जो चलता है हरदम, सत्य पथ पर, उसे किसकी परवाह, क्यों हो डर। दूजे की उन्नति पर, प्रसन्न जो, वही दिशा देता है, जमाने को। बेकार में निराश न हुआ कीजिये, तुम दुआ दीजिये बस, […]

***** हास्य रचना***** ************************ हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी, वर्ष के अंतिम दिनों में ही सही बच्चों की पिकनिक का कार्यक्रम बनाया है आप सोच रहे होंगे, ऐसे माहौल में ?? हमने सोचा……….. […]

25 दिसंबर रात 12:00 बजे, ईसा मसीह का जन्म दिवस है 25 दिसंबर है आज क्रिसमस दिवस है मान्यता है कि….. सांता क्लॉज़ आता है, बच्चों के लिए उपहार लाता है क्रिसमस ट्री सजाते हैं […]

मन तुम्हारा हो गया यह तन तुम्हारा हो गया मन की पर्तों में जो गहरे दर्द बोये थे कभी तेरा निश्छल प्रेम उन जख्मों का मरहम हो गया…. तुम धूप-सी लगती रही मैं नीर-सा बहता […]

गांव छूट गया मैं शहर में आ गया याद छूटी ही नही मन गांव में ही रह गया, तन शहर में आ गया। वो खेतों की हरियाली, चिड़ियों की चहक, झींगुरों का संगीत, सावन के […]

हे पयस्विनी ! तृप्त कर दे अपने निर्मल दुग्ध से दूर कर दे पाप सारे पंचगव्य से बुद्धि के शुद्ध कर दे प्रकृति सारी अपने सुंदर चरण से तेरी पूजा से मिले वह फल जो […]

हे तरंगों ! सज के निकलो भेदना तुमको हृदय है रोंकना तुमको है पथ में भटकते राही जो हैं राह दिखलानी उन्हे है जो बिछड़कर स्वयं से खो गये फिर ना मिले जोड़कर उनको स्वयं […]

खिल रही है धूप दिन में तो जरा राहत सी है, रात काटूं किस तरह से भीति की आहट सी है। आपको मौसम सुहाना लग रहा होगा भले ही पर मेरे मन की उमंगें आज […]

किसान दिवस स्पेशल:- ********************* २३ दिसम्बर को हर वर्ष किसान दिवस मनाया जाता है मीठी-मीठी बातें कर हम किसानों को फुसलाया जाता है बैठा है दिल्ली में किसान मांगे अपने हक का मान पर सरकार […]

लब खामोश हों फिर भी बहुत कुछ कह जाते हैं आँखें नम हों फिर भी हम मुस्कुरा जाते हैं कोई नहीं समझता तन्हा दिल के गमों को चीखकर आह निकले तो जमाना तमाशबीन ही समझता […]

परिश्रम पथ पर कष्ट हैं, उनसे नहीं डरना तुम्हें, कंटकों को रौंधना है, लक्ष्य पाना है तुम्हें। विघ्न-बाधाएं अनेकों राह में आती रहेंगी, तोड़ने उत्साह को कुछ अड़चनें आती रहेंगी। कर निरुत्साहित तुम्हें निज मार्ग […]

मै उनके गली में दो गज़ ज़मीन मांगी एक आशियाना बनाने को उसने इतनी बड़ी शर्त रखी कि , मैं दंग रह गया सोचने लगा मेरी इतनी औकात कहाँ जो उनकी ख्वाईश को हम पुरा […]

कई वर्षों की प्रतीक्षा के बाद, जब शबरी के आश्रम आए श्री राम शबरी ने कहा श्रीराम से, आए हो तुम तो निज काम से रावण का वध ना करना होता तो तुम इस वन […]

हर अंधेरे को एक सवेरा मिलता है हर कांटो के ताज पर फुल खिलता है। फिक्र क्यूं करना समस्याओ की हे मनूष्य? हर काले बादल को एक रोशनी का किनारा मिलता है। संघर्ष किए बिना […]

सोचो कुछ दिन के लिए इंटरनेट बंद हो जाए तो.. क्या करेंगे हम क्या करोगे तुम, कविता प्रकाशित नहीं कर पाएंगे सावन पर हम घर के कामों में ही उलझा रहेगा तन लेकिन फिर भी […]

जिंदगी की चली दौड़ है भागने में लगे आप-हम प्यार करने की फुर्सत नहीं है रोटियां खोजनी हैं जरूरी। पालना जिसको परिवार है उसको कैसे भी करके स्वयं को काम में है खपाना, कमाना रात-दिन […]

कृष्णा जी की प्यारी ,राधा न्यारी बसो मोरे मन मन्दिर बिहारी,संग वृषभानु दुलारी तुम बिन कोई ना ठौर हमारी, जाऊँ बलिहारी पल पल याद करूँ त्रिपुरारी, आऐ शरण तिहारी कृष्णा जी की प्यारी, राधा न्यारी […]

गीत – वो मुस्कुरा रहे है | दिल तोड़कर है मेरा नाजो अदा वो मुस्कुरा रहे है | गिरा कर है घर मेरा अपना घर वो बसा रहे है | बड़ा ही हसीन गुल था […]

अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करने आए हैं हम नौजवान देख रहा नतमस्तक होकर अपनी  दिलेरी आसमान भारत के लाडलें हम मातृभूमि पर प्राण चढ़ाएं तन मन धन से हम सब जग जननी का मान बढ़ाएं कण-कण […]

नदियों में गंगा की, ध्वज में तिरंगा की , बात ही कुछ और है फलों में आम की, देवताओं में श्याम की , बात ही कुछ और है शादी में कार्ट की, फेक्लटी में आर्ट […]

बनवारी नया नया थानेदार बना था। गाँव में हमेशा छाती तान कर चला करता था। गाँव के लोग उन्हें काफी मान सम्मान दिया करते थे। बनवारी के चौबीस की छाती छत्तीस की तब होती थी […]

मौन का मतलब समझते हो पथिक? यह दवा है दर्द की जो दर्द को ज्यादा चढ़ाकर कम किया करती है मन का। आप तो बस खो गए मन खोजता ही रह गया आपका चेहरा नयन […]

जय शिवशंकर गौरीशंकर पार्वतीशिव हरे-हरे (2) रामसखा प्रभु राम के स्वामी, विष्णुवल्लभ भोलेनाथ । जय शिवशंकर गौरीशंकर, पार्वतीशिव हरे-हरे (2) ।।1।। कैलाशपति प्रभु औढ़रदानी, नीलकंठ तुम सर्व दुखभंजन । दाता तुम्हीं हो तुम्ही विधाता, तुम […]

कहते हो मैं मर्द हूँ और औरत पर हाथ उठाते हो मर्जी हो या ना हो जबरन बातें मनवाते हो कभी जलाते हाथ तो कभी फेंकते एसिड हो सीना तान के फिर तुम मर्द कहाये […]

हे स्वर्णरश्मि ! हे दिनकर छवि ! विलम्ब न कर आजा झटपट निकला जाये मेरा दमखम प्रभु निवेदन है तुमसे विनम्र कर जोड़ खड़ा देखो मानव संकुचित है प्रकृति का हर अंग-अंग अविराम पड़े कोहरे […]

सराफत है हमारी मज़बूरी का मत नाम दो जहाँ सिर्फ तुमसे चलता नहीं यह अच्छे-से जान लो।। हैं बहुत से लोग जिनका तुमसे होगा पुराना वास्ता उनकी चाहतें तुमसे जुङी हो तुम तक जाता हो […]

प्यार न सही प्यार के बोल क्यूँ नहीं चाँद अपना न सही चाँदनी के हकदार क्यूँ नहीं ।। दूर बहुत हो तुम जिन्दगी में संग नहीं साथ हो यह कम अनमोल तो नहीं ।।

साँस से भाप उड़ती रही, आपको भी दुराशय से देखा यह नजर पाप करती रही। मन किसी और पथ पर रमा था जीभ कर करके दिखावा निरन्तर नाम का जाप करती रही। पुष्प सुन्दर खिला […]

*****कल रात***** शनि का बृहस्पति से हुआ मिलन, चार सौ वर्षों के बाद, दो दोस्तों की दूरी मिटी, दोनों ने किया आलिंगन चार सौ वर्षों के बाद ख़ुश हो रहे हैं तारे सभी, ख़ुश हो […]

“चिता के फूल” **************** मेरी नाकामयाबी पर हँसकर वो चल दिये, मेरे ऊपर लानत के हजार कथन वह कह गये… हम भी चल दिये… इस जहान से नाउम्मीदी का एक बोझ लेकर, मेरी अर्थी के […]

आज का दिन पावन दिन है ८०० वर्षों बाद ऐसा संयोग बना शनि और वृहस्पति देव जी आये एक-दूजे के सन्निकट इतिहास में यह पावन दिन सदा के लिए दर्ज हो गया शनि और वृहस्पति […]

प्यार के धागों से रिश्तो को सिल रहा हूं बड़ा हूं फिर भी झुक कर मिल रहा हूं सुना है प्यार में ताकत बहुत होती है हर बिगड़े काम आसान बना देती है उम्मीद है, […]

जिन्दगी में कमाते रहते हैं खूब रूतबा, व खूब पैसे हम जमा पूँजी को गिनते रहते हैं जमा में और जमा करते हैं। जोड़ने का नहीं है अन्त कोई, लालसा का नहीं है अन्त कोई, […]

बीते कल की परछाई है और तुम्हारी यादें हैं मैं हूँ, मेरी तन्हाई है और तुम्हारी यादें हैं..!! सर्द अंधेरी इन रातों में थोड़ी सी मदहोशी है टूटी सी इक अंगड़ाई है और तुम्हारी यादें […]

चाहोगे जीतना तभी जीत पाओगे मानोगे अपने हैं तभी अपनाओगे लोभ और ईर्ष्या के दलदल से जब तक निकलने की सोच ना होगी मन के रावण को तुम कैसे जला पाओगे। वीरेंद्र सेन प्रयागराज

तुम्हारे अधरों से छू कर, मेरे गीतों का सम्मान हुआ तुम पंख पसारे उड़ो नील गगन में, दिल से निकली है यह दुआ तुम्हें यह सारा जग जाने, तुम्हारा सब लोहा मानें जो तुम चाहो […]

यदि होती हमारी अपनी नारी तो क्या दुर्दशा होती हमारी देखती ये दुनिया सारी उसके कारण चढ जाती इतनी उधारी जिसे चुकाने में बिक जाती जमीन जायदाद सारी फिर जब हम गलियों से निकलते तो […]

सतत संग्राम ज़िन्दगी का अंग बन गए है मज़दूर हू मजबूर नहीं लॉकडाउन का बहाना दे के तुमने मेरी नौकरी छीनी भूखे हम है तोह भोजन छिना भी जा सकता है किसान हू मेरे उत्पाद […]

जब कदम उठे मंज़िल की ओर, महकने लगी दिशाएं चहुं ओर आशीष मिले हैं अपनों से, कानों में गूंजा विजय श्री का शोर वर्षों की मेहनत रंग लाई, उल्लास के क्षण संग लाई अब ना […]

बीते पल क्यूं करें विकल, ये पल तो एक धरोहर हैं उन हसीन यादों को, राही दिल में लेकर चल फिर बीते पल ना करें विकल पायल सी झंकार करे मन, हर्षित हो हम रहें […]

जी रहे हैं स्वयं हम दिवास्वप्न में, खुद को भूले हुए हैं बड़े मग्न हैं। पीठ संसार के दर्द से फेरकर, आँख सबसे चुराकर बड़े मग्न हैं। ओढ़ कर तीन कम्बल पसीना हुआ, उस तरफ […]

गीत- बेवफा हो सकता नही | इश्क हो और रुसवाई न मिले हो सकता नहीं | मेरे बिन तू और तेरे बिन मै रह सकता नही | तेरी खामोसिया कहती है बहुत कुछ मगर | […]

माटी की मूरत होते हैं बच्चे जैसा बनाओगे वैसे बन जाएंगे चाहो तो उनको गांधी बना दो जो सत्य की राह का पथिक बनेगा चाहो तो उसको भगत सिंह बुलाओ वो देश की खातिर मर […]

गीत जिन पर लिखे वे पुराने हुए उनको देखे बिना भी जमाने हुए, अब सफर में जुड़े मित्र हैं सब नए वो पुराने न जाने कहाँ गुम हुए। बीतते रह गए दिन रही आस बस […]

मुझे ठुकरा कर काश तुम अपना जीवन संवार लेते। तेरी बेवफ़ाई को ही हम अनमोल तोहफ़ा समझ लेते।। मुझे यह दु:ख नहीं कि तुम मेरे हमसफ़र नहीं बन पाए। दु:ख तो इस बात की है […]

**हास्य रचना** *********************** सुबह-सुबह उठो नहीं, रजाई में पड़े रहो सूर्य की लाली हो या पापा की गाली हो, तुम निडर उठो नहीं, तुम निडर डटो वहीं बेशर्म बन के अड़े रहो, रजाई में पड़े […]

ठिठुरता जीवन कांपता है मन सर्दियों से डरता है ये मन चिपक रहा बेटा जब माँ से कितना बेबस होगा वह तन हड्डी-हड्डी कांप रही है रोम-रोम पिघलाता यौवन कंबल-चादर फटी पुरानी सिर ओढ़े तो […]