आखिरकार बुलंदियों का आसमां पा ही लिया… आखिरकार आसमां से एक सितारा तोड़ ही लिया… बिछ गये रंगीन पंखों की तरह ख्वाब मेरे, आखिरकार लहरों ने किनारा पा ही लिया…

शिकायत किससे करें ! जब अपने ही दामन को दागदार कर देते हैं उम्मीद किससे करें जब अपने ही साथ छोंड़ देते हैं जो कभी हमारे हो नहीं सकते ! आखिर ये नैन उन्हीं को […]

किस्मत को आजमाकर एक ख्वाब जिया है मैंने आँसुओं को शराब- सा पिया है मैंने, यहाँ से दूर चला जाऊंगा मैं ये फैसला अब किया है मैंने…

जब तक खुले थे विद्यालय दिन में खाने को मिलता था, पानी की दाल भले ही थी पर कुछ जीने को मिलता था। कोविड़ क्या आया, क्या बोलें स्कूल के पट सब बंद हुए, थोड़ा […]

यह जो नाजुक सा दौर है आहिस्ता आहिस्ता खत्म हो जाएगा बस उम्मीदों का दीपक तुम यूं ही आगे भी जलाए रखना। वीरेंद्र सेन प्रयागराज

भोग विलास के लिबास पहनकर कब तक खुद से प्यार करोगे काम क्रोध ईर्ष्या को त्यागो जीवन का भव पार करोगे माया मोह के इम्तहान में जब तक सफल ना होगे तुम लोगों के दिल […]

लम्हों ने खता की है सजा हमको मिल रही है ये मौसम की बेरुखी है खिजां हमको मिल रही है सोचा था लौटकर फिर ना आएंगे तेरे दर पर बैठे हैं तेरी महफिल में खुद […]

कूड़े के ढेरों में कुछ तो मिलेगा, जरा सा खुशी का सहारा मिलेगा। नन्हें हैं वे, रात भर सोचते हैं, प्रातः को कूड़े में पथ ढूंढते हैं। बहुत खुश हुए जब मिली एक कॉपी आधी […]

मेरी सांसों पे तेरा अधिकार हो गया। लो सजना मुझे तुमसे प्यार हो गया।। ना सूरत पसन्द, ना शोहरत पसन्द तेरी चाहत पे ऐसा इकरार हो गया। लो सजना मुझे तुमसे प्यार हो गया।। मुझे […]

ले चल साकी! मुझे दरिया के पास मेरा मन बहुत प्यासा है मचल पड़ता है ये कांच का दिल जब वो मेरे करीब आता है बोल दो उसे- “मैं उसका नहीं किसी और का हूँ” […]

नदी की बहती धारा है मोहब्बत सुदूर आकाश का ,एक सितारा है मोहब्बत सागर की गहराई सी है मोहब्बत निर्जन वनों की तन्हाई सी है मोहब्बत ख्वाहिशों की महफिलों का ,ठहरा पल है मोहब्बत शाख […]

ठंड में ये भूख भी ज्यादा सताती है, है नहीं चर्बी मगर हड्डी हिलाती है। भाग पहुँचा रोज खाता हूँ मगर ये भूख भी लौट कर फिर से मेरा मन कुलबुलाती है। सोचता हूँ हम […]

जाने कहाँ विलीन हो जाते हैं, कल तक जो बोलते थे, मुस्कुराते थे अपनी भावना को व्यक्त करते थे वे, जाने क्यों माटी हो जाते हैं। शून्य हो जाते हैं। न कोई अहसास न कोई […]

पहली प्यार की पहली निशानी । संभाल कर रखना ऐ मेरी रानी।। यदि कल हम मिले या न मिले। फिर भी गुलशन में गुल खिले।। मिलन पे मौसम भी बेमिसाल है। क्योंकि मुझे तुम से […]

“राजा दशरथ और श्रवण कुमार” ************************** उठा लिया एक भारी बोझ-सा कंधे पर अंधे माँ-बाप को तीर्थ यात्रा कराई श्रवण कुमार सा हो लाल मेरा यही दुआ करे हर माई’ राजा दशरथ गये आखेट को […]

आपकी किरणें ओ सूरज! सृष्टि को वरदान हैं, मूल हैं प्रकृति का बीज में ये प्राण हैं। पेड़-पौधे , जीव सारे आपके होने से हैं आपकी प्रभा के आगे दीप सब बौने से हैं। पालती […]

आज कोई गीत नहीं है, गीता के, गीतों के गुलदस्ते में रीता है गुलदस्ता मेरा, रीता ही लेकर आई हूं कुछ अपने मन की कहने, कुछ आपके मन की सुनने आई हूं आज जल बहुत […]

भोजपुरी बिरह गीत- ये निरमोही सइया | जड़वा के रतिया ननदी कटले ना कटात | ये निरमोही सइया अँखिया नींदियों ना आत | कराई के बिदाइ हमके घरवा बईठवला | जबसे तू गईला संदेशवो ना […]

कृष्ण ने बाँसुरी बजायी, राधा के मन में प्रीत जगी । सारी दुनिया तम में है सोई, राधा रानी प्रेम-मगन है खोई ।। (मग्न) बोलो राधे-कृष्णा, राधे-कृष्णा, कृष्णा, कृष्णा, राधे-राधे, बोलो राधे-कृष्णा, राधे-कृष्णा, कृष्णा-कृष्णा, राधे-राधे […]

अचानक दस साल के एक फुटपाथी बच्चे के कानों में किसी औरत की चीख सुनाई पड़ी। वह अपनी झोंपड़ी के बाहर आया तो देखा एक औरत खून से लथपथ बीच सड़क पर तड़प रही थी। […]

अक्सर आगे बढ़ने पर रुकावटें आती हैं मंजिल बहुत दूर बहुत दूर नजर आती है पर किया भी क्या जाये जब सपनें हों इतने बड़े कि सोने ना दें जागने पर भी चैन से रहने […]

मुह्हबत में तुम्हे आशु बहाना तक नहीं आया बनारस में रहे और पान खाना तक नहीं आया ये कैसे राश्ते से लेकर चले आये तुम मुझको कहा का मयकदा एक चाय खाना तक नहीं आया […]

तेरी परछाई को देख लेता हूँ चेहरे को देखने का मौका कहाँ मिलता। ज़िन्दगी के इस खेल में दौड़-दौड़ दौड़ लेता हूँ चौका कहाँ मिलता।।

माता-पिता अकेले छोड़े हैं गांव में, कोई नहीं सहारा रोते हैं गांव में। तकलीफ और दुःख में पानी भी पूछने को, कोई नहीं है संगी जीवन है डूबने को। ताकत नहीं रही अब हाथों में […]

जिन्हें हम दिल में रखते हैं उसे क्यूँ बता नहीं पाते हमें स्नेह है कितना कभी उनसे जता नहीं पाते । उम्मीदों के बीज मन में पाल कर क्यूँ रखते वजूद नहीं जिनका उन्हीं से […]

पत्थर हूँ मैं जिस पर घिस कर चन्दन माथे पर लगाने लायक होता है, शीतलता देता है, खुशबू बिखेरता है। थोड़ा सा मैं भी घिसता हूँ चन्दन के साथ, लेकिन आपको अहसास तक नहीं होने […]

हर एक कविता लिखता हूँ जो भी लक्षित नहीं कोई स्वयं लक्ष्य हूँ मैं। किसी से नहीं है अधिक प्यार मुझको किसी से नहीं कोई नफरत है मन में। स्वयं की खुशी को लिखता हूँ […]

भोजपुरी देवी पचरा गीत (कहरवा धुन) – रीझेली भवानी | लाल लाल अड़हुल फुलवा टहकत डार | ओहि फुलवा रीझेली भवानी | अड़हुलवा सजल काली दरबार | ओहि फुलवा रीझेली भवानी | हथवा कटार माई […]

पर्यावरण के असंतुलन की तस्वीर हर ओर दिखने लगी है जिंदगी जीने की एक नई परिभाषा चहुं ओर लिखने लगी है विकट गर्मी का परिणाम दिख रहा है सूख रहे तालाब पेड़ कट कट बिक […]

*हाइकु विधा* ************** ऐ नींद ! बता तेरी क्या दुश्मनी है क्यों तू मेरे पास नहीं आती है डूबते हैं सब सपनों में क्यों तू मुझसे अदावत निभाती है ?? ना परेशान होती हूँ मैं […]

सन इकहत्तर के जंगी जवानों, आपको हम सभी का नमन, आप जांबाज थे हिन्द के आपको हम सभी का नमन। ऐसी ताकत दिखाई थी सच में देखता रह गया था वो दुश्मन, धूल ऐसी चटाई […]

“गुलमोहर का पुष्प” अति मनमोहक है सुगंध इसकी अद्धभुत है इसकी जड़ें मिट्टी को चारों ओर से जकड़े हैं मानों जैसे हाथों में वक्त पकड़े हैं रात्रि की उनींदी आँखों में कुछ गहरे सपने हैं […]

कभी-कभी, छोटी-छोटी खुशियां भी दे जाती उल्लास के पल कभी कभी छोटे-छोटे दुख भी, कर जाते दिल को घायल क्या छोटा है क्या बड़ा ये हम ही तो तय करते हैं कभी किसी की एक […]

आज विजय दिवस है 1971 में भारत-पाक युद्ध में, भारत को मिली जीत का उत्सव है आज विजय दिवस है राष्ट्रीय समर-स्मारक पर, अखंड ज्योति जलती है दिल्ली में, उसी ज्योति से अग्नि लेकर, प्रज्वलित […]

बर्फ के फ़ाहे गिरे सारी रात, चिपके रहे टहनियों के साथ सूर्य-रश्मि का मिलते ही ताप, मोती बन बूंद-बूंद बिखर गए, हिम के दूधिया से श्वेत कण धूप में और भी निखर गए कांप रहा […]

गीत ठंडक के गुनगुनाता हूँ, शूल सी चुभ रही हवाओं में खुद ही खुद दांत कटकटाता हूँ, ये जो संगीत है स्वयं उपजा, इसकी धुन में रहता हूँ जिगर को नचाता हूँ। राग में रागिनी […]

कितना अच्छा होता हर हिंदू मुस्लिम बन जाता हर मुस्लिम हिंदू बन जाता हर घर में अल्लाह आ जाते हर घर में आ जाते राम कितना अच्छा होता हर गरीब अमीर बन जाता हर अमीर […]

ये कैसी बेबसी है नाराज़गी को ढो रहे हैं अक्षमता को आकने के बदले दूसरे की कमियों को गिन रहे हैं । ये दिन है कैसा ना उम्मीदों का आसिया है ख़्वाहिशों के जलने की […]

हां दोस्ती है, इन दिनों रजाई से उसको ओढ़े बिना नहीं कटते सुनहरे पल पहाड़ी रातों के। खुद की तारीफ के न पुल बांधो हम तो कायल रहे हैं वैसे ही तुम्हारी नेह भरी बातों […]

ऐसी क्या बात है सखी, क्या हो तुम मुझसे नाराज सखी करके चुनरी का ओला सखी, क्यूं कर दिया अबोला सखी ना कोई संदेश ना दूरभाष सखी, आती है तेरी बहुत याद सखी क्या मुझसे […]