“रोटी का टूक” वह रो रहा था, सुबक-सुबक कर हाथों से छाती ,पटक-पटक कर आंखें हैं लाल ,पसीने से बुरा हाल सामने पड़ी दो लाशें, कहने को शरीर ,पर दिखने में कंकाल ! वीडियो बना […]
“रोटी का टूक” वह रो रहा था, सुबक-सुबक कर हाथों से छाती ,पटक-पटक कर आंखें हैं लाल ,पसीने से बुरा हाल सामने पड़ी दो लाशें, कहने को शरीर ,पर दिखने में कंकाल ! वीडियो बना […]
इस महामारी में हजारों लोग काल का ग्रास बन गए, कई परिवारों के कमाऊ लोग चल बसे, विलीन हो गए, झकझोर दिया है आर्थिक स्थिति को, बेरोजगार कर दिया है हजारों लाखों युवाओं को, सपने […]
Har ang hai jaise khila khila … Jabse piya tera pyar mila .. Khud mai he simte ,khud mai he khoye .. Jaise Chanda ki baho mai chandni hai soye .. Rup nikharu ..khud ko […]
मुझे तेरी हथेली पर जिगर की बात लिखने दे तुझे लव की कसम है आज सारी रात लिखने दे लिहाजा आप मुझसे हो खफा एहसास है लेकिन मिला जो आपसे मुझको वही सौगात लिखने दे। […]
पानी के बुलबुले जैसी जिंदगी है मेरी सुन्दर है, सूरज से रोशन भी मगर कब हो जाये खत्म फ़ूट जाये कब बुलबुला, खबर नहीं
छाती चौड़ी की सिगरेट जलाई, सोचता है इसे पी रहा हूँ। तू नहीं पी रहा इसको प्यारे यह धुंआ तो मजे से तुझे पी रहा। —– डॉ0 सतीश पाण्डेय
कविता- सदा बहार के जंगल पैर रख कर सिर पर किसी के , चढ़ जाओगे ऊंचाइयों पर जरूर गिरोगे जब जमीन पर ही मगर | सिर की जगह कंधा का सहारा लिया होता गिरते गर […]
दिमाग बढाने की दवा तो हर जगह मिलती है दिल को बढा करने का हुनर बस हमें आता है दिमाग है इसलिये सोचते हो बस खुद की दिल से जख्म को सहलाना बस हमें आता […]
प्रेम-बन्धुत्व का नौमिनेष ———*——*——– हर बालक को एक-सा, पालन पोषण,शिक्षा परिवेश मिले। समता,मानवता,बन्धुत्व,करूणा भरने वाला देश मिले। क्या बिगाड़ेगा उनका कोई जहाँ रहीम जौर्ज गणेश मिले। एक ऐसी धरा का नवनिर्माण करें जहाँ देश से […]
कुछ लोग हमारी संस्कृति को पिछड़ेपन का नाम देते हैं। हंस के पश्चिमी संस्कृति की उतरन थाम लेते हैं ।। घर हो या सङक शालीनता हो अपनी झलक नकल किसी और की क्यूँ करे, स्वसंस्कृति […]
दोस्तों में दुश्मनी ने घर कर लिया, ना जाने कैसे और कब कर लिया मौसम बदले वो भी बदले, उन्होंने दोस्ती का दूसरा दर कर लिया
कविता इक खूब नहाती दिखी, कुछ मधुर, पंक्ति गाती दिखी , “छटा घन घोर ,मन बड़ा हर्षाया , यूं तो कविता में कागज में ही रही, लिखे जब तुमने प्रेम के दो बोल, आंखों से […]
ए जिंदगी तू खूबसूरत है, मगर औरों के लिए । मेरे लिए तो तू; केवल बोझ सी, बन कर रह गई। मैंने तुझे जितना भी जिया, तूने मुझे उतना ही दिया, दर्द! मैं लड़ाता रहा, […]
जो है बात दिल में , वो लब पे आए । चिट्ठी सा बन कर , उस तक पहुंच जाए, हाले दिल को ; शब्द जाल से , कुछ कहकर बतलाना है ; शायरी तो बहाना […]
चलो इंसान बनते हैं। कब तक जकड़े रहेंगे , हम भेदभाव की जंजीरों में । कब तक पकड़े रहेंगे हम , धर्म- भ्रम की बेड़ियों से। मानवता की चलो , पहचान बनते हैं भगवान […]
इज़्ज़त कमाने निकला था गुरुर कमा आया पैसे कमाने के चकर में तबियत बिगड़ आया – हिमांशु ओझा
मौसम सुहाना सावन का आया, संग अपने उत्सवों का पिटारा लाया ठंडी ठंडी ये बहती पवन, बागों में खिले हैं कितने सुमन आए जब बरखा की फुहार, पिया भी करे हैं मनुहार अंगना में भीगे […]
लोकतंत्र के वृहद भवन का मुझको स्तम्भ मानो न मानो मैं धरम जाति भेदों से ऊपर आम जनता की बातें लिखूंगा। जो घटित हो रहा है लिखूंगा जो गलत हो रहा है कहूंगा, सब चलें […]
चलो फिर से कुरेदते है बीती सुध को, चंद निमेषों को, अनुराग भरें संदेशों को, चलो फिर से कुरेदते है। क्या अनुपम वेला! आह्लादों का मैला! प्रेम-क्रीडा से; मैं था खेला, गुजरे वक्त की किताबो […]
नाम बदलते रहा मैं चेहरे छुपाता रहा अपनी झूठी पहचान बनाने को पैंतरे बदलता रहा,
सावन मास शिव का मास शिव ही शिव चारों ओर बरसात की बूंदें शिव को करा रही स्नान , देवाधिदेव महादेव का आओ सब करें ध्यान,
जीवन में आगे बढ़ने को शिक्षा लो, शिक्षा लो बच्चों, पढ़ो लिखो जी- जान लगाकर कुछ बनने की ठान लो बच्चों, जिसने भी परिश्रम किया है अच्छा सा फल उसे मिला है, यह मन्त्र आगे […]
हिन्दी सावन शिव भजन 20 – गाता है जग सारा | चम चम माथे चमके चन्दा बहे जटा बीच गंगा धारा | शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा | मृग की छाला पहन […]
सूनी- सूनी सङको पर सैनिक बनने का दम भरता है । सेना में भर्ती होने का हर जन में स्वप्न सलौना पलता है ।। तात हमारे कैसे माँ, अपने पैरों पर चलकर ना आए क्या […]
वो रातें मुझे पसंद है, वो बातें मुझे पसंद है, तेरी मुहब्बत की हर, यादें मुझे पसंद है। चाँदनी रातों में तेरा, खूबसूरत दमकता चेहरा, इन आँखों को बड़ा पसंद है। बारिश कि बूँदों के […]
तुम्हारे हुस्न के मुट्ठीगंज में फंसकर इश्क़ अरैल घाट में डूब जाता है। दिल धड़कता था सिविल लाइन सा, अब यादों का कंपनी बाग बन जाता है।। ~सुरेंद्र जायसवाल (प्रतापगढ़)
न बंदिशें रोक पायी तुझे न मिन्नतों का असर हुआ तुझ पर ए दिल बता आखिर जहां ए इश्क में ऐसा किया दिखा
ये कलियुग है, इस में सतयुग सी बात कहां, जो प्यार करे ,कहलाए दीवाना परवाह करे ,उसे पागल माना तिनका चुगता है हंस यहां, मोती खाए कौवा काना जो चाल चले टेढी मेढ़ी, चढ़ जाता […]
ले के तिरंगा नारा लगाया, जय जवान जय किसान। देश के ख़ातिर मरना सिखाया, वाह रे वीर इन्सान।। पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण में आज़ादी के डंका बाजे। धरती से लिपटा तिरंगा तीन रंग में देखो […]
हिमालय से गंगा के मिलन ,यही तो देश की पहचान है। तभी तो हम सब, गर्व से कहते हैं मेरा भारत महान है।। शास्त्री गोखले मौलाना राजेन्द्र, सभी देश के शान है। तभी तो हजारों […]
तालाब!! तू परेशान मत हो तेरी एक दो मछलियों की फितरत होती ही ऐसी है कि किसी नयी मछली के आने पर मचल उठती हैं ईर्ष्या से, उन्हें लगता है कहीं ताज न छीन जाए […]
” बुढ़ापे का अकेलापन ” बहुत ही मुसीबतों के दौर से गुजरा है,ये जीवन पर किसे समझाऊं ? कैसे समझाऊं? और क्यो समझाऊं! जब कोई समझता ही नहीं है। अपनों के दुख से; दर्द […]
आज की रात सावन की बरसात है, क्या पता कल हम मिले या न मिले। वक्त के सिकंदर मैं कल रहूं या न रहूं खत्म न हो जाए मिलन के सिलसिले।। आ कुछ मीठी मीठी […]
सफलता क्या है सफलता गरीबी से अमीरी की ओर हार से जीत की यात्रा कांटो से फूलों तक की यात्रा या….आलिशान घर,बड़ी गाड़ी, और नौकर चाकर, खुली आंखों से देखे सपनों का खुशनुमा अंत। सफलता […]
बज उठी सन सैंतालीस में, वह आज़ादी का डंका था। हिमालय पे गाड़ दिए थे हम, वह भारत का तिरंगा था।।
ए वक्त तू गवाह है मेरा, तू बात, बता क्या थी हम बिछड़ गए, मेरी खता क्या थी हजारों बंदिशें भी थीं,हजारों मिन्नतें भी की समझा ना ये ज़माना ,ये बात पता क्या थी वो […]
कलरव करता पंछी उड़ा आकाश तो अच्छा लगा, शुद्ध हवा में आई सांस तो अच्छा लगा ये कोरोना आया तो गलत है लेकिन, प्रकृति का ये बदलाव अच्छा लगा तारे चमक रहे हैं निर्बाध चमचम, […]
रिमझिम बरसे सावन सजना। झूले लगे हैं मोरे अंगना।। सब सखियों के आए सजना। क्यों है सूना मेरा अंगना।। आजा अंगना के भाग जगा दे। बमल मोहे झूला झूला दे़……बलम मोहे झूला झूलादे।। लहगा चुनरी […]
वो मेरी काली जुल्फ़ों को घटाओं सा सुंदर कहते थे आंखो को मेरी वो ठहरा हुआ समंदर कहते थे आज वो करीब नहीं तो सोचती हूं अक्सर कैसी होती मैं, अगर वो होते साथ मेरे?
हालात दुख देते हैं। हां नहीं निभा पाया मैं वो वादें, तुम्हें खुश रखने के वो इरादे, याद है मुझे। बहुत हालातों से की मैंने बंदगी, मगर दुश्मन है ये जिंदगी! जो चाहूं, वो कर […]
काली जुल्फे सवारे काला लाए अंधियारे मिले कितहु ना चेन बढ़ रही बिरहा रे काहे रूप को सवारू नैन काजल क्यों बारू रंग तेरा भी तो काला तो क्यों अपना निखारू नैन कोमल है मेरे […]
अब के बरस भैया पीहर ना आऊं, बांधन को राखी तोय रे रस्ते में बैरी कोरोना खड़ा है, नजर वो रखे है मोए पे डाक से भेजी है भैया को राखी, भतीजी से लियो बंधवाए […]
राज़ को राज़ ही रहने दो ए सनम। मुझे गवारा नहीं कि तुझे कोई बेवफा कहे सनम। मैने मुहब्बत की है कोई खिलवाड़ नहीं। तेरी रुसवाई को सिन्हे में छुपाया है सनम।। माना कि वफा […]
रिमझिम बरसे फुहार देखऽ सवनमा में। झूला लगाय दऽ पिया मोर अंगनमा में।। हरियर चुनरी हरियर चोलिया हरियर हरियर पहिरनी चूड़िया कलईया में। हथवा में मेंहदी रचैली सनम नाम ले ले के तोहरे पियाजी बलईया […]
शुभ रात्रि मैं कहता हूँ पर अँखियों में है नींद नहीं। मन भौरा है कैद में ये कारा है अरविंद नहीं।।
सावन भी आया अमावस भी आई। रिमझिम फुहार संग पावस भी आई।। बागों में , खेतों में छाई हरियाली। हाथों में मेंहदी भी मैंने रचा ली।। दिल के उपवन ने झूला लगाया। मन के संदेशा […]
चलो आज खुद के लिए वक्त की तलाश करते हैं । हर जख्म को अलफाजो से ढक दुख दर्द को किसी दरिया में रख खुद को तराशने की खातिर खुद पर एक सरसरी नजर डालते […]
अनिश्चितता के सवालों में है मानव पङा कैसी होगी जिन्दगी, सुलसा भांति मुँह बाए खङा । कल की जिन्दगी का नहीं जन को पता खता क्या हुई हम से,मेरे रब जरा तुम तो बता जीवन […]
बर्फ के टुकड़े सा है ये प्यार, दगा का सूरज कब पींघला दे, पता नहीं चलता। वक्त बदले या ना बदले, इंसान कब बदल जाए, पता नहीं चलता। अनजान चहरे समझ लेते हैं हमें ; […]
रखे रहो हाथो पे हाथ प्रिया , सोचती रहो कोई अनसोंची बात प्रिया, सर्द हवा के झोंके में, जरा- ठहर जाओ रात प्रिया, हम मिलजुल कर सुख दुःख बाटेंगे, जो मिलेगा जन्म जात प्रिया।
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