प्यार फूलों से कितना किये जा रहा, दूर रहके भी तेरा हुआ जा रहा। तुम अपने उपवन में हर दम महकते रहो, भौरा बनकर मैं तेरा हुआ जा रहा। प्यार के राग को तुम छुपाती हो क्यो, फूलों की डालियों सी शर्माती हो क्यों। खिलती कलियो के जैसे है तेरी हँसी, खुशबू होकर चमन में ना आती हो क्यो। माली बनकर तुम्हे तोड़ लूंगा प्रिये, दिल में तुझको सजोकर रखूँगा प्रिये। तुम आओ तो दिल मेरा सज़ जायेगा, गीत शृंगार का एक नया गायेगा
Tera hua mai
Comments
13 responses to “Tera hua mai”
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Nice
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Thank u
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बहुत अच्छा
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Thanks
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Nice
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Thanks
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Nice
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Thanks
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उत्तम
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Thx
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बहुत.अच्छा
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Thank u
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Very good
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