तुझसे कहां कुछ कह पाती हूं मैं जब भी तुम होते हो सामने खुद को खामोश ही पाती हूं मैं
तुझसे कहां कुछ कह पाती हूं मैं जब भी तुम होते हो सामने खुद को खामोश ही पाती हूं मैं
Mera Raja beta
हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा फुफकारों से भरी वसुंधरा आकर उसे मिटाना होगा विष फैलाते असंख्य कालिया आकर मर्दन दिखाना होगा काट शीश को दुष्ट पापियों के सुर्दशन […]
आज आंखों ने कितना कहर ढाया होगा देखकर, फौजी बेटे का धड़ माँ का दिल भर आया होगा पिलाने को अंतिम स्नेह अमृत बुझाने को ममतामयी प्यास उसके पावन स्तनों का दूध आज फिर उतर […]
राखी का त्योहार है आज, आजादी का जशन भी है बहन की खातिर जीना भी चाहता हूँ देश पर मार मिटाने का मन भी है। (देश के सैनिक की मन की बात)
तुमको यह आज़ादी मुबारक हो हमे तोह तेरे प्यार ने गुलाम बना रखा है कहने पे हम आज़ाद है पर तेरे जुदाई के डर ने पिजरे में रोक रखा है ख्वाब तोह आज भी बहुत […]
खबर मिली है के सबको ही ज़रा खबरदार रहना है, अपनों को अपनों से ही सम्भलकर मेरे यार रहना है, करली बहुत सी बेवकूफियां तुमने अब छोड़ो सबको, सुनो इस दुनियां में तुम्हें थोडा तो […]
” ऐसा हिंदुस्तान चाहिए ” जिस मिट्टी में जन्म लिया बस उसका ही सम्मान चाहिए, बन जाए विश्व भी इसका ऋणी बस वैसी ही तो शान चाहिए। जो कर न सका वैसा जग में बस […]
बात इस दिल की दिल में रख लो तो अच्छा लगे, सपनों में ही सही मुलाकात रखलो तो अच्छा लगे, देखकर तुमको मैं ज्ञानी गूढ़ भी मूढ़ ही हो जाता हूँ, सुनो बातों की तुम्हीं […]
उम्मीदों का ठेला लेकर रोज निकल जाता है कोई, कागज़ कोरे जेब में लेकर रोज निकल जाता है कोई।। कलम कीमती है कितनी ये भटक राह में जाना है, तभी बैग में स्याही लेकर रोज […]
गलतफहमियों की कितनी और किश्तें बाकी रह गईं, इंसानों की कितनी और देखनी किस्में बाकी रह गईं।। नज़र-नज़ारे दिल-दिमाग और जुदाई सबपे लिखा मैंने, कहना मुश्किल है के और कितनी नज़में बाकी रह गईं।। राही […]
जिनके यार खुदा से हो _ उन्हें जहाँ तो क्या मौत से भी खौफ कहाँ से हो_ -PRAGYA-
ज़िन्दगी कितनी खरोंचे दोगी_? अब तो रूह का रेशा-रेशा भी छील गया_ -PRAGYA-
दूरियों में तुझसे.. अजीब सा हाल हो गया हैं इस दिल का भी_ जैसे इक नाकाम सा बुत पड़ा हो आती जाती सड़कों पर_ -PRAGYA-
अब साँसे भी सोचकर लेती हूँ___ कहीं ख़याल तेरे महकने ना लगे जो ख्वाब तुमने तोड़े थे कहीं दिल फिर उसे बुनने ना लगे___ -PRAGYA
जर्रा को आफ़ताब बना दे वो नज़र मेरे दोस्त की हैं_ मैं इतनी क़ाबिल तो नहीं की इंसा के लिबास में फरिश्ता नज़र आऊं_ बना दे मुझे जो फरिश्ता वो नज़र मेरे दोस्त की हैं_ […]
तन्हा-तन्हा बौराई सी फिरती हूँ हुज़ूम में भी_ कहकशाँ लगाती हूँ अपनी ही विरानियत में कुछ हाल-ए-बयां इश्क़ का इस तर्ज़ भी_ -PRAGYA-
चूका ना सकोगे कभी उज़रत हमारे क़ब्ल की_ दिल में शगुफ्ता सी मोहब्बत..वो कर्ज़ हैं तुम पर_ -PRAGYA-
ज़माना पुछता हैं चेहरे में गज़ब की कशीश- ए-खामोशी हैं_ कैसे कहे_? हरसू से नूर का तिरगी से भी वास्ता हैं मैं नियूश सा सुनता हूँ दिल हर वक़्त उसका शोर मचाता हैं_ -PRAGYA-
ज़माना पुछता हैं चेहरे में गज़ब की कशीश- ए-खामोशी हैं_ कैसे कहे_? हरसू से नूर का तिरगी से भी वास्ता हैं मैं नियूश सा सुनता हूँ दिल हर वक़्त उसका शोर मचाता हैं_ -PRAGYA-
जी रही हूँ..ज़िन्दगी का बोझ उठा रहीं हूँ_ मोहब्बत की सज़ा बो गये हो तुम मैं गुनाहों की फसल काट रही हूँ_ -PRAGYA-
रक़िब ना बनों उल्फ़त के खामख्वाह वस्ल की जीद से_ दुरियों में ही सही लबरेज हैं दिल मोहब्बत से क्या इतनी आराईश काफी नहीं ढलती उम्र की पीड़ से_ -PRAGYA-
शब भर यादें तिरी शबनम सी दिल को भिगोती रहीं_ दूरियाँ इस कदर दरम्यां हमारे सिमट गई की मैं छूती रहीं हर याद तिरी वो अब्तर हो बिखर गई_ -PRAGYA-
यूँ तो बीत गये कई पल बिन तेरे भी_ पर संग तेरे बीते वो अनमोल पल भुलाये नहीं भूलते_ ताजिंदगी तुझे चाहने की रज़ामंदी हैं इस दिल की_ मगर वफ़ा का तेरी मुझे यकीं के […]
शज़र भी सुख जाते हैं बंद दरवाजों में_ हमें तो एक अरसा हो गया हैं इंतज़ार में तिरी कैद हुए_ -PRAGYA-
तू उड़ता रह आसमाँ में कहीं, मैं ज़मीं का हूँ तो रहूंगा यहीं, मैं अब तुझे दिखाई भी नही देता, तू मेरा इम्तेहान क्या लेगा? सर को गोद में रखे मैं सज़दे में रहा, मैं […]
मैं जब ख्वाबों से गुज़रता हूँ.. तो अक्सर मिल जाते हो तुम.. छत पे नींदें सुखाते हुए. छत से मेरी रातें टपकती होगी…
ये नज़्म पोछ के आँखों से.. इन्हें कानों में पहन लो तुम, तो एक आवाज़.. दौड़ के पास आएगी, और..मेरा पता गुनगुनाएगी. फुरसत हो तो आ जाना .
बारिश में भीगे कुछ ख्वाब.. कल उठा कर लेता आया, सुखा कर इन्हें, पूछुंगा आज.. कहाँ से आए? किसने छोड़ा तुम्हें सड़कों पे? अखबार में इश्तिहार दे दूंगा.. जिसके हों… वो ले जाये.. कुछ दिन […]
बादल जीवन फिर लाए तो ——————————– मधुर मंद -मंद बयार चली, नजरों में भर कर प्यार चली। धरती के सूखे बालों को सहलाती, चिंतित सी नार चली । पीछे पीछे मस्ताना सा, बादल आया दीवाना […]
ये दिल बहुत ज़िद्दी है मेरा! ग़मों की दौलत जमा करता है; चोट दिल पर हो या जिस्म पर हर ज़ख्म पे ग़ुमांं करता है।
मेरा शौक नहीं है मजदूरी , बस हालात की है मजबूरी, चाहे हो चिलचिलाती धूप , चाहे हो कड़ाके की ठंड , चाहे हो सावन की बरसात, आप बैठे थे एसी कूलर में, हम कर […]
लो आ गया, गर्मी का मौसम दहकता सूरज, चिलचिलाती धूप, उमस दोपहर, बहता लूं….. बहता पसीना, लगता गुस्से में लाल है सूरज, मानो कह रहा हो सूरज, बुराई अब कम करो तुम मानव, सच्चाई को […]
बन्द कर लो बेशक ऑंखें मर्ज़ी तुम्हारी सही, तुम्हारी आँखों से मुतासिर आँखें हमारी सही।। राही अंजाना मुतासिर – प्रभावित
मैं एक नज़्म तेरी आँखों मे सजा कर, पलकों पे तेरी ख़ुद का पता लिख जाऊंगा. खुर्दबीन से भी ग़र मैं अब नज़र नहीं आता, देखो गिरेबाँ अपना.. शायद वहीं मिल जाऊंगा.
तेरा जिक्र बेखयाली में हुआ मुझे फ़िक्र तेरे जाने के बाद हुआ मुझे मोह्बत थी तोह तुझसे पर अहसास तेरे जाने के बाद हुआ
मैं एक नज़्म हूँ मुझे जी कर देखो, कोई ख़्वाब नहीं कि भूल जाओ मुझे, मैं एहसास हूँ मुझे महसूस करो, कोई गीत नहीं कि गुनगुनाओ मुझे.
इस गर्जन का इस तड़कन का , करुण स्वर कुटुंब के तड़पन का, कम हो जाये इससे पहले , कुछ धड़ हमको भी लाने होंगे। विस्मयबोधक विरक्ती का, परिमाण कड़ी निंदा शक्ति का, कम हो […]
उठ तू शहर से पर गांव को याद रख, पहुँच आसमां से ऊपर पर जमीं को याद रख, बेशक मिले होंगे यार हजार पर , जर्रे ए जिगर में इस दुश्मन को याद रख। अगर […]
मै जीत गया होता, मै हार गया होता, तेरा साथ जो ना होता, मै उलझ गया होता, तेरे साथ का है ये असर जो दौड़ उठा हूँ मै नही तो दुनिया की भीड़ मे सिमट […]
जब पहला कदम बढ़ाना था कोई उगली पकड़ाया था जब घुटनों मे मेरी चोट लगी कोई मलहम लगवाया था उस चोट से आगे फिर मेरा कदमो का सफर जब बढ़ता है पेनसिल के युग मे […]
जीवन के पथ पर आगे बढ़कर, काल नियंतर परिवर्तित कर, शून्य वेदना अनुनादित कर, प्रश्नचिन्ह को परिभाषित कर, स्वयं रिक्ति को भरना होगा, काल खंड में चलना होगा। हृदय कंठ स्वर निर्मल करके, मन कर्म […]
Kaabil-e-taareef h wo log… Jo meri buraayi mere aage krne ki himmat rkhte h…… Peeth piche buraayi krne walon… Tumhari soch or nazariye ki mujhe parwaah takk nahi……. #Sheetal
ज़िंदगीज़िंदगी Tragedy 1 मिनट 273 0 vivek netan © Vivek Netan Content Ranking #3171 in Poem (Hindi) #305 in Poem (Hindi)Tragedy कुछ इस तरह से मुझ से नाराज़ हो गई ज़िंदगी गाँव की खुली गलियों […]
वो कोई जंगल या कोई सुनसान गली ना थी भीड़ का मंजर था और वो भी अकेली ना थी भीड़ से ही निकला था इक झुंड भेड़ियों का उनके लिए वो शिकार थी कोई लड़की […]
पयोद धर बाण जल का चलाये तड़ित की कमान से धरती आहत होने को आकुल प्रेम में मरने को व्याकुल जी जान से|
खुशियों की डंका बजा दिया। इनकी तो लंका ढहा दिया।। हो सकते हैं अपने भी, अब सेब के बागान। डल झील में तैरता, होगा अपना भी मकान। दिलों से शंका हटा दिया। खुशियों की डंका […]
थकी – थकी – सी है यह बेज़ार ज़िंदगी अब इसे थोड़े आराम की ज़रूरत है पसीने – पसीने हो गई है जल – जल के इसे ठंडी सुहानी शाम की ज़रूरत है ! अरसा […]
एक तरफ धरती मा की करणवयथा तौ दूसरी तरफ मानवमन है। जौ मन मौसकर और सर पकडकर रौ रहा है। धरती के लाल धरती की तरफ देखकर यह कैसी घडी है। बाहार हन जल की […]
खत्म न हो जश्ने-रौनक हँसीन शाम की। आ टकरा लें प्याला और एक जाम की। देखो साकी खाली ना होने पाए पैमाना, ले आओ सारी मय, मयकदे तमाम की। आ टकरा लें प्याला और एक […]
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