या रब्ब दुश्मनों को सलामत रखे सदा

या रब्ब दुश्मनों को सलामत रखे सदा
न जाने कब आरज़ू क़त्ल की मचल जाये
राजेश’अरमान’

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कभी कभी सोचती हूँ अगर इस पल मेरी साँसें थम जाये और इश्वर मुझसे ये कहने आये मांगो जो माँगना हो कोई एक अधूरी इच्छा…

हम सब

आओ इस कल्पना की दुनिया में खो जाये हम सब एक हो जाये ये जात पात सब मिट जाये आओ सब अपने दुःख सुख में…

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