गोरखा राइफल के जांबाज कैप्टन एम० के ० पांडे ने दुश्मन को घेरा वो बटालिक की दुर्गम पहाड़ी उस पहाड़ी से दुश्मन खदेडा। लग चुकी थी उन्हें गोलियाँ, फिर भी दुश्मन का बंकर उड़ाया, बन […]
गोरखा राइफल के जांबाज कैप्टन एम० के ० पांडे ने दुश्मन को घेरा वो बटालिक की दुर्गम पहाड़ी उस पहाड़ी से दुश्मन खदेडा। लग चुकी थी उन्हें गोलियाँ, फिर भी दुश्मन का बंकर उड़ाया, बन […]
मेरे घर में रहे तो फिर किराया दे गए होते भंवर में था , मुझे कोई किनारा दे गए होते नहीं कुछ और ख्वाहिश है सनम तुमसे मुझे लेकिन चले जाना हि था तो दिल […]
अरे तुम होगें ,खिलाड़ी किसी बड़े मैदान के! मगर मेरे अपनों से मुकाबला कहा होगा, वो दिलो के साथ बहुत अच्छा खेलते हैं!
शतशत नमन उन वीरों को,कारगिल विजय दिलवाई थी स्वदेश की रक्षा की खातिर प्राणों की भेंट चढाई थी।। साफ दिनों तक जो चली थी लङाई कितनों ने जान की बाजी लगाई थी 527 जवानो ने […]
नमन है मेरा उन वीरों को, जो दुश्मन से भिड़ जाते हैं भारत मां की रक्षा खातिर, सीने पर गोली खाते हैं जय हिन्द का लगता नारा है जोश की कमी नहीं है,जोश बहुत सारा […]
आज कारगिल विजय दिवस है नमन करें उन वीरों को, जिनके अदम्य शौर्य साहस से जीत मिली भारत माँ को. छलनी कर दुश्मन का सीना भारत मां का मान बढ़ाया, देश के गौरव की रक्षा […]
देश की रक्षा पहला धर्म देश की रक्षा पहला कर्म, जुटे देश की रक्षा को, नाम देश का ऊंचा हो.
पुकार रही है भारतमाता आप सभी संतानों को, कलम उठा लो, खड़क उठा लो ख़त्म करो हैवानों को. बाहर-भीतर देश के दुश्मन, जो उन्नति के बाधक हैं, सामाजिक ताने-बाने को तोड़ रहे जो कारक हैं. […]
तुम्हारे जाने से रो पड़ा जगत सारा आओ देखे दिल बेचारा हर मूवी की तरह इस मूवी से भी जीत लिया तुमने दिल हमारा आओ देखे दिल बेचारा जिस बॉलीवुड ने तुम्हे दुत्कारा उसको कर […]
देश में बेकारी है आखिर किसकी जिम्मेवारी है। अक्षरबोध साक्षरता या अल्पज्ञान की बिमारी है।। मशीनी क्रांति का जोर या फिर बढ़ती हुई आबादी है। रोजगारों का अभाव या फिर निकम्मेपन सरकारी है।। साक्षर नहीं […]
कविता- आरती उतारा हमने | साल सैकड़ो श्रीराम तिरपाल मे आरती उतारा हमने | धूप गर्मी बरसात मे प्रभु भिंगी आंखो निहारा हमने | भगवान को भी जाना पड़ेगा कोर्ट के दर पता न था […]
चपरासी पद की भर्ती में, पीएचडी धारक आवेदक हैं, एक अनार है सौ बीमार हैं, जुगाड़ में बैठे पहरेदार हैं, इस जुगाड़ के खेल ने सारी प्रतिभाओं को निराश कर दिया, बेकारी के रोग ने […]
वो कोई सुखद घटना ही नहीं, मानो सुखों का वरदान था मेरे लिए। उसका आना, हृदय का आह्लादित हो जाना , मेरे आंगन की मुस्कुराहट सी, कुदरत की बनावट सी, मानो खुशियों का भण्डार था […]
बाद मरने के अपने, हम बहुत रोए उन्हें पता ही ना चला, उन्हें लगा हम थे सोए कुछ देर बाद, उन्हें हुआ अहसास, रो के बोले,”क्यूं चले गए मेरे ख़ास” किसी को खोज रही थी […]
आ कर कब्र पे बेरहम एक बूंद 💧 आंसू गिरा दिया। बिजली चमक के गिर पड़ी सारा जिस्म जला दिया।।
गरीब गरीब रह गया, सेठ सौ गुना सेठ। खाई सा अंतर हुआ, भूख बराबर पेट।।1 गरीबों के उत्थान की, बनी योजना लाख। कागज में पूरी हुई, उस तक पंहुची खाक।।2 —– सतीश पाण्डेय
.एहसास खोज कर रही हूं, जिंदगी कही चली गयी है । कुछ कहा भी नही, कोई संदेश नही, कुछ पता नहीं, नहीं तो मै रुठने ही नहीं देती। ले जाती उसे बाग में,मॉल मे,किसीं झिल […]
आंखे हैं पर देख नहीं सकते जुबां तो है पर कुछ कह नहीं सकते जब से वो गये है हमारी चौकट से न किसी को देखने की चाहत है न गुफ़्तगु की जुस्तजु है
आत्मघात, मानसिक पीड़ाएँ, छीना-झपटी, राह भटकना, बेरोजगारी के दुष्प्रभाव हैं, पहला काम हो इसे रोकना.
हम अपनी बेबसी पर, बेबस रहना पसंद करते हैं। ज़माना लाख बेवफाई करें हमसे , हम अब भी वफ़ा की उम्मीद करते हैं। ******************************
आशिक़ो के मज़ार के करीब, ए खुदा दो गज़ ज़मीन दे देना। गर हो गए वो वफा से बे- वफा, तो सुन मुझे वहीं दफ़ना देना।।
“क्योंकि मैं इंसान हूं ” इंसानियत है मेरे अंदर, क्योकि मैं इंसान हूं । धर्म है मेरे में मानवता का; और बंधन भी है , नैतिकता का अंदर; क्योंकि मैं इंसान हूं। अगर मैं मान […]
हर जीव को जीने का हक़ है, जीवों ने डाली है अर्जी कुदरत ने अपील सुनी है, अब ना चले बस, मानव की मर्ज़ी क्षुधा मिटाने की खातिर, निर्दोषों को है मारा, कैसा है शैतान […]
मन किसी सूखी नदी सा हो रहा आप कहती हो कि बारिश आ गई, जो ये छींटे पड़ रहे हैं उनसे बस एक सूनापन सा मन में गड रहा, कब तलक यूँ ही घिरेगा आसमाँ […]
कितने बदल गये है इंसान। बेच कर अपना ईमान।। सच्चाई से कोस दूर भागे। झूठ के बीज बोये बेईमान।। बुरी नजर वाले का मुंह है गोरा। नेकी करने वाले को बना दिए हैवान।। झूठ के […]
 बात ऐसी हो गई कि नींद नहीं आएगी ; हमें आज। वो लोयल नहीं, ढोंगी थे, उजागर हुई , मगर ये बात। आंखों से वो बड़े भोले लगते, शर्म हया का ,क्या नाटक करते […]
मत उछालो मेरे ज़हन को; मत उछालो मेरे ज़हन को, खिलौना समझ कर, मेरा मिजाज कुछ कोयले सा है! कब लपट बनजाए कुछ पता नहीं।
दु:शासन दुर्योधन की जोङी कबतक गुल खिलाएगी एक दिन चौसर की गोटी खुद उनको नाच नचाएगी — दिन बदलते ही जिनकी फितरत बदले थोड़ी सी भी लाज नहीं,पलपल जिनकी हसरत बदले लाभहानि के सौदे पे […]
हम क्या हमारा व्यक्तित्व क्या। अनन्त ब्रह्माण्ड के प्रान्गन में , हम क्या हमारा अस्तित्व क्या । कब किसके गर्भ में, कैसे कौन पनप रहा कैसे कब कौन-सा किसका सुमन कहाँ किस उपवन में महक […]
जहां हवाएं पल-पल बनाएं एक नई तस्वीर उसी आकाश में लिखना चाहूं मैं अपनी तकदीर नन्ही बूंदे नई किरण संग बना रही रंगोली मैं भी सुख के मोती ले लूं फैलाकर अपनी झोली अपने हृदय […]
मत झिड़क बूढ़े मां-बाप को उनकी सेवा में खुद को लगा ले, यह तो मौका मिला है तुझे आज मौके का फायदा उठा ले। एक दिन सबने माटी में घुल के शून्यता में समाना है […]
ए ‘ग़ालिब’ कहीं गिरे ,अश्क के सैलाब। तो कहीं किसी के लिए , दिल है बेताब।।
#इंसान हूं मगर ,काल्पनिक सा” जैसे पशु और पक्षियों का अपना वर्ण और रूप होता है , वैसे ही मैंने जन्म लिया ; इंसान के रूप में। पर ये क्या हुआ, मैं इंसान तो था […]
ना रुकेगा ये वक्त ना जमाना बदलेगा सुख जायगा जब पेड़ तो ये परिंदा ठिकाना बदलेगा – हिमांशु ओझा
सुख बटाया साथ मिलकर दुःख भी तेरा बाँट लूँगा। उम्र आधी कट गई है उम्र आधी काट लूँगा।। हर कदम पर साथ देंगे हमने खाई थी कसम। चल चुके हम साथ मिलकर शेष अब है […]
छोड़ बाबुल का घर, जब चली जाती हैं बेटियां सभी त्यौहार लगते हैं सूने, बहुत याद आती हैं बेटियां दिवाली के हर दीप में, मुस्कुराती हैं बेटियां होली के हर रंग में, खिलखिलाती हैं बेटियां […]
आत्महत्या न कर जिन्दगी को बचा, कोई दुख तेरे जीवन ज्यादा नहीं। देख चारों तरफ जो घटित हो रहा ढूंढ खुशियां उसी में, दुखों को नहीं। दुःख तो आते रहेंगे जाते रहेंगे। तेरा आना न […]
मैं दिल की जज़्बात लिखूँ। चाहता हूँ एक नात लिखूँ।। मंदिर और मस्जिद में ढूँढ़ा ढूँढ़ा काबा -काशी में। गंगा और यमुना में ढूँढा ढूँढा जलनिधि राशी में। मिला नहीं जो मुझको उसकी क्या मैं […]
हम तुम पले – बढ़े अपने ही भारत के गोद में। फिर क्यों दरार पड़ी है आज अपने ही रिश्ते में।। देखो कैसे चली आज चारो तरफ नफरत की आँधी। कैसे क़त्ल पे क़त्ल कर […]
रख अभी जिंदा मुझे, आंसू बहाने के लिए साथ तेरे प्रेम का रिश्ता निभाने के लिए और कुछ ना मांगता हूं बस यही अरदास है। दे दे बस दो गज जमीं इक आशियाने के लिए […]
पता नहीं तुम कैसे लिख लेते हो कविता, इतनी आसानी से मेरे तो ख्याल ही गुल रहते है ठहरते ही नहीं कागज पर
बेटियां तो जिंदगी का मूल हैं बेटियां शुभकामना स्फूर्ति हैं, वंश चलने की न कर चिंता मनुज, बेटियां निज वंश की ही पूर्ति हैं,
जब झेल रहे थे वीर, सरहद पे दुश्मनों के गोली। तब चारो दिशाओं में, गूंजा था इंक़लाब की बोली।। अश्क भर आयी आसमां को, लहू के दरिया देख कर। न जाने कितने सुहागन, गर्व से […]
प्रगति पथ पर दौङ लगाए चलो नव कृतिमान बनाए। पग- पग पर आने वाली बाधाओं से हंसकर अपनी पहचान बनाए।। चाहे जितनी डगर कठिन हो पर अपना विश्वास अडिग हो परिश्रम की मिठास की खबर […]
रात भर दीपक जला, भोर होने लगी तो बोला,”अब मैं चला” मैंने कहा और जलो, अभी अंधियारा बाकी है, “मेरी भी एक सीमा है”, कह कर वो मुस्कुराया उसकी अर्थपूर्ण मुस्कुराहट में, एक संदेशा मैंने […]
मेरे आशिक ,तूने मुझे पुकारा! तो मैं जरूर आजाऊंगी, किसी के पास देर से आती हूं , किसी के पास जल्दी से आती हूं, तुमने ललकारा है तो क्षण में आ जाऊंगी । तू कर […]
जिक्र ए जहन किससे करें हम लफ़्ज हैं दबे दिल में कहीं शायद डर रहें हैं बाहर निकलने से कोई समझेगा या नहीं क्या कहेगा कोई इसी उधेड़बुन में खोई रहती हूं अपने ख्यालों में […]
जुदाई का दर्द कांटों से ही प्रेम हो गया ,कलियां दिल में चुभती है दर्द भारी यादों में तेरी मेरी अखियां जगती हैं ज्यादा जुल्म किया फूलों ने कांटे बस बदनाम हुए जो चुभते रहते […]
मत काटो मेरी पंख ;मेरे अपनों मैं बुलंदी के आसमानों में उड़ना जानता हूं। छोड़ दो मुझे मेरे रास्ते पर , मैं ठोकरो से संभलना जानता हूं।
वो नन्ही नन्ही आंखें मुझे निहारती रहती हैं वो छोटे छोटे हाथों की शरारत , और होठों की चिल्लाहट , मुझे बुलाती रहती है । अब कितना सबर करूं? कि वो मुझे ; कब पापा […]
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