई फस्लें आरजुओं की […]

एक योषिता, नाम योगिता मनमोहक – मनहरण है उसकी रूप सुन्दरता। सागर की सी शूतलता, मेघों की सी चंचलता, बागों में इठलाती खेलती तितली सी, है उसकी सतरंगी छटा। एक योषिता – नाम योगिता। सपनो […]

“तारीख” ********* “तारीख”…!! हाँ.! वही तारीख़…वही माह…! बस वर्ष बदल गया… तुम्हारी तरह ! तारीख़ रह गया…मेरी तरह ! नहीं बदल पाया वो… इस गतिमान समय चक्र के साथ… रह गया पीछे…तन्हा और भ्रमित… देखता […]

“*पहला नमन “* *—***—** हर सुवह का पहला नमन आपको अर्पण करें। मनमीत मेरे आप खुश हों खुशियाँ पदार्पण करें । जानकी प्रसाद विवश मेरे परम प्रिय मित्रो , क्रिसमस -प्रेम पर्व की मंगल घड़ियों […]

ऐ चाँदनी रीतें तुम__ युँ ही एैसे ही रहना। टिमटिमातें -जगमगीतें, झिलमिल सपना तुम लाना। हलकी – हलकी, शीतल – शीतल, पुरवाईयों का तुम संग बहना। इक चॉह जगा देती है……, सागर मे हो पानी […]

पल महीने दिन यूँ गुजरे, कितने सुबह और साँझ के पहरे , कितनी रातें उन्नीदीं सी, चाँदनी रात की ध्वलित किरणें, कितने सपने बिखरे-बिखरे, सिमटी-सिमटी धुँधली यादें, कुछ कर जाती हैं आघाते , कभी सहला […]

रात पिघल जाती है यादों की जलन से! बात बदल जाती है लफ्जों की चुभन से! गरूर बना देता है दिलों में दूरियाँ, फासले मिटते नहीं इंसा के जेहन से! रचनाकार- #मिथिलेश_राय

ओ शीत से आविष्ट निशा के घोर तिमिर, व्योम के पथ, इस शुक्ल पक्ष लौटा वह एक बार फिर ! लेकिन, क्या कौतुक ? पीतवर्णी हिमाशिक्त रश्मियों के उतप्त होने का भ्रम, चतुर्दिश व्याप्त शीतलता […]

ये नये साल का मौसम भी खुशगवार नही ऐसा लगता है मुझे अब किसी से प्यार नही कई सालो से मुझे ग़म बहुत सताते है कई सालो से मेरे साथ में ग़मख्वार नही जान दे […]

आ गया अब शीत का मौसम कंपकंपी के गीत का मौसम । झील सरिता सर हैं खामोश अब न लहर में तनिक भी जोश वृक्ष की शाखें नहीं मचलें लग रहा अब है न तनिक […]

हुँ मै तेरी हाथों की कलम गढ़ ले तु गीत नया जोगन। हर शब्द हो तीर लक्ष्य भेदी, मुक्त हो प्रेम का अटुट बंधन। आँखो के कोरो मे बसा ले, बना प्रित का स्वच्छ अंजन। […]

अब तो तुम मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो, मोहब्बत का सफर नये साल पे छोड़ दो ! आने लगी है प्यार की खुश्बू मेरे शर्ट से , जो मुझसे न हो उस सवाल पे […]

नव वर्ष आने को है, कुछ भुलाने को है कुछ याद दिलाने को है, सच कहूँ तो बहुत कुछ सिखाने को है, छुप गई थीं जो बादल के पीछे कहीँ, उन उम्मीदों से पर्दा हटाने […]

धधकते लावा है मेरे सीने मे, जिसमे सेक रही हो रोटी कई महीने से। क्यॉ अब तक पकी नही ,तेरी तंदुरी, क्यॉ बाकी है अब भी ……, हवस की चाह तक पहुचने की दुरी। छोड […]

गुजं उठी चहू दिश नव वर्ष की नव शहनाई। करवट बदलती आसमां पे छाई, नव किरण लै पुरवाई आई। उमंगों भरा उत्सव गीत आज, चहकती चहचहाती चिडि़यों ने गाई। नव वर्ष देख बागों की, खिल […]

ग़ज़ल कुछ एेसा नया साल हो। अपने आप मे बेमिशाल हो। महगी थी यह वर्ष बीत गई, कुछ सस्ता नया साल हो। कुछ तो यादें रहेंगें नये नये, कुछ सपनों का उडता गुलाल हो। नई […]

बिगड़ना भी न इस कदर चाहिये, खुद को परखने की बस नजर चाहिये.. पन्ने अखबार के बेसब्री से बदल डाले, सनसनी सी कोई खबर – चाहिये.. छोटे से घर में क्यो इश्क पनपता नही, बड़ा […]

मेरे साजन तुम्हारा अभिनन्दन ————————————– मेरा सजने को है जीवन–आँगन मेरे साजन तुम्हारा अभिनन्दन… भाव–विभोर मेरे नैनन में स्वप्न ने ली अँगड़ाई है- जो लिखी विधाता के.हाथों– उस परम्परा की अगुवाई है खिलने वाला है […]

तेरी आरजू मुझे सोने नहीं देती! तेरे सिवा गैर का होने नहीं देती! धड़कनों में दौड़ती है तेरी तमन्ना, तेरे प्यार को कभी खोने नहीं देती! #महादेव_की_मुक्तक_रचनाऐं

तेरी कभी दिल से ख्वाहिश नहीं जाती! तेरे ख्यालों की नुमाइश नहीं जाती! जाती नहीं हैं यादें मेरे जिगर से, तेरे दर्द की पैदाइश नहीं जाती! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

हम सभी मरते हैं लेकिन जीते नहीं सभी! जाम को हाथों में लेकर पीते नहीं सभी! हर रोज ढूंढ लेते हैं यादों में दर्द को, अपने जिगर के जख्मों को सीते नहीं सभी! मुक्तककार – […]