नींद आये अगर आपकी आंख में तब समझना कि संतोष जीवन में है, नींद उड़ जाये तब सोचना आप यह, मन के भीतर भरा कोई बोझ है, या किसी बात भर गया सोच है, कहीं […]

कौन सुनाए गीत मुझे मन भाए बहुत संगीत। गुन गुन करते भँवरे ने बोला चूँ चूँ करती चिड़िया ने चहका, मन के भीतर पुष्प सा महका, जब आया मेरा मीत, मुझे मन भाये बहुत संगीत […]

ठेस न दे मुझे आली तेरी यह रंग भरी पिचकारी। श्वेत पहनकर, निकला था घर से तूने निशाना दे मारी, रंग भरी पिचकारी। मन गीला कर, तन गीला कर वसन सभी रंगों से तर कर […]

गाऊँ गीत, भरूँ रंग मन में होली मनाऊँ, प्रीतम संग में। लाल रंगाऊँ प्रीति की चोली पीत-हरे से खेल लूँ होली। रंग उड़ाओ मारो न बोली आओ ना हम संग खेलो होली। तन मन रंगों […]

वो दिन भर मेहनत करते हैं, रात को सड़कों पर शयन करते हैं। ऊपर से पाला पड़ता है, नीचे से शीत लगती है, मेहनतकश की जिंदगी, कठिन गीत लिखती है। सपने में गुनगुनाता है, रोकर […]

ऐसी सुना दे पंक्तियाँ जो मधुर रस सींच दें, रंग के त्यौहार में रंगीनियों को सींच दें। अश्क सारे सूख जायें होंठ गीले से रहें, नैन में काजल लगा हो खूब नीले से लगें। गाल […]

सामने बोल भी नहीं पाये आँख हम खोल भी नहीं पाये था वजन बात में भरा कितना उसको हम तोल भी नहीं पाये। आँख चुँधिया गई थी जब अपनी धूल औरों में झोंक कर आये, […]

जल बरसा आकाश से, तृप्त हो गई भूमि, पौधे फिर से जी उठे, हरी हो गई भूमि। हरी हो गई भूमि, आज रौनक प्यारी लिख, उग आई खुशहाली लेकर सुन्दर नख-शिख। कहे लेखनी रंग भरे […]

गरम चाय पीने से ताजगी आती है, तुम्हारे व्यक्तित्व की सादगी भाती है। सवेरा भी जरूर होता है राह दिखाने को अंधेरा भी मिटता है, रात भी जाती है। मेहनत का फल जरूर मिलता है, […]

मुस्कान आपकी खिले फूल जैसी, भुलाने सक्षम है गम हमारे। वाणी में इतना मीठा भरा है, विरोधी भी हो जाते हैं तुम्हारे। चमकता हुआ बल्ब बोलूँ न बोलूँ, मगर इस अंधेरे में हो तुम दुलारे। […]

कल कल कल कल नदिया बहती है, साफ स्वच्छ है पानी, जी करता है खूब नहा लूँ, मगर डर रही है रानी, मन की रानी का डरना मेरे मन में करता हैरानी। पूछा तो कहती […]

यादें ही बस साथ हैं, जीवन में अवशेष, बाकी सब मिटता रहा, नहीं बचा कुछ शेष, नहीं बचा कुछ शेष, उग रहे सूख रहे सब, नाशवान है जिन्दगी, जाने रुक जाए कब, कहे लेखनी करें, […]

झूठी सीढ़ी मत बना, मंजिल चढ़ने हेतु, खाली ऐसे बना मत तू कागज के सेतु, तू कागज के सेतु, से स्वयं से मत कर छल, ऐसे कैसे पार, होगा लक्ष्य का पथ कल, कहे लेखनी […]

रंग भरी है जिन्दगी, रंगों में रह मस्त, कष्ट से भी खोज खुशी, कभी न होगा पस्त, कभी न होगा पस्त, समय रंगीन बनेगा, मन में खिलता रंग, तुझे प्रवीण करेगा, कहे सतीश होली में […]

अपनी राहों को पकड़, चल मंजिल की ओर, पकड़े रख मजबूत हो, सच्चाई की डोर, सच्चाई की डोर, तुझे ऊंचाई देगी, नहीं हारने देगी जीत कदम चूमेगी, कहे लेखनी छोड़, तुझे क्यों चिंता रखनी, सच्चा […]

सत्ता में जाकर जिसे, याद रहे जन दर्द, वही मिटा सकता यहाँ, धूल और सब गर्द, धूल और सब गर्द, पड़ी हो जो विकास में, पहले वो हो साफ, रिआया इसी आस में, कहे लेखनी […]

सच्चाई की जीत है, सच्ची बातें बोल, पाप न रख मन में कभी, मन की आंखें खोल। मन की आंखें खोल, हो सके तो अच्छा कर, अच्छा होगा सदा, सदा सच की चर्चा कर कहे […]

अंक गणित समझे बिना, लगा लिए थे अंक, धीरे-धीरे उग गए, उल्टे सीधे पंख। उल्टे-सीधे पंख, मार्ग विचलित करने को। हार्मोन भी स्रवित थे भ्रमित करने को, बोले कलम यदि हो, कोई राजा या रंक, […]

बहुत हो चुकी नफरत की आग जल रहे हैं दिल के जंगल मुहोब्बत कर चुके हैं खाक, अब नहीं रही वैसी धाक जो एक नजर पर चुरा ले जाती थी दिल, अब तो नजरें मिला […]

रात है लेकिन न घबरा, कल सुबह निश्चित उगेगी, कर्म के बीजों को बो ले, मंजिल तुझे निश्चित मिलेगी । भाग्य पर तू छोड़ मत दे, प्रारब्ध पर निर्भर न रह, हारने के भाव मत […]

खूबसूरत शाम चारों ओर चमकते बल्ब लग रहे हैं ऐसे किसी ने काली चुनरी में सितारे जड़ दिए हों जैसे। चमचम चमकता शहर सांझ का पहर देख ले जी भर कर विलंब न कर। ये […]

बेटी घर की शान है, बेटी है अभिमान, बेटी का सम्मान कर, कहना मेरा मान, कहना मेरा मान, उसे भी पढ़ा-लिखा तू, अवसर देकर आज, उसे भी खूब बढ़ा तू, कहे लेखनी मान, उसे खुशियों […]

हो गया है उजाला अब मुझे भान हुआ जब खुली आँख तब सुबह का ज्ञान हुआ। इन चहकते हुए उड़गनों ने बताया, जाग जा अब तो तूने अंधेरा है बिताया, हो गई है सुबह साफ […]

अंधेरे का गीत लिखूं या सुबह की आस लिखूं नींद आ-जा रही है, और कुछ खास लिखूं। स्वप्न हैं पास खड़े इंतजार करते हैं, बन्द आँखों में ही, वे राज करते हैं। बात गम की […]

पानी तूने धो दिये, बड़े बड़ों के दाग, तब भी हो पाया नहीं, मेरा मन बेदाग, मेरा मन बेदाग, नहीं कुछ साफ भाव हैं, जूते भीतर कीच, सने गंदले पांव हैं, कहे लेखनी खूब, रही […]

मन अस्थिर करता मुझे, कैसे हो संतोष, खाली खाली आ रहा, खुद ही खुद पर रोष, खुद ही खुद पर रोष, नहीं संतोष मुझे है, सौ ठोकर के बाद, नहीं फिर होश मुझे है, कहे […]

घिस-घिस कर चप्पल बना, जीवन का संघर्ष, खींच रहा पीछे मुझे, कैसे हो उत्कर्ष, कैसे हो उत्कर्ष, चुभ रहे कंटक पथ में, तुझे कहाँ महसूस, बात तू बैठा रथ में, कहे लेखनी चली, जिन्दगी यूँ […]

झड़ी लगा दूँगा यहाँ, लिख कर तुझ पर मीत, प्यार मुहब्बत ही नहीं, दर्द भरे भी गीत, दर्द भरे भी गीत, तुझे गाकर कह दूँगा, फूल तोड़कर आज, यहाँ खुशबू ला दूँगा। कहे लेखनी नई […]

खोज रहा है आदमी, अपने को ही आज, मगर नहीं हो पा रहा, होने का अहसास, होने का अहसास, स्वयं मानव होने का, लोभ लालसा हाय बनी कारण खोने का, कहे कलम बेचैन मत रह […]

नारी ही तो मूल है, जीवन का आधार, नारी के बिन शून्य है, यह सारा संसार, यह सारा संसार, रचाया नारी ने ही, प्यार, मुहब्बत दया, उपजती नारी से ही, कहे लेखनी समझ, दूर कर […]

चुप रहना आता नहीं, बोलूँ कैसे बात, चावल पककर बन गया, गीला गीला भात, गीला गीला भात, हर तरफ पानी पानी, सूखे सूखे होंठ, और मन में नादानी, कहे लेखनी बात समझ मन तू जा […]

तीर न मारो बोल कर, उलाहना के बोल, भीतर बैठा दर्द है, देखो आंखें खोल, देखो आंखें खोल, सत्य स्वीकार करो तुम चुभने वाली बात न करके प्यार करो तुम, कहे लेखनी बोल में उपजे […]

खाली क्यों हो सोचते, उल्टी बातें आप। चाहत को नफरत समझ, क्यों लेते हो पाप, क्यों लेते हो पाप, मुहब्बत पुण्य काम है, जो रखता है नेह, वही सच में महान है। कहे लेखनी आप, […]

काँव काँव मत करना कौवे आँगन के पेड़ों में बैठ तेरा झूठ समझता हूं मैं सच में है भीतर तक पैठ। खाली-मूली मुझे ठगाकर इंतज़ार करवाता है, आता कोई नहीं कभी तू बस आंखें भरवाता […]

मनुष्य हो तुम मनुष्यता सदैव पास रखो पाशविक वृत्तियों को पास आने न दो। दया का भाव रखो प्रेम की चाह रखो ठेस दूँ दूसरे को भाव आने न दो। दया पहचान है कि आप […]

हलधर धरने पर रहा, आस लगाये बैठ। मानेगी सरकार कब, सोच रहा है बैठ। सोच रहा है बैठ, मांग पूरी होगी कब। अकड़ ठंड से गया, ताप सब छीन गया अब। कहे लेखनी आज, व्यथित […]

सच की राह चले चलो, चाहे हो व्यवधान, सच को ही सब ओर से, मिलता है सम्मान। मिलता है सम्मान, उसे जो सच होता है, झूठ हमेशा झूठ, बना इज्जत खोता है। कहे लेखनी मान […]

राहों में आपके कोमल सी दूब हो, पाने का हो जुनून मन में उमंग खूब हो। आ जायें जब कभी मायूसियों के दिन कुहरे के बीच भी थोड़ी सी धूप हो। मन साफ हो दिखे […]

आज छोटी बिटिया रानी एक बरस की हो गई है हाव-भाव से हमें लुभाती बड़ी सरस सी हो गई है। खुद के छोटे छोटे पांवों से कदमों को उठा रही है, मम, पप, अम्म आदि […]

इंसान तेरे रूप अनेक कोई ईमानदारी का प्रतीक कोई बेमानी की मिसाल, कोई जलता दीपक मंद करता है कोई जलाता है मशाल, कोई शांति का प्रतीक कोई करता है बवाल कोई बेशर्मी की हद पार […]

आप खो गए थे मन उद्वेलित था अब आ गए हो है प्रफुल्लित सा। नभ में सूरज उदित सा, मन है मुदित सा। आपका होना रात को चाँद सा, काजल लगी आंख सा। मगर प्रविष्टि […]

हिमखंड टूटा पानी का ऐसा प्रवाह आया वे पत्तों की तरह बह गए देखते ही देखते सैकड़ों लोग लापता हो गए। जाने कहाँ खो गए। चीत्कार- करुण-क्रन्दन से रो उठी घाटी, प्रवाह बह गया केवल […]

अनुकूल वातावरण मुश्किल से मिलता है या तो स्वयं ढलना पड़ता है या उसे अपने अनुसार ढालना पड़ता है। कर्म किए बिना कुछ नहीं होता है कर्म के बावजूद परिणाम में ईश्वर की इच्छा को […]

जिन्दगी संघर्ष है, संघर्ष कर, संघर्ष कर सोच में नेकी उगा ले हार से बिल्कुल न डर। सोच दिल से कौन है जो दर्द ने जकड़ा नहीं, कौन ऐसा है जिसे पीड़ ने पकड़ा नहीं। […]