सुगंध के लिए इत्र पास रखिये कठिन समय के लिए मित्र पास रखिये। विपत्ति में हौसला रखिये, हँसी-मजाक का भी शौक सा रखिये। दुखों को आप हल्के में रखिये अन्यथा रोज सकते में रहिए। ईश […]

आदमी आज परेशान इतना क्यों है, लुटा सा देखता अरमान क्यों है, खुद के घर में बना मेहमान क्यों है, इंसान है तो फिर बना हैवान क्यों है। धड़कता दिल बना बेजान क्यों है, जानता […]

मेरे लिखे से उजाला हो जाये कुछ भी नहीं तो उठें चिंगारिया, किसी को जिन्दगी का रास्ता मिल जाये। अंधेरे में भटकता अगर मन हो किसी का मेरी दो पंक्ति उसको रास्ता दे आये। तभी […]

अहो पत्थर! नदी से घिस- घिस रेत बनते हो, धूल बह जाती है, तुम ही तुम शेष रहते हो। नदी की नीलिमा में तुम बहुत ही श्वेत लगते हो। भवन निर्माण में तुम्हीं मजबूत बनते […]

ईंट फेंकेगा आप पर कोई आप उस ईंट को संभाल कर रखना, कभी भवन बनाओगे या कुछ सृजन करोगे, काम आयेंगी वे ईंट और पत्थर। आंख में रेत झौंके आपके अगर कोई, सच का चश्मा […]

तुम्हारी मुस्कुराहट की अजब सी बात देखी आज मैंने दर्द में डूबा हुआ मन दर्द सारा भूलकर, फूल खुशियों के उगाने को बढ़ाता है कदम। मुस्कुराहट ही बड़ी पहचान है इंसान की। जानवर हँसते नहीं […]

ईश ऐसा वर मुझे दे ईर्ष्या से दूर बैठूँ, पंक्तियाँ लिख दूँ वहाँ जिस ओर थोड़ा दर्द देखूँ। देख अनदेखा नहीं कर पाऊँ पीड़ा दूसरे की, बल्कि खुद महसूस कर पाऊँ मैं पीड़ा दूसरे की। […]

जहां नहीं संतोष मन छोड़ दीजिए राह, उलझन की हर वस्तु की छोड़ दीजिये चाह। छोड़ दीजिये चाह साथ में साथ मित्र का जिसको केवल याद रहता सौरभ इत्र का। कहे सतीश जाना, तुम दिल […]

देख रहा दर्पण मनुज करने निज पहचान, बाहर तो सब दिख गया भीतर से अंजान। भीतर से अंजान, खिली लालिमा देख कर मुस्काया मन ही मन देखा जब सुन्दर तन। कहे सतीश बाहर भीतर रह […]

बात हो रोजगार की, भरें युवा के जख्म, जगे नया उत्साह अब, नयी बजे कुछ नज्म। नयी बजे कुछ नज्म, खिले माथा यौवन का, सिंचित कर हर फूल, खिले भारत उपवन का, कहे लेखनी न्याय […]

मत भूलो सब एक हैं, क्यों रखना है भेद, मानव हैं मानव सभी, क्यों रखना संदेह। क्यों रखना संदेह, न कोई बड़ा न छोटा, भेदभाव ने मनुज कुल का गला है घौंटा। कहे सतीश सब […]

कई माह बीत गये बारिश नहीं हुई। सूखी धरा के अधर ताकते हैं नभ को। प्राणी हैं व्याकुल जल की कमी से, सब तरफ है सूखा प्यास आज सबको। पौधे झुलस कर मुरझा गए हैं, […]

बीज बोना है तुम्हें, सद्भाव का बो डालिये, साफ हो मन, साफ हो तन, मैल को धो डालिये। यूँ ही मंजिल जीत लेंगे भ्रम को मत पालिये, हो सके तो आप हृदय में मुहब्बत पालिये। […]

जाग इंसान उनकी मदद कर है सहारे की जिनको जरूरत, भूख से जो बिलखता है बचपन आगे रहकर तू उसकी मदद कर। क्या करेगा कमा करके इतना क्या करेगा जमा करके इतना, तू कमा खूब […]

होली की सबको बधाई अनेकों शुभकामनाओं के साथ। रंग भरा हो जीवन सबका खुशियां पायें आप। बधाई होली की सबको बधाई। गम का साया, पास न फटके कोई बनता काम न अटके, कदम बढ़ें निष्पाप। […]

नशा नहीं, जिन्दगी बचाओ त्यौहारों के समय इस तरह मत जीवन पर दांव लगाओ। नशा स्वयं से दूर भगाओ। झगड़े और फसादों की जड़ मद्यपान विवादों की जड़, अपनी हानि नशे से होती, इज्जत सबके […]

होली में हम रम गए पूछ न पाये बात, कैसे हो कितना लगा रंग बताओ आज। रंग बताओ आज कौन सा रंग लगा है, प्रेम और माधुर्य आज हर अंग सजा है कहे लेखनी रंग […]

होली है पावन त्यौहार उड़ रहे हैं रंग मगर यह कैसी है हुड़दंग, कई पड़े हुए हैं सड़क पर नालियों पर पीकर शराब, कर दी है उन्होंने अपने पारिवारिकजनों की खुशियाँ खराब। लगी में दौड़ा […]

सब पायें नवरंग किसी को दुख न मिले भगवान। भरपेट भोजन, वसन ढका तन, आस चढ़े परवान। किसी को दुःख न मिले भगवान। जीवन सबका खुशियों भरा हो सूखे न मन कोई, हरा ही हरा […]

चल गुजिया ही खिला दे मीठी सी बोली सुना दे समझेंगे खेल ली होली, पोत दे लालिमा रोली। भूल जा सारी शर्म पुरानी झिझक से काहे होली मनानी, आज हमें है रस्म निभानी चल गुजिया […]

पानी में भी रंग है, बेरंगा मत देख, ज्योति जगा ले नयन में, अंधियारा मत देख, अंधियारा मत देख, रोशनी खोज डाल अब, रंग खोज ले और अहमिका छोड़ डाल अब। कहे लेखनी देख, और […]

बह रही प्यार की सरिता कहे मन लिख डालूँ एक कविता सारा नेह निचोड़ दूँ इसमें खिल जाये सुन वनिता । डोर हमारी और तुम्हारी मजबूती से बंधी रहे यह गीत उगें बस, नेह भरे […]

छोड़ो बात दूजे की मनाओ अपने मन में होली, खेल सको तो खेलो हमसे मन बाहर ले आओ। बाहर-भीतर एक ही रंग हो अलग-अलग नहीं डालो। भीतर स्याह बाहर दिलकश ऐसा मुझे न बनाओ, मन […]

होली में फूल खिला दे हँसी के, होली में फूल खिला दे। प्यारे-प्यारे रंग-बिरंगे फूल ही फूल खिला दे। हँसी के— ढंग-बेढंदी हुई जिंदगानी, होली में ढंग दिला दे। हँसी के होली में फूल खिला […]

छवि तेरी मन भाये सुबह सब ओर मनोहर कोमल सी, बिखर रही है लाल अरुणिमा मिहिका बिखरी मुक्ता सी। जागूँ देखूँ स्वच्छ सुबह को त्याग अवस्था सुप्ता सी। तेरी मन भाये सुबह सब मनोहर कोमल […]

गाऊँ गीत मनाऊँ होली खुशी मनाऊँ मन ही मन रंग की रौनक जहाँ तहाँ हो खूब सजाऊँ अपना तन। लाल व पीले, हरे, गुलाबी सारे रंग उड़ाऊँ मैं, खुद का चोला खुद ही रंग लूँ […]

सुन्दर तेरी रचना अति सुन्दर तेरी रचना विधाता रंग बिरंगी सृष्टि रची, जा में नाना तरह जीवजाति बसी। नाना तरह की, विविध तरह जीवन ज्योति जगी। अति सुन्दर तेरी रचना विधाता, कल-कल करती नदिया-झरने वन-उपवन, […]

मेरे गीतों में बह आई, रंग भरी नव सरिता, खूब बहारें भरकर गाई, रंग भरी यह कविता। खूब अबीर गुलाल उड़ायें, गायें और बजायें। जीवन की सारी उलझन को, आओ दूर भगायें। खुश रहना ही […]

गाली न दे मुझे आली नहीं मारी तुझे पिचकारी मैंने मारी नहीं पिचकारी, भर कर रंग, चला कुंज गलियन, मारी नहीं पिचकारी। शायद तुझको भूल हुई है या यह मेरी राह नई है, मगर यही […]

पावक उग आ तू मेरे मन में, भस्म करूँ खामियाँ स्वयं की, एक- एक कर खोज -खोज कर दुर्बलताएँ दूर करूँ निज। बहुत हो चुका डगमग डगमग अस्थिर मन अस्थिर तन लेकर भटक रहा जो […]

लब खुलें तो सत्य बोलें अन्यथा पट बन्द हों, ईश ऐसी शक्ति देना, भाव में नव छन्द हों । याचना है ईश तुझसे, काम से मतलब मुझे हो, और राहों और बातों से नहीं मतलब […]

आ बैठ पास मेरे ओ याद! भूली बिसरी, आ अश्रु! नैन में आ या मुँह में आ जा मिश्री। बीते पलों की खुशबू तू उड़ कहाँ गई है, ओ मन की लालसा तू धुल कहाँ […]

मन बना पाहन न कारण है पता, तोय के धोए से केवल धुल गया। फिर मरुत से भाप बनकर उड़ गया, राज भीतर का वो भीतर रह गया। यामिनी भीतर ही बैठी रह गयी, दामिनी […]

आजकल सो पा रहा है वह जरा फुटपाथ पर, ठंड कम लगने लगी ठिठुरन हुई कम आजकल। बीते दिन जाड़ों में रोया रात भर सिकुड़ा सा सोया बच गया बस जैसे-तैसे सोच मन में खूब […]

बालों में लगे रबर की तरह खिंचे चले जा रहे तो तुम, खिंच रहे हो मगर बांध रहे हो सभी को एकजुट, जिससे निखर रही है चोटी, एकजुटता से ही हम छूँ सकते हैं चोटी, […]

खूब बातें हो गई हैं, अब लगो उत्थान में, देश आशा में लगा है, मत चलो अवसान में। खूब दूजे पर उछाला कीच अब रहने भी दो, एक दूजे को समन्वित बात तुम रखने भी […]

जीवन में सद्कर्म कर सकूँ, यह शक्ति तू दे मुझे, झूठ को नित करूँ उजागर, यह शक्ति तू दे मुझे। गा सकूँ खुले मन से गाने, उल्लास भाव अपना, हे ईश! मुझे वर देना तुम, […]

निद्रा में था रात भर, उठूँ धरूँ अब ध्यान, मात-पिता गुरु देव का, अभिवादन सम्मान, अभिवादन सम्मान, बड़ों का करूँ पूज लूँ, ले उनसे आशीष, राह में कदम बढ़ा लूँ। कहे कलम आशीष, एक अनमोल […]

ले खुशी के रंग सबको, रंग देना सीखिये, रंग उनका रंग अपना, मिल सके यह कीजिये। रंग मन में रंग तन में, रंग जीवन सींचिये, बेरंग जीवन जूझते , रंग उनको दीजिये। दर्द में डूबे […]

सब कुछ सिखा देगा इंटरनेट मगर संस्कार तो घर से ही सीखने होंगे, छोटे बच्चों को खेल लगाना, उनकी चाहत को पहचानना, उनकी भूख-प्यास का अहसास ये सब तो सीखने ही होंगे। बुजुर्गों का अदब, […]

खिल गई है सुबह जाग जा अब पथिक हाथ-मुँह धो ले, न कर आलस अधिक। काम पर लग गई है दुनिया चींटीं से लेकर हाथी तक अपना चुके हैं, मेहनत का पथ। उड़गन भी नित्यकर्म […]

जो दान भूखे को दे सकेगा असल में सच्चा धनी वही है, जमा किया बस जमा किया तो वो सच में कुछ भी धनी नहीं है। कमाओ लाखों करोड़ों चाहे, जरा सा उसमें से दान […]

तू रंग कैसा लगा गया है मुझ में तो मधुमास सा आ गया है। ये पीले-पीले व लाल फूलों से मेरा तन-मन सजा गया है। खिला के भीतर के फूल मेरे रंगों का उपवन सजा […]

अगर मैं रूठूँ मुझे मनाना, अगर मैं टूटूँ मुझे उठाना, सहारा मेरा बने मैं तेरा, यही तो जीवन का है फ़साना। अगर है दूरी तो पास लाना, जरा सा मनुहार से बुलाना, मीठी सी लोरी […]

जो राह सच्ची चलेगा मित्रों भले ही गाली वो लाख खाये मगर है ईश्वर का न्याय ऐसा, हमेशा सच ही सैल्यूट पाये। कभी भी जीवन में तुम किसी का बुरा न करना, बढ़े ही जाना, […]

तू टिमटिमा मत चमकते तारे बिना रुके रोशनी दिखा दे, अंधेरा घनघोर सा घिरे जब तू कर उजाला मुझे सिखा दे। चलूँगा कैसे अंधेरी राहें, मुझे तू सारी कला सिखा दे, मनाने प्रीतम को क्या […]

ये गुनगुनाहट कहाँ हुई है जो लेखनी ने बयान की है, जो ध्वनि सुनी थी कभी मुहोब्बत की आज फिर से सुनाई दी है। निगाहों से मिलने को निगाहें पलक झपकते मिला ही दी हैं। […]

बाजार में प्रविष्ट करते ही छोटे-छोटे बच्चे पीछे लग जाते थे, बाबू जी दे दो, माताजी दे दो, भैया जी दे दो, दीदी जी दे दो। स्कूल का समय होता लेकिन वे माँग रहे होते। […]

बिम्ब बनाना चाहता हूँ तेरा आकाश, मगर कहाँ से शुरू करूँ सोच रहा विश्वास। सोच रहा विश्वास, इस कदर विस्तृत है तू आदि अंत का नहीं पता बस विस्तृत है तू। कहे लेखनी भानु, चमकता […]